होम पर वापस जाएं
पड़ोसी पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 344 बार

चुदाई एक्सप्रेस- 2

सनी वर्मा

22 Mar 2017 को प्रकाशित

चुदाई एक्सप्रेस- 2
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

आंटी चुदाई कहानी में गाँव के अमीर जमींदार का बेटा शहर में एक विधवा के घर में कमरा लेकर रहने लगा पढ़ाई के लिए. उसकी एक बेटी भी थी. विधवा को जवान लड़का देख चुदाई की तलब लगी.

कहानी के पहले भागचूत लंड की जरूरत है सबकोमें आपने पढ़ा कि गाँव के बड़े जमींदार की ह,त्या के बाद सारी संपत्ति उनकी विधवा ठकुरानी के पास आ गयी. पर जमींदार का एक सौतेला भाई भी था, उसके बाप की रखैल का बेटा.वह खेती की देखभाल करने लगा और साथ में ठकुरानी को भी चुदाई के लिए मना लिया.ठकुरानी का बेटा नीरज शहर में पढ़ रहा था.

अब आगे आंटी चुदाई कहानी:

नीरज अब उसके मकान में शिफ्ट हो गया.सरिता बहुत मिलनसार और बातूनी महिला थी.वो खाना भी बहुत अच्छा बनाती थी.

नीरज को पैसे की कोई दिक्कत थी ही नहीं.अब उसका मन पढ़ाई में लगने लगा था. वो अक्सर सरिता के रूम में बैठकर ही पढ़ता. वहां एसी लगा था.

उसकी सरिता से खूब पटने लगी.हालाँकि सरिता उससे काफी बड़ी थी पर हंसी मजाक के दौरान दोनों काफी खुल गए थे.

उधर सावित्री की तबियत भी खराब रहने से वो अब सफर नहीं कर पाती थी तो इतने सालों के बाद एक बार नीरज उससे मिलने गाँव गया.

उसने सावित्री से अपने साथ चलने को बहुत कहा, पर सावित्री नहीं आई.

गरमी के दिन थे.नीरज के कमरे में सिर्फ पंखा था तो वो अक्सर कपड़े उतार कर सिर्फ लुंगी पहन कर सोता.

एक रात बारिश तेज होने लगी, आसमान में बिजली कड़क रही थी.घर का मेन गेट किसी पत्थर के बीचे में आने से ठीक से बंद नहीं हो रहा था.

सरिता ने नीरज को आवाज दी.नीरज ने नीचे आकर पत्थर हटा कर गेट लगाया तो वह भीग गया.सरिता ने उससे कहा की वो जाकर कपड़े बदले और वो उसके लिए चाय बनाती है.

नीरज ने मना भी किया पर सरिता ने उसे जबरदस्ती ऊपर भेज प्रिया कपड़े बदलने को.

नीरज ने हंस कर कहा की वो तो रात को केवल लुंगी पहनता है तो सरिता भी मुस्कुरा कर बोली- तो केवल लुंगी ही बदल कर आ जाओ.

नीरज लुंगी बदल कर ऊपर से टॉवेल डाल कर आ गया.

सरिता ने कॉफ़ी बनायी थी.दोनों कॉफ़ी लेकर बेड पर बैठ गए.

कमरा ठंडा हो रहा था.अचानक बिजली चली गयी … शायद बारिश की वजह से.

सरिता का इन्वर्टर भी चालू नहीं हुआ.

सरिता ने मोबाइल की लाइट खोल दी, कमरे में हल्की सी रोशनी हो गयी.

बेड पर बैठे बैठे दोनों के पैर टकरा रहे थे.सरिता की पाजेब आवाज कर रही थी. नीरज का मन मचल रहा था.

एक तो मौसम और ऊपर से विपरीत सेक्स का साथ.

कमोबेश सरिता भी बेचैनी महसूस कर रही थी.

उसने नीरज को लेकर कभी गलत नहीं सोचा, बस वो उसे अच्छा लगता था.पर आज मन बेईमान हो रहा था.

इन्वर्टर देखने के बहाने नीरज उठने को हुआ देखने को तो सरिता ने हाथ पकड़कर रोक लिया कि बिजली आती ही होगी.

अब सरिता का हाथ उसके हाथ में था.नीरज धीरे धीरे उसे सहला रहा था.

दोनों चुप थे.

अचानक बिजली जोर से कड़की तो सरिता उससे लिपट गयी.बस अब सब्र का बाँध टूट गया.नीरज ने उसे कस के चिपटा लिया.

सरिता ने मुंह ऊपर उठाया तो नीरज ने अचानक ही उसे चूम लिया.

अब तो दोनों लिपट गए, ताबड़ तोड़ चूमा चाटी होने लगी.नीरज को एक औरत के जिस्म की नजदीकी जिन्दगी में पहली बार मिल रही थी और सरिता को दो साल के बाद किसी मर्द की बलिष्ठ छाती से लिपटने का सुख मिल रहा था.

नीरज का लंड पूरा तन गया था.उसने सरिता के नाईट सूट को पीछे उठाया और उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराते हुए उसे अपने से और चिपटा लिया.

सरिता कसमसाई और बोली- नीरज, हम गलत कर रहे हैं.नीरज को करेंट सा लगा.उसने सरिता को छोड़ प्रिया और बेड से उतरने लगा.

अब सरिता दोबारा उससे लिपट गयी, बोली- मत जाओ. जो तूफ़ान उठा है उसे भगवान की मर्जी मान लो.सरिता ने कहकर नीरज की लुंगी खोल दी और उसका मूसला बन चुका लंड पकड़ लिया.

नीरज ने भी सरिता के कपड़े उतार दिए.तभी बिजली आ गयी.

दोनों नंगे एक दूसरे के सामने थे.सरिता का मचलता जिस्म दमक रहा था.

वह झपट कर उठी और कमरे की लाइट बंद कर दी और नीरज से जा लिपटी.नीरज ने पहली बार किसी औरत के मम्मे पकडे थे.

सरिता के मम्मे मांसल थे.नीरज उन्हें बारी बारी से चूसने लगा.सरिता उसका लंड मसल रही थी.

बहुत ज्यादा फोरप्ले की गुंजाइश नहीं थी.दोनों की आग भड़क चुकी थी.

नीरज ने हाथ नीचे किया और अपनी एक उंगली सरिता की चूत में कर दी.वहां तो उसकी चूत पानी बहा रही थी.

अब तो दोनों गुत्थम गुत्था हो गए.दो जिस्म एक होने को मचल उठे.

लेटे लेटे ही सरिता ने नीरज का लंड अपनी चूत पर सेट किया और नीरज से कसमसा कर कहा- ऊपर आ जाओ.

नीरज ने सेक्स भले ही न किया हो, पोर्न तो खूब देखीं थीं.वो चढ़ गया सरिता के ऊपर और मूसल पेल प्रिया.

सरिता की तो मानो जान निकल गयी.नीरज का जवान लंड बहुत मोटा था और फिर सरिता की आदत भी तो ख़त्म हो गयी थी घमासान चुदाई की.

नीरज ने लंड बाहर निकालना चाहा तो सरिता ने उसे चिपटा लिया अपने से और बोली- कहीं मत जाओ, चुदाई रोको मत. धक्के लगाओ जोर से, मेरी प्यास बुझा दो.

थोड़ी देर की उठापटक के बाद दोनों निढाल होकर अगल बगल में पड़े उखड़ी उखड़ी सांस ले रहे थे.सरिता ने नीरज को चूमते हुए कहा- आज तुमने मेरी बरसों की प्यास बुझा दी. कनिका के पापा और मैं बिना दमदार सेक्स किये सोते ही नहीं थे. मैं तड़प रही थी ऐसी चुदाई के लिए.

आंटी चुदाई के बाद सुबह नीरज कॉलेज चला गया.

अब तो वो और सरिता पति पत्नी की तरह रहने लगे.दोनों साथ नहाते, साथ खाते और रात को दबा कर सेक्स करते.मौक़ा मिलता तो नहाते समय भी चुदाई कर लेते.

अब तो सरिता और नीरज बिना कपड़ों के लिपट कर सोते.

सरिता तो खेली खायी थी, उसने पहले से ही ऑपरेशन करा रखा था तो कोई डर नहीं था.और बिना कपड़ों के रहने की आदत उसे डॉक्टर साहब ने डाल दी थी तो उसने यही फोर्मुला नीरज पर भी अप्लाई कर प्रिया.

ऐसे ही कब एक साल निकल गया पता ही नहीं चला.अब ये नीरज का आखिरी साल था.

सरिता की बेटी कनिका की पढ़ाई पूरी हो गयी तो वो वापिस आने वाली थी.

यह भी पढ़ें (Recommended)

नाम में क्या रखा है-2

रात को सेक्स के दौरान लिपटते हुए सरिता ने नीरज को ऊपर ही शिफ्ट होने को कहा.नीरज ने कहा कि वो मकान बदल लेगा.तो सरिता ने उसे चूमकर कहा- अब मैं बिना तेरे नहीं रह सकती.

उस रात उनका धमाकेदार सेक्स हुआ.ऐसा सेक्स मानो यह उनकी जिन्दगी आ आखिरी सेक्स हो.उन्होंने पूरी रात चुदाई कर के अपनी हसरतें पूरी कीं.

अगले हफ्ते सरिता की बेटी कनिका आ गयी.नीरज तो उसे देखता रह गया.कनिका बिलकुल सरिता की छाया थी पर उससे बहुत ज्यादा सुंदर और चंचल.

नीरज और कनिका आपस में जल्दी ही घुलमिल गए.कनिका भी जॉब ढूँढने लगी.

उसे जल्दी ही एक कॉल सेंटर में जॉब मिल गयी.उसे दोपहर 12 बजे जाना होता था और रात 9 बजे तक वो वापिस आती थी.

सबकी टाइमिंग अलग थी.सरिता सुबह 7 बजे निकलती और दोपहर 3 बजे तक वापिस आती.नीरज कॉलेज के लिए सुबह 10 बजे निकलता और शाम तक लौटता.

सरिता सुबह बहुत जल्दी उठकर सबके लिए नाश्ता बनाकर चली जाती.

दोपहर का खाना सभी बाहर खाते, रात का खाना सरिता बना ही लेती.

कनिका अक्सर ही रात को लेट आती तो बस आकर खाना खाकर सो जाती.

सुबह उसे अक्सर नीरज ही उठाता कॉलेज जाते समय.

सन्डे को नीरज कनिका को घुमाने ले जाता, कनिका के पापा की मोटरसाइकिल पर.

अब नीरज और कनिका नजदीक आने लग गये थे और एक दूसरे को पसंद भी करने लगे थे.

पर यह बात सरिता नहीं जानती थी.नीरज से चुदाई के बाद सरिता ने डॉक्टर साहब को चुदाई के लिए मना किया.

डॉक्टर साहब उस पर दबाव बनाने लगे तो सरिता ने उनका अस्पताल छोड़ प्रिया था और दूसरा अस्पताल ज्वाइन कर लिया था.

सरिता और नीरज को शाम को समय मिलता.सरिता जल्दी से रात का खाना बना लेती और नीरज के साथ समय बिताती.

दोनों अक्सर शाम को साथ नहाते और सेक्स करते.कई बार तो नीरज पीछे पड़ जाता कि बिना कपड़ों के ही खाना बनाओ.

ऐसी स्थिति में किचन में स्लैब के ऊपर टांग रखकर नीरज उसकी चुदाई करता.

सरिता चुदाई के लिए कभी मना नहीं करती.पर अब उनको डर था कनिका का.

एक दिन मोटरसाइकिल पर घुमते हुए कनिका नीरज से ज्यादा ही नजदीक होकर चिपट कर बैठ गयी.उसके मम्मे नीरज की पीठ पर चिपके हुए थे.

कनिका ने अपने लम्बे नाख़ून नीरज की छाती पर शर्ट के अंदर कर लिए.

नीरज ने मुंह घुमाया तो कनिका ने उसे चूम लिया.

नीरज ने एक एकांत देखकर बाइक रोकी तो कनिका ने उसे दोबारा चूमा और कहा- आई लव यू!नीरज ने उसका हाथ थामा और कहा- तुमने अपनी मम्मी से पूछा है?कनिका बोली- अभी नहीं पूछा, तुम हाँ कहोगे तब पूछूंगी. पर एक बात स्पष्ट है कि मेरे अलावा उनका कोई नहीं. तो शादी के बाद मैं उनका ध्यान पूरा रखूंगी.

नीरज ने उसका हाथ दबाते हुए कहा- यह तो बहुत अच्छी बात है. मैं भी उन्हें हमेश खुश देखना चाहूँगा.

दोनों वापिस आ गये.

अगले दिन शनिवार था.नीरज और कनिका को कहीं नहीं जाना था.

सरिता अपने रूटीन से हॉस्पिटल चली गयी.

नीरज नहा रहा था.अचानक कनिका बिना आवाज किये ऊपर आ गयी और बाथरूम का दरवाजा खोल लिया.अंदर नीरज नंग धडंग नहा रहा था.

कनिका सॉरी बोलकर जाने लगी तो नीरज ने हँसते हुए अंदर खींच लिया और शावर के नीचे चिपटा लिया अपने से.

अब दो जवान जिस्म जब मिले तो पानी में आग और भड़क गयी.पहले तो होंठ मिले फिर जिस्म.

कनिका की फ्रॉक कब उतर गयी और कब उसके मम्मे नीरज चूसने लगा, कब कनिका के हाथ में नीरज का लंड आ गया, कब वो लंड कनिका के मुंह में पहुंचा, ये सब पता ही नहीं चला.

होश तो तब आया जब नीरज ने वहीँ शावर के नीचे कनिका की चूत में लंड पेलना चाहा.कनिका बहुत कसमसाई पर नीरज ने लंड चूत के छेद से नहीं हटाया.

अब कनिका भी बिफर गयी.दोनों बेड पर आ गए और पहली चुदाई की रस्म अच्छे से अदा करने के लिए.

कनिका पैर चौड़ा कर लेट गयी.नीरज ने अपनी जीभ घुसा दी उसकी चूत में.कनिका की चूत पर हल्के हल्के रेशमी बाल थे.वह जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी.

नीरज ऊपर हुआ और उसके मम्मे लपक लिए और उन्हें चूसने लगा.

कनिका ने हाथ नीचे किया तो उसके हाथ में नीरज का तना हुआ लंड आ गया.

नीरज ने भी टाइम वेस्ट नहीं किया और ऊपर होकर अपना लंड कनिका की चूत पर रख प्रिया.

कनिका का यह पहला मौक़ा था.वो लंड की मोटाई से घबराई.

नीरज ने पास रखी क्रीम अपनी लंड और कनिका की फांकों पर लगाई और आहिस्ता से लंड सरका प्रिया मखमली फांकों के बीच.

कनिका की चीख निकल गयी.उसने नीरज को कस के जकड़ लिया.

नीरज ने अब पूरा लंड पेल प्रिया अंदर.कनिका के आंसू निकल आये.

नीरज लंड बाहर निकालने को हुआ तो कनिका ने उसे कस के जकड़ लिया.

अब तो दोनों की रेलम पेल शुरू हो गयी.कनिका भी चुदाई में नीरज का पूरा साथ दे रही थी.

कसी चूत थी, नीरज का भी होने को था.उसने बाहर निकालना चाहा पर कनिका की पकड़ मजबूत थी.नीरज ने अपने गाढ़े वीर्य से कनिका की चूत भर दी और निढाल होकर कनिका के बगल में लेट गया.

बेड शीट पर खून के कतरे दिख रहे थे.कनिका के चेहरे पर मुस्कान थी और साथ में डर था इस अनप्लांड सेक्स के अंजाम का.

नीरज ने उसे समझाया कि जो कुछ हुआ मेरी जल्दबाजी से हुआ.मैं तुमसे शादी के लिए तैयार हूँ, पर पहले पढ़ाई पूरी कर लूं. आज के सेक्स के लिए अभी दवाई ला देता हूँ.

अब तो कनिका और उसका सेक्स हर शनिवार को होने लगा.

याह आंटी चुदाई कहानी कैसी लग रही है आपको?कमेन्ट करके बताएंsupport@mohakkisse.com

आंटी चुदाई कहानी का अगला भाग:चुदाई एक्सप्रेस- 3

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

चुदाई एक्सप्रेस

कुल भाग: 3
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

नाम में क्या रखा है-2
पड़ोसी

नाम में क्या रखा है-2

प्रेषक : होलकर

13 मिनट 669
मेरी चालू बीवी-82
पड़ोसी

मेरी चालू बीवी-82

सम्पादक – इमरान

7 मिनट 383
प्यासी पड़ोसन आन्टी की चूत चोदी
पड़ोसी

प्यासी पड़ोसन आन्टी की चूत चोदी

हेलो आल भाभी, गर्ल और हॉट आंटी. आई एम रवि, 23 इयर्स ओल्ड फ्रॉम लखनऊ!मैं अपनी लाइफ की फर्स्ट सेक्स दास्ताँ लिखने जा रहा हूँ जिसमें मैंने मेरे पड़ोस की आंटी को चोदा।मैं इस साइट का बड़ा प्रशंसक हूँ… साथ ही मुझे शादीशुदा औरतें बहुत पसन्द हैं।

11 मिनट 994

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
k

kg4galz

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

युवराज सिंह 1

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।