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माँ की चुदाई पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 954 बार

प्यासी मां की चुदाई की लालसा

आकाश पटेल

04 Aug 2020 को प्रकाशित

प्यासी मां की चुदाई की लालसा
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Xxx बेटा माँ सेक्स कहानी में एक रात मैंने मम्मी पापा की चुदाई देखी जिसमें मम्मी की चुदास अधूरी रह गयी. वे बाथरूम में चूत में उंगली डालने लगी. तब मैं मम्मी की चुदाई का सोचा.

मेरा नाम आकाश है, मैं अभी 20 साल का हूँ पर मेरा लंड 8.5 इंच का है.

हमारे परिवार में हम तीन लोग हैं.मैं, पापा और मम्मी.मेरे पापा का नाम प्रकाश है, वे एक बड़ी कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव हैं.

ये Xxx बेटा माँ सेक्स कहानी मेरी और मेरी मां के बीच हुईं एक सच्ची घटना पर आधारित सेक्स कहानी है.

वे हफ्ते में 2-3 दिन ही घर में रह पाते हैं क्योंकि उनको अपने काम के चलते ज्यादा समय घर के बाहर रहना पड़ता है.

मेरी मां नाम पायल है. मेरी मां एक हाउसवाइफ हैं.मां की उम्र 45 साल की है, पर वे लगती 35 या 36 साल की ही हैं.

उनका कमनीय फिगर ऐसा है कि उन्हें देख कर किसी बुजुर्ग का लंड भी खड़ा हो जाए.वे बाजार में जब अपनी मतवाली चाल से चलती हैं तो ऐसा लगता है मानो उनके चूतड़ हमें बुला रहे हों और कह रहे हों कि आओ और मुझे चोद दो.

मेरी मां की बॉडी फिगर 36-32-38 की हैं.उनके चूतड़ बहुत बाहर को निकले हुए हैं और खूब टाइट हैं.

कुछ साल पहले तक मेरी मां जींस भी पहनती थीं, पर जब से दादाजी ने शहर वाले हमारे में आना शुरू किया, उसके बाद वे साड़ी और सलवार दोनों ही पहनने लगी हैं.

हालांकि दादा जी हमारे घर में एक दो रुक कर वापस गांव चले जाते थे.तब भी मां ने जींस आदि पहनना छोड़ कर साड़ी व सलवार सूट पहनना आरंभ कर प्रिया है.

एक दिन की बात है, रात के 11:30 बजे का समय हुआ था.मैं पानी पीने उठा था.

तभी मेरे पापा के कमरे के अन्दर से कुछ आवाज आ रही थी.‘आह … और अन्दर डालो जी आह … और जोर से करो …!’

मैंने एक खिड़की में से झांक कर देखा तो देखता ही रह गया.

कमरे में जीरो वाट के बल्व की हल्की लाल रोशनी में मेरे पिता जी, मां के ऊपर चढ़े हुए थे और धक्के लगा रहे थे.मेरी मां पूरी नंगी थीं और कामुक आवाज में बोल रही थीं.

उस दिन मैंने पहली बार मां का नंगा बदन देखा था.उनका बदन इतना गोरा था मानो दूध में एक चुटकी केशर मिला प्रिया गया हो.

मेरी मां की चुदाई की स्थिति कुछ तरह की थी कि उनके मोटे मोटे चूचे बाहर हवा में झूल रहे थे.

पापा मां के चूचों को पूरी मस्ती से मसलते हुए दबा रहे थे और ‘हूँ हूँ’ करके उन्हें चोद रहे थे.

करीब दो या तीन मिनट बाद मेरे पापा के धक्के लगने रुक गए और वे मां के ऊपर से उतर गए.

मैं समझ गया कि पापा का पानी मां की चूत में चला गया.पापा एकदम से निढाल होकर ऐसे लेट गए मानो उनमें जान ही न बची हो.

वे टांगें पसार कर नंगे ही सो गए.उनका मुर्दा लंड किसी मरे हुए मेंढक की तरह नजर आ रहा था.

तभी मुझे मालूम हो गया कि मेरे बाप में दम नहीं है.

पापा के हट जाने के बाद मां पलंग पर से उतर कर बाहर आने लगीं.तो मैं तुरंत वहां से भाग कर अपने कमरे में चला गया और उधर से छुप कर देखने लगा कि अब मेरी मां क्या करेंगी.

मां वहां से उठीं और अपने शरीर पर केवल साड़ी को लपेट कर अधीनंगी अवस्था में ही बाथरूम में चली गईं.

हमारे घर में एक कॉमन बाथरूम मां के कमरे से बाहर भी बना है तो वे उसे इस्तेमाल करने बाहर आने लगी थीं.

हालांकि मुझे मां की इस बात से जरा हैरानी हुई थी लेकिन मैं क्या कर सकता था.

मां ने बाथरूम का दरवाजा खुला ही रहने प्रिया.वे खड़ी अवस्था में ही अपनी साड़ी उठा कर अपनी चूत में उंगली डालने लगीं.

चूंकि रात में मां को मेरे आने की उम्मीद नहीं थी तो उन्होंने बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ प्रिया था.ऐसा मेरा सोचना था.

मैं उन्हें देखने लगा था.मैं तो सच में मां को देखता ही रह गया. वे बाथरूम की दीवार से टिकी हुई थीं, उस कारण से उनका मुँह मेरी तरफ ही था.

उनकी साड़ी पेट तक उठी हुई थी और चुत में उंगली करती हुई मां मुझे साफ नजर आ रही थीं.

मां की आंखें बंद थीं तो वे मुझे नहीं देख पा रही थीं मगर मुझे उनकी मदमस्त नंगी जवान काया साफ दिख रही थी.

मां बस अपनी चूत में 2 उंगलियों को डाल कर आगे पीछे कर रही थीं.मैं अपने कमरे में दरवाजे की आड़ में खड़ा था और मां की चुत को देख कर अपने खड़े लंड को मुठिया रहा था.

मां अपने एक हाथ से अपने चूचों को दबा रही थीं.उनके होंठ उनके दांतों से कुचले जा रहे थे.अगले 5 मिनट में मां ने अपनी चुत से शायद पानी छोड़ प्रिया था क्योंकि वे हल्की आवाज में आह आह करती हुई निढाल होती जा रही थीं.

उनके स्खलन के साथ ही मैं भी अपने लंड से पानी छोड़ चुका था.मैं झट से अपने बिस्तर में आ गया और सो गया.

जब मैं सुबह उठा तो मेरा मां को देखने का नजरिया बदल गया था.मैं बिस्तर में लेटे हुए ही रात का दृश्य याद करने लगा और मेरी नजरों के सामने नंगी मां के दोनों अवस्था के चित्र चलने लगे.

एक तो वह दृश्य … जब वे मां पापा के नीचे दबी हुई चुद रही थीं और दूसरा वह सीन, जिसमें वे अतृप्त अवस्था में बाथरूम में आकर अपनी चुत में उंगली करके खुद को संतुष्ट करने का प्रयास कर रही थीं.

यह सब याद करके मैंने पहले मां के नाम की मुट्ठी मार ली.उसके बाद मैं तैयार होकर बाहर किचन में आया तो देखा मां खाना बना रही थीं और पिताजी नाश्ता कर रहे थे.

तभी पिता जी के मोबाइल पर उनके ऑफिस से बॉस का फोन आया.वे जल्दी जल्दी नाश्ता खत्म करके खड़े हो गए और अपने रूम में चले गए.उन्होंने एक बैग तैयार किया और मुझे अपने रूम में बुलाया.

मैंने पूछा- क्या हुआ पापा? आप कहीं जा रहे हैं क्या?पापा बोले- हां बेटा, मुझे एक महीने के लिए दुबई जाना पड़ रहा है. ऑफिस का बहुत जरूरी काम है. तू अपनी मम्मी का ख्याल रखना!

इतने में मम्मी भी वहां आ गईं.वे हमारी सारी बातें सुन चुकी थीं.

मम्मी ने पापा से सिर्फ इतना कहा- आप अपना ख्याल रखना.इतना कहकर वे पापा से गले लग गईं और रोने लगीं.

थोड़ी देर बाद बाहर कंपनी की गाड़ी आ चुकी थी.पापा उसमें बैठकर चले गए.अब मैं और मां घर में अकेले थे.

मैंने सोचा कि अब मां को चोद कर उन्हें लंड का सही मायने का सुख देने का मौका आ गया है.मैं प्लान बनाने लगा और मेरी सोच यह थी कि मां की खुद की इच्छा के अनुरूप ही मैं उन्हें संभोग सुख दूंगा.

शाम को 5 बजे मैंने मां से कहा कि मां मेरे रूम का A/C खराब हो गया है.

मां ने कहा- कोई बात नहीं, आज से तू मेरे रूम में सो जाया कर. वैसे भी तेरे पापा तो एक महीने के लिए दुबई गए हैं. फिर भी कल A/C वाले को बुलाकर ठीक करवा लेंगे.

मैंने ओके कहा और बोला- मैं बाहर जा रहा हूँ!मां ने हम्म कह कर अपनी सहमति दी और मैं चला गया.

रात 8 बजे लौटा तो मैंने और मां ने साथ खाना खाया.फिर हम अपने-अपने काम में लग गए.मैं टीवी देखने लगा और मां रसोई का काम समेटने लगीं.

कुछ देर बाद मैं टीवी देखने के बाद सोने के लिए मां के कमरे में जाने की सोचने लगा.

अभी भी मां का काम खत्म नहीं हुआ था तो मैं कुछ देर के लिए और रुक गया.कुछ देर बाद मां कमरे में चली गई थीं.

तभी वाल क्लाक ने रात के 11 बजने का संकेत प्रिया तो मैं मां के रूम में आ गया.मैंने देखा मां लाल रंग की नाइटी में खड़ी थीं.

वे मुझे देख कर बोलीं- चल आ जा बेटा … सो जा, कल तेरे दादा जी आ रहे हैं.

मैं तुरंत बेड पर चला गया और सोने की एक्टिंग करने लगा.

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रात 12:30 बजे मैंने देखा कि मां पूरी तरह नींद में थीं और उनकी गांड मेरी तरफ थी.उनकी नाइटी जांघों तक ऊपर उठी हुई थी.

मैंने फौरन से हाथ बढ़ाया और नाइटी को पूरी तरह ऊपर को चढ़ा प्रिया, इससे मां की गांड दिखाई देने लगीं.मां ने ब्लैक कलर की पैंटी पहनी थी.

मैंने अपना हाथ उनकी गांड पर फेरना शुरू किया और दूसरे हाथ से अपना लौड़ा बाहर निकाल कर सहलाने लगा.मेरी मां गहरी नींद में सोई हुई थीं तो उन्हें शायद मेरे स्पर्श का आभास नहीं हुआ.

मैंने साहस किया और अपना मुँह मां की पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर लगा प्रिया.वाह … क्या मस्त, मदहोश करने वाली गंध आ रही थी.

अब मैं अपना आपा खो चुका था.मैंने मां को सीधा किया, उनके पैरों के बीच में आ गया, पैंटी साइड में की और अपना मुँह लगा कर ज़ोर-ज़ोर से चुत को चाटने व चूसने लगा.

मां का एक हाथ मेरे सर पर आ गया.वे अपनी चूत मेरे मुँह में दबाने लगीं.

उनके कंठ से मादक कराह निकली- आह … जान … आह्ह … और जोर से चूसो ना!

मैं भी मस्ती से उनकी बुर चूस रहा था.जैसे ही मां ने आंखें खोलीं और मुझे देखा, वे मुझे अपने से छुड़ाने लगीं.

मैंने कहा- क्या हुआ?वे बोलीं- नहीं बेटा … तू मेरा बेटा है … मैं तेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती!

पर मैं कहां मानने वाला था … मैं और ज़ोर-ज़ोर से उनकी चुत चूसने लगा.

मां ने कुछ देर विरोध किया … फिर उनका विरोध कमजोर पड़ता चला गया.

अब वे दोबारा से पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं.वे अब सिर्फ मुँह से विरोध कर रही थीं, पर उनका हाथ मेरे सर पर घूम रहा था.

कुछ देर बाद मां के मुँह से भी कामुक भाषा निकलने लगी और अब विरोध खत्म हो गया था.

मां बोलीं- आह … उह … ठीक से चूस अपनी मां की चूत … आह्ह … उम्ह… और तेज़ चूस मादरचोद!

जैसे ही मैंने मां के मुँह से ‘मादरचोद’ शब्द सुना, मैं रुक गया और उनके चेहरे की तरफ देखने लगा.

मां ने शरारती स्माइल दी, मुझे ऊपर खींचा और पागलों की तरह किस करने लगीं.

फिर क्या था, मैं भी मां को पागलों की तरह किस करने लगा और उनके चूचों को जोर-जोर से दबाने लगा.मां और भी कामुक हो गईं और मुझे ज़ोर से किस करने लगीं.

मैंने फटाफट मां की नाइटी उतार दी और ब्रा भी निकाल दी.अब मेरी मां सिर्फ़ काली पैंटी में थीं.

मां ने मुझे भी एकदम नंगा कर प्रिया और मेरा लौड़ा देखकर बोलीं- अरे वाह … मैंने आज तक इतना बड़ा लौड़ा नहीं देखा बेटा.

मैंने मस्ती में पूछ ही लिया- और कितनों का देखा है मां?यह कह कर मैं हंसने लगा.

मां ने मेरे लौड़े को तुरंत मुँह में लेकर ज़ोर-ज़ोर से चूसना शुरू कर प्रिया.मैं तो जन्नत में पहुंच गया था.

मां ने करीब दस मिनट तक मेरा लौड़ा चूसा. वे मेरा लंड चूसते समय बिल्कुल रंडी लग रही थीं और ऐसे चूस रही थीं मानो लौड़ा चूसने में उन्होंने पीएचडी कर रखी हो.जैसे ही मैं झड़ने वाला था, मैंने मां को रोका और बोला- अब मेरी बारी!

वह हंस दीं और चित लेट गईं.

मैंने उनकी पैंटी उतारी और चूत चाटने लगा.पांच मिनट में ही मां ने अपना पानी छोड़ प्रिया.मैंने उनकी चुत से टपका सारा रस चाट लिया.

अब हम दोनों 69 की पोज़ीशन में आ गए.मैं मां की चूत चाट रहा था और मां मेरा लंड चूस रही थीं.

हम दोनों ने करीब पांच मिनट तक एक-दूसरे को चाटा.इस दौरान मां एक बार फिर से झड़ चुकी थीं.

अब मेरी बारी थी, मैंने मां के मुँह में ही अपना पूरा माल छोड़ प्रिया.फिर हमने दस मिनट तक गहरी लिप-किस की.

उसके बाद मैंने मां को लिटाया और अपना लौड़ा उनकी चूत की फांकों पर रगड़ने लगा.

मां एकदम से बेकाबू होकर बोलीं- अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा बेटा … जल्दी से ये मोटा लौड़ा अपनी मां की चूत में डाल दे … आह्ह… फाड़ दे अपनी मां की चुत और कर दे ठंडी अपनी इस रंडी मां को!

मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा तो लौड़ा आधा अन्दर घुस गया.मां चीख पड़ीं- उईई मां … मर गई रे … ओह्ह … बाहर निकाल बेटा … नहीं तो मैं मर जाऊंगी … प्लीज़ बेटा, थोड़ी रहम कर अपनी मां पर!

पर मैंने उनकी एक न सुनी और एक और ज़ोरदार व करारा धक्का दे मारा.मेरा पूरा लौड़ा मां की चूत के अन्दर समा गया था और मां की चूत पूरी तरह फट चुकी थी.

मां की आंखों से आंसू बह रहे थे.मैं थोड़ी देर रुका रहा, उनके साथ लिप-किस करता रहा.

जब मां ने नीचे से अपनी गांड ऊपर उठाकर हिलाना शुरू किया तो मैं समझ गया कि मां को मजा आने लगा है.मैंने भी ज़ोर-ज़ोर से झटके देने शुरू कर दिए.

दस मिनट बाद मैंने मां को अपने ऊपर आने को कहा.मां फट से मेरे ऊपर चढ़ गईं और उन्होंने मेरा लंड पकड़ कर अपनी प्यासी चुत की फांकों में रगड़ना चालू किया और एकदम से पूरा लौड़ा अपनी चूत में समा लिया.

इस बार मीठी आह निकालने की बारी मेरी थी.मेरी मां मेरे लंड के ऊपर झूला झूल रही थीं और वे मुझे अपने रसीले दूध चुसवाती हुई चुदाई का मजा ले रही थीं.

वे कुछ ही देर बाद मेरे लौड़े के ऊपर जोर जोर से कूदने लगी थीं और मैं भी अति उत्तेजित अवस्था में नीचे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था.

उनके उछलते चूचों को मैं जोर जोर से दबा रहा था और बारी बारी से दोनों मम्मों को चाट चूस रहा था.

फिर कुछ देर बाद मां झड़ गईं और मेरे ऊपर निढाल हो गईं.Xxx बेटा माँ सेक्स में मेरा अभी बाकी था, तो मां को अपने ऊपर से उठा कर घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा.

इसी बीच मैंने उनकी गांड में एक उंगली डाल दी.

गांड में उंगली डालते ही मुझे समझ में आ गया कि मां की गांड भी चुदी हुई है.उनकी मखमली गांड ऐसी लग रही थी, जैसे किसी ने पहले भी चोदी हो.उनकी गांड का छेद एकदम ढीला गुलगुला सा था.

मां पूरी चुदासी बनकर मेरे लौड़े से चुत चुदवा रही थीं और मीठी आहों में कराह रही थीं.

मैंने सही मौका समझ कर पूछ ही लिया- मां, आपकी गांड किस-किस ने मारी है?मां हांफती हुई बोलीं- बेटा … कई लोगों ने मेरी गांड मारने की कोशिश की … पर बहुत कम लोगों का ही अन्दर तक गया है!

ये सुनकर मैं चौंक गया और तेज़-तेज़ चोदने लगा.मां इस बीच दो बार झड़ चुकी थीं. अब वे तीसरी बार अपने चरम पर थीं और मैं भी पूरा जोर लगा रहा था.

आख़िरकार मैं और मां दोनों एक साथ झड़ने लगे.मैंने अपना पूरा वीर्य मां की चूत में खाली कर प्रिया.

मां की पूरी चूत मेरे वीर्य से लबालब भर गई थी और वीर्य उनके पैरों से होता हुआ बह रहा था.फिर हम दोनों करीब एक घंटे तक नंगे, एक-दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े रहे और किस करते रहे.

उस रात हमने कुल तीन बार चुदाई की.मैंने दो बार मां की चूत मारी और मुझे औरतों कीगांड मारने की ललकथी तो एक बार पूरी तरह से उनकी गांड भी मारी.

चुदाई के बाद मां ने रहस्योद्घाटन किया कि वे काफी दिनों से मेरे लंड से चुदने की सोच रही थीं.रात को बाथरूम में दरवाजा खोल कर चुत में उंगली करने की कोशिश भी इसी दिशा में उनका एक कामुक प्रयास था.

मैं अपनी मां की चुदाई से बहुत खुश हो गया था.

दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आपको भी मेरी मां की चुदाई की कहानी अच्छी लगी होगी.प्लीज मुझे जरूर बताएं कि आपको Xxx बेटा माँ सेक्स कहानी कैसी लगीsupport@mohakkisse.com

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