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लड़कियों की गांड चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 711 बार

पिचकारी घुसी पिछवाड़े में

वीर सिंह रसिया

11 Dec 2010 को प्रकाशित

पिचकारी घुसी पिछवाड़े में
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आप लोगों के सुझाव मुझे मिले और तारीफों के लिए शुक्रिया। मैं कोशिश करूँगा और अच्छा लिखने की।

तो अब आते हैं इस बार की कहानी पर।

रिसोर्ट वाली मस्ती के बाद शोभा और मैं आपस में खुल गए। अब ऑफिस में भी मौका मिलता तो हम चुम्बन कर लेते थे। कभी मैं उसके नितम्ब मसल देता तो कभी वो मेरी पिचकारी को। यूँ ही हंसी ठिठोली के साथ हमारे दिन गुजर रहे थे।

एक दिन मेरे रूम पर पार्टी का आयोजन हुआ। ऑफिस के कुछ लड़के लड़कियां और मैं और शोभा रूम पर पहुंच गए। गीत-संगीत और बियर का दौर चल रहा था। सब एक दूसरे के साथ डांस कर रहे थे, होश में थे पर मदहोश भी थे। शोभा और मैं मेहमानों की खातिरदारी कर रहे थे और साथ में अपनी बियर के साथ डांस भी कर रहे थे।

तभी मेरे मन में आया और मैंने सबकी नज़र बचा कर उसके उरोजों को दबा प्रिया।“बहुत मूड में आ रहे हो वीर जी।” शोभा ने अपनी वही कातिलाना अदा के साथ कहा।“मूड तो बहुत कर रहा है आज … और आज तुम्हारे पीछे वाले रास्ते में घुसने का मन है।” मैंने उसे बाँहों में झुलाते हुए कहा।“ना ना वीर जी सोचना भी मत … जितना मिल रहा है उसी में खुश रहना सीखो।” उसने साफ़ साफ़ मना कर प्रिया।पर मैं भी कहाँ मानने वाला था मैंने भी जिद पकड़ ली और मिन्नतें करने लगा।

तभी हमारी दोस्त आँचल बोली- क्या हुआ वीर? क्या बात कर रहे हो तुम दोनों?मैंने भी मस्ती में कह प्रिया- शोभा को बोल रहा हूँ एक गिफ्ट देने की … पर वो मना कर रही है।यह सुनकर आँचल बोली- शोभा दे दो ना … जो मांग रहा है वरना मुझे बताओ मैं दे देती हूँ।

उसकी इस भोली सी बात पर मैं और शोभा ज़ोर से हंसने लगे।मैंने शोभा से कहा- देखो तुम दे दो … वरना आँचल तैयार है।आँचल को हमारा मज़ाक समझ नहीं आया या फिर शायद अनजान बनी रही।शोभा ने गुस्से से मुझे देखा और आँचल को बोला- मैं दे दूंगी इसे गिफ्ट … तुम बियर पियो और पार्टी का आनंद लो।

हम फिर से डांस करने लगे।

थोड़ी देर में पिज़्ज़ा आ गया। मुझे तो शोभा के साथ रात रंगीन करनी थी तो मैंने सबको बोला पिज़्ज़ा ठंडा हो जाएगा, जल्दी से खा लो। सब लोग नाच गा कर थक चुके थे और भूखे भी थे। सबने पिज़्ज़ा खाना शुरू किया और ख़त्म भी कर प्रिया।

कुछ देर में एक एक करके सब लोग जाने लगे।

शोभा रूम समेट रही थी मैं सबको बाहर तक छोड़ने गया। आँचल ने जाते वक़्त मुझे बोला- तुम्हारा गिफ्ट शोभा नहीं दे तो मुझे बताना … मैं इसकी खबर लूंगी।मैंने हंस कर उसे कहा- शोभा गिफ्ट दे या ना दे … तुमसे तो मैं गिफ्ट लूंगा ही अब!आँचल ने कहा- ऐसा क्या गिफ्ट चाहिए, ज़रा हिंट तो दो?मैंने उसे कहा- जो एक मर्द को औरत से चाहिए होता है।और आँचल को आँख मार दी।

आँचल ये सुन कर पहले तो थोड़ा झेंपी पर फिर संभलते हुए बोली- वो गिफ्ट तो फिर तुम शोभा से ही लो। मैंने ये गिफ्ट किसी और को दे रखा है।मैंने कहा- मुझे झूठा खाने में कोई परहेज़ नहीं हैं आँचल!आँचल ने मेरे पैन्ट की तरफ देख कर कहा- पर मुझे तो परहेज है वीर!और हँसते हुए विदा कह कर चली गयी।

मैं अंदर आया और शोभा के साथ कमरा व्यवस्थित किया। सब कुछ बहुत जल्दी समेट लिया तो मैंने शोभा को कहा- अब अपनी पार्टी शुरू करते हैं।मैंने गाने चला दिए और हम दोनों डांस करने लगे एक दूसरे की बाँहों में। मैंने अपना हाथ उसके नितम्ब पर लगाया और सहलाने लगा।“लगता हैं वीर जी, आज पिचकारी पीछे दे कर ही मानोगे?”“हां शोभा, मुझे तुम्हारे इन गोलाकार, मखमली नितम्बों का आनंद लेना है।” और उसके नितम्ब की दरार में उंगली फेर दी।वो चिहुँक उठी और मेरे गले लग गयी।

मैंने भी देर ना करते हुए उसके वस्त्र अलग कर दिए, उसके निप्पलों पर जीभ फेरी और उसके पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा। जब उसकी योनि पर हाथ लगाया तो समझ आया को शोभा गर्म हो गयी है और साथ में गीली भी।मैंने अपनी जीभ उसकी योनि में उतार दी, वो सिसकारी लेने लगी। फिर धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए उसके नितम्ब चाटने लगा। उसके गुदा द्वार को गीला किया और जीभ अंदर सरका दी।शोभा ने आह की आवाज से सहमति दी।

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मैंने उसे बिस्तर पर उल्टा लिटाया और अपनी पिचकारी पर थूक लगाया। धीरे से मैंने अपनी पिचकारी उसके पीछे के द्वार पर धकेली। गीलेपन की वजह से पिचकारी का मुँह अंदर चला गया।वो एकदम से झटका देकर उठ गयी, बोली- वीर जी बहुत दर्द हो रहा है और जल भी रहा है।मैंने कहा- थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मजा आएगा। एक काम करता हूँ थोड़ा तेल लगा देता हूँ आसानी होगी।उसने हिम्मत दिखा कर हाँ कह प्रिया।

मैंने तेल लेकर उंगली से अंदर तक भर प्रिया और फिर धक्का लगाया। इस बार मेरी पिचकारी आधी अंदर चली गयी।शोभा की चीख निकल गयी, बोलने लगी- वीर जी, इसे निकाल लो … ऐसा लग रहा है किसी ने तलवार से चीर प्रिया हो।मैंने कहा- बस शोभा, हो गया … आधा अंदर है, थोड़ी हिम्मत रखो मजा आएगा।

फिर मैं उसकी पीठ चूमने लगा और लिंग अंदर बहार करने लगा। वो जब थोड़ी सहज हुयी तो थोड़ा और दम लगा कर पूरी पिचकारी अंदर उतार दी। उसके नितम्ब मेरी पिचकारी को जकड़े हुए थे। बहुत मजा आ रहा था। धक्कों के घर्षण से उसे भी अब मजा आने लगा था।

करीब 15 मिनट की ठुकाई के बाद मैं उसके अंदर ही झड़ गया।मैंने पूछा- मजा आया?शोभा ने कहा- बहुत मजा आया वीर जी … और आपने बहुत प्यार से डाला। मैं आपकी दीवानी हो गयी हूँ। मेरा 2 बार पानी निकला। वीर जी, एक बार योनि की भी ठुकाई कर दो। इसमें बहुत खुजली हो रही है।मैंने कहा- यह रात अपनी ही है। इत्मीनान से सेवा की जायेगी आपकी और आपकी योनि की भी।शोभा ने हंस कर मुझे गले लगा लिया और हम चुम्बन करने लगे।

कुछ देर आराम करके हमने फिर से जवानी का खेल खेलना शुरू कर प्रिया. शोभा नंगी इतो पड़ी ही थी, मैंने शोभा की योनि में जीभ घुसाना शुरू किया तो उसकी सिसकारी निकल गयी।69 के पोजीशन में हम दोनों एक दूसरे के अंगों में खो गए। कभी वो मेरा लिंग गले तक मुँह में ले लेती तो कभी मेरी गोटियां।

फिर अचानक उसने ऐसी हरकत करी जिसका अहसास आज करता हूँ तो अजीब सी लहर दौड़ जाती हैं शरीर में। उसने अपनी जीभ से मेरे गुदाद्वार को चाटा और जीभ को हलक सा अंदर उतार प्रिया।मैं एकदम से उठ बैठा … क्यूंकि ऐसा पहली बार हो रहा था मेरे साथ।

अब तक मेरी पिचकारी भी फिर से धावा बोलने को तैयार हो चुकी थी, लिंग फटने को आ गया था, ऐसा लग रहा था जैसे लिंग की नसें अभी तहस नहस हो जाएंगी।उधर शोभा को भी हाल बुरा था, उसकी आंखें और उखड़ती सांस बता रही थी कि वो अब कितनी उत्तेजित है।

मैं भी देर ना करते हुए उसके नंगे जिस्म के ऊपर सवार हो गया। मैंने लिंगमुंड से शोभा के योनिद्वार पर दस्तक दी। शोभा ने उसका जवाब अपनी टांगें चौड़ी करके योनि द्वार हाथों को फैला कर प्रिया।

मैंने अपने लिंग को शोभा की योनि की गहराइयों में उतार प्रिया और हम दोनों कामक्रीड़ा के समुद्र में गोते खाने लगे। बीच बीच में उसकी घाटियों में अपनी जीभ विलुप्त कर देता।मैं एक बार अपनी पिचकारी शोभा की गुदा में खाली कर चुका था तो इस बार थोड़ा टाइम लग रहा था झड़ने में।

मैंने कुछ देर बाद शोभा को घोड़ी बनाया और फिर पीछे से योनि द्वार में अपना लिंग प्रविष्ट करवाया। शोभा के बदन अकड़ने से समझ आया कि शोभा अपनी मंजिल पर पहुँच चुकी हैं और इस घड़ी का आनन्द ले रही है।यह दृश्य देखकर मैं भी अपने आपको रोक ना सका और उसकी योनि के अंदर ही अपनी पिचकारी की एक एक बूँद खाली कर दी। शोभा गर्भनिरोधक गोली लेती थी तो घबराने की कोई बात नहीं थी। हम दोनों एक दूसरे के अगल बगल लेट कर हांफ रहे थे।

जाने कब आँख लग गयी और हम निर्वस्त्र ही नींद के आगोश में खो गए।

जब मैं जागा सुबह सुबह 5 बजे तो मेरा प्यार शोभा मेरा लिंग चूस रही थी। मेरी नींद शोभा की इस हरकत से ही खुली थी. उसने प्यार से मुझे चुम्बन किया और मेरा हाथ अपनी योनि पर ले जा कर रख प्रिया। योनि की भट्टी फिर से जल उठी थी। हमने एक राउंड अपनी काम क्रीड़ा का और लगाया। आधे घंटे बाद वो तैयार हो गयी और मैं उसे फिर उसके रूम पर छोड़ कर आ गया।

तो दोस्तो … यह थी मेरी और शोभा की कहानी पीछे के द्वार की।आप अपने सुझाव मुझे मेरी मेल आई डी पर भेज सकते हैं।support@mohakkisse.comआपका वीर

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