Hindi Chudai Kahani
कामुक, बोल्ड और रोमांचक हिंदी कहानियों का बेहतरीन संग्रह।
Drishyam, ek chudai ki kahani-52
इतना चोदा तुमने मुझको की सुध न रही मेरे तन में,यह लण्ड तेरा कैसा लण्ड है, कोई रहम नहीं उसके मन में?दिन में था बेहोशी का आलम रातों को चुदी दिन में सोई,चूत सूज गयी लहराये कदम तब कैसे भला चलता कोई?
Drishyam, ek chudai ki kahani-51
जब हवस दिमाग पे हावी हो तो तरिका तौर नहीं होता,बस लण्ड और चूत ही होती है, बाकी कुछ और नहीं होता।लण्ड तगड़ा हो चूत हो राजी दिन रात चुदाई होती है,फिर चूत सूजे या पाँव डुले उस पर कोई गौर नहीं होता।
Drishyam, ek chudai ki kahani-50
जब हवस दिमाग पे हावी हो तो तरिका तौर नहीं होता,बस लण्ड और चूत ही होती है, बाकी कुछ और नहीं होता।लण्ड तगड़ा हो चूत हो राजी दिन रात चुदाई होती है,फिर चूत सूजे या पाँव डुले उस पर कोई गौर नहीं होता।
Drishyam, ek chudai ki kahani-49
जिंदगी प्यार की दो चार घडी होती है चाहे छोटी भी हो यह उमर बड़ी होती है।कड़ी चुदाई हो तेरी अगर मोहब्बत से आखिरी लम्हें तक वह याद खड़ी होती है।
Drishyam, ek chudai ki kahani-48
जहां लण्ड और चूत में गर्मी हो वहाँ रस्मोरिवाज का क्या करना?जब प्यार हवस से चुदता है, कोरे अलफ़ाज़ का क्या करना?चूत छोटी सी हो लण्ड बड़ा तगड़ी चुदाई तब होती हैलण्ड ठोक रहा नाजुक चूत को चूत हो नासाज़ तो क्या करना?
Drishyam, ek chudai ki kahani-47
पाठक गण, अगर कहानी ठीक लगी हो तो जरूर कमैंट्स लिखे!
Drishyam, ek chudai ki kahani-43
किसी गैर से चुदवाने का जोश दिमाग में छाया है,मुझे चोदने प्रेमी मेरा आज मेरे घर आया है।एक बालम था अब तक मेरा जिसका लण्ड लिया मैंने,अब इस प्रेमी का लुंगी मैं जो मेरे मन भाया है।ब्याह रचाएगा मुझसे दुल्हन उसकी बन जाउंगी,कहता है मेरा प्रेमी की तभी मैं ...
Drishyam, ek chudai ki kahani-42
लण्ड मेरा यह बेकाबू है तेरी सूरत देखि जब से,चूत से मिलने को पागल है वह खड़ा ही रहता है तब से।कैसे उसको मैं शांत करूँ कैसे उसको मैं मनाऊंगा,थोड़ा सा सेहला दोगी तो शायद मैं समझा पाउँगा।
Drishyam, ek chudai ki kahani-41
बाँहों में नंगी कर के वह जब चोदेगा मुझ पर चढ़ कर,चूत में घुस कर फाड़ेगा जब तब मुझको है मरने का डर।चूत मेरी सुई की आंख सम लण्ड उसका है जैसे अजगर,अगर मुझे मारना ही है तो फिर जो दिल में आये सो कर।
Drishyam, ek chudai ki kahani-39
ना डरना ओ मेरे राही अगर राहों में भटके हो। यदि हो चाह मंजिल की तो रास्ते मिल ही जाते हैं।ना हो मुश्किल जो राहों में सफर का क्या मज़ा साहिल, लगादें जान जो अपनी वही मंजिल को पाते हैं।
Drishyam, ek chudai ki kahani-38
कोई क्या जाने दिल की हालत जो परवानों की होती है।ख़ौफ़ मरने का तो है फिरभी जितअरमानों की होती है।
Drishyam, ek chudai ki kahani-37
कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर,सितारों से आगे यह कैसा जहां है?”