फ़ुलवा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@lva
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
फ़ुलवा की रचनाएं
मेरी अपनी माँ- समाज दर्पण
सूचना: यह कोई सेक्स कहानी नहीं है, यह कहानी जन चेतना के लिए है.जो पाठक शुद्ध सेक्स पढ़ना चाहते हैं, यह कृति उनके लिए नहीं हैं.
सफ़ेद चादर
सुंदर गुलाब के फूलों वाली नई चादर पर बैठी नवविवाहिता आयुषी अपने फ़ोन में कुछ फोटो देख रही थी.
नाजायज़ औलाद
आज जो कुछ भी हुआ, उसकी उम्मीद मीनाक्षी को सपने में भी नहीं थी, आज उसके विद्यालय की छुट्टी जल्दी हो गई तो उसने अपने बेटे अंकुर को भी उसके कॉलेज से छुट्टी दिला कर बाजार जाने का सोचा इसलिए वह कॉलेज के प्रिन्सीपल से अंकुर की छुट्टी स्वीकृत कराने गई कि...
पेट
मजदूरी करते रज्जो थकी नहीं थी क्योंकि यही उसका पेशा था। बस सड़क की सफाई करते ऊब सी गई थी।अब वह किसी बड़े काम की तलाश में थी जहाँ से ज्यादा पैसा कमा सके जिससे वह अपने निठल्ले पति का पेट भरने के साथ ही उसकी दारू का भी इंतजाम कर सके।
खामोश शर्मिन्दगी
बहुत देर से रेलवे आरक्षण की लम्बी कतार में खड़े रहने के बाद अब मैं खिड़की के काफी क़रीब पहुँच चुका था।
गुलदस्ता
बाथरूम से निकलते हुए कुसुम की नजर जब रीतेश के कमरे की ओर गई तो उसने देखा कि दरवाजा आधा खुला था और मिनी अपने को किसी से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। उसे लगा जैसे किसी चीज में उसका पाँव उलझ गया हो और वह उसे ही छुड़ा रही हो।
चाहत का इन्तज़ार
हमारे गाँव में पवन के पिताजी की करियाने की दुकान थी।वह अपने पिताजी की तरह मोटू व अकड़ू था।
मेरे जीजू और देवर ने खेली होली-1
जीजू और देवर संग होलीमैं अपने मम्मी-पापा के साथ सोनीपत में रहती हूँ। मेरी एक बड़ी बहन माला जिसकी शादी को अभी आठ महीने ही हुए हैं दिल्ली में है। जीजू रोहित का कपड़े का एक्सपोर्ट बिजनेस है।मेरा रिश्ता भी दिल्ली में तय हो चुका है और मेरे होने वाले पति...