फ़ुलवा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@lva
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
फ़ुलवा की रचनाएं
वेश्या पतिता नहीं होती
वेश्या पतिता नहीं होती, पतन को रोकती हैपतित जन की गन्दगी, अपने हृदय में सोखती हैजो विषैलापन लिए हैं घूमते नरपशु जगत मेंउसे वातावरण में वह फैलने से रोकती है…
क्या वो किसी नाम का हकदार नहीं !
वेश्यावृति की परिभाषा बहुत सरल है पर केवल समाज के उन लोगों के लिए जो सिर्फ वेश्यावृति के रूप में उन महिलाओं को देखते हैं जो चंद पैसों के बदले अपने शरीर को बेच देती हैं।
वेश्या तो पूज्या होनी चाहिए
जी नहीं ! मुझे यह कहने में जरा भी शर्म नहीं है कि मैं एक वेश्या यानि सेक्स वर्कर हूँ ! मेरे कई नाम हो सकते हैं- वेश्या, कालगर्ल, एस्कोर्ट, धन्धेवाली, कोठे वाली, रण्डी, सेक्स वर्कर, प्रोस्टीच्यूट Callgirl, Prostitute, Sex Worker, Escort
मुम्बई की गंध-2
तीन फुट ऊंचे, संगमरमर के फर्श पर, बहुत कम कपड़ों में, चीखते आर्केस्ट्रा के बीच वह लड़की हंस हंस कर नाच रही थी। बीच-बीच में कोई दस-बीस या पचास का नोट दिखाता था और लड़की उस ऊंचे, गोल फर्श से नीचे उतर लहराती हुई नोट पकड़ने के लिए लपक जाती थी।
भाभियों का दुःख
सुनिये जी ! कल रात फिर आपसे भूल हो गई है । इतनी जल्दबाजी में क्यूं रहते हैं ?
पेट
मजदूरी करते रज्जो थकी नहीं थी क्योंकि यही उसका पेशा था। बस सड़क की सफाई करते ऊब सी गई थी।अब वह किसी बड़े काम की तलाश में थी जहाँ से ज्यादा पैसा कमा सके जिससे वह अपने निठल्ले पति का पेट भरने के साथ ही उसकी दारू का भी इंतजाम कर सके।
मेरी अपनी माँ- समाज दर्पण
सूचना: यह कोई सेक्स कहानी नहीं है, यह कहानी जन चेतना के लिए है.जो पाठक शुद्ध सेक्स पढ़ना चाहते हैं, यह कृति उनके लिए नहीं हैं.
अगर उस दिन मैं दरवाजा खोल देती
कई बातें ऐसी होती हैं जो बीत जाने के बाद बरसों तक, कई बार तो ताउम्र अपनी याद बनाये रखती हैं।
खामोश शर्मिन्दगी
बहुत देर से रेलवे आरक्षण की लम्बी कतार में खड़े रहने के बाद अब मैं खिड़की के काफी क़रीब पहुँच चुका था।