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माँ की चुदाई पठन समय: 25 मिनट पढ़ा गया: 608 बार

तीन मोटे लंड और मम्मी की अकेली चूत

धर्म रेक्स

27 Mar 2019 को प्रकाशित

तीन मोटे लंड और मम्मी की अकेली चूत
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हाय दोस्तो, मैं आज आपके सामने एक सच्ची हिंदी एडल्ट स्टोरी प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मेरी अपनी मम्मी की है.वैसे तो सभी लोग माँ की बड़ी इज्जत करते हैं लेकिन जब मम्मी ही इतनी बेशर्म हो जाएं कि वो तो हमेशा लंड के चक्कर में ही रहें, तो इसमें बेटे का क्या कसूर है.

यह स्टोरी उस वक्त की है, जब मैं स्कूल में पढ़ता था, उन दिनों मैं शाम के समय गांव के सारे बच्चों के साथ मिलकर छुपा छुपी का खेल खेलता था. उस खेल में सभी बच्चे छुप जाते थे और एक बच्चा उन सबको ढूँढता था. वो जिसको सबसे पहले पकड़ता, उसे उस बच्चे को अपनी पीठ पर बैठा कर काफी दूर तक घुमाना पड़ता था, इसलिए सभी बच्चे ऐसी जगह जाकर छुपते कि जल्दी से नहीं मिल सकें.

हम अक्सर ऐसी जगह ही छुपते थे लेकिन एक दिन मैं अपने भूसे के छप्पर में जाकर छुप गया. शाम को थोड़ा अंधेरा भी होने लगा था तो अन्दर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था.मैं काफी देर तक छुपा रहा तभी मैंने देखा कि कोई अन्दर एक परछाई सी दिखाई पड़ी तो मैंने सोचा कि शायद कोई लड़का मुझे ढूँढने आया है, तो मैं और भी ज्यादा अपने को छुपाने के लिए दुबक गया.

मैंने देखा कि वो परछाई मेरे से दूसरे वाले कोने में जाकर रूक गई.मैं तो एकटक उसे ही देख रहा था कि कुछ ही देर में दूसरी परछाई भी आई और उसने कुछ खुसुर फुसर की सी आवाज में कहा- भाभी कहाँ हो?तो मुझे लगा कि यह तो मेरे चाचा की आवाज है. तभी दूसरी तरफ सें आवाज आई कि “इधर आ जाओ.”

अब मैं समझ गया था कि ये तो मेरी मम्मी और चाचा हैं. लेकिन ये यहां क्या कर रहे हैं.मेरे दिमाग में न जाने क्या क्या विचार आने लगे लेकिन मैं तो बस अपलक उन्हें ही देखता रहा. अन्दर कुछ साफ तो नहीं दिख रहा था लेकिन उनकी परछाई से लग रहा था कि वो जरूर कुछ अलग ही कर रहे हैं.

जब मैं लगातार देख रहा था तो कुछ समझ में आने लगा कि चाचा मम्मी को दीवार के सहारे खड़ा करके अपनी कमर आगे पीछे कर रहे हैं और मम्मी ‘सीइइ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय..’ कर रही हैं.मेरी तो कुछ समझ में नहीं आया कि वो क्या कर रहे हैं और मम्मी ‘सीईइइ आह…’ क्यों कर रही हैं.

करीब 20 मिनट के बाद चाचा ने मम्मी को छोड़ा तो मम्मी दरवाजे की तरफ आकर अपने कपड़े ठीक करके बाहर चली गईं. चाचा ने कुछ सामान ऊपर हाथ करके छप्पर की छान के नीचे रख दी और वो भी बाहर चले गए.

मैं यह सब देख कर आश्चर्य में पड़ गया कि आखिर उन्होंने क्या किया है. खैर कुछ ज्यादा जोर ना देकर मैं घर में आ गया और खाना खाकर सोने लगा, लेकिन आज तो नींद मेरी आँखें के नजदीक भी नहीं आ रही थी. मम्मी पापा के पास सो रही थीं और चाचा खेत में चले गए थे.

वो सीन के बारे में सोचते सोचते पता ही नहीं चला कि कब सुबह हो गई और मम्मी ने मुझे जगाया.

अगले दिन मैंने देखा कि चाचा अभी खेत से नहीं आए हैं और मम्मी खाना बना रही हैं.

अब मैं आपको मेरी मम्मी कुसुम की फिगर के बारे में बताता हूँ कि मम्मी की हाईट करीब 5 फुट दो इंच है, कमर 28 इंच के करीब चूचियां 32 इंच व चूतड़ भी 30-32 के आस पास थे. मम्मी का वजन करीब करीब पचास किलो का होगा, वे एकदम छरहरी देह की हैं.

कल जहां चाचा ने कुछ सामान रखा था, मैं वहां गया और देखने लगा कि चाचा ने वहां पर क्या रखा था. मैं ढूँढने लगा तो मुझे वहां एक सफेद रंग का गुब्बारा मिला, जिसमें ऊपर से गांठ लगा कर बांधा गया था, उसमें कुछ सफेद रंग का गाढ़ा सा पदार्थ भरा था. मैंने वो पहली बार देखा था तो मैंने मम्मी से पूछने का निर्णय किया और उसे अपनी जेब में रख लिया.

घर पर आया तो मम्मी खाना बना कर फ्री हो गई थीं और वो बोलीं- बेटा आज स्कूल नहीं जाना क्या?मैंने उनकी बात को अनसुनी करते हुए कहा कि मम्मी मुझे एक चीज मिली है.“जरा दिखा तो वो क्या है?” ये कहते हुए वो मेरे पास आ गईंमैंने वो चीज निकाल कर मम्मी को दिखाई तो मम्मी उसे देखते ही चौंक गईं और बोलीं- बेटा, ये तुझे कहां से मिली है?मैंने बताया कि मम्मी यह तो अपने तूड़ी वाले छप्पर के पास पड़ी थी.वह बोलीं- बेटा यह तो गंदी चीज है, इसे यहां क्यों लाये हो.. लाओ इसे मैं बाहर फेंक दूँगी.

मम्मी ने झट से उसे मेरे हाथ से ले लिया.

शाम को जब चाचा आए तो मैं थोड़ा बाहर की तरफ जाने चला गया और फिर उनकी बातें सुनने लगा. मम्मी चाचा को डांट रही थीं- देवर जी, तुम्हें इतना भी होश नहीं है कि कौन सी चीज कहां फेंकनी चाहिए, कल कंडोम वहीं पर पटक प्रिया जो धर्म को मिल गया था, यह तो शुक्र है कि वो मेरे पास ले आया, नहीं तो किसी को पता चल जाता तो क्या होता?चाचा बोले- भाभी मैंने तो ऊपर रखा था.

खैर चाचा ने मम्मी से गलती माफ करने को कहा और खाना खाकर खेत पर चले गए क्योंकि वहां पर पानी चल रहा था.

दोस्तो, यह खेल उनका यूं ही चलता रहा. एक दिन मम्मी ने मुझे एक पैकिट प्रिया और कहा कि बेटा इसे अपने कचरे के ढेर में फेंक आओ, तो मैं उसे लेकर गया लेकिन मेरा शैतान दिमाग कुछ और ही कह रहा था तो मैंने उसे खेला तो देखा कि उसमें कुछ बालों का गुच्छा सा था जो कम से कम मम्मी के सिर के तो नहीं थे. मैं उन्हें काफी देर तक देखता रहा, फिर मैंने देखा कि उसमें एक कपड़े का टुकड़ा भी था जो खून में सना हुआ था. मैंने उन सब चीजों को कुछ देर देखा फिर फेंक प्रिया और घर आ गया.

उस दिन पापा घर पर ही थे, वे काम पर नहीं गए थे क्योंकि चाचा 15-20 दिनों के लिए बाहर गए थे.

कुछ देर बाद पड़ोस के गांव का एक आदमी आया और पापा से कहने लगा कि तुम्हारी बुआ सास बहुत बीमार हैं और वो कुसुम से मिलना चाहती हैं.

पापा ने मम्मी से कहा कि कल तुम तुम्हारी बुआ से मिल आओ.तो वो बोलीं- देवर जी भी नहीं हैं, मैं किसके साथ जाऊं?पापा ने कहा- तुम धर्म को लेकर चली जाओ.

फिर मैं मम्मी के साथ अगले दिन पास के गांव जो हमारे गांव से करीब 7-8 किमी दूर था.. के लिए तैयार होकर निकल लिया. हम दोनों जैसे ही निकले तो मम्मी ने कुछ सोच कर आम रास्ते से जाने के बजाए छोटे रास्ते से जाने का निर्णय किया जो खेतों के बीचों बीच डोल से जाता था. क्योंकि आम रास्ता दो तीन गांवों से होकर जाता था. इसलिए सीधे ही जाने का निर्णय लिया.

यह बात फरवरी माह की है. मैं मम्मी के पीछे पीछे चल रहा था, चारों तरफ गहरी ओर बड़ी बड़ी सरसों खड़ी थी जिसमें से आदमी ऊपर हाथ करे तो भी नहीं दिखता था, इतनी बड़ी बड़ी सरसों थी.

दोपहर करीब 1 बजे का समय था, हम चले जा रहे थे. मुझे कभी कभी डर भी लगता कि कोई जानवर नहीं आ जाए. लेकिन मम्मी मेरा हौसला बढ़ातीं और हम चले जा रहे थे.

हम करीब तीन चार किमी चले होंगे कि अचानक ही तीन आदमी एक डोल पर बैठे थे, जिन्हें देख कर मम्मी भी एकदम ठिठक गईं और रूक गईं.मैं भी डर गया, उनकी नजरें हमारे पर पड़ चुकी थीं और वो भी एकदम अवाक से रह गए. मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और वापस मुड़ने को कहा तो वो तीनों हमारे पास आ गए और हमसे पूछा कि हमें कहां जाना है.

लेकिन मम्मी कुछ नहीं बोलीं.उनमें से एक मम्मी के सामने आ गया और बोला कि हमने आपसे पूछा कि आप कहां जा रहे हैं लेकिन आपने कोई जवाब नहीं प्रिया.तो मम्मी थोड़ा साहस करके बोलीं कि हम कहीं भी जाएं, आपको क्या मतलब है.उसने मम्मी का एक हाथ पकड़ लिया और बोला- हमें सब मतलब है.. अगर नहीं बताओगी तो..ये कहकर उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बोला- देख कितना प्यारा बच्चा है.फिर मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ कर उसकी गोद से छुड़ाना चाहा लेकिन उससे नहीं छुड़ा सकीं.

मम्मी उनके तेवर समझ गई थीं, मम्मी बोलीं- हम तो पास के गांव जा रहे हैं.तो उनमें से एक बोला- साली, अब तो लाईन पर आई.मम्मी बोलीं- अब तो मेरे बच्चे को छोड़ो, हमें आगे जाना है.वह बोला- मेरी रानी चली जाना.. हमें तुम्हें रोक कर क्या करना है, लेकिन आज कितने दिनों के बाद तो दिखी हो, आज तो दे ही दो! बहुत मजा आता है तेरे साथ! एक मौका मिला है और यह भी बेकार चला गया तो क्या फायदा.

मम्मी ने कहने लगीं- यार मोहन, अभी जाने दो, जरूरी काम से जाना है, दो चार दिन बाद का प्रोग्राम सेट कर लेते हैं…लेकिन वो कहां मानने वाला था, मोहन बोला- मैं मान भी जाऊं तो ये भोला और शमशेर कहाँ मानेंगे, ये तो मुझसे कई बार कह चुके हैं तेरे लिए, आज इनको अपनी दिखा ही दे!

तभी एक ने इशारा किया कि इसे खेत के अन्दर ले चलो तो उसने मम्मी को हाथ पकड़ लिया और खेत के अन्दर ले जाने लगा. लेकिन मम्मी ने विरोध करते हुए कहा- आज नहीं, मुझे देर हो जाएगी… और मेरा बेटा भी देख रहा है.एक ने मम्मी को बांहों में जकड़ लिया और एक ने मुझे अपनी गोद में ले रखा था. वो हमें एक खेत के बीच में ले गए, जहां पर एक बड़ा भारी सा खेजड़ी का पेड़ था, उस पेड़ के नीचे काफी दूर तक सरसों नहीं थी.

वहां पहुँच कर वो तो साले लग गए अपने काम में. मैं बहुत घबरा रहा था कि ये क्या हो रहा है.

तभी मोहन ने मम्मी की साड़ी खोल डाली और पेटीकोट जांघों तक ऊपर सरका कर हाथ फिराते हुए बोला- वाह भोले, तेरी आज तो हमारी किस्मत चमक गई, वैसे भी मुझे इस साली की चूत मारे कई महीने हो गए हैं.उसने एक एक करके सारे कपड़े उतार कर मम्मी को बिल्कुल नंगी कर प्रिया.

भोला आगे आया और मम्मी की जांघों के बीच देख कर बावला सा हो गया और बोला- वाह मेरी रानी, क्या माल छुपा रखा है.

मैंने भी देखा कि मम्मी की चूत पर आज एक भी बाल नहीं था, एकदम सफाचट चूत थी. अब मैं समझ गया था कि कल वो बालों का गुच्छा कैसा था.

भोला मम्मी की छोटी छोटी पर टाइट चूचियों को मसल रहा था. तभी तीसरा आदमी जो शमशेर होगा, मम्मी के नाभि के नीचे के टांकों के निशान देख कर बोला- वाह यार, यह तो कुंवारी चूत के बराबर है, इसका तो बच्चा भी आपरेशन से हुआ है.

सच कहूँ तो यह बात मुझे भी आज तक पता नहीं थी कि मैं मम्मी की चूत से नहीं निकला हूँ.

आखिर मम्मी भी उनसे कब तक मुकाबला करतीं. उन्होंने हार मान ली और शांत हो गईं.

मैं तो डर के मारे चुपचाप सब देख रहा था. वो काफी देर तक मम्मी को चूमते मसलते रहे. मैंने देखा कि अब एक आदमी ने आकर मम्मी के पैरों को चौड़ा करके उनके बीच आकर चूत को सहलाने लगा और ‘वाह वाह..’ करने लगा

मैंने देखा कि मम्मी जितनी गोरे रंग की हैं उतनी चूत गोरी नहीं थी. उनकी चूत की फांकें हल्की हल्की काली सी थीं. कोई मम्मी के गाल चूम रहा था, कोई चूचियां मसल रहा था, तो एक हरामी चूत को मसल रहा था.

करीब दस मिनट के बाद वो सब भी नंगे हो गए तो मैं तो उन्हें देख कर दंग रह गया. सालों के क्या गजब लंड थे, एक से बढ़कर एक.. ये देख कर तो मम्मी भी गिड़गिड़ाने लगीं- हाय राम मैं तो मर जाऊंगी.. तुम्हारे तो बहुत मोटे लंड हैं.

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मम्मी के मुँह से लंड सुन कर तो उनको और भी जोश आ गया.

फिर वो आपस में बातें करने लगे. भोला बोला कि यार मैं तो पहले इससे लंड चुसवाऊँगा और आगे आकर मम्मी के मुँह पर अपना लंड रखने लगा. उसका नाम रतन था.

मम्मी तो जैसे डर ही रही थीं. साले का क्या लंड था.. काला मूसल जैसा, जिस पर लाल रंग का टमाटर जैसा सुपारा था, लंड भी पूरा बालिश्त भर लम्बा होगा.. करीब 9 इंच लम्बा और ढाई इंच से भी ज्यादा मोटा. मम्मी की आंखें के सामने आते ही मम्मी की तो आंखें ही बंद हो गईं. भोला मम्मी के मुँह में लंड डालना चाह रहा था लेकिन मम्मी ने अपना मुँह भींच लिया था.

तभी मोहन सामने आया, उसका लंड भी कम नहीं था. करीब 7 इंच लम्बा लेकिन उसका सुपारा ज्यादा मोटा नहीं था. उसका लंड बीच में से थोड़ा टेढ़ा था.तीसरा शमशेर उसका लंड भी करीब 5-6 इंच के आसपास ही था, लेकिन उसका सुपारा काफी मोटा था. मम्मी उन्हें देख कर ही घबरा रही थीं.

मैं समझ गया था कि आज मम्मी की खैर नहीं है. इनमें भोला का लंड सबसे बड़ा था. फिर उन्होंने काफी कोशिश की लेकिन मम्मी ने मुँह में नहीं लिया तो शमशेर बोला- चलो साली की चुदाई करते हैं.

ये कह कर वह मम्मी के बगल में आकर लेट गया और मम्मी की एक टांग को अपने हाथ से उठा कर मम्मी के मम्मों की तरफ किया और एक टांग को अपनी जांघों में लेकर लंड को चूत के पास ले आया. वो एक हाथ से लंड को मम्मी की चूत पर मसलने लगा. मम्मी अब भी थोड़ा विरोध कर रही थीं लेकिन जब शमशेर ने जैसे लंड को चूत पर टिकाया, तो लंड अन्दर नहीं जा रहा था. मम्मी की चूत शायद एकदम टाईट हो रही थीं. इसी तरह शमशेर ने दो तीन बार प्रयास किया, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. उसने मोहन से कुछ कहा तो उसने आकर मम्मी की टांगों को कस कर पकड़ लिया.अब शमशेर ने सुपारा चूत के छेद पर रखा और कमर का एक झटका लगाया तो सुपारा सरसराता चूत में दाखिल हो गया.

एक बार तो मम्मी छटपटाईं, लेकिन दूसरे झटके में आधे से भी ज्यादा लंड अन्दर समा गया. अब मम्मी भी ढीली पड़ गईं और तीसरे झटके में तो लंड जड़ तक चूत की गहराई में खो गया.तीसरा झटका इतनी जोर का था कि मम्मी की चीख निकल गई. ‘उइइइ.. मर गइइइ.. हाययय.. रे र.. माररर.. डालाआ.. रेर..’

तभी मोहन ने उनका मुँह भींच लिया. मम्मी की आंखों में आंसू आ गए. लेकिन उन लोगों को कोई फिक्र नहीं थी. अब वो धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा तो मैंने देखा कि अब मम्मी बिल्कुल शांत थीं.

मैं देख रहा था कि लंड को टोपे को चूत की फांकों तक लाता और एक ही झटके में अन्दर कर देता. मम्मी हर झटके के साथ ‘उई आह सीईइइ..’ करने लगीं. लंड जब बाहर आता तो अन्दर से लाल लालखरबूजे के जैसी गिरी को बाहर लाता और अन्दर कर डालता.

शमशेर भी अब ‘हाय सीईइइइ..’ करने लगा तो मोहन बोला- साले अभी अन्दर मत डालना.. साले चूत गीली कर देगा तो मजा नहीं आएगा.यह सुन कर मम्मी गिड़गिड़ाईं और बोलीं- प्लीज अन्दर मत डालना, कल ही मेरा पीरियड खत्म हुआ है.

शमशेर पेल ही रहा था कि अब भोला आ गया और बोला- हट अब मैं करता हूँ.शमशेर ने जैसे लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कि साले का लंड चूत का पानी पी कर तो और भी भयंकर हो गया था. लंड के बाहर आते ही चूत का मुँह खुला का खुला रह गया और अन्दर की लाल दरार साफ दिखने लगी.शमशेर के हटने के साथ ही भोला ने मम्मी के दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया, जिससे अब मम्मी के दोनों पैर आसमान की तरफ हो गए और चूत उभर कर ऊपर हो गई.

भोला ने अपना मोटा लंड मम्मी की चूत पर रख कर कमर का एक जोरदार झटका मारा तो वो फिर से चिल्लाईं- अइरेर.. मार डाला रेर.. हाय एक बार बाहर निकालो.. मेरी तो फट गई रेररर..मैंने देखा कि वो मूसल मम्मी की चूत में एक ही झटके में जड़ तक अन्दर चला गया.मम्मी छटपटाने लगीं- मररर.. गईइइ.. निकालो इसे हायय..

लेकिन अब भोला भी अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा और कुछ ही देर में अपनी स्पीड बढ़ा कर पेलने लगा. जब भोला ठाप मारता तो मम्मी के मुँह से ‘हा हाहहाहाहा.. हाह..’ की आवाज निकलती और ‘थपथप..’ की आवाज आ रही थी. अचानक ही मम्मी के मुँह से जोरदार सिसकारी निकलने लगी- सीइइ..इइइ इइ..मुझे लगा कि अब मम्मी भी इस चुदाई का पूरा मजा ले रही हैं. भोला के ठाप के साथ मम्मी भी चूतड़ उचका कर उसका साथ दे रही थीं. तभी चूत से फचाफच पानी आने लगा. लेकिन यह क्या मम्मी कुछ ही देर में शांत हो गईं. भोला भी करीब दस मिनट तक पेल कर हट गया.

अब मोहन का नम्बर आया तो उसने मम्मी को बोला- रानी, अब तू घोड़ी बन जा.उसने मम्मी को घोड़ी बना कर खुद घोड़े की तरह मम्मी के पीछे आ गया और अपने मोटे सुपारे को चूत के छेद पर रख कर धक्का मारा कि मम्मी का मुँह तो जमीन पर टिक गया.

एक बार मम्मी फिर चिल्लाईं- हायय.. सालों ने आज तो मार डाला रे.. धीरे कर लो..लेकिन मोहन ने मम्मी की कमर को पकड़ कर धक्के लगाना स्टार्ट कर प्रिया फिर ‘थपथप.. खचफच..’ की आवाज आने लगी.

मम्मी तो बस कबूतरी की तरह फड़फड़ा रही थीं. अब तक तीनों की चुदाई से मम्मी कई बार झड़ चुकी थीं, इसलिए अब मम्मी को मजा नहीं आ रहा था.

मोहन भी करीब 15 मिनट के बाद ‘हाय सीईइइ..’ करने लगा और उसने अपनी स्पीड तेज कर दी. फिर अचानक ही मोहन 10-15 ठापें मारके शांत होने वाला ही था कि शमशेर ने उसे हटा प्रिया और उसने मम्मी को जमीन पर चित्त लिटाकर मम्मी की दोनों टांगों को ऊपर करके एक बार फिर से लंड अन्दर डाल प्रिया. मैं देख रहा था कि अब मम्मी रबर की गुड़िया की तरह उनके इशारों पर कर रही थीं, जैसे वो चाह कर रहे थे.

तभी शमशेर ने जोर जोर से ठाप लगाई और 25-30 कस के ठापें मारीं और शांत हो गया.मम्मी के मुँह से ‘आहहहह.. ये क्या कर रहे हो.. तुम्हें मना किया था… हे भगवान मैं तो मर गई रेर..’

वो शमशेर को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगीं, लेकिन शमशेर ने उन्हें इस पोजिशन में जकड़ा हुआ था कि मम्मी छटपटाने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकती थीं.

मैंने देखा कि शमशेर अपनी गांड भींच रहा था. वैसे ही मम्मी ‘हाय सीई..’ कर रही थीं. वो मम्मी के ऊपर निढाल होकर गिर पड़ा था.

तभी मोहन ने उसे हटाया और वो मम्मी के ऊपर से हटा और लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कि अब उसका लंड मुरझा गया है.

फिर मैंने मम्मी की चूत को देखा तो देखता ही रह गया साले ने क्या हालत बना दी थी. मैंने देखा कि चूत का दरवाजा काफी खुला हुआ था, उसमें से सफेद सफेद गाढ़ा पदार्थ रिस रहा था. शमशेर एक तरफ हट गया तो अब मोहन ने भी लंड चूत में डाला तो जैसे उसका लंड अन्दर गया तो चूत से एक सफेद पदार्थ की पिचकारी निकली क्योंकि शमशेर का वीर्य चूत से पूरी तरह निकला नहीं था. मोहन के मोटे लंड की वजह से सारा रस बाहर निकलने लगा.

अब मोहन ने ठाप मारना स्टार्ट कर प्रिया तो मम्मी फिर बड़बड़ाने लगीं- प्लीज अन्दर मत डालो.. प्लीज..लेकिन मोहन तो ठाप मारे जा रहा था और कुछ ही देर में वो भी शमशेर की तरह ही मम्मी पर औंध गया और वो भी अपनी गांड को खुल्लु भिच्चु करने लगा. मम्मी तो एकदम निढाल हुई पड़ी थीं.

जैसे मोहन हटा तो उसका लंड खचाक की आवाज करता हुआ बाहर आया. अब तो चूत का बुरा हाल हो रहा था. वीर्य अपने आप ही बहने लगा.

अब बारी थी भोला की, वो भी उसी पोजिशन में मम्मी के ऊपर चढ़ गया और ठाप मारने लगा. मम्मी की चूत वीर्य से भरी थी, इसलिए उसका लंड फसर फसर चल रहा था. वो दोनों अब भी मम्मी की चूचियां दबा रहे थे और भोला ठाप पर ठाप मार रहा था.

मम्मी भी अब शांत हो गई थीं, उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी. मम्मी का पूरा शरीर ढीला हो चुका था. कुछ देर बाद भोला मम्मी के ऊपर से हटा तो सभी ने मेरी मम्मी की चूत की तरफ देखा, जिसका बुरा हाल हो चुका था. उसमें से गाढ़ा गाढ़ा वीर्य रिस रहा था.

फिर उन्होंने थोड़ा पानी लेकर मम्मी के मुँह में डाला और छींटे मारे तो मम्मी के शरीर में कुछ हरकत हुई. मम्मी उठ कर बैठी.मोहन बोला- कुसुम यार, मजा आ गया बहुत दिनों के बाद तेरी चूत चोद कर!मम्मी बोली- हरामी, तुझे पहले कभी मना किया था? आज मुझे जल्दी जाना था और तूने देर करवा दी.वे तीनों खींसें निपोरते हुए चले गएऔर मेरी मम्मी की चूत चुद गई.

हमें अभी तो 2 किमी और जाना था. मैंने मम्मी को पानी पिलाया और उन्हें उठाया तो मम्मी जैसे ही बैठीं उनकी चूत से खून के साथ ढेर सारा वीर्य टपक गया.. जो जमीन पर सफेद रंग का गिर रहा था.

करीबन आधे घंटे के बाद मम्मी कपड़े पहन कर चलने लगीं, लेकिन मम्मी से चला भी नहीं जा रही था. वो बड़ी मुश्किल से धीरे धीरे कदम रख रही थीं. हम जैसे तैसे बुआ के घर 7 बजे तक पहुँचे.

तो उस समय तक तो मम्मी का बुरा हाल हो चुका था. मम्मी तो जाते ही चारपाई पर गिर पड़ीं.

फिर चाय पानी पीकर मम्मी की बुआ का हाल चाल जान कर मम्मी बोलीं- बुआ मैं पैदल चलकर आई हूँ, जिससे मेरी तबीयत खराब हो गई है. मैं आराम करना चाहती हूँ. हम सुबह बात करेंगे.तो बुआ ने कहा- ठीक है बेटी कुसुम अब तुम सो जाओ.

एक कमरे में मम्मी के बिस्तर लगा दिये. मैंने देखा कि मम्मी चारपाई में घुसते ही रजाई ओढ़ कर सो गईं.

मैं तो समझ रहा था कि मम्मी कई बार मोटे लंडों से चुद कर आई हैं, तो ये हालत तो होनी थी.

फिर सबने खाना खाया और सो गए. बुआ का केवल एक लड़का था, जिसकी शादी अभी नहीं हुई थी, तो वह ही बुआ की देखभाल करता था. वह ही बुआ के कमरे में सो गया और मुझसे कहा कि बेटा तुम हमारे साथ सो जाओ.तो मैंने मम्मी के पास ही सोने को कहा. फिर मैं मम्मी की रजाई में जाकर सो गया.

मम्मी को देख कर मुझे वही सीन ध्यान आ रहा था कि कैसे उन सालों ने मम्मी को रौंदा था. मम्मी तो एकदम निढाल थीं.मैं मम्मी के बिस्तर में घुसा, तब भी उनको मेरे आने का पता नहीं चला. मैं सोने की कोशिश कर रहा था लेकिन नींद तो मेरी आंखों से कोसों दूर थी. बस रह रह कर चुदाई ही याद आ रही थी.

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