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Group Sex Story पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 449 बार

अगर मुझसे मोहब्बत है-23(Agar mujhse mohobbat hai-23)

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11 Sep 2014 को प्रकाशित

अगर मुझसे मोहब्बत है-23(Agar mujhse mohobbat hai-23)
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अभी हम अपनी बीवी को ही चोदेंगे नजाकत से।

नजर दूसरे की बीवी पर भी डालेंगे शराफत से।

मगर दिल में उसी की चोदने की ही शरारत है।

वह चोदे मेरी बीवी को अगर मुझसे मोहब्बत है।।

मैंने और रीता ने पीछे मुड़ कर देखा तो सूरज और किरण हमारे कमरे के दरवाजे पर खड़े थे। सूरज ऊपर से खुला था। उसने सिर्फ नीचे हाफ पेण्ट माने चड्डी पहन रखी थी। बिखरे हुए बालों में आच्छादित सूरज का चेहरा वाकई किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था। किरण ने पतली पारदर्शक ढीली सफ़ेद सिल्क जैसे चमकते कपड़े की ऐसी गाउन पहनी थी, जिसमें से उसके दोनों स्तनों पर गोरी गोरी निप्पलें साफ़ दिख रही थी।

किरण की दोनों जांघों के बीच में उसकी चूत की झांखी भी हो रही थी। किरण के घूमने से उसकी गांड और उसके दो फूले हुए गाल और उसके बीच की दरार भी साफ़ दिखाई देती थी।

रीता अफरा-तफरी में पलंग की चद्दर खींच कर ओढ़ने का प्रयास करने लगी। मैंने रीता के हाथ से चद्दर खींच कर कहा, “हमें पता है कि तुम्हें स्विंमिंगपूल में सूरज ने पूरा नंगा देख ही लिया है। वह तो तुम्हें चोदने वाला ही था। तुमने सूरज का लंंड भी चूसा है। तो अब प्लीज यह सब लाज और शर्म के नखरे मत करो।

तुमने अभी-अभी उस ग्रुप की सदस्यता की सारी शर्तें स्वीकार कर ली हैं। अब देखने दो हम सब को तुम्हारा अद्भुत नग्न रूप। हम सब तुम्हारे रूप के कायल हैं। मैं, सूरज और किरण भी। तुम हमारी राजरानी हो। हम तुम्हारे ग़ुलाम है।”

रीता ने मुझे कोहनी मार कर नकली तरीके से गाल फुलाते हुए कहा, “अच्छा तो तुम दोनों हमें छिप-छिप कर देख रहे थे? तभी तो मैं सोचूं कि यह सब किया कराया किसका है? मेरी जूठी तारीफ़ करके मत चढ़ाओ मुझे चने के पेड़ पर। मैं ऐसे ही ठीक हूं। किरण तुम मुझे सजा देना चाहती हो ना? ठीक है मैं तैयार हूं सजा भुगतने के लिए। पर सजा छोटी-मोटी नहीं होनी चाहिए। सजा ऐसी होनी चाहिए कि उसको भुगतते हुए मैं चीखने-चिल्लाने लगूं। तुम सब को देखना था ना तुम्हारी राजरानी का नग्न रूप? तो यह लो देख लो तुम्हारी राजरानी का नग्न रूप सब ओके?”

रीता के चद्दर हटा कर अपना नग्न रूप दिखाते ही सूरज चकरा रहे थे। सूरज की आँखें जैसे नशे में डूबी हुई हों ऐसे घिरने लगी। रीता नंगी पलंग पर सीधी लेटी हुई कोई नग्न अप्सरा या हूर से कम नहीं लग रही थी। रीता की गोरी त्वचा और उसके पूरे बदन को जैसे कोई अत्यंत दक्ष शिल्पकार ने संगेमरमर को अपनी पूरी कला का उपयोग करके तराशा हो वैसी मूरत सी लग रही थी। रीता के स्तन गुरुत्वाकर्षण के नियम का अपमान करते हुए उद्द्ण्ड अर्ध गोलाकार में एरोला के बीच घिरी हुई निप्पलों से शोभायमान दो गुंबज के सामान दिख रहे थे।

रीता की एक-दम साफ़ गुलाबी चूत के और कमर के बीच का कामुक उभार देखते ही बनता था। रीता की गांड के गाल और बीच की दरार अच्छों अच्छों का लंड खड़ा कर देने वाली थी। पलंग पर रीता के घुंघराले लम्बे केश बिखरे हुए थे। पूर्णिमा के चन्द्रमा सम खिला हुआ यौवन के कारण उस यौवन का कामुक नशा रीता की आँखों में साफ़ दिख रहा था। जैसे कोई अभिसारिणी अपने प्रियतम से विहार करने की अपेक्षा में नग्न हो कर बैठी हो, वैसे ही रीता अपने प्रीतम से अपनी चुदाई की प्रतीक्षा में अपनी जांघें खोल कर बैठी हुई थी।

रीता चद्दर हटा कर पलंग पर चढ़ कर तकिये के सहारे दीवार से सट कर बैठी हुई थी। रीता किरण पर गुस्से की बात को एक पल में ही भूल गयी और उसने हस कर किरण को अपनी बाहें फैला कर अपने पास बुलाया। किरण फ़ौरन पलंग पर चढ़ कर रीता की बाहों में लिपट गयी, जैसे कोई बच्चा माँ से लिपट जाता है। किरण रीता के मुंह, कपाल, बाल, गाल, स्तन सब कुछ चूमने लगी। किरण एक हाथ में रीता का एक स्तन लेकर उसकी निप्पलों से खेल रही थी और दूसरा स्तन मुंह में लेकर, चूम चूस, चाट और कभी-कभी काट भी रही थी। दोनों खूबसूरत स्त्रियों का यह रूप देखने वाला था।

रीता ने किरण को अपने बिल्कुल बगल में अपने बदन से सटा कर बिठाया और खुद टेढ़ी हो कर अपना एक हाथ किरण के गाउन में डाल कर किरण के स्तनों से खेलना आरम्भ किया। दोनों महिलाओं को एक-दूसरे से खेलते हुए देख सूरज घुटनों के बल पलंग पर चढ़ कर घुटनों पर चलता हुआ किरण की गोद में जा पहुंचा। किरण की गोद में किरण की चूत के ऊपर ही अपना सर रख कर अपने बदन को किरण की दोनों पलंग पर लम्बाई हुई करारी जांघों के बीच जगह बना कर लम्बा हो कर लेट गया।

सूरज किरण का गाउन ऊपर कर अपना मुंह किरण के स्तनों के करीब ले जा कर स्तनों को अपने मुंह से चिपका कर किरण के स्तनों की निप्पलों को मुंह में लेकर उन्हें चूसने लगा। बगल में बैठी रीता का हाथ जो किरण के स्तनों से खेल रहा था वह बार-बार सूरज के मुंह से छूता और रीता प्यार से सूरज के मुंह और उसके होंठों को सहला देती।

मैं नंगधड़ंग पलंग के पास खड़ा हुआ यह सब खेल देख रहा था। मेरी प्यारी खूबसूरत नंगी पत्नी रीता ने अपने हाथ लंबा कर मुझे भी अपनी बाहों में बुला लिया। मैं भी पलंग पर चढ़ सूरज की ही तरह घुटनों के बल चलता हुआ बिल्कुल सूरज की तरह अपनी बीवी रीता की गोद में उसकी चूत के ऊपर ही सर रख कर रीता की टांगें चौड़ी कर उनके बीच पलंग पर लम्बा हो कर लेट गया। मेरा सर रीता के मादक स्तनों को छू रहा था।

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रीता ने किरण के गाउन को खींचते हुए कहा, “तुमने मुझे अच्छी तरह से जब फसा ही दिया है, तो अब मुझसे क्या पर्दा?” यह कह कर रीता ने किरण के बदन से वह गाउन उतार दिया और उसे पूरी तरह नंगी कर दिया। नग्न किरण रीता से ज़रा सी भी कम नहीं लग रही थी। किरण की गांड रीता की गांड से थोड़ी ज्यादा भारी थी।

किरण का चेहरा लम्बा था जबकि रीता का गोल। किरण के बाल घुंघराले थोड़े से छोटे कटे हुए थे। रीता के घने लम्बे फैले हुए। बाकी स्तनों में दोनों के स्तन भरे हुए सख्त, अल्लड़, गोल एरोला के बीच सख्ती से फूली हुई निप्पलों से शोभायमान थे।

मुझे और शायद रीता को भी नंगधड़ंग किरण देख कर बड़ी ख़ुशी हुई। मैंने किरण को स्विंमिंगपूल क्लब में नंगी तो देखा था, पर उस समय मैं उसे चोदने की अफरातफरी में था।

उस समय इस तरह इतनी मस्ती से पूरी तरह से किरण का इतना सुन्दर नग्न रूप मैंने इतनी बारीकी से नहीं देखा था। नंगी किरण कमाल की खूबसूरत लग रही थी। किरण के कूल्हे रीता से कुछ ज्यादा भारी और ज्यादा आकर्षक थे ऐसा रीता मानती थी।

किरण ने चड्डी पहने हुए अपने पति सूरज की और देखते हुए कहा, “अभी तुम अकेले ही हो जो कपड़े पहने हुए हो। आ जाओ हम नंगों की टोली में।” यह कह कर किरण ने अपने हाथ लंबा कर सूरज की चड्डी का बेल्ट खोल दिया। सूरज ने फटाफट अपने पांव ऊपर-नीचे कर अपनी चड्डी निकाल फेंकी। अंदर सूरज ने कुछ नहीं पहना था। चड्डी खोलते ही सूरज का तगड़ा मोटा लंड कूद कर बाहर आ गया और सख्ती से खड़ा हुआ ऊपर की तरफ मुड़ा हुआ लंबा हो गया।

इतना लम्बा और मोटा होने के कारण सख्त होते हुए भी पलंग पर लेटे हुए सूरज का लंड कुछ आगे जा कर नीचे की ओर झुका हुआ था। वहाँ लेटे हुए हम सब ने पहले कभी ना कभी सूरज के लंड को देखा था। फिर भी उस समय हम सब तेज रौशनी में सूरज के इतने बड़े, लम्बे और मोटे लंड को आश्चर्य में डूबे हुए एक टक घूरते हुए देख रहे थे। सूरज का लंड जैसे पोर्न मूवी में चोदने वाले मर्दों का होता है, या फिर जैसे घोड़े का लंड जैसा लम्बा और मोटा होता है वैसा था। अपने टोपे पर एक-दम चमकता हुआ गोरा दिख रहा था। सूरज के लंड की आगे ऊपर की त्वचा मुड़ी हुई सूरज के लंड के टोपे की कगार में एक साथ इकट्ठी हो गयी थी।

जब किरण ने हम सब को सूरज के लंड को बड़े ही गौर से घूर कर देखते हुए पाया, तो सूरज का लंड अपनी हथेली में लेकर उसे प्यार से सहलाते हुए बोली, “पहली बार जब मैंने सूरज को नंगा किया, और उसका लंड देखा तो मेरी तो जान ही निकल गयी थी। मैंने तो खेल-खेल में सूरज से चुदवाने के लिए उसके कपड़े उतार कर उसे नंगा किया। पर जब मैंने उसका यह महाकाय लंड देखा तो फटाफट मैं उसको उसकी निक्कर वापस पहनाने लगी।

मैंने उस समय सोचा कि अगर यह लंड मैंने मेरी चूत में डलवाने का प्रयास किया, तो यह लंड तो मेरी नाजुक चूत में जा ही नहीं पायेगा। पर ज्यादा कोशिश करने पर वह अगर जबरदस्ती मेरी चूत में घुसाया गया तो वह मेरी चूत को फाड़ ही देगा और उसको मेरी चूत में लेने की कोशिश करते हुए खून से लथ-पथ हो कर मैं जरूर मर जाउंगी।”

किरण की बात पर किसी को उस समय किसी तरह का कोई शक नहीं था। मेरे लंड के मुकाबले सूरज का लंड कम से कम डेढ़ गुना लंबा और करीब दोगुना मोटा था। मेरा लंड भी सामान्यतः हिंदुस्तानी मर्दों के लंड से ज्यादा ही बड़ा था। तो आप सब सोच सकते हैं कि सूरज का लंड कैसा होगा। सब किरण की और किरण की बात पूरी करने के लिए एक टक देखने लगे।

किरण ने कहा, “पर सूरज मुझे चोदने पर आमादा था। वह शराब पीया हुआ नशे में धुत्त था। मैं सूरज मुझे चोदे उसके लिए उसके पीछे कई महीनों से पड़ी हुई थी। जब से मैं उसके पीछे पड़ी हुई थी, तब से वह मुझे किसी भी हाल में चोदने के लिए राजी नहीं हो रहा था। वह मुझे हमेशा दुत्कारता रहा, वह मुझसे बात ना करता और आगे बढ़ जाता।

उस दिन मैं सूरज को पकड़ कर अपनी कार में जबरदस्ती बिठा कर मेरे कमरे पर उससे चुदवाने के लिए ले आयी थी। मैंने उसके सामने मरे कपड़े उतार फेंके और मैं अपने बूब्स अपने हाथों में दबा कर और अपनी चूत में उंगली डाल कर उसे उकसाती रही। आखिर में जब मैंने उसके कपड़े उतारे तब उसका यह महाकाय लंड देखा।”

किरण ने सूरज का लंड अपनी हथेली में लेकर उसे सहलाने लगी और आगे की त्वचा से पकड़ कर हलके से प्यार से हिलाना शुरू किया और अपनी बात जारी रखते हुए बोली, “पर तब तक देर हो चुकी थी। मेरे उकसाने से पागल हुए सूरज ने नंगे होते ही मुझे उठाया और मेरे ही पलंग पर मुझे लिटाया और फिर मेरे ऊपर सवार हो गया। सूरज का घोड़े जैसा लंड मेरी छोटी सी चूत पर ऐसे लहराने लगा कि मैं डर के मारे आधी तो उसी समय मर गयी थी ऐसा मुझे लगा।

मुझे लगा जैसे कोई घोड़ा अपना लम्बा मोटा लंड मेरी चूत में डालने जा रहा था। मैं आँखें मूंद कर प्रार्थना करती रही और सूरज ने बिना कोई दया के अपना इतना मोटा लंड मेरी चूत में एक झटका मार कर जोर से घुसेड़ने की कोशिश की।

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Hello mai Prakash aap meri sexy mom pe bahut sari stories padh chuke honge. Mai kafi dino se pvt press ke liye stories likh raha tha. Aap sabhi ke liye mai ek nayi kahani lekar aaya hu jo aasha krta hu ki aap logo bahut pasand aayega.

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