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भाई बहन पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 722 बार

बहन ने भाई से चुदवाकर कोख हरी की- 2

वृत्ति चौधरी

26 May 2026 को प्रकाशित

बहन ने भाई से चुदवाकर कोख हरी की- 2
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बहन की चूत की कहानी में मेरी औलाद नहीं हुई तो मेरी छोटी बहन ने मुझे मेरे चचेरे भाई से चूत मरवाकर गर्भ धारण की सलाह दी. मैं उस भाई से कई बार शादी से पहले चुद चुकी थी.

यह कहानी सुनें.

दोस्तो, मैं वृति चौधरी आपको अपनी सगी बहन पूनम की चुदाई चचेरे भाई से कैसे हुई, उस घटना को इस सेक्स कहानी के माध्यम से लिख रही हूँ.

इस सेक्स कहानी के पहले भागऔलाद के लिए भाई को चोदने के लिए मनायामें मेरी बहन पूनम मेरी सलाह पर ही भाई से चुदवा कर खुद को गर्भवती करवाने का प्रयास कर रही थी.क्योंकि डॉक्टर ने उसे बताया था कि उसके पति के लौड़े में बच्चे पैदा करने लायक शुक्राणु नहीं थे.हम दोनों बहनों ने चचेरे भाई देवेंद्र को इस बात के लिए मना भी लिया था कि वह अपनी बहन को चोद कर मां बना देगा.

अब आगे बहन की चूत की कहानी:

रात को सब लोग खाने के बाद अपने-अपने कमरे में आ गए थे.सब लोग सोने की तैयारी करने लगे.

मैं और पूनम दूसरे कमरे में सोने की तैयारी करने लगी थीं.

लेकिन रात 11 बजे तक हम तीनों ने ही आपस में बातचीत की.उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गई और पूनम को देवेंद्र के कमरे में छोड़ दिया.

वैसे भी उसे मायके में रहते हुए दस दिन हो गए थे.उसका मासिक धर्म 12-14 दिन पहले हुआ था.यानी उसके गर्भवती होने के लिए यह उचित काल था.

अब देवेंद्र और पूनम के बीच घमासान होने वाला था.मुझे उनकी चुदाई देखने का मन तो था लेकिन मैंने वह सब देखना उचित नहीं समझा.

एक तो पूनम ने भी मना कर दिया था.तीसरे व्यक्ति के पास होने से थोड़ा सा असहज महसूस होता है, यह मुझे भी मालूम था.

मैंने देवेंद्र को कहा था- तुम बिल्कुल पूनम को वैसे ही चोदना जैसे अपनी पत्नी पूजा को चोदते हो!

अब कमरे में क्या हुआ, वह कहानी पूनम आपको खुद बताएगी.

दोस्तो, मैं पूनम चौधरी.जैसा कि वृत्ति ने आपको बता दिया है कि मुझे मजबूरी में अपने चचेरे भाई के साथ शारीरिक संबंध बनाने पड़े थे.

जैसा कि देवेंद्र ने बताया था कि दीदी को एक पत्नी की तरह ही चोदूंगा.

फिर वृत्ति के जाने के बाद भाई ने मुझे देख कर एक हल्की सी मुकान दी.मैं भी मुस्कुरा दी.

कुछ पल बाद भाई ने अपने होंठ आगे बढ़ाए और मेरे होंठों से लगा दिए.

मैं अभी कुछ समझ पाती कि उसने मुझे अपने पास खींच लिया.अब हम दोनों ने एक-दूसरे को अपनी बांहों में भर लिया और चूमाचाटी करने लगे.

मुझे आज चुदाई से ज्यादा गर्भवती होने का अहसास खुशी दे रहा था और मेरे भाई को वर्षों बाद आज फिर से मेरी चुत में लंड पेलने का मजा आने वाला था.

कुछ देर बाद भाई ने मेरी लाल रंग की चोली नुमा ब्लाउज को उतारने के लिए अपने हाथ मेरे मम्मों पर लगाया और दूध मसलते हुए वह मेरे ब्लाउज के बटन खोलने लगा.

मेरे चिटकनी वाले बटन पल भर में खुल गए.भाई ने चोली को अलग फेंक दिया.

अब मैं अपनी काली रंग वाली रेशमी ब्रा में थी.मेरे दूध से सफेद आधे से अधिक चूचे काली ब्रा में कैद कबूतर से फड़फड़ाते हुए दिख रहे थे.

उसने मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाना और मसलना शुरू कर दिया.साथ ही मेरे गुलाबी रंग के होंठों को भी चूसना शुरू कर दिया.

मैं भी भाई के होंठ चूस रही थी.बच्चे के चक्कर में चुत चुदाई की खुशी में मेरी चूत जबरदस्त गीली हो रही थी.

भाई ने मेरा पेटीकोट भी उतारना चाहा, पर मैंने अपने लहंगे का नाड़ा बहुत टाइट बांधा हुआ था तो वह खुल ही नहीं सका.

मैं यह देखना चाह रही थी कि वह नाड़ा खोल पाएगा या नहीं … या पेटीकोट यूं ही ऊपर उठाकर अपनी बहन की चुत चोद देगा.

पर वह तो ठहरा पुराना खिलाड़ी, अब तक छह लड़कियों के साथ सेक्स करके चुदाई का मजा ले चुका था, जैसा उसने बाद में मुझे बताया था.

उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार कर मेरी टांगों से निकालते हुए अलग कर दिया.

मैंने कहा- तुम तो बहुत तेज हो गए हो!वह कुछ नहीं बोला, बस उसका ध्यान मेरी गदराई जवानी पर ही टिका था.

मेरा पेटीकोट हटते ही उसने देखा कि मैंने काले रंग की पैंटी पहनी हुई है.

उसने चुत पर हाथ फेरा तो उसे समझ आ गया कि चुत चू रही है और उसी कारण से मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी है.

मेरी चूत अब तक बहुत पानी छोड़ चुकी थी और मुझे जल्द से जल्द भाई का लंड अपनी चुत में लेने का जी कर रहा था.

वह बोला- मुझे ज्यादा तेज तो तुम्हारी चुत है, साली बिना लंड के ही रो रही है!मैं हंस दी और बोली- आज तो सारी रात चोदता रह मुझे … सच में बड़ा मन था तेरे लंड से फिर से चुदवाने का!

वह हंसा और बोला- तुझे मेरे लंड से चुदने का मन था या अपनी चुत की खेती में बीज बुवाने का मन था!मैंने कहा- कुछ भी समझ ले मेरे भाई … बस पेल दे जल्दी से!

अब मैं उसके सामने ब्रा और पैंटी में थी.मैं एकदम चिकनी, गोरी और बेदाग नजर आ रही थी.

दस मिनट तक चूमाचाटी के बाद भाई ने एकदम जोर से मेरे एक दूध को पकड़ लिया और उसे आटा समझ कर मसलने दबाने लगा.उसकी सख्ती से मैं एकदम से अचकचा गई और ‘आह धीरे दबा न!’ कह उठी.

देवेंद्र को अपनी बहन की चूत सालों बाद मिल रही थी.

मैंने उसे आराम-आराम से करने को बोला था लेकिन वह मेरी कहां कुछ सुनने वाला था.अब वह मेरे एक दूध को अपने मुँह में आधा भर कर तबियत से चूसने लगा था.

मुझे भी उससे अपने दूध को चुसवाने में बड़ा मजा आ रहा था तो मैं उसके सर को अपने मम्मे पर दबाती हुई उसके मुँह में अपना आम ठूंस रही थी.‘आह चूस ले भोसड़ी के … आह साले बड़ा मजा आ रहा है!’

मैंने उसे गाली दी.तो वह भी एकदम से मुझे गरियाते हुए मेरे जिस्म को नोंचने लगा- आह साली कुतिया … कब से मेरे लौड़े में आग लगी थी … आज सच में तेरी चुत फाड़ दूंगा बहन की लवड़ी!मैंने उसे चूमते हुए कहा- तो खा ले न अपनी बहन की चूचियों को.

उसने कहा- मैं तुमको कब से चोदना चाह रहा था … आखिर आज यह इच्छा भी पूरी हो जाएगी!इसी तरह की बातों से हम दोनों भाई बहन सेक्स में डूबे हुए थे.

मैं बस मन ही मन मुस्कुरा रही थी.मुझे चुदाई से ज्यादा अपने गर्भवती होने की इच्छा हो रही थी.

फिर उसने मेरी आधी खुली ब्रा को का हुक खोला और उसे उतार कर मेरे टन से अलग कर दिया.अब मेरी मस्त रसभरी चूचियां उसके सामने तनी हुई थीं.

उसने अपने दोनों हाथ मेरे मम्मों पर रख दिए और मेरे होंठों को चूसने लगा था.

मैं बोली- देवेंद्र, पहले मुझे तू जल्दी से नीचे से खुश कर दे क्या पता बाद में कोई आ भी जाए … बाकी वाली मस्ती बाद में भी कर लेंगे!उसने कहा- हां जरूर दीदी, पर जल्दी क्या है? मैं सब तरह से आपको खुश कर दूंगा आज तो आप मेरी कुतिया हो!

मैंने स्माइल करते हुए एक हल्का-सा थप्पड़ मार दिया और बोली- चल मेरे कुत्ते, नीचे को हो जा और मेरी चूत चाट!

वह बेड पर पीछे को हटते हुए मेरी टांगों के पास पहुंच गया और मेरी पैंटी उतारने लगा.

पैंटी उतारकर देखा कि मेरी एकदम चिकनी, झांट-रहित चूत उसके सामने आ गई थी.

मेरी पावरोटी सरीखी फूली हुई चूत देखकर देवेंद्र बहुत खुश हो गया.

वह पोज सैट करके मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा, साथ ही चूत में उंगली करने लगा.तो मैं एकदम से चिहुंक उठी और मेरी दर्द भरी आह निकल गई.

मुझे भी भाई के लंड की सख्त जरूरत हो गई थी तो मैं बस चुपचाप मजा ले रही थी.उस वक्त मुझे अपनी कोख में बच्चा चाहिए था जिसके लिए मैं कभी-कभी अकेले में बैठकर रोती रहती थी.

मेरे पति भी बहुत ज्यादा परेशान थे पर वे अपने परिवार वालों के ताने नहीं सुन पाते थे तो मुझ पर ही इल्जाम लगाते थे.

मैं चुप बनी रही और अपने भाई को उसकी मर्जी का करने देने लगी.पहले मैंने सोचा था कि पांच मिनट में सिर्फ चुदाई करके वीर्य चुत के अन्दर लेकर अलग हो जाऊंगी और सब कुछ सामान्य हो जाएगा.

लेकिन देवेंद्र ने जल्दबाजी करने की बजाए मुझे अपनी पत्नी की तरह चोदना चालू कर दिया था.वह मुझे मजे से चोदने में लगा था, इस कारण से मैं भी गर्मा गई थी.

फिर दस मिनट के ओरल सेक्स के बाद भाई ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए थे.

तभी मैं बोली- रुक, तेरा अंडरवियर मैं उतारूँगी!उसने कहा- हां क्यों नहीं मेरी जान, आप ही उतारो!

वह मेरे पास पहुंच गया और उसका लंड किसी सख्त लोहे की रॉड जैसा खड़ा हो चुका था.

जब मैंने भाई का लंड देखा, तो वह लंबा और काफी मोटा हो चुका था.

मैं उसका लौड़ा देखकर एकदम हैरान हो गई और कहने लगी- आज तो तू मेरी चूत को फाड़ ही देगा, तेरा इतना बड़ा कैसे हो गया है?

उसने कहा- नहीं दीदी, ऐसा कुछ नहीं होता है. चूत में बहुत गजब का जादू होता है, वह जरूरत के अनुसार फैल जाती है … उसके लिए लंड बस सिर्फ लंड होता है. लंड से मोटा तो चुत से बच्चा निकलता है!

उसकी बात सही थी.वैसे मुझे भी सब पता था.

उसने अपना लंड अपने हाथ से सहलाते हुए मेरे मुँह के ऊपर रख दिया.

पर मैंने मुँह को घुमा लिया और लंड चूसने के लिए मना कर दिया.

वह थोड़ा प्यार जताते हुए बोला- मुँह से चूस कर देखो तो दीदी … बहुत मजा आएगा!मैं चुप रही.

उसने पुनः कहा कि अरे मैं वीर्य निकलने से पहले ही लंड को बाहर निकाल दूंगा.अब मैं उसके लंड को अपने मुँह में लेने के लिए मान गई.

मैंने भाई का आधा लंड अपने मुँह तक ले लिया और हल्के-हल्के से चूसना शुरू कर दिया.उसने आह आह करते हुए पूछा- मजा आ रहा है न केला चूसने में?

मैंने कहा- हां तेरा लंड चूसते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा है.

भाई ने गाली देते हुए कहा- साली कुतिया, तू तो लंड चूसने से मना कर रही थी और अब कह रही है कि मजा आ रहा है? बहन की लौड़ी रांड बन कर चूस साली!यह कह कर वह हंसने लगा.

मैं भी उसके मुँह से अपने लिए रांड शब्द सुन कर कुछ नहीं बोली.

उसने मेरा सिर पकड़ते हुए अपना पूरा लंड मेरे मुँह में धकेल दिया.उसका लंड मेरे गले तक पहुंच रहा था और मैं सही से सांस भी नहीं ले पा रही थी.

वह अपना लंड आगे-पीछे करके मेरे मुँह को चोदने लगा.

अब मैं भी बिल्कुल गर्म हो चुकी थी और कह रही थी- देवेंद्र, अब तो मुझे चोदकर अपने बच्चे की माँ बना दे!

वह नीचे आया और मेरी चूत को देखने लगा.सच में चूत चुदाई से पहले कितनी मस्त लगती है और लंड से फटने के बाद इसका क्या होता है, वह बात सब जानते हैं.

वैसे मेरी चूत एकदम गुलाबी थी और झांटें साफ थीं.वृत्ति ने पहले ही बता दिया था कि सब कुछ सफाई करके आना, तुझे अपने बच्चे की माँ बनने का अच्छा अवसर है.

जब मेरा भाई मेरी चूत चूसने लगा, तो मेरे मुँह से आवाजें निकलने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … उफ़्फ़!

मैंने अपनी टांगें फैला दीं, क्योंकि भाई ने ऐसा कहा था.उसे चुत चूसने में थोड़ी सी परेशानी हो रही थी.

अब मैं पूरी तरह से कामुक हो चुकी थी.

भैया ने मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया.इससे मेरी चूत उठकर ऊपर आ गई थी.

वह अपना लंड सैट करने लगा.लंड का सुपारा चुत के छेद में सैट करते ही वह धक्का लगाने लगा.

उसके धक्का मारने पर भी लंड मेरी चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. क्योंकि शादी के बाद पति के लंड से सही से चुदाई न होने के कारण चूत काफी टाइट हो चुकी थी.पति का लंड भैया की तुलना में काफी छोटा और पतला भी है.

भैया का लंड ज्यादा मोटा होने के कारण बार-बार फिसल जा रहा था.

उसके बाद भाई ने मेरी चूत में बहुत सारा थूक लगाया.इससे चूत बहुत गीली हो गई.

उसने अपने लंड को फिर से चूत की फांक में फंसाया और एक जोरदार धक्का दे मारा.

इस बार उसके लंड की टोपी चूत को फैलाती हुई अन्दर चली गई.मेरी चीख निकल गई- अह्ह्ह … ह्हह्ह … म्म्म्म्मी … अह्ह्ह … भाई फट गई मेरी आह आराम से!

जब वह नहीं माना तो मैं दर्द से कराहती हुई कहने लगी- बाहर निकालो प्लीज!लेकिन भाई ने देर करते हुए अगला धक्का दे मारा.

इस बार उसका आधा लंड चूत में घुस गया और अगले शॉट में लौड़े ने मेरी बच्चेदानी से टक्कर मार दी.

भाई ने अब मेरी चुत को पेलना चालू कर दिया और मैं उसे आह आह करती हुई धीरे धीरे चोदने के लिए कहने लगी.पर वह कहां रुकने वाला था.

आज कई सालों बाद उसे मेरी चूत मिल रही थी.

कुछ देर रुकने के बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला और जोर का धक्का मार दिया.अब उसके लंड का लाल सुपारा मेरी चूत को चीरते हुए जोर-जोर से अन्दर घुसने निकलने लगा.

मेरी चीखें निकलने लगीं गई और मैं रोती हुई कहने लगी- आह … मर गई … देवेंद्र … प्लीज अपना लंड एक बार बाहर निकालो … आह मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मेरी चूत फट गई!

मैं ज्यादा जोर से चिल्ला भी नहीं सकती थी क्योंकि मैं अपने भाई से चुद रही थी.

उस वक्त घर की छत पर उसके माँ-पिता सो रहे थे.यदि मैं जोर से चिल्लाती, तो भाई के लंड से चुदने का सुख खो बैठती और ऊपर छत पर सोए सभी लोगों को पता चल जाता.

दोस्तो, उस वक्त मेरी हालत बड़ी अजीब सी थी. एक तरफ मुझे अपनी कोख में बच्चा चाहिए था और दूसरी तरफ मैं अपने भाई का मूसल जैसा लंड झेल भी नहीं पा रही थी.

आप इस सेक्स कहानी के अगले भाग में पढ़ेंगे कि मेरे साथ मेरे भाई ने किस तरह से चुदाई की और मुझे मां बना दिया.

आपको मेरी इस बहन की चूत की कहानी पर अपने विचार जरूर रखने चाहिए क्योंकि यह एक सच्ची सेक्स कहानी है, जो सेक्स का मजा लेने के लिए नहीं बल्कि एक मजबूर लड़की को बच्चे की जरूरत के खातिर भाई से चुदाई का सहारा लेने को लेकर लिखी गई है.

आपके सुझाव आमंत्रित हैंsupport@mohakkisse.com

बहन की चूत की कहानी का अगला भाग:बहन ने भाई से चुदवाकर कोख हरी की- 3

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