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मेरी मां अपने डॉक्टर यार से चुद गई

हंसिका अवस्थी

22 Feb 2009 को प्रकाशित

मेरी मां अपने डॉक्टर यार से चुद गई
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Xxx डॉक्टर सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे हमारे पड़ोसी डॉक्टर ने मेरी माँ की चूत चोद कर उन्हें मजा प्रिया. यह सारा नजारा मैंने अपनी आँखों से देखा.

मुझे इधर लिखी हुई कहानियां बेहद पसंद आईं और मुझे भी लगा कि क्यों न मैं भी अपने कुछ सच्चे अनुभव आप लोगो से साझा करूँ.

मैं पहले आपको अपने बारे में बता दूं.मेरी उम्र 28 वर्ष है और मैं पिछले दो साल से दिल्ली में जॉब कर रही हूँ.

मेरे पिताजी फौज में थे और जब मैं अबोध थी, तभी कश्मीर में वो शहीद हो गए थे.उसके बाद से मुझे मेरी मां ने ही पाला.

मैं एक अच्छे घर से हूं लेकिन मैंने काफी छोटी उम्र से ही अपनी मां की चुदाई देखी है इसलिए चुदाई के नाम से मेरा दिल मचल उठता है.जैसी चुदक्कड़ मेरी मां है, आज मैं भी वैसी ही चुदक्कड़ हूं.

मैं आज आपको अपने द्वारा देखी पहली सच्ची घटना बता रही हूं.इसके बाद मैं खुद के साथ घटी घटनाओं को भी लेकर आऊंगी, अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मुझे Xxx डॉक्टर सेक्स कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा.

मैं बिल्कुल नयी हूं, इसलिए लिखने में अगर कोई भूल हो जाए तो उसे नजरअंदाज कर दीजिएगा.

यह बात काफी पुरानी है लेकिन मुझे यह बात आज तक बिल्कुल सही सही याद है.

मैं और मेरी मां, जिनका नाम विमला है.हम हमारे नये घर में रहते थे. हमारा घर नया था और शहर से थोड़ा बाहर के इलाके में बना था.

हमारे घर के आस-पास उस वक्त केवल 3 घर और थे.उनमें से एक घर में कोई नहीं रहता था और एक में एक अंकल और आंटी रहते थे.

एक अन्य घर में मेरी सहेली मेघा और उसके पापा, जो पेशे से डॉक्टर थे, वो रहते थे.उसकी मम्मी नहीं थीं.मेघा मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ती थी और ज्यादा समय मेरे पास ही रहती थी.

मेघा के पापा का नाम सुरेन्द्र था.वो जब भी अपने क्लिनिक जाते तो मेघा को मेरे घर पर ही छोड़ जाते थे.

सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन उस दिन से मेरी जिंदगी एक अलग मोड़ लेने वाली थी.

मेरी मां की तबियत कुछ दिनों से खराब चल रही थी तो सुरेन्द्र अंकल ने उन्हें अपने क्लिनिक पर चेकअप के लिए बुलाया.मां ने मुझे कहा- मैं थोड़ी देर में आ जाऊंगी, मेरी तबियत ठीक नहीं है. मैं दवाई लेकर आ जाऊंगी.

यह सुनकर कि वो शहर तरफ जाने वाली हैं, मैं भी उनसे साथ चलने को कहने लगी.पहले तो मां ने मना कर प्रिया मगर मैं जिद करने लगी तो बाद में वो मान गईं और मुझे और मेघा को अपने साथ स्कूटी पर बैठाकर ले गईं.

हम लोग दोपहर के करीब दो बजे सुरेन्द्र अंकल के क्लिनिक पर पहुंचे.वहां केवल एक मरीज था तो अंकल ने हमें बाहर बैठने को कहा और रेशमा आंटी, जो अंकल की सहयोगी थीं, उनको क्लिनिक बंद करके घर जाने को कहा.

वो क्लिनिक बंद करके पांच मिनट बाद चली गईं.कुछ देर बाद वो मरीज भी वहां से चला गया और अंकल ने क्लिनिक को अन्दर से बंद कर प्रिया.

उसके बाद वो मेरे और मेघा के लिए कुछ चिप्स और बिस्किट लाने चले गए.

थोड़ी देर बाद अंकल खाने की ढेर सारी चीजें लेकर आए और हमें खाने को दे दीं.

फिर मम्मी बोलीं- बेटा, मैं चेकअप करवा कर आती हूं, आप लोग यहीं बैठो.इतना कहकर मम्मी वहां लगे टीवी में एक कार्टून चैनल लगाकर अन्दर चली गईं.

मैं और मेघा खाने और कार्टून देखने में व्यस्त हो गए.धीरे धीरे काफी समय बीत गया और मेघा टीवी देखते हुए सो गई.

मैंने कुछ देर टीवी देखा, फिर सोचा कि बहुत देर हो गई, मम्मी अभी तक नहीं निकलीं, एक बार जाकर बुलाती हूं.

यह सोचकर मैं अन्दर चेम्बर के तरफ जाने लगी.जैसे ही मैं गेट के पास पहुंची, तो मैंने जो देखा, वो मुझे आज तक याद है.

मैंने देखा कि मेरी मां की सलवार और पैंटी नीचे जमीन पर गिरी हुई थी और मेरी मां अपनी टांगें फैलाए कुर्सी पर बैठी हुई थीं.उनकी चूत में अंकल अपनी उंगली पेल रहे थे.

उस वक्त मैं बहुत छोटी थी. ये सब मेरे समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि चल क्या रहा था.मैंने वहीं से आवाज लगाई- मम्मी क्या हुआ आपको?

मेरी आवाज सुनकर मेरी मां और अंकल दोनों अकबका गए.मां ने मेरी तरफ देखा और घबराहट में बोलीं- कुछ नहीं बेटा, अंकल मेरा चेकअप कर रहे हैं और इलाज करेंगे, आप बाहर जाकर बैठो.

मां के इतना कहते ही अंकल झट से उठकर आए और मुझे केबिन से बाहर ले आए.वहां अंकल ने मुझे कुछ चॉकलेट आदि दिए और समझाने लगे- बेटा, मैं मम्मी का इलाज कर रहा हूँ, इसमें थोड़ा टाइम लगेगा. तब तक आप कार्टून देखो और ये चॉकलेट खाओ.

इतना कहकर अंकल ने मुझे टीवी के सामने बिठा प्रिया और खुद वापस अन्दर चले गए.उन्होंने केबिन का दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.

मैं दुबारा कार्टून देखने में व्यस्त हो गई. मैं इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि अन्दर अंकल मेरी मां चोदने वाले हैं.

कुछ देर तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा, मगर इधर मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई थी.मैंने सोचा कि जरा एक बार जाकर देखूं कि मां का इलाज हुआ या नहीं.

जब मैं वहां गई, तो दरवाजा बंद था.तब मैंने बाहर से आवाज भी लगाई मगर अन्दर से कोई जवाब नहीं आया.

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.तभी मैंने सोचा कि एक बार खिड़की से देखती हूँ कि अन्दर क्या चल रहा है.

यह सोचकर मैं खिड़की के पास गई और देखने कि कोशिश की, मगर खिड़की ऊंची थी.तब मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे मोटी मोटी किताबें एक शेल्फ में रखी दिखाई दीं.

मैंने उनमें से कुछ किताबों को निकालकर एक के ऊपर एक करके सीढ़ी जैसी बनाई और खिड़की से अन्दर देखने लगी.

इस बार का नजारा तो पहले से काफी अलग था. वहां पर मेरी मां पेशेंट वाले बेड बिल्कुल ही नंगी लेटी थीं और अंकल जोर जोर से मेरी मां को चोद रहे थे.यह सब मेरे सामने पहली बार हो रहा था मगर पता नहीं क्यों, मुझे यह पसंद आ रहा था.

मेरी मां का गोरा जिस्म किसी परी के जैसे मखमली था.अंकल काफी जोश के साथ मेरी मां को चोदे जा रहे थे.

कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद उन्होंने मेरी मां को कस कर पकड़ लिया और उनके जिस्म पर लेट गए.मां ने अंकल को अपने ऊपर से हटाया और उठ कर खड़ी हो गईं.

अब वो अपने कपड़े पहनने लगीं.यह देख मैं भी वहां से नीचे उतर गई और सारी किताबों को उनकी जगह पर रखने लगी.

दो किताबें अभी भी मेरे हाथ में ही थीं. तभी अचानक से पीछे से मेरी मां की आवाज आई- क्या कर रही हो बेटा?

उनकी आवाज सुनकर मैं घबराहट में बोली- कुछ नहीं मां, अंकल की बुक देख रही थी. ये किताब भी न कितनी मोटी है, मुझसे गिर गई थी. वापस रख रही हूँ.

मां ने कहा- तुम छोड़ दो, अंकल रख लेंगे.मैं दौड़कर मां के पास गई और बोली- अब घर चलो.

उनको देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वो अभी अभी चुद कर आ रही थीं.थोड़ी देर बाद अंकल भी बाहर निकले और बोले- ऐसे ही इलाज कराओगी, तो जल्दी ठीक हो जाओगी.

मैं बोल पड़ी- हां अंकल, आप मम्मी का इलाज अच्छे से कीजिए.यह सुनकर मां मुस्कुराती हुई बोलीं- आज रात खाना आप हमारे घर पर ही खा लीजिए डॉक्टर साहब!

यह सुनकर अंकल मुस्कुराते हुए बोले- मैं तो मीट खाऊंगा, वो भी लाल लाल!यह सुनकर मां हंसती हुई बोलीं- आपको जो खाने का मन हो, खा सकते हैं. कोई रोक नहीं है.

यह कह कर मां ने मुझसे चलने का कहा.मैं और मां वहां से निकल गए.मेघा वहीं रूक गई.

उस दिन मां बहुत मुस्कुरा रही थीं. मुस्कुराएं भी क्यों न, आखिर चुद कर जो आई थीं.

इसके बाद रास्ते में मुझे बहुत सारी चीजें बिना बोले ही मां ने दिला दीं.रात के लिए मीट लेकर हम लोग वापस घर आ गए.

उनको भनक तक नहीं लगी थी कि मैंने उनकी चुदाई देख ली थी.मैं भी चुप रही क्योंकि मेरी समझ में भी उस वक्त कुछ खास नहीं आया था.

रात को ठीक आठ बजे अंकल और मेघा हमारे घर आ गए.मैं मेघा को लेकर अपने कमरे में चली गई.

उस वक्त मेरी मां बाथरूम में नहा रही थीं.

मैंने मां को आवाज दी कि मां, डॉक्टर अंकल और मेघा आए हैं.कुछ देर बाद मां ने मुझे और मेघा दोनों को आवाज लगायी कि तुम दोनों बहनें खाना खाने नीचे आ जाओ.

यह सुनकर हम दोनों नीचे हॉल में आ गए.तब मैंने देखा कि मां किसी परी की तरह सफेद ड्रेस में सजकर तैयार थीं.उनके पूरे बदन से परफ्यूम की अच्छी खुशबू आ रही थी.

अंकल ने मां की तारीफ की और कहा- आप बहुत सुंदर दिख रही हैं.हमने साथ बैठकर खाना खाया.

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खाने के बाद मैं मेघा के साथ अपने कमरे में, जो ऊपर की तरफ था, वहां चली गयी और उसे अपने खिलौनों से खेलने देने लगी.कुछ देर खेलते खेलते हम दोनों की आंख लग गई.

बहुत रात को मुझे प्यास लगी तो मेरी नींद खुली.मैंने देखा कि मेघा मेरे बाजू में सोयी हुई है. मैंने सोचा कि नीचे किचन में जाकर पानी पी लेती हूँ.

यह सोचकर मैं धीरे धीरे सीढ़ियों से उतरकर हॉल में आई और वहां पानी पिया.मैं जब पानी पी रही थी, तब मैंने देखा कि मेरी मम्मी के कमरे की लाईट अभी तक जल रही थी, जबकि मम्मी लाइट बंद करके सोती थीं.

तो मैं लाइट्स बंद करने जाने लगी तो वहां मैंने बुदबुदाने की आवाज सुनी.वो आवाज मेरी मां की थी.

मैंने पर्दे के पीछे से झांक कर देखा, तो मेरे सामने बिल्कुल दोपहर वाला नजारा था.मां और डॉक्टर अंकल दोनों बेड पर नंगे लेटे हुए थे और मां डॉक्टर अंकल से कह रही थीं कि दोनों बच्चियां जाग जाएं, इससे पहले आप मुझे जी भर के चोद दो.

इतना कहकर मां डॉक्टर अंकल को चूमने लगीं.वो दिसम्बर का ठंडा महीना था. कमरे में गर्म वाला ब्लोअर चल रहा था, जिससे अन्दर का वातावरण अनुकूल था.

चुदाई की कह कर मेरी मां ने अपनी गोरी टांगों को फैला प्रिया और उनकी एकदम गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने आ गई थी.अंकल मां के ऊपर चढ़े और बोले- साली छिनाल, तीन बार चुदवाकर भी मन नहीं भरा तेरा?

इस पर मेरी मां वासना भरे स्वर में बोलीं- मैं बहुत प्यासी हूं … मेरी इस मादरचोद चूत को एक बार और रगड़कर चोद दो.इतना सुनते ही अंकल ने मेरी मां को अपनी ओर खींचा और दोनों टांगों को कस कर फैला कर चोदना शुरू कर प्रिया.

मेरी मां के मुँह से निकलने लगा- आ आह आह … और चोदो मेरी जान … ऐसे ही … आह ये चूत तुम्हारी ही है.उनकी मादक आवाजें निकलने लगीं.

अंकल- अब तुम्हारी जवानी लंड के लिए नहीं तरसेगी विमला रानी.ये कहकर अंकल मेरी मां को धकापेल चोदे जा रहे थे.

पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा था.

ऐसे ही काफी देर तक और चोदने के बाद अंकल ने मेरी मां की खूबसूरत चूत में अपना सारा रस डाल प्रिया.

मेरी मां और अंकल दोनों काफी हांफ रहे थे. दोनों एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे.अंकल मेरी मां से बोले- तुम्हारी चूत बेहद खूबसूरत है विमला, मैं तो इसका दीवाना हो गया. जिंदगी में मैंने पहले कभी इतनी प्यारी चूत नहीं चोदी थी.

यह सुनकर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलने लगीं- क्या आप भी डॉक्टर साहब … मुझे तो शर्म आ रही है.इस पर शायद अंकल भड़क गए और कड़क आवाज़ में मेरी मां को देखते हुए बोले- साली छिनाल, चार बार चुदवाने में तुझे शर्म नहीं आई … और अब तुझे शर्म आ रही है. साली आज तुझे इतना चोदूंगा कि तू शर्माना भूल जाएगी.

मेरी मां घड़ी की ओर देखती हुई बोलीं- डॉक्टर साहब, साढ़े तीन बजने वाले हैं. बच्चियां जाग गईं, तो दिक्कत हो जाएगी. आप कल या परसों फिर चोद लेना, मैं आज बहुत थक गई हूं. और वैसे भी कौन सा मैं कहीं भागी जा रही हूं.

इस पर अंकल बोले- तुम बच्चियों की चिंता मत करो. सुबह 5 बजने से पहले मैं तुम्हें चोद कर निकल जाऊंगा. तुम चुदने के लिए ही बनी हो, अपनी चूत के साथ अन्याय मत करो. इसे जी भरके चुद लेने दो.यह बोलते ही अंकल मेरी मां के ऊपर फिर से चढ़ गए.

अब वो अपने लंड को धीरे से मेरी मां की चूत में डालने लगे.मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- बड़े मादरचोद हो आप डॉक्टर साहब!

अंकल बोले- काश तुम मेरी बीवी होती.मेरी मां उनको चूमते हुए बोलीं- अभी तो आपकी ही बांहों में हूँ, तो बीवी समझ कर ही मजा लीजिए.

यह कहकर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और Xxx डॉक्टर अंकल ने भी चुदाई तेज कर दी.मेरी मां फिर से कराहने लगीं- ओह डॉक्टर साहब, बहुत मजा आ रहा है … ऐसे ही चोदो डॉक्टर साहब.

ये बातें सुनकर अंकल ने रफ्तार और बढ़ा दी … और वो मेरी मां को बहुत जोर जोर से चोदने लगे.मुझे ये सब देखने में बहुत मजा आ रहा था.

अंकल बोलने लगे- कैसा लग रहा है?मां बोलीं- बस ऐसे ही चोदते रहो डॉक्टर साहब.

दोनों चुदाई में इतने मगन थे कि उन्हें कोई दीन दुनिया का कोई होश ही नहीं था.जल्द ही फिर से पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा.

चोदते चोदते अंकल कभी मां के चूचों को दबाते, तो कभी उन्हें अपने मुँह में भरकर चाटने लगते.मां भी उनका पूरा साथ दे रही थीं और किसी रंडी की तरह धकापेल लंड खाए जा रही थीं.

ऐसे ही बहुत देर तक ताबड़तोड़ चुदाई चलती रही.तभी अंकल ने रफ्तार बहुत तेज कर दी और एक झटके में सारा वीर्य मेरी मां की चूत में टपका प्रिया.

अब वो निढाल होकर मेरी मां के ऊपर ही लेट गए और मां ने भी उन्हें कसकर जकड़ लिया.कुछ देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.

फिर अंकल ने धीरे से अपना लंड मेरी मां की चूत से बाहर निकाला और बोलने लगे- विमला, तुम्हें चोदने में बहुत मजा आया.मां ने समय देखा और बोलीं- चोदते चोदते एक घंटा से ज्यादा हो गया. बच्चियां जाग जाएंगी, अब आपको जाना चाहिए.

अंकल बोले- हां विमला, अब मैं निकलता हूं. लेकिन वादा करो कि दुबारा फिर चोदने दोगी.इस पर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- मैं कहां भागी जा रही हूं. आपका जब मन करे, तब आप मुझे चोद सकते हैं. मेरी चूत का ख्याल तो अब आपको ही रखना है.

अंकल ने कहा- तुम फिक्र मत करो, तुमसे ज्यादा ख्याल मैं तुम्हारी चूत का रखूंगा.यह कहकर वो उठ कर अपने कपड़े पहनने लगे.

कपड़े पहनकर वो मां को किस करके बोले- विमला, अब तुम भी अपने कपड़े पहन लो.मेरी मां बोलीं- मेरा अभी मन नहीं है. बाद में पहन लूँगी.

अंकल बोले- तुम समय निकालकर क्लिनिक आ जाना, मैं तुम्हारी नसबंदी करवा दूँगा. उसके बाद तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और उसके बाद हर शनिवार रात मैं तुम्हें ऐसे ही चोदूंगा.मां ने हां कहकर सिर हिलाया और कंबल के अन्दर नंगी ही लेट गईं.

मैं भागकर मेघा के पास आ गई और सोने का नाटक करने लगी.मुझे अभी तक समझ नहीं आया था कि आखिर अंकल ने मेरी मां के साथ क्या किया.

थोड़ी देर बाद अंकल मेघा को लेने आए.जैसे ही वे हमारे पास आए, तो उनके शरीर से वही परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो मेरी मां ने शाम को अपने जिस्म में लगाई थी.वो मुझे बिना जगाए मेघा को गोद में उठाकर चले गए.

जब वो दोनों चले गए तो मैं भी नीचे उतरकर मां के कमरे की तरफ चली गई.अब वहां कोई लाइट नहीं जल रही थी और काफी अंधेरा था.

मैं अन्दर गई और एक डंडे से लाईट का बटन चालू किया.मां सोयी हुई थीं, तो मैं भी धीरे से बेडपर जाकर कंबल में घुसकर उनके बगल में लेट गई.

मेरी मां के जिस्म से मस्त खुशबू आ रही थी.थोड़ी देर बाद मैंने मां की जांघों पर अपनी टांग को रख प्रिया और मां से लिपट गई.

मेरे मन में वो सब चल रहा था, जो मैंने देखा था.मैं जानना चाहती थी कि आखिर हुआ क्या?

यही जानने के चक्कर में मैंने अपना हाथ मां के पेट पर रख प्रिया और धीरे धीरे हाथ को नीचे की तरफ ले जाने लगी.कुछ देर में ही मेरे छोटे हाथ मेरी मां की चूत तक पहुंच गए. उनकी चूत बहुत ज्यादा चिपचिपी थी और सारा माल मेरे हाथों में लग गया.

मैंने धीरे से अपने हाथों को मां की झांटों में रगड़कर साफ कर लिया.अब मैंने सोचा कि ये क्या चीज थी, जो मेरी मां की सुसु में अंकल ने डाल दी.

यह जानने के लिए जैसे ही मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में डालीं, वैसे ही झट से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और उंगली को बाहर कर प्रिया.वो घबराहट में बोलीं- हंषु बेटा, तुम यहां क्या कर रही हो?

मैं भी घबराकर बोली- मम्मी मुझे आपके पास रहना है.यह कहकर मैं अपनी मां से लिपट गई और रोने लगी.

मां मुझसे पूछने लगीं- क्या हुआ बेटा, रो क्यों रही हो?मैं रोती हुई बोली- मां अंकल ने आपके सुसु में क्या डाला?

यह सुनते ही मां के होश उड़ गए. वो समझ गईं कि मैंने सब कुछ देख लिया था.वो कुछ देर के लिए बिल्कुल चुप रहीं. शायद उनको समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूं.

वो सोचने लगीं और तब उन्होंने मुझसे पूछा- तुमने क्या देखा?मैंने सब कुछ सच सच बता प्रिया.

मेरी मां समझ गईं कि मैंने उनकी चुदाई देख ली.अब मां को ये डर था कि कहीं मैं किसी को ये सब न बता दूं.कुछ देर सोचने के बाद मां बोलीं- बेटी, तुम ये बात किसी से मत बताना.

मैं जिद करने लगी कि पहले आप बताओ, अंकल ने आपके साथ क्या किया?इस पर वो मुझे समझाती हुई बोलीं- हंषु बेटा, तुमको तो पता हैं कि मां की तबियत कितनी खराब थी. जब आज हम लोग चेकअप के लिए गए, तब अंकल ने मुझे चेक करके बताया कि मुझमें प्रोटीन की कमी है. मेरे पैरों में और पेट में बहुत कम प्रोटीन है, इसलिए मुझे प्रोटीन शेक लेना होगा. तो अंकल मेरा इलाज कर रहे थे और मुझे प्रोटीन दे रहे थे बेटा.

ये सुनकर मुझे लगा कि हां अंकल मेरी मां का इलाज कर रहे होंगे.

मैंने पूछा- मगर वो आपकी सुसु करने वाली जगह से क्यों प्रोटीन दे रहे थे?मां मुस्कुराती हुई बोलीं- वो इसलिए बेटा, क्योंकि सुसु वाली जगह से मेरा पेट और पैर पास में है न. उधर से वहां तक जल्दी प्रोटीन पहुंच जाएगा और मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी.

मैं खुश होकर बोली- अच्छा तो ये प्रोटीन दवाई है और आप इससे जल्दी ठीक हो जाओगी?मां ने कहा- हां बेटा, ऐसे ही अंकल मेरा फिर से इलाज करेंगे, तो मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी. लेकिन तुम ये किसी को मत बताना वर्ना सब तुम्हें ये बोलकर चिढ़ाएंगे कि तुम्हारी मां बीमार है.

मैंने कहा- ठीक है मां, मैं किसी को नहीं बताऊंगी.यह कहकर मैं अपनी मां की बांहों में लेट गई.

इसके बाद तो लगभग हर बार मैंने अपनी मां को चुदते देखा … और हर बार अंकल मेरी मां को ऐसी हीबेरहमी से चुदाईकरते थे.पिछले बीस सालों से वो मेरी मां को चोद रहे हैं. मेरी मां अब भी दिखने में काफी सेक्सी हैं, तभी तो अंकल अभी भी उन्हें जमकर चोदते हैं.

तो ये थी मेरी आंखों देखी अपनी मां की चुदाई की कहानी.उम्मीद है आप सभी को ये पसंद आएगी.बाद में मैं अपनी चुदाई की घटना आपसे साझा करूंगी.

तब तक आप सभी इस Xxx डॉक्टर सेक्स कहानी के लिए अपनी प्रतिक्रिया मुझे अवश्य भेजेंsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अंशुल मथुत

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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