सारिका कंवलउसने चोदने का मन बना लिया, उसने मुझे खड़े होने को कहा और खुद भी खड़ा हो गया, सुधा ने मेरी योनि पर थूक लगा प्रिया।मुझसे अजय ने कहा- तुम मेरे लौड़े पर अपना थूक लगाओ !मैंने लगा प्रिया।सुधा ने नीचे बैठ कर मेरी एक टांग उठा दी। फिर अजय मेरे पास आकर मुझे पकड़ लिया और मैंने उसको।अब सुधा उसका लिंग हाथ से पकड़ कर मेरी योनि पर रगड़ने लगी और फिर उसके लिंग को योनि के छेद पर टिका कर कहा- जोर लगाओ !हल्के से धक्के में ही उसका लिंग ‘चप’ करता हुआ, मेरी योनि में घुस गया और मेरी बच्चेदानी से टकरा गया।मैं सिसकार उठी।मैं एक टांग पर खड़ी थी, दूसरे को सुधा ने उठा कर सहारा प्रिया था और अजय एक हाथ से मेरी एक चूची को दबा रहा था, दूसरे हाथ से मेरे एक चूतड़ को और हमारे मुँह आपस में चिपके हुए थे।कभी हम होंठों को तो कभी जुबान को चूसते और अजय जोर-जोर के धक्के मार कर मुझे चोद रहा था।उधर मेरी सहेली कभी अजय के अंडकोष को सहलाती तो कभी अपनी योनि को।कुछ देर बाद अजय ने मुझे छोड़ प्रिया और नीचे लेट गया। अब मेरी सहेली की बारी थी, उसने अपनी दोनों टाँगें उसके दोनों तरफ फैला कर उसके ऊपर चढ़ गई और मुझसे कहा- थोड़ा थूक उसकी चूत पर मल दो !मैंने उसकी योनि में थूक लगा प्रिया और अजय के लिंग को पकड़ कर उसकी योनि के छेद पर टिका प्रिया।अब उसने अपनी कमर नीचे की तो लिंग ‘सट’ से अन्दर चला गया, सुधा ने धक्के लगाने शुरू कर दिए।कुछ ही देर में वो पूरी ताकत से धक्के लगाने लगी। मैं बगल में लेट गई और देखने लगी कि कैसे उसकी योनि में लिंग अन्दर-बाहर हो रहा है।वो कभी मेरे स्तनों को दबाता या चूसता तो कभी मेरी सहेली के.. कभी मुझे चूमता तो कभी उसको!उसने 2 उंगलियाँ मेरी योनि में घुसा कर अन्दर-बाहर करने लगा। मुझे इससे भी मजा आ रहा था।सुधा ने कहा- मैं अभी तक दो बार झड़ चुकी हूँ।मैंने पूछा- इतनी जल्दी कैसे?तो उसने कहा- मैं जल्दी झड़ जाती हूँ।तभी अजय ने कहा- मैं भी झड़ने वाला हूँ !तब मेरी सहेली जल्दी से नीचे उतर गई, अब वो मेरे ऊपर आ गया, मैंने अपनी टाँगें फैला दीं, उसने बिना देर किए लिंग को मेरी योनि में घुसाया और मुझे चोदने लगा।कुछ ही देर में मैं भी अपनी कमर उचका-उचका कर चुदवाने लगी। इस बीच मैं झड़ गई और मेरे तुरंत बाद वो भी झड़ गया।उसने अपना सफ़ेद चिपचिपा रस मेरे अन्दर छोड़ प्रिया।हम तीनों अब सुस्ताने लगे।कुछ देर बाद हम फिर से चुदाई का खेल खेलने के लिए तैयार हो गए।अजय ने कहा- आज मैं हद से अधिक गन्दी हरकतें और गन्दी बातें करना चाहता हूँ।इस पर मेरी सहेली ने कहा- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी हम दो तुम्हारी रानी हैं आज रात की।मैं थोड़ी असहज सी थी, क्योंकि यह सब मैं पहली बार कर रही थी और मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ होगा।उसने कहा- तुम दोनों बारी-बारी से मेरे लंड के ऊपर पेशाब करो !और वो नीचे लेट गया। मेरी सहेली ने अपने दोनों पैर फैलाए और ठीक उसके लिंग के ऊपर बैठ गई।फिर उसने धीरे-धीरे पेशाब की धार छोड़ दी।मुझे यह बहुत गन्दा लग रहा था, पर अब देर हो चुकी थी, मैंने हद पार कर दी थी, मुझे भी करना पड़ा।उसने उसके पेशाब से अपने लिंग को पूरा भिगा लिया। फिर मेरी बारी आई मैंने भी उसके लिंग पर पेशाब कर प्रिया।इसके बाद अजय ने कहा- अब मेरी बारी है।तब मेरी सहेली लेट गई और मुझसे कहा- मेरी योनि को दोनों हाथों से फैला कर छेद को खोल !तो मैंने वैसा ही क्या।फिर अजय बैठ गया और अपने लिंग को उसकी योनि के पास ले गया और उसके छेद में पेशाब करने लगा।मैं तो ये सब देख कर हैरान थी।तभी उसने मुझसे कहा- चलो अब तुम लेट जाओ।मैंने कहा- नहीं.. मुझे ये पसंद नहीं है !पर मेरी सहेली ने मुझे जबरदस्ती लिटा प्रिया और कहा- जीवन में हर चीज़ का मजा लेना चाहिए!उसने मेरी टाँगें फैला दीं और दो उंगलियों से मेरी योनि को खोल प्रिया।फिर अजय ने पेशाब करना शुरू कर प्रिया, मेरी योनि पर गर्म सा लगा, बिल्कुल वैसे ही जैसे मर्दों का वीर्य लगता है।फिर हम लेट गए और चूसने और चाटने का खेल शुरू कर प्रिया।हमने 4 बजे तक चुदाई की, कभी वो मुझे चोदता तो कभी मेरी सहेली को।पर हर बार उसने अपना रस मेरे अन्दर ही गिराया।इस रात में भी बहुत मजा आया और अगले दिन दोपहर को हमने नदी तट पर जाने की योजना बनाई।फिर अपने-अपने कमरे में जा कर सो गए।मैं अगले दिन उठी और अपने भाई और भाभी से कहा- आज दोपहर में मैं सुधा और अजय के साथ उनको गाँव दिखाने और गाँव के बारे में बताने के लिए जा रही हूँ तो देर हो जाएगी।मैंने तौलिया और बाकी का सामान साथ ले लिया।मैं घर से निकल ही रही थी कि मेरे पति का फोन आया और उन्होंने मुझसे कहा- घर जल्दी आ जाओ.. कुछ काम है !मैंने कहा- ठीक है मैं कल आ जाऊँगी।यह सुन कर मेरा दिल टूट सा गया क्योंकि पिछले 3 रातों से जो हो रहा था, उसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था और ये सब अब खत्म होने वाला था।मेरे पास बस आज भर का समय था। मैंने बहुत सालों के बाद ऐसा सम्भोग किया था और मेरा रोम-रोम इसकी गवाही दे रहा था।मैंने ऐसा अमर के साथ बहुत पहले महसूस किया था और अब लगभग 6 साल बाद ऐसा हुआ था।मुझे याद आ जाता कि कैसे अमर और मैंने 16 दिन तक लगातार सम्भोग किया था और किसी-किसी रोज तो दिन और रात दोनों मिलकर 5 से 7 बार हो जाता था।मैं कभी नहीं भूल सकती वो दिन, जिस दिन अमर और मैंने 24 घंटे में 11 बार सम्भोग किया था।मेरे जिस्म में दर्द था। मेरी योनि में भी दर्द हो रहा था पर जब भी मैं रात के मजे को याद करती, ये दर्द मुझे प्यारा लगने लगता और मैं फिर से इस दर्द को अपने अन्दर महसूस करने को तड़प जाती। मैं जब सोचती इस बारे मेरे अन्दर वासना भड़क उठती। मेरी योनि में नमी आ जाती, चूचुक सख्त हो जाते.. रोयें खड़े हो जाते !बस यही सोचते हुए मैं निकल पड़ी, रास्ते में वो दोनों तैयार खड़े थे।हम नदी की ओर चल पड़े, रास्ते में हम बातें करते जा रहे थे।तभी अजय ने सुधा से पूछा- बताओ.. तुम्हें ऐसा कौन सा दिन अच्छा लगता है जिसको तुम अपने जीवन की सबसे यादगार सेक्स समझती हो !तब मेरी सहेली कुछ सोचने के बाद बोली- मुझे सबसे यादगार दिन वो लगता है जिस दिन मैंने तुम्हारे और तुम्हारे दोस्त के साथ रात भर सेक्स किया था।तब अजय बोला- अच्छा वो दिन.. उसमें ऐसी क्या खास बात थी, इससे पहले भी तो तुम दो और दो से अधिक मर्दों के साथ सेक्स कर चुकी हो !उसने कहा- वो दिन इसलिए यादगार लगता है क्योंकि उस दिन मैं पूरी तरह से संतुस्ट और थक गई थी। दूसरी बात यह कि तुम दो मर्द थे और मैं अकेली फिर भी तुम दोनों थक कर हार गए थे, पर मैंने तुम दोनों का साथ अंत तक प्रिया।ऐसा कह कर वो हँसने लगी।फिर उसने कहा- मुझे तो ऐसा सेक्स पसंद है जिसमें इंसान बुरी तरह से थक के चूर हो जाए !तब अजय ने भी कहा- हाँ.. मुझे भी ऐसा ही पसंद है, पर मुझे सम्भोग से ज्यादा जिस्म के साथ खेलना पसंद है !‘जिस्म के साथ तब तक खेलो जब तक की तुम्हारा जिस्म खुद सेक्स के लिए न तड़पने लगे, फिर सेक्स का मजा ही कुछ और होता है !’बातों-बातों में हम नदी के किनारे पहुँच गए, पर हम ऐसी जगह की तलाश करने लगे, जहाँ कोई नहीं आता हो और हम नदी में नहा भी सकें।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com
अंगूर का मजा किशमिश में-9
सारिका कंवल
26 Jul 2023 को प्रकाशित
कहानी सुनें
ऑडियो प्लेयर (Play Audio)
स्वर: लोड हो रहा है...
0:00
0:00
कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)
श्रृंखला
कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)
अंगूर का मजा किशमिश में
कुल भाग: 12
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।
इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ
Group Sex Story
छिपी अन्तर्वासना की पूर्ति कनाडा में-1
22 वर्ष की होने पर मेरी शादी हो गई, मेरे पति भी एक बड़ी कंपनी के मालिक हैं, तब उनकी उम्र 24 वर्ष थी।मेरे पति का लण्ड भी बहुत तगड़ा है। शादी के एक वर्ष बाद ही मैंने दो जुड़वाँ खूबसूरत बच्चों को जन्म प्रिया।
10 मिनट
838
Group Sex Story
Cinema hall me chudi meri maa-29
Ab Bharti Aunty Maa ki baat maan gayi thi. Tabhi meri Maa ne kaha-
8 मिनट
789
Group Sex Story
Picnic Par Soniya Aur Meri Chudai
Hello friends main apki pyaari Priyanka, ek new sex story ke sath hajir hu.
10 मिनट
1,012
पाठकों की राय
2 टिप्पणियां
श
शिल्प मित्तल
3 months agoबहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।
भ
भोपाली
3 months agoकहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।