Office Sex

शीला की जवानी भोगी

लेखक: दर्शन डैश दिनांक: 30-10-2011 पठन समय: 6 मिनट

दर्शन डैश

मेरा नाम दर्शन है, अहमदाबाद में रहता हूँ। उम्र सत्ताईस साल, लगभग पाँच फिट पाँच इंच का कद है। मैंने पहली बार चुदाई का मज़ा आज से चार साल पहले लिया था। जो आपको सुनाने जा रहा हूँ।

मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ। वहाँ एक लड़की भी काम करती है। उसका नाम शीला था। देखने में एकदम मस्त माल। पहली नज़र में दिल को घायल कर दे, ऐसी अदा थी उसकी। उसके मम्मे तो गजब के थे, कोई भी देखता, वही ढेर हो जाए।

मैंने सोचा ऐसी खूबसूरत लड़की अगर मेरे साथ लेट जाए तो मज़ा आएगा।

एक दिन कंपनी में ओवर-टाइम के लिए कहा गया। सब रुक गए थे, पर मैं नहीं रुका। तभी पीछे से एक आवाज़ आई, मैंने मुड़ कर देखा तो शीला ने आवाज़ दी थी। मैं तो हक्का-बक्का रह गया। फिर क्या, मैं रुक गया।

करीब रात के बारह बजे होंगे, सब निकल गए थे, सिर्फ़ मैं और शीला और हमारा बॉस तीन ही बचे थे।

बॉस ने कहा- अब तुम लोग भी जाओ।

मैं शीला दोनों घर जाने को तैयार हो गए।

मैं बाइक ले कर जाने की तैयारी कर रहा था, तो बॉस का कॉल आया, बोले- तुम शीला को उसके घर छोड़ कर फिर अपने घर चले जाना।

मैंने ‘हाँ’ कह प्रिया। मैं गेट के बाहर निकला तो शीला वहीं खड़ी थी।

मैं कुछ बोलूँ, उसने पहले ही कह प्रिया- तुम मेरी बात मानते नहीं, तो मैंने बॉस से कहलावा प्रिया।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, बैठ जाओ..!

फिर क्या, शीला बाइक पर बैठ गई। मैंने बाइक चालू की और उसके घर की ओर चल प्रिया। धीरे-धीरे उसके मम्मे मुझे छूने लगे, मेरा लंड खड़ा होने लगा था, पर पहली बार में हिम्मत नहीं हुई। बस बातें करता रहा। थोड़ी देर में उसका घर आ गया।

क्या मस्त घर था, उसने कहा- आओ चाय पी कर जाना।

मैंने कहा- नहीं, बाद में..!

तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया। वो मुझे अन्दर घर में ले गई। मुझे सोफे पर बैठा कर वो आने के लिए कह कर अन्दर चली गई। उसको आने में करीब पच्चीस मिनट लगे। उसको मैंने देखा, वो सिर्फ़ नाइट ड्रेस में थी। उसकी चूची एकदम साफ दिख रही थीं। थोड़ी देर तक उसके साथ बैठ कर चाय पी और मैं जाने को तैयार हो गया। मैं जैसे ही खड़ा हुआ, बिजली चली गई और वो मुझसे चिपक गई। मेरे सब्र का बाँध टूट रहा था।

मैंने कहा- क्या हुआ?

कहने लगी- रुक जाओ मुझे डर लगता है..!

मैंने उसकी बात मान ली। हम दोनों अलग-अलग कमरे में चले गए। करीब चार बजे होंगे। मैंने अपने शरीर पर कुछ हरकत होने का अहसास किया। मेरी नींद खुल गई, देखा तो शीला ने मुझे नंगा कर प्रिया था और मेरा लंड सहला रही थी। उसके सहलाने से वो सात इंच खड़ा हो गया था।

मैंने कहा- यह क्या कर रही हो?

उसने कहा- कुछ नहीं, अब मेरी प्यास बुझा दो।

मैंने मना किया, उसने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया। फिर तो क्या, मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने झट से उसे नीचे पटका और उसकी चूत चाटने लगा। वो भी मेरा लंड चाट रही थी। उसकी चूत गीली थी, मेरा माल निकलने वाला था, पर उसने सब अपने मुँह में भर लिया।

मेरे माल को चटखारे लेकर खाने के बाद बोली- राजा, अब सहा नहीं जाता.. आ जा मेरी चूत फाड़ दे…!

वैसे भी वो गर्म हो चुकी थी। मैं सीधा उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी चूत के मुँह पर लंड लगा प्रिया। धीरे-धीरे लंड को हिलाते हुए अन्दर डालने की कोशिश की, पर ऐसा लगता था, वो सील पैक है। लंड जा ही नहीं रहा था।

उसने कहा- रूको..!

वो तेल लाई, मेरे लंड पर लगाया और खुद की चूत पर भी मला और बोली- अब करो..!

मैंने अपना लंड एक बार फिर उसके चूत पर रखा, फिर एक झटका प्रिया।

अभी लंड थोड़ा सा ही घुसा, उतने में ही वो चीख पड़ी- निकालो..!

मैंने निकाल लिया, उसे दर्द हो रहा था।

बोली- अब करो धीरे से !

मैंने फिर लंड डाला, अबकी बार के शॉट से आधा अन्दर घुस गया।

वो और जोरों से चिल्लाई- मार डाला !

मैंने इस बार उसकी ना सुनी, बस धक्के पर धक्के लगाते गया। वो चिल्लाती रही, पर मैं रुका नहीं। थोड़ी देर बाद वो भी शान्त हो गई, और मेरा साथ देने लगी। करीब पंद्रह मिनट बाद वो झड़ गई, पर मेरा अभी नहीं निकला था। मैं अपनी धकापेल में लगा रहा, वो दुबारा झड़ गई।

अब वो रिरिया कर बोली- अब रहने दो… फिर कभी कर लेना..!

मैंने कहा- फिर कब मुलाकात हो, आज ही करने दे।

बोली- मैं थक चुकी हूँ..!

थोड़ी देर बाद मैंने कहा- ओके..!

मैंने ऐसे ही लंड बाहर निकाला, पलंग की चादर पूरी खून से तर थी।

उसने कहा- आज के लिए इतना काफी..अब तो तुझसे ही चुदाई करवाऊँगी…मेरे राजा.., आज तूने एक कुंवारी लड़की को इतना मज़ा प्रिया है कि पूछ मत..!

फिर उसने एक बार फिर मेरा लंड मुँह में ले लिया, क्योंकि मेरा अभी भी तना हुआ था। उसने मेरे लंड को शांत किया। मेरा पूरा वीर्य निगल गई।

दोस्तो, यह मेरी सच्ची कहानी है। मुझे अपनी राय दें।

support@mohakkisse.com