वेट पुसी फक स्टोरी में मेरी गर्म बीवी ने मेरे घर में मौजूद होते हुए अपने पुराने बॉयफ्रेंड का लंड अपनी चूत में लेकर गंदा सेक्स किया.
पिछले भागमेरी बीवी की चुदाई उसके यार से
से आगे वेट पुसी फक स्टोरी:
मैंने देखा कि संजू की चाल बदल गई थी, उसे चलने में दिक्कत हो रही थी।हो भी क्यों ना, 4-5 बार चुदवा चुकी थी वो!मैं बोला, “मुझे थोड़ी नींद आ रही है, मैं सो लेता हूँ।”दिनेश अपने कमरे में चला गया और मैं आँखें बंद करने का नाटक करने लगा।
संजू कुछ घरेलू काम करने लगी।10-15 मिनट बाद संजू बाथरूम के अंदर गई और दरवाजा बंद करने ही वाली थी कि दिनेश भी जबरदस्ती अंदर घुसने लगा।
ये सब मैंने अधखुली आँख से देख रहा था क्योंकि बाथरूम मेरे रूम से सटे ही था।
संजू बार-बार उसे धकेल रही थी बाहर ही रहने को, पर दिनेश मान ही नहीं रहा था।
आखिरकार अंदर से दरवाजा बंद होने की आवाज आई।
मैं झट से उठा और बाथरूम के दरवाजे पर अपना कान सटा दिया।
मैंने देखा बाथरूम के दरवाजा के पास थोड़ा से दरवाजा क्रैक के वजह से छेद हो गया था जिससे अंदर का नजारा साफ दिख रहा था।
दिनेश संजू को पीछे से दबोचे हुए था और संजू कसमसा रही थी और फुसफुसा के बोली, “ये आप क्या कर रहे हैं? मेरा पति अभी घर में ही है! अगर वो जाग गए और ये सब जान गए तो मुझे घर से निकाल देंगे। प्लीज! मुझे छोड़िये और निकलिये यहाँ से!”
दिनेश बोला, “अरे! अभी नहीं जगेंगे। देखो! मैं पूरा बेचैन हो रहा हूँ, मेरा नहीं निकला है ना इसलिए, प्लीज! मेरा भी तो ख्याल करो!”
संजू बोली, “ख्याल किया तभी तो सुबह से 4-4 बार जी भर के सेक्स करने दिया!”
संजू लाचारी में बोली, “प्लीज! जाईये यहाँ से!”दिनेश कुछ भी समझने को तैयार नहीं था।
उसने पीछे से ही संजू के नाइटी को ऊपर कर दिया।संजू अंदर से नंगी थी।
और फिर पीछे से ही संजू की चूत में लंड घुसाने का प्रयास करने लगा पर वो घुस नहीं पा रहा था।संजू भी समझ गई कि वो बिना झड़े शांत नहीं होगा.
तो वो बाथरूम के मेन नल के पास अपने हाथों का पकड़ बनाते हुए थोड़ा ऊपर से आगे की ओर झुक गई और गांड को पीछे कर दी।
क्या गांड थी मेरी बीवी की! काफी उभरा हुआ और गोरी-गोरी!
दिनेश ने अपने हाथों पर 2 बार थूका और इस थूक को संजू की चूत में लगाया और फिर अपने लंड को पीछे से ही संजू की चूत में सेट किया और एक ही बार में घुसेड़ दिया।
संजू दर्द से तड़प उठी और जोर से कराह उठी, “आह हहहह!”दिनेश बोला, “क्या हुआ?”संजू मासूम सा चेहरा बनाते हुए बोली, “यार! ऐसे घुसाइयेगा तो दर्द करेगा ही ना!”
दिनेश अपना लंड संजू की चूत से निकाल लिया और मायूस होकर बोला, “छोड़ दो, मैं अब और तुम्हें तकलीफ नहीं दूँगा। मैं मुठ मार कर इसे गिराने का प्रयास करता हूँ।”
फिर संजू दिनेश का मुरझाया चेहरा देखकर बोली, “यार! क्या आप जल्दी निकाल सकते हो?”दिनेश बोला, “प्रयास करूँगा!”
संजू ने अपनी नाइटी को उठा ली और फिर से नल के सहारे गांड को पीछे करते हुए खड़ी हो गई।दिनेश ने इस बार धीरे से अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
संजू थोड़ा चिहुँकी पर शांत हो गई।दिनेश अब धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा।
2-3 मिनट बाद ही संजू भी पूरा गर्म हो गई, वो भी अब सिसकारी भरने लगी।वो बोली, “जल्दी कीजिये! मेरा पति जग जायेंगे तो दिक्कत हो जायेगी!”
इस पर दिनेश ने अपना लंड बाहर निकाला और संजू को अपने सामने किया।
दिनेश का लंड पूरा खड़ा था और उसके लंड पर पूरा कामरस लगा हुआ था।
अब दिनेश ने संजू के एक टांग को उठा कर अपने कमर पर लगाया और लंड को उसकी चूत में घुसा दिया।लंड घप से चूत में चला गया!
अब दिनेश संजू के होंठ को चूसने लगा और अंदर से चूत चोदने लगा।
दोनों काफी वासनामय हो गए थे।
दोनों एक-दूसरे के मुँह और जीभ को खा जाने की स्थिति में किस कर रहे थे।
एकाएक मुझे फिर कुछ खुराफात सूझी, मैंने फिर से अपने रूम में जाकर संजना को आवाज लगाई, और फिर आकर अंदर देखने लगा।
इस आवाज से दोनों हड़बड़ा गए और संजू ना चाहते हुए भी दिनेश के लंड को अपने चूत से निकाल दी।दोनों ही ये बिल्कुल भी नहीं चाहते थे, पर वो कोई लफड़ा नहीं चाहती थी।
लंड निकलते ही दिनेश घबरा गया।
दिनेश का लंड जो कि रॉड की तरह टाइट था, उसमें संजू की चूत का पूरा पानी चमक रहा था और पानी टपक भी रहा था।संजू घबराकर बोली, “मैं बोली थी ना कि बर्दाश्त करो! कहीं इस हालत में वो देख लिये तो आफत हो जायेगी!”
संजू बाथरूम से ही मुझे बोली, “आ रही हूँ, बाथरूम में हूँ!”दिनेश बोला, “मैं प्यासा मर जाऊँगा!”संजू बोली, “क्या करूँ? मजबूर हूँ!”
ये कहकर दरवाजा खोलकर आश्वस्त हो ली कि मैं रूम में हूँ और चुपके से दिनेश को बाहर भेजकर स्वयं बाहर आ गई और मेरे पास आ गई।
मैंने बोला, “थोड़ा पानी लाना।”वो पानी ले आई, मैंने पानी पिया।
दोनों का चुदाई देखकर मैं भी पूरा वासनामय हो गया था।
एकाएक मैंने उसे बेड पर खींच लिया और उसे किस करने लगा।वो तो पहले से ही पूरा उत्तेजित थी, तुरंत मेरा साथ देने लगी।वो बुरी तरह से मुझे किस कर रही थी।
एकाएक उसने मेरे पैंट को शरीर से अलग कर के मुझे नंगा कर दिया और मेरे लंड को चूसने लगी और फिर अपना नाइटी उतार दी और पूर्णतः नंगी हो गई।
मैंने देखा उसका चूत के आसपास काफी पानी लगा हुआ था और रिस भी रहा था।
मैंने अनजान बनते हुए पूछा, “संजू! तुम्हारे चूत से इतना पानी कैसे निकल रहा है?”वो झेंपते हुए बोली, “बहुत मन कर रहा था सेक्स के लिए, इसलिए कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा था।”
ये कहकर वो मेरे लंड पर बैठने ही वाली थी कि मैंने बोला, “रुको ना! तुम्हारा चूत देखने का मन कर रहा है आज।”वो झेंपते हुए बोली, “छोड़िये! डायरेक्ट सेक्स करते हैं ना, बहुत प्यासी हूँ!”
पर मैंने उसे पीठ के बल बेड पर लिटा दिया और चूत को निहारने लगा।बाथरूम में दिनेश के चुदाई से अभी भी संजू की चूत कुछ खुली खुली ही थी।
चूत के आसपास काफी मात्रा में पानी लगा हुआ था।यहाँ तक कि उसकी चूत के छेद के आसपास दिनेश के चुदाई के दौरान संजू की चूत से निकल रहे पानी में दिनेश के लंड घर्षण के वजह से जो सफेद-सफेद झाग बना था, वो भी लगा हुआ था।
परंतु मैंने जानबूझकर संजू को इस बारे में नहीं बताया।संजू की चूत को मैंने जैसे ही छुआ, उसके मुँह से “ईससस” की आवाज निकल गई।
मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी, जो बहुत ही आराम से अंदर चला गया।
वो बोली, “जल्दी डालिए ना!”पर मैंने अपना लंड नहीं डाला।
उसने कामातुर होकर मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड को सेट करके घप से चूत में घुसा ली और लगी जोर-जोर चोदने और मुँह से “आह….. ईससस” निकालने लगी।
संजू हवस में कुछ ज्यादा ही आवाज निकाल रही थी।इसी बीच मैं जो कि पीठ के बल लेटा था और मेरा मुँह दरवाजा के तरफ था, परदे के पीछे दिनेश को छुप के देखते हुए देखा।
हम लोग दरवाजा बंद करने भूल गए थे।
मैं जानबूझकर उसे दिखाने के लिए नीचे से कमर उठा-उठा कर जोरदार शॉट मारने लगा।संजू भी अब जल्द मुकाम तक पहुँचना चाहती थी, वो भी उसी स्पीड से मेरे लंड के ऊपर उठक-बैठक करने लगी।
इससे उसकी दोनों चुची बुरी तरीके से उछल रही थी और चूत से भी फच-फच की आवाज आ रही थी।
मैंने चोर आँखों से बिना दिनेश को पता हुए उसे देखा.वो संजू को मेरे साथ इतनी मस्ती से चुदाई करते देख अपना लंड हिला रहा था।
संजू अब उसी अवस्था में मेरे ऊपर लेट गई और मुझे कस के पकड़ ली जिससे उसकी चुची मेरे सीने से दब गई और फिर वो मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी गांड मेरे लंड पर पागलों की तरह पटकने लगी।
इससे उसकी आवाज भी बढ़ गई और वो चरम में पहुँच गई और जोरदार तरीके से झड़ने लगी और झड़कर मुझसे लिपट गई।
मेरा अभी तक हुआ नहीं था, मैंने उसे कहा, “बड़ी जल्दी झड़ गई!”वो मुस्कुराकर बोली, “बहुत मन कर रहा था, इसलिए।”
मैंने उसे बोला, “अब मेरी बारी!”और ये कहकर मैंने उसे बेड पर ही घोड़ी बना दिया।अब उसका मुँह दरवाजे के तरफ हो गया।
मैंने उसे इसी घोड़ी की अवस्था में ही अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और लगा चोदने।
4-5 मिनट के चुदाई के बाद वो मेरा साथ देने लगी.तभी उसकी नजर परदे के पीछे झाँक रहे दिनेश पर पड़ी, जिससे वो थोड़ा संयमित हुई।
संजू को बुरा लगा कि वो दिनेश को तड़पता छोड़कर यहाँ चुदाई कर रही है, इस वजह से वो मुझे झूठ बोली, “सुनिये ना! अब छोड़ दीजिये ना, मैं थक गई हूँ।”
मैं समझ गया कि ये क्यों ऐसा बोल रही है।
मैंने पूछा, “अभी तो बड़ा मजे से चुदा रही थी, अभी क्या हो गया?”वो बोली, “नहीं! ऐसी बात नहीं है पर मैं थक गई हूँ।”
मैंने बोला, “और मेरा कैसे निकलेगा?”वो बोली, “जल्दी निकाल दीजिये ना!”
मैंने मौके की नजाकत देखते हुए संजू को पीठ के बल लिटा दिया और ऊपर आकर उसे बेतहाशा चोदने लगा।इससे संजू को भी मजा आ रहा था, पर वो चाहते हुए भी अपने आशिक के सामने मुझसे नहीं चुदना चाहती थी।
मैं अब जोर लगाते हुए 2-3 मिनट में ही उसकी चूत में ही बेतहाशा झड़ने लगा।मेरे लंड से काफी सारा वीर्य उसकी चूत में गिरने लगा।
उसके चेहरे से दिख रहा था कि वो और चुदना चाहती थी, पर वो मजबूर थी।
मैं वीर्य गिराकर उसकी चूत में ही लंड डालकर उसके ऊपर लेट गया।
करीब 5 मिनट तक ऐसे ही लेटा रहा कि अचानक मेरे मोबाइल की घंटी बजी।मैंने उसकी चूत से लंड निकाला तो कुछ वीर्य की बूंदे बाहर टपकी पर संजू के गांड के नीचे तकिया लगा रहने से अधिकांशतः वीर्य उसकी चूत में ही रहा।
मैं मोबाइल उठाया तो पाया कि मेरा एक पड़ोसी का फोन आया था और उसने मुझे मैसेज किया- लगता है बिजी हैं, कल बात करते हैं।पर मैंने जानबूझकर अपनी बीवी को बोला, “रमेश बुला रहा है, कुछ काम है। आता हैं कुछ देर में।”
और मैं ये कहकर घर से निकल गया।और जाकर अपने बेडरूम के खिड़की में छुपकर देखने लगा।
मेरे निकलने के 2 मिनट बाद ही दिनेश मेरे बेडरूम में आ गया।
उसने गंजी और हाफ पैंट पहना हुआ था।
संजू अभी भी पूरा नंगी ही बेड पर लेटी हुई थी और उसके बदन पर सिर्फ 1 चादर ढकी हुई थी।
दिनेश ने आकर ही ताना मारा, “वाह मेरी जान! मैं यहाँ प्यासा तड़प रहा हूँ और तुम मजा लूट रही हो! ये तो अच्छी बात नहीं है ना!”संजू की आँखें बंद थीं, वो आँखें खोलकर बोली, “मैं क्या कर सकती हूँ? वो मेरा पति है, उनका हक है मेरे ऊपर। मैं ना नहीं कह सकती ना उनको।”
दिनेश बोला, “लेकिन जान! मैं कब से तड़प रहा हूँ, उसका तो इलाज करो!”संजू मुस्कुरा कर बोली, “तो रोका किसने है?”
दिनेश को तो इसी का इंतजार था।उसने संजू के बदन से चादर उठा कर फेंक दी।
संजू की गदराई जवानी उसके आँख के सामने निर्वस्त्र थी।वो कामातुर दिनेश फट से संजू के ऊपर चढ़ गया और उसके होंठ से होंठ सटा कर चूसने लगा।
संजू भी पहले से ही गरम थी, वो भी उसका साथ देने लगी।अब दिनेश संजू के बड़ी बड़ी चूचियों का मर्दन करने लगा और उसके गर्दन पर किस करने लगा।संजू सिसकारी भरने लगी।
अब दिनेश संजू के बगल के आर्मपिट को चाटने लगा जिससे संजू को गुदगुदी हुई।संजू हँसकर बोली, “अरे! छोड़िये, वहां गुदगुदी होती है।”
दिनेश हवस से पागल हो गया था।वो अब चुची को चूसते-चूसते दांत से भी काट लेता था, जिससे संजू को दर्द भी होता था।
संजू बोली, “आराम से कीजिये!”पर वो कहाँ मानने वाला था।
अब दिनेश उठा और अपना गंजी और पैंट खोल कर दूर फेंक दिया।उसका लंड फुफकार मार रहा था।
इसी बीच संजू भी नंगी उठी और बोली, “मैं बाथरूम से आती हूँ।”
दिनेश पूरा वासनामय था, उसने संजू को पीछे से दबोच कर अपने शरीर से सटा लिया।संजू बोली, “अरे-अरे! छोड़िये मुझे, मैं अभी गंदी हूँ, थोड़ा साफ करके तुरंत आती हूँ।”
परंतु दिनेश ने उसे पीछे से जकड़े रखा और उसके चुची का मर्दन करते रहा और बोला, “मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है जान! मुझे तुम्हारी हरेक गंदगी अमृत जैसी लगती है!”
संजू हँस के बोली, “अरे! ये मेरी गंदगी नहीं, मेरे पति का वीर्य मेरे अंदर है! उसे मैं साफ करके आती हूँ, वो पूरा चिपचिपा रहा है अंदर।”
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