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अनोखे चूत लंड की अनोखी दुनिया-2

दीक्षा

24 Jun 2024 को प्रकाशित

अनोखे चूत लंड की अनोखी दुनिया-2
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रमा जब विकास को उठाने गई तो उसकी पहली ही नजर… विकास के तने हुए लंड पर पड़ी, उसे लगा कि विकास ने पक्का कोई बोतल निक्कर में छुपा ली होगी.उसे गुस्सा आ गया और उसने निक्कर को नीचे खींचा उसके मुँह से चीख निकलते निकलते रह गई।इतना बड़ा लंड… ऐसे मतवाले लंड को देख वो भी खुद को रोक न सकी और हाथ आगे बड़ा उसने लंड को पकड़ लिया।

गर्म और सुडौल लंड को छूते ही उसके पूरे बदन में आग लग गई, वैसे भी उसे रोज राजेश की लुल्ली लेनी पड़ती थी, राजेश तो 4-5 मिनट में झड़ जाता और संतुष्ट होकर सो जाता पर रमा की जवानी तड़पती रहती. उसका एक मन तो हुआ कि कपड़े खोले और चढ़ जाए इस विशाल लौड़े पर और बुझा ले अपनी आग!

पर घर में सभी थे तो उसने खुद को रोक लिया.

उसके मन में एक तरकीब आई, उसने इस राज़ को राज़ ही रखने की सोची ताकि मौका मिलते ही वो अपनी आग बुझा सके।उसे लग रहा था जैसे आज तक वो इस खजाने को जानबूझ कर लुटा रही थी।पर इस खजाने को पाने के लिए विकास को वश में करना जरूरी था. उसने विकास को नहीं जगाया और रसोई में जाकर सारा काम खुद कर लिया। पर उसके पूरे बदन में आग लगी हुई थी उसकी चूत एक दमदार लंड के तड़प रही थी।

काम करके रमा बेडरूम में पहुंची तो मोटे थुलथुले राजेश को देख कर उसका मन बैठ गया पर वो बेचारी करती क्या… उसकी फ़ुद्दी इस टाइम जल रही थी, उसे एक लंड चाहिए था.रमा को पता था कि राजेश तो चुदाई करेगा नहीं, बोलेगा ‘थका हुआ हूँ’, इसलिए उसने दिमाग से काम लिया उसने जल्दी से नाइटी अलमारी के पीछे फ़ेंक दी और कपड़े उतार कर नंगी घूमने लगीकमरे में!वैसे रमा थी पूरी चुदक्कड़ 36डी की ये बड़ी बड़ी चुची और 37″ की गांड किसी भी मर्द को उत्तेजित करने के लिए काफी थे. ऊपर आज की टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी जैसी शकल!

परन्तु राजेश पर तो जैसे इनका कोई असर ही नहीं हो रहा था।‘क्या हुआ? नंगी क्यों घूम रही हो?’‘अजी नाइटी नहीं मिल रही… आप मदद कर दो न!’ रमा ने अपने होंठों को काटते हुए कहा.‘भाई नहीं मिल रही तो नंगी ही सो जाओ… वैसे भी यहाँ कौन आने वाला है? मुझे तो ज़ोरों की नींद आ रही है मुझे मत तंग करो!’

‘कैसा छक्का है ये!’ रमा ने मन में सोचा और नंगी ही राजेश के पास लेट गई उसने पीठ राजेश की तरफ मोड़ ली और जानबूझ कर अपनी गांड उसके लंड पर रगड़ने लगी इस आस में कि शायद पत्थर पिघल जाये!पर पत्थर तो पत्थर होता है, राजेश ने उसे एक तरफ झटक प्रिया और बेड के कोने में होके सो गया।

रमा बेचारी आग में तड़पती रही.

रमा को ‘गुरूजी’ की याद आ गई. एक गुरु जी थे जो दिन में दसियों औरतों को संतान प्राप्ति करवाते थे और एक राजेश था जिससे अपनी बीवी की भी चुदाई नहीं होती थी।गुरु जी पर राजेश की माँ की असीम आस्था थी, मरते मरते भी बोल गई थी कि चाहे कुछ भी हो जाये गुरु जी की बात मत टालना, जैसा वो कहें वैसा ही करना! और रमा को गुरु जी के पास जरूर ले जाना दर्शनों के लिए!

तब विकास कोई एक साल का था, माँ के मरने के कोई 3 महीने बाद गुरु जी चंडीगढ़ आये और पास की पहाड़ियों पर अपने आश्रम में ठहरे तो संतान प्राप्ति के लिए राजेश रमा को गुरूजी के आश्रम में ले गया था। रमा को अच्छे से वो दिन याद था उसने नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी। किसी परी जैसी लग रही थी।

पर गुरु जी के आश्रम पर जब उसने उनकी सेविकाएं देखी थी तो उसे लगा कि जैसे वो अप्सराएं हो एक से एक सुन्दर।राजेश उसे सुबह के 5 बजे ही आश्रम ले आया था ताकि भीड़ न हो पर इतनी सुबह भी उनका नंबर बीसवां था।

रमा डर रही थी कि कहीं गुरु जी ये न कह दें कि वो कभी माँ नहीं बन सकती।

कोई 7 बजे उनका नंबर लगा, सेविका उन्हें गुरु जी के कमरे तक ले गई और दरवाजे से अंदर जाने का इशारा किया तथा उनके अंदर जाते ही उसने दरवाजा बाहर से बंद कर प्रिया।

गुरु जी 50 वर्ष के रहे होंगे पर चेहरे पर ऐसा तेज था कि 40 से अधिक नहीं लगते थे, गोरा अंग्रेजों जैसा रंग, बेहद कसरती बंदन, पहलवानों सी मजबूत बाहें…रमा ने अंदाजा लगाया कि गुरु जी का कद कम से कम साढ़े 6 फुट तो होगा।न जाने क्यों उसके मन में एक विचार कौंध गया 6.5 फुट और मैं 5 फुट… और वो सिहर उठी।

गुरु जी एक ऊँचे आसन पर विराजमान थे, रमा को देखते ही बोले- बेटी रमा, अहिल्या से भी सुन्दर हो!रमा का तो जैसे शर्म से गड़ ही गई।

फिर बिना कुछ पूछे राजेश से ‘तुम्हारी माता जी गुज़र गईं.. अहह बड़ी भक्त थीं वो मेरी!’ गुरूजी ने एक आह भरते हुए कहा।‘गुरु जी आपको कैसे पता चला कि माँ गुज़र गई?’ राजेश ने हैरानी से पूछा.‘बेटा, हमारी दिव्य आँख से कुछ छिपा नहीं रहता… जैसे हमें यह भी पता है कि यह नन्हा बालक जो तुम्हारी पत्नी की गोद में है, इसे तुमने गोद लिया है.’ गुरु जी ने मुस्कुराते हुए कहा.

‘गुरु जी आप तो भगवान हैं, सब जानते हैं, बताइये न संतान सुख हमारे दापंत्य जीवन में है या नहीं?’ राजेश कहते कहते रो पड़ा था।

‘भगवान केवल एक है, हम तो बस उपासक हैं उनके, बच्चा दोष तुम्हारी बीवी में है इसने पिछले जन्म में अपनी खूबसूरती के घमंड में एक ब्राह्मण का न्योता ठुकरा प्रिया था, तो उसे ब्राह्मण पुत्र ने इसे श्राप दे प्रिया था.’‘गुरूजी, यह दोष दूर तो हो जायेगा न?’ राजेश ने पूछा.

‘बच्चा ऐसा कोई कार्य नहीं जो हम न कर सकें… बस दो दिन की कामदेव की नेहा करनी होगी!’ बाबा जी रमा को ऊपर से नीचे तक निहारते हुए बोले।‘गुरु जी नेहा कब शुरू करनी होगी?’ राजेश ने पूछा।‘बेटा इस नेहा का योग अभी ही है, अगर 1 घंटे में न शुरू की तो 1 साल इंतज़ार करना पड़ेगा.’‘तो गुरु जी हम आश्रम में ही ठहर जाते हैं.’ राजेश ने कहा।

‘नहीं बच्चा, इस नेहा में तुम शामिल नहीं हो सकते, हमें पता है तुम अपनी पत्नी से बेहद प्यार करते हो और इतनी सुदंर पत्नी से कौन प्यार नहीं करेगा… परंतु यदि तुम साथ रहे तो श्राप नहीं टूटेगा.. तुम घर चले जाओ, हम रमा को नेहा के बाद भिजवा देंगे.’ गुरु जी ने राजेश के सर पर हाथ फेरा और उसे जाने के लिए कहा.और राजेश किसी बुद्धू की तरह बाहर चला गया, रमा अकेली रह गई।

राजेश के चले जाने के बाद गुरूजी सेविका को फ़ोन करने के उठे तो उनका 7 फुट का विशाल काय शरीर देखके रमा सिहर उठी।गुरु जी ने सेविका को फ़ोन किया और कहा कि रमा को कामदेव की नेहा के लिए तयार करो।

एक सेविका आई और रमा को बाहर ले गई, उसने रमा को चन्दन और दूध से ने नहलाया और एक पीले रंग की साड़ी बिना ब्लाउज और पेटीकोट के उसके तन पर लपेट दी।फिर वो उसे आश्रम के दूसरे कोने में ले गई जहाँ केवल एक ही कमरा था और काफी बड़ा लग रहा रहा था।

सेविका ने उसे अंदर जाने को कहा.रमा उलझन से उसे देखने लगी तो वह बोली- डरो मत बेटी, गुरु जी पर पूर्ण विश्वास रखो और इस पवित्र कमरे में तुम्हें अकेले ही जाना होगा!रमा ने उत्तेजना और डर से भरे मन को लेकर कमरे में प्रवेश किया, गुरु जी इस समय शिव की उपासना कर रहे थे और रमा को पास ही पड़े एक बड़े से टेबल पर बैठने का इशारा किया.

रमा इस समय बेहद डर रही रही थी, चुपचाप टेबल पर बैठ गई, टेबल के पास ही एक स्टूल रखा था जिस पर एक कमंडल में जैतून का तेल रखा हुआ था. रमा ने तेल को खुशबू से पहचान लिया.कोई 15 मिनट और उपासना करने के बाद गुरूजी रमा के पास आ गए और बोले- बेटी, इस आसान पर उल्टा लेट जाओ हम नेहा शुरू करने से पहले तुम्हें सब बुरी आत्माओं से शुद्ध करेंगें.रमा टेबल पर अपनी मोटी मोटी छातियों के बल पर लेट गई, उसका दिल इस समय इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि वो सांस भी ढंग से नहीं ले पा रही थी।

‘बेटी हम तुम्हारी शुद्धि करने जा रहे हैं इस पवित्र जैतून के तेल को तुम्हारे बदन पर लगा कर थोड़ी ऊपर उठो ताकि इस अपवित्र वस्त्र को हम हटा सकें!’ गुरु जी ने नर्म आवाज़ में कहा. रमा का एक दिल कह रहा था कुछ अनहोनी होने वाली है. भाग जा! पर संतान प्राप्ति की लालच ने उसे गुरु जी की बात मानने को मजबूर कर प्रिया।

वो ऊपर उठी और गुरु जी ने एक झटके में ही साड़ी को उसके बदन से अलग कर प्रिया।रमा तो जैसे शर्म के सागर में डूब गई।‘अति सुन्दर, बेटी तुम्हें तो कामदेव ने रचा है, डरो मत, शुद्धि में ज्यादा समय नहीं लगेगा, तुच्छ दुनिया के सब विचारों को मन बाहर निकाल दो, बस उसका उत्तर दो जो हम पूछते हैं.’ गुरूजी ने थोड़े से तेल को रमा के कन्धों पर उड़ेलते हुए कहा।‘जी गुरु जी!’ रमा बस यह ही कह पाई.

गुरु जी ने उसके कन्धों पर अपने बड़े और गर्म हाथ रखे तो वो बुरी तरह से कांप गई।‘बेटी क्या तुम्हारे इन गोरे और सुन्दर कन्धों को शादी से पहले किसी ने छुआ था?’ गुरु जी ने कन्धों की हलके हाथों से मालिश करते हुए पूछा.

रमा अपनी तारीफ से खुश भी हुई और डरी भी एक संशय उसके मन में आया कि यह कोई नेहा है भी या नहीं, पर वो एक बच्चा चाहती थी ताकि कोई उसे बाँझ न कह सके तो उसने अच्छा बुरा सोचना बंद कर प्रिया, ‘नहीं गुरु जी’ उसने जवाब प्रिया।‘तुम्हारा पति तुम्हारे कन्धों की मालिश करता है या नहीं?’‘नहीं गुरु जी’ रमा ने झट से जवाब प्रिया.

‘हम्म गधा है वो जो ऐसी रूपवती स्त्री की सेवा नहीं करता!’गुरु जी के हाथ अब रमा की पीठ की मालिश कर रहे थे, गुरु जी मालिश में बेहद निपुण थे रमा को लग रहा था जैसे उसकी जन्मों की थकान मिट रही हो।

‘तुम्हारा वो पति तुम्हारी इस गोरी और मुलायम पीठ को तो चूमता होगा?’‘नहीं गुरु जी!’ बेचारी रमा और क्या कहती.‘बड़ा नाकारा मर्द है… तुम्हारी माँ ने तो तुम्हारी सारी जवानी बेकार कर दी!’ गुरु जी अब रमा की पीठ के कोनों की तरफ मालिश कर रहे थे उनके हाथ रमा के अगल बगल से उभरे हुए स्तनों से बस कुछ ही इंच दूर रह गए थे।

गुरु जी ने अपनी हथेली में तेल उड़ेला और रमा की पीठ के दाहिनी तरफ मालिश करते हुए बोले- रमा, सच कहता हूँ, अगर मैं तुम्हारी माँ होता तो किसी जानदार मर्द से तुम्हारी शादी करवाता… औरत जितनी खूबसूरत हो उसे उतना जानदार मर्द चाहिए होता है… तुझे अपने माँ बाप पर गुस्सा नहीं आता?गुरूजी ने रमा की बगल से बाहर उभरे हुए स्तन को हल्के से छूते हुए पूछा।

गुरु जी के हाथ के हल्के से स्पर्श से रमा उत्तेजित हो उठी थी, कुछ बोल नहीं पाई। रमा को लग रहा था कि गुरु जी ने अब चुची दबाई कि अब दबाई, पर वो तो उसके ऊपरी हिस्से को छोड़, पाँव की तरफ चले गए और टांगों की मालिश करने लगे।

रमा कुछ शांत हुई तो बोली- गुरु जी, मेरे माँ बाप को लगा लड़का अमीर है, ठीक होगा, बाकी सब कौन सोचता है.

गुरूजी के हाथ अब रमा के घुटनों के ऊपर आ चुके थे और रमा की सुडौल जांघों की मालिश कर रहे थे.रमा फिर उत्तेजित होने लगी और उसकी साँस फिर तेज़ होने लगी पर गुरूजी पूरी तल्लीनता से मालिश करने में लगे थे.रमा उत्तेजित थी पर उसका पूरा बदन एक नई ताकत का एहसास कर रहा था।

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हुई चौड़ी चने के खेत में -4

‘रमा तू देखने में तो अप्सराओं से भी सुन्दर और कामुक है, शादी से पहले तेरा कोई प्रेमी तो ज़रूर रहा होगा?’ गुरूजी ने रमा के मांसल मोटे पुट्ठों को सहलाते हुए पूछा।‘था गुरु जी.. अः अह’गुरु जी का हाथ कुछ गहराई में उतरा पर तभी बाहर आ गया, रमा का सारा बदन गर्म हो रहा था वो समझ नहीं पा रही थी कि वो इतनी कामोत्तेजना क्यों महसूस कर रही है, अब बस वो यही चाहती थी की गुरूजी मालिश करते रहें और उसके हर एक अंग की करें।

‘उसके साथ तुमने कभी सम्भोग नहीं किया?’ गुरु जी ने उसकी गांड को ज़ोर से दबाते हुए पूछा.‘उउउ माँ… नहीं गुरु जी!’‘तुम्हें तो सब मर्द ही नपुंसक मिले हैं!’ गुरु जी ने अपना पूरा हाथ रमा की गांड की दरार में डालते हुए कहा।

फिर आगे बोले- रमा, अब सीधी हो जाओ और पीठ के बल लेट जाओ।पर रमा शर्म के मारे कुछ न कर सकी, वो वैसे ही पड़ी रही, गुरु जी उसकी दुविधा समझ रहे थे, उन्होंने बड़ी नाजुकता से रमा को पकड़ा और पलट प्रिया. अब रमा की गोल गोल और बड़ी बड़ी छातियाँ गुरु जी के सामने एकदम नंगी थीं और रमा शर्म से मरी जा रही थी।

‘अति सुंदर… अति सुन्दर, मैंने तुम्हें सही ही अहिल्या कहा था.’रमा को अहिल्या की कहानी नहीं पता थी इसलिए उत्सुकतावश उसने पूछा- गुरूजी, ये अहिल्या कौन थीं?गुरु जी ने रमा के कंधों की मालिश करना शुरू की बोले- अहिल्या कई हज़ार साल पहले हुई और उस युग की सबसे सुन्दर स्त्री थी, गोरा रंग, सुडौल और बेल के फल जैसे बड़े स्तन, पतली एक ही हाथ में समा जाय ऐसी कमर बड़े उभरे हुए कूल्हे… उसका रूप देख एक महाऋषि उस आक्सत हो गए. हालांकि वो उस समय काफी बूढ़े हो चुके थे पर उन्होंने अहिल्या के पिता से उसका हाथ मांग लिया. और क्योंकि ऋषि काफी गुस्से वाले थे, अहिल्या के पिता ने उसकी शादी बूढ़े ऋषि से करवा दी.

ऋषि सुबह ही तपस्या के लिए निकल जाते और रात को लौटते बेचारी अहिल्या काम वासना में तड़पती रहती.गुरुजी ने रमा को वो पूरी कहानी सुनाई जिसमें अहिल्या के साथ धोखे से सम्भोग का वर्णन था.

गुरु जी ने कहानी ख़त्म की तो उसका ध्यान गुरूजी के हाथों पर गया जो इस समय उसकी कड़ी हो चुकी चूचियों पर थे।

गुरु जी ने उसकी चूचियाँ छोड़ दी और कहा- शुद्धि कार्य पूरा हो चुका है, अब रमा का प्रसाद ग्रहण करने का समय है। पर यह प्रसाद केवल आँखें बंद करके ही लिया जा सकता है।

गुरु जी ने रमा की आँखों पर पट्टी बांध दी और उसे घुटनों के बल बैठने को कहा. किसी लकड़ी की चीज़ के सरकाने की आवाज़ हुई और कुछ देर बाद गुरूजी ने रमा को अपने हाथ आगे करने को कहा.रमा को लगा कि गुरूजी उसके बिल्कुल पास बैठे हैं.‘रमा प्रसाद खोज कर तुम्हें खुद ही प्राप्त करना होगा, तभी ये नेहा सफल हो पायेगी.’

रमा को लगा जैसे गुरूजी की आवाज़ में दबी हुई हँसी मिली हुई है, आँखों में पट्टी बंधी होने के कारण रमा इधर उधर हाथ मारने लगी. कुछ देर इधर उधर हाथ मारने के बाद उसका हाथ एक गर्म और नर्म चीज़ से टकराया, रमा ने उस चीज़ को टटोलने की कोशिश की ताकि उसका कोई सिरा उसके हाथ लग सके, आखिर काफी मशक्कत के बाद रमा उस लंबी मोटी और गर्म चीज़ को पकड़ने में कामयाब हुई और डर के मारे लगभग चीख ही पड़ी- सांप… सांप!और झटक कर उसने हाथ पीछे कर लिया.

‘डर गई रमा… हमें तो लगा था तुम बहादुर हो… इस सांप को अपने वश में कर लोगी!’‘गुरूजी, सांप है काट लेगा तो?’ रमा ने कांपती आवाज़ में कहा।‘अरे रमा, तुम बेहद भोली हो, ये हमारा पाला हुआ सांप है, नहीं काटेगा… नेहा के लिए सांप का आशीर्वाद बेहद ज़रूरी है, इसके लिए तुम्हें इससे खुश करना बेहद ज़रूरी है तभी संतान प्राप्ति हो सकेगी… कर सकोगी इसे खुश?’‘जी गुरूजी…’ रमा ने डरते डरते कहा और आगे बढ़ के दोबारा सांप को पकड़ लिया.

‘अब इसे चूमो, हम इसका मुंड तुम तक लेके आते हैं, तुम चूम लेना.. अपने होंठ आगे करो और चूमो’ गुरूजी ने आदेश देते हुए कहा।रमा जिसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, आगे झुकी और सांप के मुख को चूम लिया.

उसके चूमते ही सांप में हल्की सी हरकत हुई ‘उई माँ काटता है…’ रमा चिल्ला उठी.‘हाहा… रमा तुम बेवजह डरती हो, ये तो हमारे साँप का आशीर्वाद था… तुमने आशीर्वाद पा लिया है अब तुम अपनी ज़ुबान निकालो और इसे चाटो!’

रमा के तो होश उड़ गए और वो जैसे पत्थर की बन गई, बिल्कुल हिल डुल नहीं पा रही थी, गुरूजी ने उसके हाथों को पकड़ा और सांप को रमा के हाथों में दे प्रिया- रमा, तुम संतान चाहती हो या नहीं?‘चाहती हूँ गुरूजी!’‘फिर वैसा ही करो जैसा हम कहते हैं, मुहूर्त का समय निकला जा रहा है… चलो चाटो इसे!’

रमा जिसे अब शक होने लगा था की जो चीज़ उसके हाथों में है वो सांप है भी है या नहीं… चीज़ को अपने हाथ ऊपर नीचे कर टटोलने लगी निचले हिस्से पर पहुंची तो उसे सांप के मुंह जैसा कुछ नहीं महसूस हुआ बल्कि उसे लगा की वो एक संतरे जितने बड़े लंड मुंड को सहला रहा रही है.अचानक उसके मन में पिछली सारी बातें घूम गई ‘हाय राम इतना बड़ा लौड़ा’ उसने मन में सोचा और उसका दिल फिर रेलगाड़ी की तरह धड़कने लगा।

उसकी चूत में जैसे एक टीस सी उठी, आज पहली बार वो एक असली मर्द का लौड़ा छू रही थी। रमा एक अजीब सी उत्सुकता में बह गई, उसके मन में अजीब सी बातें आने लगी ‘हाय कैसे लूँगी इस लंड को चूत में, जब 7 फुट के बाबा जी मेरे ऊपर चढ़ेंगे तो क्या होगा?’ वो लंड को पकड़े पकड़े ही विचारों में खो गई.

‘रमा… रमा क्या हुआ? किन विचारों में खो गई?’ बाबा जी अपने शिथिल लेकिन भारी और बड़े लंड से रमा के चेहरे पर एक चपत मारते हुए पूछा.‘गुरु जी, जिस चीज़ का मैंने अभी चुम्बन लिया है, वो सांप नहीं है न?’‘ह्म्म्म आखिर तुम जान ही गई तो तुम ही बताओ ये क्या है?’‘गुरूजी, ये आपका लिंग है.’‘तुम्हें अच्छा लगा? तुम्हारे पति से अच्छा है या बुरा?’‘गुरूजी उनका तो किसी छोटे बच्चे की लुल्ली जैसा है.’

‘अच्छा और हमारा लिंग कैसा है?’‘आपका तो बहुत बड़ा है.’‘तुम देखना चाहोगी?’‘हाँ गुरु जी!’‘हम तुम्हे अपने लिंग के दर्शन करवाएंगे पर उससे पहले तुम्हें इससे प्यार करना होगा… करोगी न रमा?’

रमा जो घुटनों के बल बैठी थी, कुछ आगे खिसकी, गुरु जी न उसके चेहरे को पकड़ अपने लिंग के बिलकुल पास सेट कर प्रिया ताकि रमा उसे चाट सके, रमा ने अपनी जीभ निकाली और लिंग को आइसक्रीम की तरह चाटने लगी, नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे, एक गर्म, डंडे जितने बड़े लंड को वो चाटती जा रही थी।‘ओह… रमा तुम तो कमाल चाटती हो आह!’ गुरु जी सिसकारियाँ लेने लगे.

गुरु जी का शिथिल लंड अब अकड़ने लगा था क्योंकि रमा ने लिंग को दोनों हाथों से पकड़ रखा था, उसे लगा कि लिंग के उठान से वो भी कहीं ऊपर न उठ जाए. कुछ सेकण्ड में गुरु जी लंड पूरा तन चुका था।‘रमा, लिंग दर्शनों के लिए तैयार है, खोलो अपनी आँखों की पट्टी!’ गुरूजी ने मुस्कुराते हुए कहा.

रमा ने लिंग को छोड़ प्रिया और उसने अपनी आँखों की पट्टी खोली, 120 डिग्री पर तने हुए एक किलो की लौकी जितने मोटे लंड को देख रमा का मुंह खुला का खुला रह गया।‘रमा तुम हमारे लिंग का माप नहीं लोगी? ये लो इंचीटेप और मापो इसे, आखिर तुम्हें पता होना चाहिए कि जो लिंग तुम्हारी योनि में जाने वाला है उसका आकार क्या है’ कहते हुए गुरु जी ने रमा को इंचीटेप थमा प्रिया।

नापने का मन तो रमा का भी कर ही रहा था, उसने झट से इंचीटेप उठाया और लिंग के सिरे पर रख इंचीटेप को लंडमुण्ड के आखरी सिरे तक खोला… उसे 12 इंच पढ़कर विश्वास नहीं हुआ, उसने दोबारा माप लिया इस बार भी 12 इंच…’12 इंच मतलब पूरा एक फुट!’ रमा ने मन में सोचा.

‘रमा तो कितनी लंबाई है हमारे लंड की?’‘गुरु जी 12 इंच’‘ठीक अब मोटाई का नाप लो’‘हाय इतनी तो मेरी बाजु भी मोटी नहीं है.’‘हा हा हा, रमा ये असली मर्द का लंड है… पर आज तुम्हें देख ये कुछ अधिक ही तन गया है अब मुझसे और सब्र नहीं होता अब तुम्हारा चोदन करना ही होगा… तुम तैयार हो न?’‘जी गुरूजी आप जो करेंगे, वही ईश्वर की कृपा होगी.’

गुरूजी ने रमा को गोद में उठा लिया और उसे ले जा कर फिर से टेबल पर लिटा प्रिया, और रमा की बाहें खोली और टेबल के कोनों से एक रस्सी की मदद से बांध दीं।‘गुरूजी ये आप क्या कर रहे हैं… मुझे डर लग रहा है.’ रमा बोली.‘डरो नहीं रमा, अभी तो आखिरी प्रसाद ग्रहण करना है.’ गुरु जी ने रमा की टांगें खोली और खुद उसकी टांगों के बीच आते हुए बोले- रमा, मेरी तो बड़ी इच्छा थी तुम्हारी इस चूत का रसपान करूँ पर ये लिंग में लगी आग पहले शांत करनी होगी!

रमा कुछ नहीं बोली बस लेटी रही… उसके हाथ बंधे थे और वो कुछ कर भी नहीं सकती थी. गुरुजी के लौड़े को देख उसे डर लग रहा था लेकिन उसके अंदर की प्यास उसके डर से कहीं ज्यादा थी. गुरु जी थे कि अपने मूसल लिंग को उसकी चूत के होंठों पर रगड़े जा रहे थे… रमा का पूरा बदन मस्ती से काँपने लगा.

‘रमा क्या हुआ, तुम काँप क्यों रही हो?’ गुरूजी ने भोले बनते हुए कहा.‘आह… गुरूजी और सहन नहीं होता!’ रमा ने आहें भरते हुए कहा.गुरूजी इसी के तो इंतज़ार में थे कि रमा कोई इशारा करे, यहाँ तो रमा ने न्योता ही दे प्रिया था, उन्होंने आव देखा न ताव… झट से रमा की पतली कमर पकड़ी और ज़ोर का धक्का मारा उनके लंड का मुंड सरसराता रमा की योनि में घुस गया।

रमा दर्द से बिलबिला उठी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आई मर गई… गुरूजी क्या कर प्रिया… इस दर्द से मर जाऊँगी मैं!‘रमा तुम भी कमाल करती हो… चोदन से कोई मरता है क्या… फिर तुम जैसी अप्सरा तो इससे भी बड़ा लौड़ा संभाल सकती!’ गुरूजी ने मुस्कुराते हुए कहा और अपने लिंग को बाहर निकाल लिया और फिर रमा की योनि पर सेट कर प्रिया.

रमा के लिए पहला वार ही जानलेवा था, गुरूजी को आगे की तैयारी करते देख वो ज़ोर से रोने लगी- गुरूजी, भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, मैं नहीं ले पाऊँगी इतना बड़ा… उई माँ मर गई! गुरूजी प्लीज निकालिये न बाहर!’ रमा ने छटपटाते हुए कहा.

‘रमा तुम तो बिलकुल बच्ची हो… देखो तो तुम्हारी इस छुइमुई योनि तो बिलकुल भीगी पड़ी है… और अपनी चूचियों को तो देख, कैसी अकड़ गई हैं.’ बाबाजी ने झुक के रमा की दाईं चूची को मुंह में ले लिया और चूसने लगे और दूसरे मम्मे को हल्के हल्के दबाने लगे।

रमा ने ऐसा आनन्द का अनुभव कभी नहीं किया था, रमा ने आँखें बंद कर ली और खुद को पूरी तरह से बाबा जी के हवाले कर प्रिया।बाबा जी ने मौका देख कर रमा के स्तनों को मजबूती से पकड़ा और ज़ोर से धक्का लगाया और उनका लिंग फचक की आवाज़ करता हुआ रमा की बच्चेदानी से जा टकराया… रमा दर्द से निढाल सी ही हो गई थी, उसमें इतनी भी ताकत न रह गई थी कि चीख ही पाती…और बाबा जी ने तो जैसे धक्कों की सुपरफास्ट ट्रेन ही चला दी।

उसे एक नरम बिस्तर पर होश आया तो रात हो रही थी, उसे कपड़े पहना दिए गए थे और एक सेविका उसके पाँव दबा रही थी।कुछ देर बाद बाबा जी कमरे में आ गए और रमा के सिरहाने बैठ उसके सर को हल्के हल्के सहलाने लगे।‘रमा तुमने प्रसाद ग्रहण कर लिया है.. तुम्हें संतान प्राप्ति अवश्य होगी.’ वो रमा के सर को सहलाते हुए बोले।

रमा कुछ कह न सकी उसकी आँखों में ख़ुशी और संतुष्टि के आंसू थे।बाबा जी उसकी भावनाओं को समझ गए और उसके कान में धीरे से बोले- पगली हम तीन महीने बाद फिर आएंगे… पर तुम यहाँ से जाते ही अपने पति के साथ एक बार ज़रूर सम्बन्ध बना लेना.. वरना उसे शक हो जायेगा.’

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अर्शदीप कौर

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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