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भाई बहन पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 933 बार

बहन के साथ प्रेमलीला-6

साजन शर्मा

05 Jun 2014 को प्रकाशित

बहन के साथ प्रेमलीला-6
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Bahan Ke Sath Prem-leela-6मैं अभी नहा धोकर मैं बाथरूम से बाहर आया और कपड़े पहने ही थे कि दिया मेरे लिए नाश्ता लेकर आ रही थी।उसने अपनी नज़र नीचे कर रखी थी।

दिया को देखते ही मुझे रात का वो सीन याद आ गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान आई गई।

जब दिया नाश्ता बेड पर रख रही थी तो मैंने दिया से कहा- ये दोनों भी उठ गए है इनके लिए भी नाश्ता ले आती!

पर मेरी बात का दिया ने कोई जवाब नहीं प्रिया और वो वापस जाने लगी तो मैंने उसको कहा- दिया क्या हो गया तुमको? तबियत तो ठीक है न।

मैं उसको यह दर्शाना चाह रहा था कि मुझे रात की घटना के बारे में कुछ नहीं पता।और मेरी थोड़ी सी कोशिश के बाद उसको विश्वास हो गया कि मुझे रात की बात का कुछ भी नहीं पता, तब जाकर वो नार्मल हुई।

दिया- जब मैं साजन भाई के सामने गई तो साजन भाई से नजर नहीं मिलाई जा रही थी। पर भाई की बात से मुझे लगा कि भाई को रात के बारे में कुछ नहीं पता… इसलिए मैं भी अब नार्मल हो गई थी।

फिर मैंने पारुल और मुकेश को भी नाश्ता करवाया, उसके बाद मैंने भाई से पूछा- आपको कहीं जाना तो नहीं है, मम्मी पूछ रही थी तो साजन भाई ने कहा नहीं आज तो मुझे कहीं नहीं जाना।

इतना सुनकर मैं वापस रसोई में मम्मी का हाथ बंटाने आ गई और मम्मी को भी बता प्रिया कि आज भाई को कही नहीं जाना।

कुछ देर बाद पापा भी अपने ऑफिस निकल गए।

हमें घर का काम खत्म करते करते मुझे 11 बज गए थे और 11:30 पर हमारा घर का सारा काम ख़त्म हो चुका था।

दोपहर में 12 बजे मम्मी ने मुझसे कहा- मैं पड़ोस में जा रही हूँ, 2-3 घंटे में आ जाऊँगी, खाना मैंने बना प्रिया है, जब भूख लगे खा लेना और अपने भाई को भी खिला देना।

मैंने कहा- ठीक है मम्मी !

और फिर मम्मी तैयार होकर पड़ोस में चली गई।

साजन भाई, पारुल और मुकेश टी वी देख रहे थे।मुझे रात की बात याद आई और मैं सोचने लगी कि यह अच्छा हुआ, मम्मी पड़ोस में चली गई। आज मैं कोशिश करती हूँ कि किसी तरह से मैं भाई को अपने साथ सेक्स करने के लिए तैयार कर सकूँ। क्योंकि रात को भाई का चूसने के बाद मेरे अन्दर चुदाई का कीड़ा जोर मार रहा था और मैं अभी चाहती थी कि भाई भी मेरी योनि को चूसे, खा जाए और जम कर मेरी चुदाई करे, जब तक भाई यहाँ रहे तब तक हम मौज मस्ती कर सकें।

बस फिर क्या था भाई को रिझाने के लिए मैंने अपने कपड़े चेंज कर लिए।

दिन में इतनी ठंड तो थी नहीं, क्योंकि ठंड अभी रात को ही होती थी, दिन में मौसम नोर्मल ही था अभी, इसलिए मैंने शर्ट और स्कर्ट पहन ली पर शर्ट के नीचे ब्रा नहीं पहनी और स्कर्ट के नीचे गुलाबी रंग की पेंटी जरूर पहन ली थी।जो स्कर्ट मैंने पहनी थी वो बहुत ही शार्ट थी जिसमें मेरी गोरी टाँगें और आधी से ज्यादा मेरी जांघें दिखाई दे रही थी, और स्कर्ट ने तो बस मेरी पेंटी ही छुपा रखी थी बाकी सब तो ओपन ही था।ब्रा न पहनने के कारण शर्ट में मेरे बूब्स का आकर सही से नजर आ रहा था।

जब मैं तैयार होकर आईने के सामने आई तो आज मैं खुद को ही बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी।आईने में देखते हुए मैंने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए, शर्ट के दो बटन खुलते ही मेरे बूब्स दिखाई देने लगे।

अब मैं और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी, अब मुझे पूरा यकींन हो गया था कि साजन भाई मेरी मस्त मस्त, गोल गोल चूचियों को देखकर मुझ पर जरूर फ़िदा हो जायेंगे।

शर्ट के नीचे ब्रा तो थी नहीं और ऊपर के दो बटन भी खुले हुए थे, तो मुझे ऐसा लग रहा था कि हवा भी मेरी चूचियों को छेड़ती हुई महसूस हो रही थी।

मैं अपने कपड़े बदल कर भाई के पास पहुँची, जिस कमरे में साजन भाई और मेरे भाई बहन तीनों टी वी देख रहे थे। मैं भी वहीं साजन भाई के सामने कुर्सी पर बैठ गई।

मुकेश और पारुल टी वी के नजदीक आगे की तरफ बैठे थे, अगर मैं कोई भी हरकत करती तो उन दोनों को पता नहीं चल पाता।

मुकेश और पारुल दोनों ही बड़े ध्यान से टी वी देख रहे थे, पर जैसे ही मैं कुर्सी पर बैठी तो साजन भाई का ध्यान मेरी तरफ गया और वो मुझे एकटक देखने लगे और बस देखते ही जा रहे थे।

मेरे इस बदले हुए रूप को शायद ही उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।

कभी वो मेरे चेहरे को देखते तो कभी वो मेरे बूब्स देख रहे थे जो कि दो बटन खुले होने के कारण कुछ ही ज्यादा बाहर को आ गए थे।भाई का ध्यान अब मेरे बूब्स में ही अटका हुआ था इसलिए मैंने अपनी सोची समझी हुई दूसरी चाल भी चल दी मतलब यह कि मैंने अपने दोनों पैरो इस तरफ से खोले कि उनको यह महसूस ही न हो कि मैं ये सब जान बूझकर कर रही हूँ।

जैसे ही मैंने अपने दोनों पैर खोले तो साजन भाई की नज़र मेरे बूब्स से होते हुए मेरी टांगों के बीच गई। वहाँ पर उनकी नजर गुलाबी पेंटी से ढकी हुई मेरी अनछुई चूत पर गई।

मेरी गुलाबी पेंटी में मेरी चूत का उभरा हुआ भाग साफ़ साफ़ साजन भाई को दिखाई दे रहा था।

एक पल को तो साजन भाई पलके झपकाना ही भूल गए थे।

मैं साजन- पारुल, मुकेश और मैं कमरे में बैठ हुए टी वी पर फ़िल्म देख रहे थे तभी मेरी नज़र कमरे में आती हुई दिया पर पड़ी।तो उससे देखता का देखता ही रह गया… क्या मस्त और सेक्सी लगी रही थी और उसने आज कपड़े भी बहुत सेक्सी ही पहने थे।उसने शर्ट और मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी।जब दिया कमरे में चलती हुई आई तो उसके बूब्स हवा में उछल रहे थे और दिया के शर्ट के दो बटन भी खुले हुए थे जिससे चलते हुए उसके बूब्स बाहर को आ जाते थे।जो स्कर्ट दिया ने पहनी हुई थी वो बस उसके चूतड़ और योनि को ही छुपाये हुई थी।उसकी चिकनी जाँघ देखकर मेरा लिंग अंगड़ाई लेने लगा था। मुझे उसका यह रूप देखकर अंदाजा हो गया था कि यह क्या चाह रही है।

मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि रात दिया ने मेरा लण्ड चूसा और अब ये सब देखने को मिल रहा है।

आज मुझे लगा कि दिया की चूत का मेरे लण्ड से संगम होकर ही रहेगा।

दिया कमरे में आकर साइड में रखी हुई कुर्सी पर मेरे सामने बैठ गई, फ़िल्म पारुल और मुकेश की पसंद की आ रही थी कि पारुल और मुकेश ने दिया की तरफ ध्यान ही नहीं प्रिया पर मेरा ध्यान अब टी वी में कहाँ था, अब तो बस मुझे दिया ही नजर आ रही थी।

कुर्सी पर बैठ कर वो टी वी देखने लगी और मैं उसके बूब्स को देख रहा था। शर्ट के ऊपर दिया के बूब्स की निप्पल मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी, कुछ देर बाद दिया ने अपने पैरों को खोल कर चौड़ा कर लिया।जैसे ही दिया ने अपने पैरों को खोला तो उसकी गुलाबी रंग की कच्छी नजर आने लगी और उस कच्छी से झांकती हुई उसकी चूत के भी दर्शन हो रहे थे जिसे देखकर मेरा लण्ड अंगड़ाई लेने लगा।कुछ देर बाद ही मेरा लण्ड पूरी तरफ तन कर खड़ा हो गया।

मुझे तो लग रहा था कि दिया ये सब जान बूझकर कर रही है।

मैं अपना लण्ड अपने एक हाथ से मसल रहा था और उसकी चूत को अपनी आँखों से ही चोदने की भरपूर कोशिश कर रहा था।दिया मुझे चोर निगाहों से देख रही थी, मेरे लण्ड का तो बहुत बुरा हाल हो गया था।मैं अपना लण्ड मसलते हुए दिया को देख रहा था तो वो थोड़ा सा नीचे की तरफ कुछ इस तरफ से झुकी की उसकी पूरी चूची मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे गई और जब वो ऊपर की तरफ उठी तो मेरी और दिया की नजरें आपस में मिली।मुझसे नजरें मिलते ही वो मुस्कुरा दी और बदले में, मैं भी अपना लण्ड मसलते हुए मुस्कुरा प्रिया।कहानी जारी रहेगी।

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