सेक्स विद पोर्न गर्ल का मजा मुझे सड़क पर मिली एक लड़की ने प्रिया. मैंने उसे लिफ्ट दी और उसका फोन नम्बर ले लिया. ऐसे ही बात आगे बढ़ी और चुदाई तक पहुँच गयी.
प्रिय पाठको, आप सब को मेरा प्यार भरा नमस्कार!मेरा नाम रॉकी सिंह हैं मैं छत्तीसगढ़ के दुर्ग भिलाई का रहने वाला हूँ.
मैं अपने बारे में यह बता देना चाहता हूँ कि मैं 5 फुट 8 इंच का लड़का हूं.मेरी उम्र 26 साल की है.
मेरे लंड का साइज बहुत बड़ा है, इसका अंदाजा आपको इस बात से भी हो जाएगा कि आज तक मैंने जितनी भी लड़कियों भाभियों और चाची मामियों को चोदा है, वे सब मुझसे पूरी तरह संतुष्ट हुई हैं.जितनी भी लड़कियां मेरी इस सेक्स कहानी को पढ़ेंगी, तो मुझे पूरा यकीन हैं कि वे सब अपनी चूत में उंगली किए बिना नहीं रह पाएंगी.
यह सेक्स विद पोर्न गर्ल कहानी तब की है. जब मैं रायपुर में रह कर 2019 में कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था.
वहां मैं एक किराए के रूम में रहा करता था. मेरा खाना भी एक भोजनालय में होता था.
मेरे साथ मेरे आस-पास मेडिकल कॉलेज के दोस्त रहा करते थे.हम सभी अपनी अपनी बाइक पर कॉलेज आया करते थे.
एक दिन ये हुआ कि हम तीन दोस्त मेरी बाइक पर बैठकर पुस्तक लेने के लिए जा रहे थे.बाइक को मैं चला रहा था.
तभी रास्ते में एक लड़की अकेली जा रही थी.मेरी नजर उस पर पड़ी और उसकी नजर मुझ पर भी पड़ गई.
हम दोनों की नजरें आपस में मिलीं और ऐसा लगा कि पहली नजर में हम एक दूसरे को पसंद करने लगे.
थोड़ी दूर जाकर मैंने अपने दोस्तों से कहा- चलो चाय पीते हैं.हम सब चाय पीने लगे.
मैंने कहा- मुझे थोड़ा सा काम है. मैं 5 मिनट में आता हूं.यह कह कर मैं वापस उसी रास्ते पर चला गया.
मैं जल्द ही उसी रास्ते पर आ गया, जहां वह लड़की चलती चली जा रही थी.मैंने उस लड़की को देखा और उसके पास जाकर अपनी गाड़ी रोककर उससे कहा- मैं भी उधर ही जा रहा हूं, अगर आप चाहें तो मैं आपको जहां जाना चाहती हो, उधर छोड़ सकता हूं.
उसने शुरू में तो मना किया लेकिन मेरे दो बार कहने पर वह मान गई.मैं उसे अपनी बाइक पर बिठा कर गाड़ी चालू करके चल प्रिया.
मैंने उससे पूछा- बताएं मैडम किधर को चलना है?उसने बताना शुरू किया और कहा- मेरा नाम तनु है, मैडम नहीं है.
मैंने उसे अपना नाम रॉकी बताया और उसके बताए रास्ते में बढ़ चला.रास्ते में मैंने उससे बात की.
बात ही बात में उसका स्टॉप आ गया और इस तरह से मैंने उसे जहां जाना था, वहां छोड़ प्रिया.
मैंने उससे कहा- मैं जानना चाहता हूँ कि आपको मेरे साथ इस छोटे से सफर में कैसा लगा?उसने कहा- अच्छा लगा.
मैंने अपना नंबर देते हुए उससे कहा- आप शायद जल्दी में हैं, इसलिए डिटेल में नहीं बता पा रही हैं. ये मेरा नंबर ले लीजिए. मैं आपके फोन का इंतजार करूंगा.वह हल्के से हंस दी.
अब लौंडिया हंसी तो समझो फंसी.यह एक नब्बे फीसदी मामलों में काम करने वाला फार्मूला है.
मैंने उससे कहा- क्या आप अपना फोन मुझे एक मिनट के लिए दे सकती हैं?उसने अपना फोन मुझे दे प्रिया.
मैंने झट से उसके फोन से अपना नंबर डायल किया और उसे फोन वापस कर प्रिया.
वह इस बार बोली- भरोसा नहीं था क्या कि मैं फ़ोन करूंगी या नहीं करूंगी?मैंने कहा- क्वालिटी फ्रेंड को मैं यूं ही हाथ से नहीं जाने दे सकता हूँ. ये मेरी आदत है.
वह इस बार और जोर से हंसी और बोली- थैंक्स.मैंने सर झुका कर वेलकम कहा.
उसने बाय कहा और पलट कर चल दी.वह चार कदम ही चली होगी कि उसने वापस मुझे पलट कर देखा तो मैंने होंठों पर हाथ रख कर हवा में चुंबन उछाल प्रिया.
फ्लाइंग किस देते हुए मेरा हाथ उसकी तरफ न जाकर हवा में ऊपर हो गया था.वह ऊपर हवा में देखने लगी और उसने अपना मुँह खोल प्रिया और ऐसे किया मानो मेरे किस को उसने खा लिया हो.
उसकी इस हरकत से मेरे कलेजे में सुकून की ठंडी लहर दौड़ गई.
इस तरह से हम दोनों ने एक दूसरे को स्वीकार कर लिया था.
उसका नंबर मुझे मिल गया था तो रात में मैंने उसे मैसेज किया.
वह शायद इंतजार ही कर रही थी.अगले ही पल रिप्लाई में भी उसका मैसेज आया.
मैंने लिखा- हाय तनु कैसी हो?उसने जवाब प्रिया- बेचैन हूँ.
मैंने कहा- ये बेचैनी क्यों है?वह बोली- पता नहीं … बस अन्दर से कुछ अजीब सा लग रहा है.
मैंने कहा- किधर ज्यादा अजीब सा लग रहा है?वह मेरे इस सवाल से अचकचा गई और बोली- मतलब?
मैंने कहा- तुम्हें अजीब सा लग रहा है न?वह बोली- हां … तो?
मैंने एक स्माइली भेजी और आंख दबाने वाली इमोजी भी भेज दी.
कुछ पल तक उसका जवाब नहीं आया.फिर अचानक से उसने एक डंडा लेकर मारने वाली इमोजी भेजी.
इसका मतलब था कि वह समझ गई थी कि मैंने उससे क्या जानना चाहा था.मैं ठठा कर हंस पड़ा.
वह बोली- बड़े गंदे हो तुम?मैंने कहा- क्यों ऐसा क्या पूछ लिया था मैंने?
वह हंसने लगी थी और लिख कर बोली- सच में पहले तो सीने में अजीब सा लग रहा था; फिर नीचे भी कुछ कुछ होने लगा था.मैंने कहा- कुछ कुछ से मतलब गीला गीला सा लगने लगा था न?वह बोली- अब ज्यादा मत पूछो यार.
उसके मुँह से यार शब्द सुनकर दिल को बड़ा सुकून मिला.मैंने एक ठंडी सांस ली और उसे थैंक्स लिखा.
उसने थैंक्स लिखने का कारण पूछा- थैंक्स क्यों?मैंने कहा- एक क्वालिटी लड़की मुझे यार बोलेगी और मैं उसे थैंक्स नहीं बोलूँगा तो ये मेरी कमअक्ली होगी.वह हंस दी.
इस तरह हम दोनों की बात मोबाइल फोन में मैसेज और कॉल के जरिए होने लगी.
हम दोनों रायपुर में ही रहते थे तो हमारी लगातार मुलाकात भी होने लगी.कभी कॉफी शॉप में मिलने लगे, कभी मूवी देखने जाने लगे.तो कभी गार्डन में मिल लेते.
इस तरह हम दोनों अलग-अलग जगह पर मिलने लगे.
एक दिन मैंने उसे प्रपोज किया तो उसने भी हां कह दी.अब मोबाइल में हम दोनों की खुली खुली बातें भी होने लगीं.
हम दोनों के बीच फोन में सेक्स चैट भी शुरू हो गई.
फोन सेक्स करते करते हम इतने उत्तेजित हो जाते थे कि दोनों के पानी ही निकल जाते थे.
उसके बाद एक दिन हम दोनों ने मूवी देखने का प्लान किया.हम दोनों उस मूवी का सुबह दस बजे का शो देखने गए.
उसमें भी एक कोने वाली सीट पर हम बैठ गए.हॉल खाली ही था. कुछ जोड़े ही ज्यादा थे, जो हमारे जैसे थे.
हम दोनों ने बैठते ही चूमना चालू कर प्रिया.कुछ ही समय में उसके दूध मेरे हाथों में थे और उसका हाथ मेरी पैंट के अन्दर था.
उसी दिन हम दोनों की वासना भड़क गई थी लेकिन उधर चुदाई सही ढंग से नहीं हो सकती थी इसलिए हम दोनों ऊपर ऊपर से मजा लेकर वापस आ गए.
अब हम दोनों एक दूसरे से अकेले कमरे में मिलने के लिए हद से ज्यादा तड़पने लगे.लेकिन कुछ बात नहीं बन पा रही थी; जगह का इंतजाम नहीं हो पा रहा था.
फिर एक दिन ऐसा आया जब हमारी मुलाकात किसी कमरे में होने वाली थी.
हुआ यूं कि मुझे भिलाई में एक दोस्त का पता चला, जो किराए पर कमरा लेकर रहता था.
मैं उसे अपने रूम नहीं ले जा सकता था क्योंकि मेरे घर में ही मकान मालिक रहता था.उसकी नजर मुझ पर लगातार बनी रहती थी.
उस दिन हम लोगों ने भिलाई जाने का तय किया.भिलाई रायपुर से सबसे नजदीक का शहर है.
हम लोग भिलाई पहुंचे और सीधे दोस्त के रूम पर चले गए.पहले मैंने अकेले जाकर दरवाजे पर लगा ताला खोला और अन्दर आ गया.
फिर दूर खड़ी तनु को इशारा किया तो वह भी इधर उधर देखती हुई सावधानी से कमरे के अन्दर आ गई.
मैंने उसके अन्दर आते ही दरवाजा बंद किया और उसे अपने सीने से लगा लिया.वह भी मुझसे चिपक गई.
वह ब्रा में बड़ी कड़क माल लग रही थी.मैं उसके एक दूध को जोर जोर से मसलने लगा.
मुझे तो ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में आ गया हूं.उसका फिगर 34-30-36 का था.
उसके मम्मों को दबाते हुए मैं मजा लेने लगा.वह भी जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी.
मेरी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी.मैंने उसके बड़े बड़े मम्मों को उसकी काली ब्रा से जुदा कर प्रिया और उसके नग्न हो चुके मम्मों पर झपट पड़ा.
एक को जोर जोर से दबाते हुए और दूसरे दूध के निप्पल को अपने मुँह में भर कर खींचते हुए चूसने लगा.वह और जोर से कामुक सिसकारियां लेने लगी.
अब मैंने उसे बेड पर लिटा प्रिया और सबसे पहले उसकी जींस उतार दी.
उसकी गोरी-गोरी जांघों को देख कर मेरा लंड फुंफकारने लगा.
चूत के ऊपर ढकी हुई उसकी ब्लैक पैंटी को भी मैंने फट से अलग कर प्रिया और खुद भी नंगा हो गया.
उसकी गुलाबी चूत देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी चूत पर आक्रमण कर प्रिया.
मैं उसकी चूत को इतना जोरों से चूस रहा था कि वह खुद पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.
उसकी चूत से लगातार पानी बह रहा था, जिसे मैं पिए जा रहा था.
अब वह खुद पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और बार-बार अपनी गांड उठा कर चूत को मेरी मुख में घुसा रही थी.
चूत की चुसाई के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत की फांकों में रखा तो वह मचल उठी और उसने गांड ऊपर उठा दी.इससे चिकनी उसकी चूत में मेरा आधा लंड घुसता चला गया.
वह एकदम से दर्द से कराह उठी और ‘आह मर गई रहने दो आह निकाल लो … आह बस करो बस करो.’ कहने लगी.पर अब मेरा लंड कहां मानने वाला था.
मैंने अपना लंड धीरे से निकालकर एक ही झटके में पूरा उसकी चूत में पेल प्रिया और उसे ताबड़तोड़ चोदने लगा.
कुछ ही देर में उसका दर्द भी खत्म हो गया था और वह भी गांड उठा उठा कर चुदाई करवा रही थी.
उस दिन हमने शाम तक 3 बार ताबड़तोड़ चुदाई की और दोस्त के कमरे से निकल कर वापस रायपुर आ गए.
इस प्रकार हमारा सेक्स विद पोर्न गर्ल का सिलसिला चल पड़ा और आए दिन हमचुदाई का कार्यक्रमबनाने लगे.
चुदाई के कार्यक्रम के लिए मैंने अपना कमरा बदल लिया जो शहर से दूर एक कम आबादी वाली जगह पर था.उधर हम दोनों कुछ इस तरह से मिलते थे कि किसी को कानोंकान खबर नहीं होती थी.
आपको मेरी ये सेक्स कहानी कैसी लगी?इसके बारे में आप मुझे मेरी ईमेल पर भी मैसेज कर सकते हैं या फिर अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं.
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