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Office Sex पठन समय: 19 मिनट पढ़ा गया: 459 बार

बाप खिलाड़ी बेटी महा खिलाड़िन- 1

राकेश सिंह 1999

10 Jul 2018 को प्रकाशित

बाप खिलाड़ी बेटी महा खिलाड़िन- 1
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यह कहानी मेरे दोस्त सुरेश की है. सुरेश एक बिजनेस मैन होने के नाते अच्छा खासा कमा लेता था. मगर जवान लड़कियों को चोदने का उसे जबरदस्त शौक था.

उसके घर में उसकी खूबसूरत बीवी रति और उसकी बेहद खूबसूरत बेटी रिया भी थी. रिया भी उसके बिजनेस में हाथ बंटाती थी. वह देखने में बहुत खूबसूरत थी और एकदम श्रद्धा कपूर के जैसी दिखती थी.

सुबह के नाश्ते के बाद एक दिन रिया और सुरेश घर से निकल रहे थे कि रिया का फोन बज पड़ा.फोन उठा कर रिया ने कहा- हाँ, बोलो रत्न?उधर से रत्न ने कुछ बोला.रिया- तुम्हें मेरा रेट पता नहीं क्या? आगे से दस हजार।

रत्न फिर कुछ बोला.रिया- पीछे भी चाहिए तो बीस हज़ार और ऊपर फ्री।रत्न ने फिर कुछ जवाब प्रिया.रिया- ओके! रात दस बजे पक्का। बॉय!इतना कह कर रिया ने फ़ोन रख प्रिया.

उसकी मां रति भी ये बातें सुन रही थी.वो बोली- बेटा यह क्या काम करती हो तुम जो यूँ रात- रात भर बाहर रहना पड़ता है तुम्हें?रिया- ओहो! मां कितनी बार तो बताया है कि इवेंट ऑर्गेनाइस करती हूं।

रति- वह तो ठीक है मगर यह आगे- पीछे और ऊपर का क्या चक्कर है?रिया- मां आगे का मतलब है सॉफ्ट ड्रिंक्स जो आगे के दरवाज़े से खुले आम आ जा सकें।रति- अच्छा, फिर पीछे और ऊपर?

रिया- पीछे का मतलब है शराब, जो सिर्फ पीछे के रास्ते से छुपाकर आती है और ऊपर मतलब खाना।रति- बेटा यह गैर कानूनी है. इसमें खतरा है तो ऐसा क्यों करती है?

सुरेश- रति, तुम भी ना बहुत डरपोक हो। यह मेरी बेटी है। इसे अच्छी तरह पता है कि बिजनेस कैसे किया जाता है, यह कोई ख़राब काम नहीं कर रही. देखना एक दिन यह अपने बिजनेस में हमारा नाम जरूर रोशन करेगी।

रिया- थैंक यू डैड। बाय, अब मैं चलती हूँ. कल सुबह 10 बजे तक आ जाउँगी।यह बोल कर रिया घर से निकल गयी.

रति सुरेश से- आपने तो इसे सिर पर चढ़ा रखा है. जब हमारे पास इतना पैसा है ही तो इसे ऐसे काम करने की इसे क्या जरूरत है? और तुम भी तो इसकी पॉकेट मनी नहीं बढ़ाते. आखिर वह भी तो अब बड़ी हो गयी है. उसके खर्चे भी तो बढ़ गए हैं।

सुरेश- रति तुम समझती नहीं हो. मैं जानबूझ कर उसकी पॉकेट मनी नहीं बढाता. मैं चाहता हूँ कि वह अपने पैरों पर खुद खड़ी हो. आखिर एक न एक दिन यह सब उसी का तो होने वाला है और तब उसका यह एक्सपीरियंस काम आएगा।

रति- हां हां! समझ गयी. तुम, तुम्हारी बेटी और तुम्हारा बिजनेस!सुरेश ने रति को अपनी बांहों में कस लिया और बोला- अरे जानू … ग़ुस्सा क्यों होती हो. तुम तो मेरी जान हो। तुम नाराज़ हो जाओगी तो ऐसा लगेगा कि मेरी जान ही मुझसे नाराज़ हो गयी और अगर जान नाराज़ हो जाए तो मैं तो मर ही जाऊंगा।

वो सुरेश के मुंह पर हाथ रखते हुए बोली- छी! ऐसा मत कहो. तुमसे पहले मेरी ही जान निकल जाए।सुरेश ने रति को अपने सीने से लगा लिया और बोला- अब मैं चलता हूँ. रात को देर से लौटूँगा या फिर सुबह ही लौटूं शायद।

रति- बस यही तो है बुरी आदत है आप दोनों बाप- बेटी में! मुझे तो घर में सिर्फ पहरेदार ही बना प्रिया है आप दोनों ने।सुरेश- मेरी जान, यूँ उदास होकर मत विदा करो. अच्छा नहीं होता. ज़रा मुस्करा दो।वो मुंह बना कर बोली- तुम भी न, हमेशा अपनी बात मनवा ही लेते हो। ठीक है जाओ, और हाँ रात में ही आने की कोशिश करना।

सुरेश- बॉय!रति- बॉय! जल्दी आने की कोशिश करना।अब सुरेश भी घर से निकल गया.

कुछ देर के बाद वह ऑफिस पहुंच गया. वो सीधा अपने केबिन में गया और जाते ही उसकी सेक्रेटरी रीता जो एक 32 या 33 साल की मगर ज़िस्म से गदराई हुई माल थी, पीछे- पीछे वह भी सुरेश के केबिन में घुस गई.

रीता- गुड मॉर्निंग सर!सुरेश- गुड मोर्निंग। सिट् डाउन।सुरेश थोड़ी देर तक फाइल्स के पेज पलटने के बाद गुस्से में बोला- रीता आर यू क्रेज़ी?रीता- क्या हुआ सर? एनी प्रॉब्लम?

सुरेश- प्रॉब्लम क्या … ऐसे काम होता है? तुम तो मुझे बर्बाद कर दोगी। यह फाइल्स अब तक क्लियर क्यों नहीं हैं?रीता- सर … वो … वो …सुरेश- क्या वो-वो लगा रखा है? पता नहीं मैंने तुम्हें काम पर किसलिए रखा हुआ है!

सुरेश के गुस्से को देखते हुए रीता उठी और सुरेश के पास जाकर खड़ी हो गयी. उसने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका प्रिया जिससे वो नीचे गिर गया. उसने सुरेश का हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पर रखवा प्रिया.

रीता दिमाग से भले ही पैदल थी लेकिन वह अपने जिस्म की कीमत अच्छी तरह से जानती थी. इसलिए उसने सुरेश को अपनी चूत के जाल में उलझा कर रखा हुआ था. यही कारण था कि सुरेश उसको चाह कर भी काम से नहीं निकाल पा रहा था.

सुरेश ने पहले अपने हाथ से रीता के बूब्स को जार से दबाया और फिर उसे अपनी गोद में खींच कर बैठा प्रिया. उसके चेहरे को पकड़ कर उसके होंठों पर अपने होंठ रखने ही वाला था कि उसके केबिन का दरवाजा नॉक हुआ.

सुरेश और रीता हड़बड़ा गये और रीता झट से सुरेश की गोद से उठ गई.सुरेश सँभलते हुए- कम इन।दरवाज़ा खुला और सुरेश का मैनेजर राजन अंदर आया।

सुरेश- बोलो राजन? एनी प्रोब्लम?राजन- सर वो … अब तक राना एंड संस की फाइल क्लियर नहीं हुई है और वह अपना अकाउंट जल्दी क्लियर करने का प्रेशर बना रहे हैं।सुरेश- क्यों क्लियर नहीं हुई अब तक?

राजन- सर, वह रीता के हाथों में यह सारी बातें हैं. अब वह ही बतायेगी कि क्यों देर हो रही है? मगर जल्द क्लियर न करने से हमें बहुत नुकसान हो सकता है क्योंकि आगे वह हमारे साथ काम नहीं करना चाहेंगे।

सुरेश- आई सी। (मैं देखता हूं). ओके ठीक है, तुम जाओ मैं देखता हूँ।राजन चला गया और सुरेश रीता की तरफ देख कर बोला- रीता क्या है यह सब?रीता ने फिर अपना शैतानी दिमाग लगाया और इस बार अपनी साड़ी को अपनी कमर तक ऊपर उठाते हुए अपनी पेंटी खोल कर सुरेश के उपर फ़ेंक दी.

उसकी पैंटी को हाथ में लेकर उसे दिखाते हुए सुरेश बोला- अपना यह रन्डीपना बंद करो तुम और यह फाइल आज ही क्लियर करके लाओ।रीता ने गुस्सा होते हुए मुंह बनाया और बोली- हां लाती हूं, लाइये दीजिए फाइल … और मेरी पैंटी भी।

सुरेश- तुम सिर्फ फाइल ले कर जाओ. और यह पैंटी आज मेरे पास ही रहेगी. जब तक काम नहीं हो जाता तब तक तुम नंगी ही रहोगी. अब जाओ।

सुरेश ने रीता को चिढ़ाते हुए उसकी पैंटी से अपना चेहरा पौंछ लिया.रीता गुस्से में बड़बड़ाते हुए जाने लगी- हूंह … नंगी रहो! पूरे कपड़े खुलवा कर ही नंगी कर दो ना?

उसकी बात पर सुरेश ने भी जवाब फेंका- अपने काम पर ध्यान दो, छिनालपन पर नहीं.रीता जाकर अपना काम करने लगी और सुरेश रीता की पैंटी को अपनी पॉकेट में रख कर अपने काम में लग गया.

धीरे धीरे शाम हो गयी. सारा स्टाफ चला गया सिवाय रीता को छोड़ कर। आधे घंटे के बाद रीता फाइल समेट कर सुरेश के केबिन में आई और टेबल पर फाइल पटकते हुए गुस्से में बोली- लीजिये आपकी फाइल और मेरी पैंटी मुझे दीजिये, मुझे घर जाना है।

फाइल देख कर सुरेश खुश होते हुए बोला- घर? घर क्यों, आज तो तुम्हें होटल मूनलाइट जाना है ना?रीता- क्या? होटल? नहीं … आज कोई चुदाई-वुदाई नहीं होगी. मुझे जल्दी घर जाना है।सुरेश- पर क्यों मेरी जान?

रीता- घर पर मेरे पति मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे।सुरेश- वह भड़वा क्या इंतज़ार करेगा तुम्हारा? उसे तो मैं एक फ़ोन लगाऊंगा तो वह अपनी माँ भी चुदवा देगा मुझसे।रीता ने हंसते हुए कहा- और बच्चे? मेरे बच्चों को कौन संभालेगा?

सुरेश- तुम्हारा पति कब काम आएगा? वह सम्भालेगा उन्हें. वैसे भी कोई दूध पीता बच्चा थोड़े ही है तुम्हारा?रीता- अच्छा तो फिर मेरा दूध पीता कौन है?

सुरेश ने आगे बढ़ते हुए रीता को अपनी बांहों में लेटा लिया और बोला- अब मुझे ज्यादा गर्म मत करो वरना यहीं पकड़ कर चोद दूंगा।रीता- ठीक है. अब तो मुझे मेरी पैंटी वापस कर दो!

वो उठ कर रीता से अलग हुआ और चाबियों के गुच्छे में से चाबी लगाकर कपबोर्ड खोलते हुए बोला- आज तक कभी वापस की है मैंने तुम्हारी ब्रा-पैंटी जो आज वापस करूंगा?

रीता ने सामने कपबोर्ड में देखते हुए कहा- बाप रे! कितना गजब का शौक है आपका? इतनी सारी ब्रा पैंटी इकट्ठा कर रखी हैं! लगता है कि आपके सारे पैसे मेरे जैसी रंडियों की ब्रा और पैंटी पर ही खर्च होते हैं.

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सुरेश- सारी रंडियों की ब्रा- पेंटी पर नहीं … सिर्फ तुम्हारी ही ब्रा और पेंटी मैं ख़रीदता हूँ. बाकी तो सभी शौक से ही मुझे अपनी ब्रा और पेंटी दे देती हैं।रीता- ठीक है, अब इसे रखिये और चलिये. देर हो रही है।

सुरेश- पहले तुम अपनी ब्रा तो मुझे दे दो ताकि मैं इसे रख दूं।रीता ने मुस्कराते हुए अपना ब्लाउज खोला और अपनी ब्रा को निकाल कर सुरेश के हाथों में थमा प्रिया. फिर उसने अपना ब्लाउज वापस पहन लिया.

उसकी ब्रा और पैंटी को अंदर रखते हुए सुरेश बोला- क्या तुम जानती हो कि ये सारी यूज़ की हुई ब्रा- पैंटी हैं? बिना धुली हुई. जब भी किसी की चूत की याद आती है मैं यह कपबोर्ड खोल कर इनकी खुशबू सूंघ लेता हूँ. बड़ा ही मजा आता है।

रीता- मुझे पता है. अब चलिये ना।सुरेश- बड़ी भूख लगी हुई है तुम्हारी चूत को, चलो तुम्हारी चूत की भूख को मिटा ही देता हूं.

होटल मूनलाइट में सुरेश की पहले से ही स्पेशल सेटिंग थी. वो दोनों पहुंच गये और जाकर उन्होंने खाना ऑर्डर किया. थोड़ी देर के बाद वेटर आया और खाने के साथ ही एक कॉन्डम का पैकेट भी लेकर आ गया. वो रख कर वापस जाने लगा.

सुरेश कॉन्डम का पैकेट उठाया और गुस्से में बोला- तुम्हें पता नहीं है कि जब मैं मैडम के साथ आता हूं तो मुझे कॉन्डम की जरूरत नहीं होती है?रीता ने अपनी छिनाल हंसी के साथ कहा- जाने दीजिये ना … इस बेचारे को क्या पता कि मेरी चूत में ऐसा क्या है जो आपको कॉन्डम की जरूरत ही नहीं पड़ती.

रीता रंडी की बात सुन कर वेटर भी शरमा गया और वहां से चुपचाप चला गया.उसके जाने के बाद वो दोनों खाना खाने के लिए तैयार होने लगे.रीता- मैं जरा फ्रेश हो कर आती हूँ।

वो बाथरूम में गयी और जब बाहर निकली तो सुरेश के चेहरे पर शैतानी मुस्कान फैल गयी. रीता पूरी नंगी होकर बाहर आयी थी. धीरे- धीरे अपनी बड़ी सी गाँड मटकाते हुए वो सुरेश के पास आई और बोली- क्या देख रहे हो जी?

सुरेश- बस तुम्हें ही देख रहा हूँ कि कितनी बेशर्म हो तुम! अपने पति और बच्चों के होते हुए भी तुम मुझसे चुदने चली आती हो।रीता- तो इसमें बुरा क्या है? ये मेरी चूत है, मैं चाहे जिससे चुदवाऊँ! इसमें मेरे पति का क्या?

उसकी बात पर सुरेश बोला- मेरी रंडी रानी. कभी कभी मन करता है कि तुझे अपने सभी दोस्तों के साथ मिल कर चोद दूं.रीता- ना बाबा ना … मैं केवल आपकी रंडी हूं. आप जितना चाहे चोदिये मगर किसी और से मुझे न चुदवाइये.सुरेश मुस्कराते हुए बोला- ठीक है, अब चल … मेरा लंड चूस।

रीता झट से अपने हाथ को सुरेश की पैंट पर ले गयी और उसे खोलते हुए उसने सुरेश के लंड को बाहर निकाल लिया. झुक कर उसने सुरेश के लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसके लंड को जोर जोर से चूसना शुरू कर प्रिया.

रीता के मुंह से लंड चूसने की कामुक आवाजें निकलने लगीं- आऊम्मम … चप्पचप्प … आह्ह. अम्म… मुचमुच… ऊंहह… आह्ह गप्प गपल गप्प…ऐसी आवाजें करते हुए वो सुरेश को लंड चुसाई का पूरा मजा देने लगी.

सुरेश ने रीता के बाल पकड़ कर उसके मुंह को लंड से अलग कर प्रिया और उठ कर अपने सारे कपड़े खोल कर उतार फेंके.रीता बेड से उतर कर किनारे खड़ी हो गई और झुक कर अपनी गाँड सुरेश की तरफ कर दी. सुरेश को ट्रेस करते हुए वो अपनी गांड गोल गोल घुमा कर मटकाने लगी.

उसकी हरकत को देखते हुए सुरेश मुस्कराया और बोला- तुम खा खाकर मोटी हो गयी. देखो तुम्हारी गांड कितनी बड़ी हो गयी!रीता के पास आकर सुरेश ने उसकी गाँड के दोनों पट को अपने दोनों हाथों से फाड़ प्रिया.

रीता- मेरी गाँड ज्यादा खाने से नहीं … आपके लंड के घुसने की वजह से बड़ी हो गयी है। गलती आप करो और इल्ज़ाम मुझ पर लगाओ? यह कहाँ का इन्साफ है?

उसकी गांड को गौर से देखते हुए सुरेश बोला- अरे हां, तुम बिल्कुल सही कह रही हो. तभी तो मैं कहूँ कि तुम्हारी गाँड का छेद इतना गोल कैसे हो गया? मगर जो भी हो, लगती बहुत ही प्यारी है तुम्हारी ये गांड।

वो बोली- हां आपको तो बस मेरी गांड चुदाई करके मजा लेने से मतलब है. मगर इस मोटी गांड का बोझ तो मुझे ही ढोना है ना!सुरेश- तो आजा मेरी रानी … तुझे भी मजा दे देता हूं.

सुरेश ने अपनी जीभ निकाली और रीता की गांड के छेद पर रख कर उसकी गांड को चाटने लगा.अम्म … आह्ह चपकचप… चपचप … मुचमुच… करके वो उसकी गांड को काफी देर तक चाटता रहा.फिर उठ कर उसकी गांड पर जोर से तमाच मारने लगा.

दर्द से रीता चिल्लाने लगी- आईई… आह्ह … आऊच … ओह्ह … ऊईई।रीता की गांड पूरी लाल हो गयी.फिर सुरेश ने रीता की एक टाँग पकड़ कर बेड पर रख दी और खुद उसके पैरों के बीच में नीचे बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा।

चूत चटाई करवाते हुए रीता बहुत गर्म हो कर सिसकारने लगी- आह्ह … आआहा … हाह्ह … ओह्ह … ओ … मां … हूंह … अम्म … उम्ममा आह्ह…वो चूत चटवाने का मजा लेती रही.

फिर सुरेश खड़ा हुआ और उसने अपने लंड पर थूक लगा लिया. उसने लंड को चिकना करके रीता की चूत में पेल प्रिया और उसको पकड़ कर चोदने लगा.रीता सिसकारने लगी- आह्ह … हम्म … यस्स… चोदो … आह्ह. और जोर से … फाड़ दो मेरी चूत … हाह … मांआह्ह … चोद दो मुझे।

सुरेश अपने दोनों हाथों से रीता के बूब्स को पकड़ कर लगातार धक्के मार रहा था. ऐसे ही 15 मिनट तक उसकी चूत में धक्के देने के बाद उसने अपना लंड रीता की चूत से निकाल लिया.

रीता नीचे बैठ कर उसका लंड मुंह में लेकर चूसने लगी. सुरेश ने उसे पकड़ कर ऊपर उठाया और उसके बालों से पकड़ कर उसे खींचता हुआ सोफे पर ले गया. रीता ने झुक कर सोफे की दीवार पकड़ ली और अपनी गांड सुरेश की ओर कर दी.

सुरेश ने रीता की गाँड पर ढे़र सारा गाढ़ा थूक गिरा प्रिया और अपने हाथ से उसकी गांड के छेद पर थूक को मलने लगा. फिर अपना लंड उसकी गांड पर लगा कर उसने जोरदार धक्के के साथ अपना लंड रीता की गांड में घुसा प्रिया.

लंड घुसते ही रीता एक बार चिल्लाई. मगर तब तक सुरेश ने धक्के लगाने भी शुरू कर दिये थे.वो जोर जोर से आवाजें करती हुई अपनी गांड चुदाई करवाने लगी- आह्ह … सररर … आह्ह … आआ. फाड़ दीजिये … मेरी गाआ … गांड को! आह्ह … चोद दो सररर … आह्ह चोद दो मेरी गांड।

उत्तेजना में आकर सुरेश भी सिसकारने लगा- आह्ह … यस्स … रीता … आह्ह … तेरी गांड … चोद दूं तुझे … मेरी रंडी … आह्ह क्या मस्त गांड है तेरी … आह्ह रीता मेरी रंडी … यस्स आह्ह फक यू… आह्ह… फाड़ दूंगा आज।

लगातार 20 मिनट तक चोदने के बाद सुरेश झड़ने के करीब पहुँच गया. उसने रीता की गांड में अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.थोड़ी देर के बाद वो रीता की गांड में ही झड़ने लगा.‘ओह्ह रीता … आह्ह … यस्स आआ … आहह … यस्स ओह्ह’ करते हुए उसने सारा माल रीता की गांड में गिरा प्रिया.

सुरेश के वीर्य से रीता की गांड पूरी भर गयी. फिर सुरेश ने अपना लंड रीता की गांड से बाहर निकाल लिया. मगर तभी रीता ने सुरेश के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

उसकी गाँड में से सुरेश के लंड का माल बहने लगा. सुरेश का लंड चूसने के बाद रीता ने अपना हाथ पीछे अपनी गाँड पर लगा लिया और ढेर सारा वीर्य अपने हाथ पर इकट्ठा कर लिया और फिर अपनी हथेली को चाट कर बोली- आह्ह सर … आह्ह … टेस्टी है … मजा आ गया.

सुरेश वहीं सोफ़े पर बैठ गया और रीता उससे लिपटते हुए बोली- बड़ी बेदर्दी से चोदते हैं आप मुझे। मेरे पति मुझे ऐसे नहीं चोदते।सुरेश- अरे उस भड़वे में दम कहाँ जो वह तुम जैसी रांड को चोद सके. मगर मेरी जान, मेरी चुदाई में तुम्हें मजा नहीं आता क्या?

रीता- मज़ा तो बहुत आता है, तभी तो खुलकर सबके सामने भी आपसे चुदने चली आती हूँ. मगर एक गन्दी आदत लगा दी है आपने मुझे।सुरेश- वह क्या?रीता- वही … मेरी गाँड से निकले हुए आपके लंड के वीर्य को चाटने की।

सुरेश- मेरी रांड … यही तो फैंटेसी है।इतना कह कर दोनों ठहाका मार कर हंसने लगे.

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

वीर सिंह

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

प्रतीक गोयल ओडिशा

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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