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Group Sex Story पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 618 बार

बदले की आग-8

उषा मस्तानी

07 Mar 2020 को प्रकाशित

बदले की आग-8
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कुसुम रोते हुए बोली- मुन्नी मेरी अच्छी सहेली है। कल बेचारी ने पति से छुप कर हज़ार के दो नोट दिए थे, बोली थी ‘अपने घर भेज देना, तेरे मम्मी पापा मुश्किल में हैं।’ आप उसे कुछ मत बताना।

कुसुम बोली- मैं पच्चीस हजार उसके डिब्बे में वापस रख दूँगी, कम से कम मुन्नी को पैसे तो मिल जाएँगे।

दो दिन बाद मुन्नी का फ़ोन आया, वो मुझसे मिलना चाह रही थी। हम लोग अपने चुदाई अड्डे पर मिले। साड़ी उतारकर मुझसे चिपकते हुए मुन्नी बोली- चोर ने मेरे पैसे वापस उसी डिब्बे में रख दिए। ये देखो पूरे पच्चीस हजार हैं। उसने एक माफ़ी मांगने का पत्र भी लिखा है।

मुन्नी ने मेरे बचे हुए पैसे वापस कर दिए। मुन्नी थोड़ी उदास सी दिख रही थी, मैंने मुन्नी की पप्पी लेते हुए कहा- तुम उदास क्यों हो?

मुन्नी रोते हुए बोली- मेरे पैसे कुसुम ने चुराए थे।

मैंने अनजान बनते हुए पूछा- तुम्हें कैसे पता?

मुन्नी बोली- दो दिन पहले दया करके मैंने दो हज़ार के नोट उसे दिए थे, उसमें से एक के ऊपर मुन्नी लिखा था, जब भी मेरी डोक्टरनी मुझे पैसे देती है तो सबसे ऊपर वाले नोट पर मेरा नाम लिखा होता है। चोर ने जो पच्चीस हजार के नोट वापस रखे थे उनमें से एक नोट वो भी है जो मैंने कुसुम को प्रिया था।

मुन्नी गुस्से से बोली- कुतिया रंडी ने मेरे पैसे चुराए थे। कुसुम के लिए मैंने अपनी प्यारी सहेली नीता को चाल से निकलवाया, कुतिया ने मुझे धोखा प्रिया है। हरामिन को कुतिया की तरह चुदना पड़ेगा मेरे और नीता के सामने।

मुन्नी मुझसे बोली- तुम उसकी गांड मारोगे न, जैसे तुमने मेरी मारी थी, वैसे ही उसकी चोदना।

मैंने मुन्नी से कहा- कुसुम को तेरे सामने सजा देंगे और सब झगड़े की जड़ तो यही है, इसकी जवानी तो मैं तीन तीन लण्डों से चुदवाऊँगा। तेरे से भी ज्यादा इसकी चोदी जाएगी।

मुन्नी मुझसे चिपकी रही, उसकी आँखों में आँसू थे। मैंने उसका पल्लू हटाया और कान में बोला- दूध तो पिला दो !

मुन्नी ने ब्लाउज के बटन खोलकर दोनों स्तन बाहर निकाल दिए, मैंने बारी बारी उसकी दोनों निप्पल चूसीं और बोला- मुन्नी की मुन्नी मुझसे गुस्सा है क्या?

मुन्नी मुझे देखकर मुस्कराई और मुझसे चिपकते हुए बोली- मुन्नी की मुन्नी तो तुम्हारी गुलाम है, रोज़ तुम्हारे लण्ड की राह देखती है। मुन्नी ने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल प्रिया और अपनी टांगें फ़ैला कर चूत का दरवाज़ा मेरे लण्ड के लिए खोल प्रिया।

मुन्नी बोली मैं उसे माफ़ कर देती लेकिन जब नीता ने मुझे चुदवाया तब मुझे पता चला कि दूसरे की चुदती देखना कितनी बुरी बात है। मुझे कुसुम को यह अहसास करवाना ही पड़ेगा कि दूसरे की चुदती देखने का मज़ा लोगी तो एक दिन अपनी भी चुदवानी पड़ेगी। तुम मेरे साथ हो न? कुसुम की चोदोगे न?

मैंने हामी भरते हुए कहा- मुझे तो कुसुम से नीता भाभी और भैया की भी बेइज्ज़ती का बदला लेना है, उसकी चुदाई तो करवानी पड़ेगी ही। मैंने मुन्नी के कान में कुसुम की चुदाई का प्लान बताया। मेरा प्लान सुनकर मुन्नी बहुत खुश हुई, इसके बाद हम लोग अलग हो गए।

रात को जब मैं घर पहुँचा तो भाभी ने दरवाज़ा बंद किया और मेरे गालों पर पप्पी की बारिश करते हुए बोलीं- मज़ा आ गया। आज मुन्नी आई थी कह रही थी उसके पैसे कुसुम कुतिया ने ही चुराए हैं, उसको वो अब वैसे ही चुदवाएगी जैसे खुद चुदी थी। मुझसे कह रही थी उसी फ्लैट में कुसुम की गांड और चूत बजाएंगे। सच तुम्हारे कारण ही मैं बदला लेने मैं सफल हुई।

मैंने भाभी से कहा- मोहन भैया के थप्पड़ का भी बदला लेना है, कुसुम की चूत मोहन भैया से भी चुदवानी है। भाभी को पता नहीं था कि कुसुम ने मोहन को थप्पड़ मारा था। मैंने उन्हें पूरी बात बता दी। भाभी उत्साह से चिपकती हुई बोलीं- आह, बड़ा मज़ा आएगा जब मोहन का लण्ड उसकी चूत में घुसेगा, अपने सामने मोहन से चुदवाऊँगी कुतिया को।

भाभी के होंट चूसते हुए मैंने कहा- अब जरा प्यार वाला दूधू पिलाओ !

भाभी ने अपना ब्लाउज उठाया और अपने दोनों गोल संतरे बाहर निकाल दिए। मैंने के एक एक बार दोनों को दबाते हुए जी भरकर चूसा। शाम को मोहन भैया को भाभी ने बता प्रिया कि कुसुम उन्हीं हाथों से पकड़ कर प्यार से उनका लण्ड अपनी चूत में लगाएगी जिससे उसने आपको थप्पड़ मारा था, साथ ही साथ यह भी बताया ये सब मेरे कारण संभव हुआ है।

मोहन भैया कुसुम की चुदाई नीता के सामने की बात सुनकर बहुत खुश और उत्तेजित थे। अगले दिन मोहन भैया के जाने के बाद सुबह भाभी और मैं साथ साथ नहाए और खुशी ख़ुशी मैं भाभी ने मुझसे अपनी चूत का मर्दन दो बार करवाया।

घर से निकलने के बाद मैंने कुसुम को फोन किया और बता प्रिया कि कैसे मुन्नी को पता चल गया है कि पैसे उसने चुराए हैं। कुसुम को मैंने मिलने बुला लिया और उससे कहा- अब तुम्हें मुन्नी और नीता के सामने चुदना ही पड़ेगा नहीं तो मुन्नी तुम्हारे गाँव में सब बता देगी और तुम बदनाम हो जाओगी !

कुसुम पसीने से नहा रही थी, मैंने उसे बाँहों मैं भरा और उसकी पीठ सहलाते हुए कहा- बद अच्छा बदनाम बुरा ! मुन्नी की बात मान लेना और एक दिन मुन्नी और नीता के सामने चुद लेना ! नहीं तो पति और अपने गाँव की नज़रों में गिर जाओगी।

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कुसुम डर गई और बोली- मेरे पति को और गाँव में पता नहीं चलना चाहिए।

कुसुम बोली- मैं मुन्नी और नीता के सामने चुदने को तयार हूँ।

कुसुम मुझसे चिपकती हुई बोली- आप ही चोदोगे न मुझे?

मैंने उसके होंटों को चूमते हुए कहा- कोशिश करूँगा लेकिन मैं तुम्हें बदनाम नहीं होने दूँगा। अब मुन्नी का जब फ़ोन आए तो गलती मान लेना और चुदने को तयार हो जाना। किसी को यह मत बताना कि तुम मेरी दोस्त बन गई हो।

हम लोग बात कर रहे थे, तभी मुन्नी का फ़ोन आ गया उसने कुसुम से कहा कि उसके बदन में दर्द है, थोड़ी देर को घर आ जा,वो नीता के घर मिलेगी।

कुसुम का चेहरा बुझ सा गया था। इसके बाद नीता भाभी का फ़ोन मुझे आया, बोली- मुन्नी ने कुसुम को बुलाया है, तुम भी आ जाओ। मैंने कुसुम को बाँहों में भरा और कहा- डरो नहीं, अब मैं भी वहाँ मिलूँगा।

कुसुम चिपकते हुए बोली- बड़ा डर लग रहा है, जाने से पहले एक बार मेरी चोद दो न।

मैंने कहा- ठीक है !

इसके बाद मैंने कुसुम की चुदाई करी और ऑटो में घर के लिए बैठा प्रिया। कुसुम से मैंने कहा कि मेरे बाद वो नीता के घर आए। इसके बाद मैंने घर के लिए ऑटो लिया।

कुसुम से पहले मैं घर पहुँच गया, वहाँ नीता पहले से बैठी थी।

तभी मुन्नी वहाँ आ गई और कमरे में घुस कर नीता को गले लगाते हुए मुन्नी बोली- नीता, मेरी प्यारी सहेली, इस कुतिया कुसुम के कारण ही मेरी बेइज्ज़ती हुई है, उसी हरामिन ने ही पैसे चुराए हैं इसके कारण ही मुझे कुतिया की तरह चुदना पड़ा। अब हम और तुम इस कुसुम को रंडी की तरह चुदवाएँगे।

मुन्नी मेरी तरफ देखती हुई बोली- राजेश भैया, आप को कुसुम की गांड और चूत वैसे ही चोदनी है जैसे आपने मेरी चोदी थी।

तभी कुसुम अंदर आ गई, मुन्नी उसे देखकर गुस्से से कांपने लगी, चिल्लाते हुए बोली- कुतिया रंडी, तूने मेरे पैसे चुराए थे। तेरे को चाल में बुलाने के लिए मैंने अपनी प्यारी सहेली नीता को चाल से निकालने के लिए खेल खेला और तू ही मेरे पैसे चुरा ले गई। तुझे तो दो दो लण्डों से चुदवाऊँगी।

नीता कुसुम के कंधे पर हाथ रखकर बोली- 2-2 से नहीं 3-3 से।

कुसुम रो पड़ी।

नीता ने आगे बढ़कर उसके आंसू पौंछे और बोली- जब खुद की चुदती है तो आँसू आते ही हैं, और जब दूसरे की चुदती है तो मज़ा आता है। एक दिन की बात है, मुन्नी और मैं तो चुद ही चुकी हैं, अब तेरी बारी है थोड़ा मज़ा लेंगें, उसके बाद हम तीनों दुबारा दोस्त हो जाएँगे।

कुसुम सर झुकाकर बोली- मैं चुदने को तैयार हूँ।

मुन्नी आगे बढ़कर बोली- तुझे तो तैयार होना ही पड़ेगा। राजेश भैया कल इसकी चुदाई का मुजरा कराते हैं। जब आपका लण्ड इसकी गांड फाड़ेगा तब इसे मज़ा आएगा।

नीता चोर आँखों से मुझे देख कर मुस्करा रही थी।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

विशाल चौरसिया

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

इश्क ज़ादे

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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