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Hindi Sex Story पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,027 बार

अल्हड़ पंजाबन लड़की संग पहला सम्भोग-8

राहुल श्रीवास्तव

09 May 2023 को प्रकाशित

अल्हड़ पंजाबन लड़की संग पहला सम्भोग-8
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काजल मेरे लण्ड की लम्बाई और मोटाई से डर रही थी।

मैंने उसके गाल पर चुम्मी लेते हुए उसके होंठों को चूसने लगा और कहा- नहीं यार अब बिल्कुल दर्द नहीं आएगा.. तुमको भी अब अच्छा लगेगा।

अब आगे..

काजल भी संभल चुकी थी.. मेरे होंठों और चूची की चुसाई ने उसकी दर्द को काफी हद तक गायब कर प्रिया था।

मैंने भी धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरू किया, मैं पूरा लण्ड नहीं निकाल रहा था मुझे डर था कि कहीं वो मना ही ना कर दे।हर धक्के पर उसकी ‘आह’ निकलती ‘आआ आह्ह्ह हहह.. ऊऊऊह्ह्ह ह्ह्ह.. मर गई रे.. उम्हाआआ आआआ.. धीरे से करो दर्द हो रहा..’

काजल भी थोड़ा सहयोग करने लगी थी, उसकी चूत लण्ड के हिसाब से सैट हो चुकी थी, मेरे लण्ड को उसकी चूत जोरदार तरीके से जकड़े हुए थी।

अबकी बार पूरा लण्ड मैंने पूरा बाहर निकाला और एक जोरदार शॉट के साथ एक ही बार में चूत के अन्दर कर प्रिया। काजल की तेज स्वर में चीख निकल पड़ी ‘ऊक्क्.. हाआआम्म.. म्ममम्मीईई..’ काजल फिर से रो दी।अब लण्ड के हर धक्के पर काजल की चीखें लगातार निकलने लगीं।

थोड़ी देर की अन्दर-बाहर में काजल को आराम मिला और वो अब अपने चूतड़ उछालने लगी और गाण्ड को उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।मैंने लण्ड को धीरे-धीरे से अन्दर-बाहर करना चालू कर प्रिया, काजल अब भी थोड़ा कराह रही थी ‘ऊऊ कक्क.. ओह्ह्ह्ह्ह् होकक..’

मेरी शॉट की स्पीड ने काजल की कराह को सिसकारियों में बदल प्रिया, काजल और भी जोर-जोर से आवाज़ निकालने लगी- ऊऊऊह्ह्ह विकास.. उफ्फ्फ अब अच्छा लग रहा है.. विकास और तेजी से करो और जोर-जोर से करो.. ऊक्क्क्क हाआआम्म म्मम्मम्म..’

थोड़ी ही देर में मैंने स्पीड तेज कर दी और काजल का जिस्म अकड़ने लगा.. जो लावा काजल के जिस्म में इतनी देर से रुका हुआ था.. वो अब बाहर आने को तैयार था।

मेरी भी स्पीड बढ़ गई.. मैं हाथों से उसके चूचुक मसलने लगा।कमरे में सिर्फ मादक और कामुक सिसकारियाँ.. कराहट.. का शोर था ‘आआआह्ह ह्ह्ह्ह.. फ़क मी.. फ़क मी..’

जैसे पूरा लण्ड बाहर निकाल कर अन्दर डालता.. तो उसके मुँह से सिसकारी निकल जाती और साथ में चूत से आती ‘फच्च.. फच्च..’ की ध्वनि की आवाज़.. जो माहौल को और रोमाँटिक बना रही थी।

काजल की मदहोशी के आलम में मादक आवाजें निकल रही थीं।

अचानक काजल ने अपने नाख़ून मेरी पीठ में गड़ा दिए और पैरों को कस कर बांध लिया और अपने ऊपर खींच कर मेरे होंठों को अपने मुँह में भर कर दांतों को होंठों पर दबा प्रिया।

वो मछली की तरह छटपटाई.. उसके चूतड़ उछले और वो शांत हो गई, चूत का गर्म कामरस मुझे लण्ड पर महसूस हुआ, चूत की जकड़न भी महसूस हुई.. खुलती और बंद होती चूत.. मेरे लण्ड को महसूस हो रही थी।उसके चेहरे पर पसीने की बूँदें मुंदी हुई आंखें.. गहरी साँसें.. उठते-गिरते उसके चूचे।

काजल अपने चरम को दुबारा पा चुकी थी.. पर मेरा अभी बाकी था।

कुछ पलों में जब उसने आँख खोली और मुस्कुरा कर मुझे चुम्बन करने लगी।मैं समझ गया कि अब वो तैयार है और अब उसको फिर से चोदना शुरू कर सकता हूँ।

मैंने धीरे से लण्ड निकाला और एक साथ चूत में डाल प्रिया और एक समान स्पीड में चोदने लगा और फिर धीरे से उसको लिए लिए पलट गया। मुझे इस बात का ख्याल रखना था कि लण्ड बाहर ना आए।

अब काजल मेरे ऊपर थी।मैंने नीचे से धक्के लगाने शुरू किया, उसकी कमर को पकड़ कर ऊपर-नीचे करने लगा, ‘फच्च.. फच्च. पट पट..’ की आवाज़ मेरा हौसला बढ़ा रही थी।

मेरे धक्के पर काजल की उछलती चूचियाँ.. और ‘उफ्फ्फ्फ़ आह्ह’ का शोर वो फिर से मस्ती करने लगी।काजल फिर चीखने लगी- यस विकास फक मी.. फास्ट आअहहा!

मैं उसकी बहुत ही प्यारी से चूचियों को देख कर पागल हुए जा रहा था.. इसलिए मैंने भी काजल की चूचियों को मुँह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। एक चूची मेरे मुँह में थी और दूसरी चूची के चूचक को मैं हाथ से मसल रहा था।काजल अब मुझे चोद रही थी।

कुछ देर बाद काजल ने कहा- विकास वैसे ही करो.. जैसी पहले कर रहे थे.. उसमें अच्छा लग रहा था।काजल को फिर से लिटा कर मैंने अपना लण्ड एक बार फिर एक ही बार में चूत के अन्दर कर प्रिया।काजल- उफ्फ्फ्फ़ धीरे से.. ओह्ह्ह्ह्ह् आह अच्छा लग रहा है।

मैंने भी जोरदार तरीके से फिर से चोदना चालू कर प्रिया, हर शॉट पर काजल मचल जाती.. चीख पड़ती ‘उफ़ विकास.. आह्ह.. आह यह.. हाँ जोर से.. विकास.. बहुत अच्छा लग रहा है।’

जैसे मैं पूरा लण्ड बाहर निकाल कर अन्दर डालता.. तो उसके मुँह से सिसकारी निकल जाती। साथ में चूत से आती ‘फच्च.. फच्च..’ कामुक ध्वनि की आवाज़.. जो माहौल को और रोमाँटिक बना रही थी।

‘आहह.. ओफफ्फ़.. सीईई.. मैं मर गईईईई.. अहहूऊ.. ओहुचह..’ मदहोशी के आलम में मादक आवाजें निकल रही थीं।

कुछ देर की चुदाई के बाद चुदाई चरम रीमा पर पहुँच गई थी और वो मुझसे कहने लगी- विकास मेरा फिर से कुछ निकलने वाला है.. और जोर-जोर से झटके मारो.. फक मी हार्ड.. जोर से.. आह्ह्ह्ह और जोर से..

मैं भी अपने चरम की तरफ था.. मेरी स्पीड भी बढ़ गई थी, ऐसा लग रहा था कि सारा खून एक जगह इकट्ठा हो गया है, हर तेज धक्के में मेरा लंड काजल की चूत की जड़ तक पहुंच जाता था और काजल तेज सिसकारी ले लेती थी ‘अह्ह्ह्ह आहह.. हई याह्ह्ह…’इसके साथ ही अपनी कमर और चूतड़ पूरे हवा में उठा कर मेरे लंड का स्वागत किया।

काजल- अह्हह ह्ह्हहा हयी..उसने काफ़ी ज़ोर से सीत्कार भरी.. मेरा लंड उसकी चूत को छेदता जा रहा था।

काजल भी अपनी चूत को बार-बार सिकोड़ रही थी। मेरे लण्ड में मेरा सारा खून एक जगह एकत्र हो गया था.. कभी भी मेरा लावा फूट सकता था, दोनों ही एक-दूसरे में समां जाने को आतुर थे, कमरे में सिसकारियों का.. एक-दूसरे के जिस्म की रगड़ से निकलती आवाज़ों से.. और चुदाई की ‘फ़चाफ़च-फ़चाफ़च’ आवाजें गूंज रही थीं।

हम दोनों अपने चरम की ओर बढ़ रहे थे। करीब 8-10 धक्कों के बाद मैंने जोर की ‘आआह्ह्ह्ह’ की और अपना लावा उसकी चूत के अन्दर भर प्रिया और उसी समय काजल ने भी जोर से मुझको जकड़ कर अपना पानी छोड़ प्रिया, उसकी चूत खुल और बंद हो रही थी। लण्ड भी रह-रह कर तुनके मार रहा था।

मैं निढाल सा उस पर गिर गया, काजल ने भी मुझको अपनी बाँहों में समेट लिया हम दोनों की ऐसी हालत थी.. जैसे जिस्म में कोई भी जान अब बाकी बची ही न हो।

उसकी चूचियों पर सर रख कर मैं लेट गया।

हम दोनों ही अपनी साँसें स्थिर करने में लगे थे कि न जाने कब हमारी आँखें नींद की आगोश में समां गईं।

काफी देर बाद मेरी नींद खुली, उस वक्त करीब 3 बज रहे थे, काजल पूरी नंगी मेरे से लिपटी सो रही थी, वो मासूम सी लग रही थी। उसके चेहरे की चमक और निखार बता रहा था कि वो पूरी तरह से संतुष्ट हो कर सो रही थी।

मैंने उसके माथे को हौले से चूम लिया। उसके चेहरे पर जो बाल आ गए थे.. उनको भी हटा प्रिया.. और मैं उसको प्यार भरी नजरों से देख रहा था।

मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि काजल का नंगा जिस्म मेरी बाँहों में है और उसको मैंने कली से फूल बना प्रिया है।

मैं उसकी चूचियों पर हाथ रख कर सहलाने लगा। काजल भी मेरे गर्म हाथों का स्पर्श पाकर कुनमुनाई.. उसने मुझको और जोर से बाँहों में जकड़ लिया।

मेरा लण्ड फिर से सुगबुगाने लगा, काजल की जांघों से टकराने लगा।

काजल को मेरे लण्ड की गर्मी और सांसों की मादक महक से नींद के आगोश से बाहर निकाल प्रिया।उसने आँख खोल कर मुझको देखा और शर्मा कर मुस्कुराई।

मैंने उसको बाँहों में भर कर उसके रसीले होंठों को चूमना शुरू कर प्रिया, काजल ने भी मेरा साथ प्रिया।

करीब 10 मिनट के बाद हम जब अलग हुए तो वो बोली- मुझको टॉयलेट जाना है।मैंने उसको अपनी बाँहों से आज़ाद कर प्रिया.. पर वो जैसे ही खड़ी हुई कि लड़खड़ा कर बिस्तर पर गिर गई।मैं- क्या हुआ?काजल धीरे से बोली- नीचे बहुत दर्द है.. चला नहीं जा रहा है।

मैं उठा और उसको बाँहों में उठा कर टॉयलेट में ले गया और उसे कमोड पर बैठा प्रिया, फिर बाथटब का नल खोल प्रिया।मैं- मुझे आवाज़ दे देना.. मैं आ जाऊंगा।कह कर मैं बाहर आ गया।

मैंने एक नज़र बिस्तर पर डाली.. जो कुछ घंटों पहले की चुदाई की दास्तान बयान कर रहा था। जगह-जगह दाग थे काजल के नीचे बिछी तौलिया पर भी खून के दाग.. उसके कुंवारेपन का सबूत दे रहे थे।

मैंने बिस्तर ठीक किया ही था कि काजल की आवाज़ आई ‘विकास..’

मैं अन्दर गया तो काजल दीवार का सहारा लेकर खड़ी थी। उसको उठा कर मैंने बाथटब में लिटा प्रिया। टब का पानी हल्का गर्म था.. उसके जिस्म को अच्छे से साफ किया, उसकी चूत को अच्छे से धो प्रिया, टॉवेल से चूत की सिकाई भी कर दी।

काजल अब कुछ तरोताज़ा महसूस कर रही थी पर उसकी आँखों की हया बार-बार दिख रही थी।मैं जिस तरह से उसका ख्याल रख रहा था.. उसको भी अच्छा लग रहा था।

काजल को उठा कर उसका जिस्म अच्छे से पोंछकर उसको बिस्तर पर ले जाकर बिठा प्रिया, उसको पानी पिलाया और फिर बिस्कुट खिला कर एक पेनकिलर दवा भी खिला दी।

यह सब देख कर काजल ने बोला- विकास मेरा ऐसा ही ख्याल रखोगे न हमेशा।मैं मुस्कुरा कर बोला- यस माय लव।

काजल मेरे साथ चुद चुकी थी और अब वो मुझसे स्त्रीसुलभ बातें करने लगी थी।आपके ईमेल के इन्तजार में।

कहानी जारी है।support@mohakkisse.com

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