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जीजा साली की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 802 बार

विधवा सलहज की चूत की चुदास

ललित सोनी

28 Nov 2012 को प्रकाशित

विधवा सलहज की चूत की चुदास
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दोस्तो, मेरा नाम ललित है.. मेरी उम्र 52 साल है। मेरी पत्नी की उम्र 49 साल है.. जो कि एक बहुत छोटे से गाव की है। मैं एक छोटे से कस्बे से हूँ.. जहाँ मेरा गुजर-बसर हो जाए.. इतनी आमदनी तो हो ही जाती है।मेरा लड़का जिसकी उम्र 21 साल है.. जिसने बड़े शहर में अपनी खुद की दुकान खोल ली.. उसका खाना-पीना होटल में होने के कारण मैं भी परिवार सहित शहर में आ गया।

मेरी बीवी का एक भाई उदयपुर में रहता है.. बाकी भाई गांव में रहते हैं। उसके गांव वाले एक बड़े भाई की बीवी ने मुझसे बोला- आप शहर में अपने लड़के के कारण शिफ्ट हो रहे हैं.. तो हमारे मकान में शिफ्ट हो जाइए।तो मैं उनके के खाली पड़े मकान में सैट हो गया।

मेरे साले की पत्नी यानि मेरी सलहज जिनकी उम्र 50 साल के करीब होगी.. पर वो दिखने में 40 की दिखती थीं। साथ में बहुत ही भारी डील-डौल वाली थीं। वैसे वो विधवा थीं और ऊपर से सुहागन जैसे कपड़े पहनने के कारण विधवा नहीं लगती थीं। वैसे तो किसी बात की टेन्शन थी भी नहीं.. उसके बेटों का व्यापार भी अच्छा था।

जब मैं शहर में रहने आया.. कुछ महीनों तक सब कुछ ठीक-ठाक चला। मेरी सलहज बीच-बीच में अपने इलाज के लिए शहर आती.. तो हमारे यहाँ ही रूकती थीं। उनको लेने के लिए मुझे ही जाना पड़ता था। जब मैं मोटरसाइकिल पर बैठा कर उन्हें लाता.. तो भारी बदन की होने के कारण यूँ समझो कि पूरी सीट उसकी हो जाती। इसी वजह से वो मेरे से चिपकी हुई रहती थीं। जब कहीं गड्डा आता.. तो उसके मम्मे मेरे से टकराते।

फिर उसको हॉस्पिटल दिखा कर घर लाता और मेरी पत्नी के साथ बातों में मशगूल हो जाती। मेरा मन तो बहुत करता पर करूँ क्या.. ऐसा कोई अवसर हाथ नहीं आ रहा था.. और न ही वो कोई ऐसी हरकत कर रही थी।

रात को वो मेरी पत्नी के पास सोती और मैं दूसरे कमरे में सोता था।

इस तरह 7-8 महीने निकल गए। इधर कार्तिक का महीना आ रहा था।एक दिन वो आई हुई थी, बातों ही बातों में पुष्कर मेले की बात चल पड़ी.. मेरी पत्नी ने मुझसे बिना पूछे ‘हाँ’ कर प्रिया।

मेला के दिन हम तीनों बस से दोपहर में निकल पड़े और शाम तक पुष्कर पहुँच गए। वहाँ जाकर सबसे पहले स्नान की मान्यता के चलते हम भी ब्रह्म सरोवर पर पहुँचे।वहाँ कोई ऊँच-नीच नहीं होती है, महिलाएँ और पुरुष सम्मिलित स्नान करते हैं।

हम तीनों भी स्नान कर रहे थे। मेरी सलहज के कपड़े पानी से भीगने के कारण शरीर से चिपक गए।उस समय वो बड़ी सेक्सी लग रही थी। इतना देख कर मेरा लंड अंडरवियर में उठा हुआ साफ दिखाई दे रहा था। मेरी सलहज मेरे उठे हुए लौड़े को कनखियों से देख रही थी।मेरी बीबी का ध्यान धार्मिक कर्मकांड में लगा हुआ था।

वहाँ से हम ब्रह्मा मंदिर गए.. तो वहाँ सीड़ियों तक जोरदार लाइन लगी हुई थी। मैंने बीवी को आगे किया उसके पीछे सलहज को.. उसके पीछे में खड़ा हो गया। क्योंकि इस मौके पर लोग बहुत गलत हरकत करने से नहीं चूकते हैं।

कुछ देर बाद भीड़ बढ़ने के कारण पीछे से धक्का लगा.. तो मैं सलहज से चिपक गया।िसलहज ने कहा- क्या हुआ?मैंने कहा- पीछे से धक्का लग रहा है।

तो उसने कुछ न कहा.. कुछ देर चिपके रहने के कारण मेरा लंड खड़ा हो गया। अब वो उसकी गाण्ड में जाने को बेताब हो रहा था। मैं भी मदहोश हो गया अब जानबूझ कर गाण्ड के बीच में लंड की पॉजीशन बना कर बार-बार धक्का देने लगा।थोड़ी देर में मैंने देखा कि सलहज भी जानबूझ कर चिपकने के पूरी कोशिश कर रही थी।

मैंने मदहोशी में उसके पेट के ऊपर हाथ रख प्रिया। जब उसने कोई एतराज नहीं किया.. तो दूसरे हाथ को भी उसकी पेट पर रख कर उसको चेपने की कोशिश करने लगा।

तभी किरण का समय होने के कारण कुछ देर के लिए लोगों को दर्शन के लिए रोक प्रिया। इधर पीछे भीड़ लगातार बढ़ रही थी.. जो मेरे लिए ठीक ही था। मेरा लंड बार-बार सलहज की गाण्ड पर फेरने के कारण.. वो बहुत उत्तेजित लग रही थी।

तभी पता नहीं मुझे क्या हुआ.. मैंने उसके बोबों पर हाथ रख प्रिया। उसने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं की.. इससे मेरा हौसला और खुलने लगा।

अब मैं भीड़ की ओट में ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल कर उसके बोबों को बुरी तरह मसल रहा था। तभी वापिस दर्शन की लाइन चलने लगी और भीड़ की धक्का-मुक्की में वो कुछ दूर हो गई।

खैर.. हम सब दर्शन करके वापिस आए। अब रात को रुकने के लिए एक कमरा चाहिए था.. ताकि किसी भी तरह आज की रात सलहज को चोद सकूँ।

मैं इससे पहले भी पुष्कर आ चुका था। मुझे एक धर्मशाला की याद आई.. जिसके पुजारी से मेरी थोड़ी बहुत जान-पहचान थी। क्योंकि उस धर्मशाला में दो-चार बार पहले भी रुका था। मैंने अकेले जाकर पता किया.. बहुत मुश्किल से एक कमरा मिल पाया।

वापिस आकर हम सब खाना खाने बैठे। मेरे पास नींद की गोली थी.. वो मैंने चुपके से अपनी बीवी की सब्जी में डाल दी।बीवी को सब्जी कुछ अटपटी सी लगी.. मैं उसे समझा कर बोला- मेले के मौके में इसी टाइप की साग मिलती है.. खा ले..खैर.. रात को हम कमरे में आकर सो गए।

पहले में मेरे पास मेरी बीवी का बिस्तर.. उसके पास मेरी सलहज का बिस्तर था।अब मैं बीवी को नींद आने की सोच रहा था।आखिर एक-डेढ़ घंटा बाद वो गहरी नींद में सो गई.. तो मैंने एक बार उसको हिला कर देखा.. कहीं जग तो नहीं रही है।

जब पक्का विश्वास हो गया। तब मैंने सलहज को टटोला.. तो वो आधी नींद में थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि आज ही ऐसा होगा।सलहज ने कहा- ननद जाग तो नहीं रही है?मैंने कहा- मैं हिला कर देख चुका हूँ और सब्जी में नींद की गोली डाली हुई थी.. अब वो सुबह ही उठेगी।

मेरे कहने का उसे विश्वास नहीं हुआ तो उसने भी अपने हाथ से हिलाकर देखा।तब उसने कहा- कंवर साब.. आप भी छुपे-रुस्तम निकले.. मैं आपके साले जी के जाने के बाद से.. 4 साल से भूखी हूँ.. बस आप अब देर मत करो.. एक बार सीधा अन्दर डाल दो.. वैसे भी आपने आज मेरी सोई हुई आग को भड़का प्रिया है।

मैंने एक मिनट की देरी किए बिना उसके कपड़े उतारना चालू किए। उसने भी मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसके मम्मों को देखा.. तो मेरी आँखें फ़टी की फटी रह गईं।उसके मम्मे तो बड़े खरबूजे के साइज़ के थे.. दोनों हाथ में भी नहीं आते थे, इतने बड़े पपीतों को बस सीधे होंठों में लेना चालू किया।

उसने बोला- कंवर साब, ये सब दूसरी बार में कर लेना.. एक बार पहले मेरी प्यास बुझा दो।

मैंने आव देखा ना ताव.. सीधा लण्ड लेकर उसके चूत में पेल प्रिया। जब औरत दो-तीन साल चुदाई न करे.. तो उसकी चूत एकदम टाइट हो जाती है।

लण्ड डलवाते ही वो कराहने लगी.. मैं भी चाहता था कि एक बार मेरा भी पानी निकल जाए.. तो अगला राउंड दमदार होगा।कुछ ही मिनट में हम दोनों एक साथ झड़ गए।उस रात चार राउंड लगाए.. सुबह चार बजे से पहले सो गए.. कि कहीं बीवी जाग ना जाए।

सुबह देर से पत्नी ने उठाया और हम फिर से ब्रह्म-सरोवर पर पहुँच गए। वहाँ स्नान किया.. उसके बाद नाश्ता-पानी करके मंदिर को चले। कल से ज्यादा आज भीड़ थी। स्नान करने के बाद फिर दर्शन की लाइन में लगे।

बाप रे बाप.. आज तो भीड़ बहुत लम्बी थी। मैंने वही कल वाला सिस्टम किया। आज मेरा हौंसला खुला हुआ था।, सलहज भी मस्ती के मूड में थी।

भीड़ में मौका देख कर उसका राजस्थानी घाघरे को पीछे से ऊँचा उठाया और ज़िप से लण्ड निकाल कर गांड में डालने लगा। सलहज भी साथ देने लगी। दोनों की कोशिश रंग लाई। लंड गांड में धीरे-धीरे घुसता चला गया।

आधा घंटा तक मस्ती में रहे.. जब देखा.. अब मंदिर के अन्दर पहुँच रहे हैं तब सावधान हो गए।

अभी कथा आगे और भी है।

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

पेले खान

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

अंचल

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

हंसिका अवस्थी

4 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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