होम पर वापस जाएं
बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 354 बार

हादसा-4(Haadsa-4)

masterji

05 Mar 2013 को प्रकाशित

हादसा-4(Haadsa-4)
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

पिछला भाग पढ़े:-हादसा-3

थोड़ा बहुत माल मेरे चेहरे पर और मेरे बूब्स पर भी गिर गया। झड़ने के तुरंत बाद उन्होंने लंड फिर से मेरी चूत में डाला, और मुझे चोदने लगे। मैंने कहा, “मन नहीं भरा?” उस पर उन्होंने कहा कि, “मन तो मेरा तेरी चूत से कभी नहीं भरेगा”। मैं मुस्कुराई और उनको किस्स करने लगी। कुछ देर किस्स करने के बाद उन्होंने मुझे कुत्ती बनने को कहा। मैं झट से डॉगी पोज़ीशन में आ गई, और राकेश्वर जी ने भी झट से अपना लंड मेरी चूत में घुसा प्रिया।

लंड चूत के अंदर घुसते ही मेरे मोबाइल की रिंग बजने लगी। मैं इस बात से बहुत गुस्सा हो गई और बोली, “यार अब किसका फ़ोन आगया!” मैं उठी और फोन की तरफ देखा तो मेरे पति का फ़ोन था। मैं थोड़ा हड़बड़ा गई लेकिन फिर मैंने उनका फ़ोन उठाया।

मैं: हैलो, कैसे हो?

मेरे पति: मैं ठीक हूं बेबी, तुम कैसी हो?

मैं: मैं बिल्कुल ठीक हूं।

मैं बोलते-बोलते राकेश्वर जी के बगल में जा कर बैठ गई। मैं फ़ोन पर बोल ही रही थी कि राकेश्वर जी ने अपना लंड मेरे हाथ में रखा, और हिलाने का इशारा किया। मैं उनका इशारा समझ गई और उनका लंड हिलाने लगी। मेरे मन में आया, “एक पति से फ़ोन पर बात कर रही हूं, और एक पति का लंड हिला रही हूं”। ये सोच कर मैं मुस्कुराने लगी।

पति: क्या हुआ, हस क्यों रही हो?

मैं: अरे कुछ नहीं, बस तुमसे बात करके अछा लगा।

पति: अरे मेरी शोना। अच्छा वैसे राकेश्वर जी कैसे है? कोई तकलीफ तो नहीं?

मैंने राकेश्वर जी के तरफ देखते हुए कहा-

मैं: अरे वो तो बहुत खुश है।

ऐसे ही करीब पांच मिनट बात करने के बाद मैंने काम का बहाना बना कर फ़ोन काट प्रिया। फ़ोन कटते ही मैं झट से राकेश्वर जी का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। राकेश्वर जी, “अरे फ़ोन रखते ही शुरु हो गई, वाह क्या बात है!”

मैं चुप-चाप मजे से उनका लंड चूसे जा रही थी, और फिर कुछ ही देर में वो मेरे मुंह में झड़ गए, और मैंने भी उनका सारा पानी बड़े आराम से पी लिया। फिर हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे के बगल में बैठे रहे।

राकेश्वर जी बहुत खुश लग रहे थे। उन्हें खुश देख मुझे भी अच्छा लगा। राकेश्वर जी ने कहा, “वाह! रितु तूने तो मेरा सारा पानी निकाल प्रिया। ऐसा लग रहा है जैसे में फिरसे जवान हो गया हूं“।

मैंने कहा, “वो सब तो ठीक है। मगर आप मुझे दिन भर चोदने के बाद भी थके कैसे नहीं?”

इस पर वो हंसे और बोले, “मुझे भी नहीं पता। तुम इतनी हॉट हो कि मेरा मन ही नहीं भरता। मन करता है कि तुम्हें बस चोदते रहूं। या फिर पहले मैं पहलवानी करता था, इसलिये मेरा शरीर आज भी मेरा साथ दे रहा है”।

उनसे बात करके मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। ऐसे लगा के मानो वो मुझे समझ सकते थे। मेरी धड़कन तेज होने लगी, और मैंने झट से बोल प्रिया, “राकेश्वर जी क्या आप मेरे सच में पति बनेंगे?”

वो ये सुन कर शॉक हो गए और बोले, “रितु ये तुम क्या कह रही हो? तुम्हे मेरे बारे में ऐसा क्यूं लग रहा है?”

मैंने कहा, “आप तो मेरे झूठे पति होने के बाद भी मेरा खयाल रखते है, और मेरे असली पति को तो मेरे लिये टाईम ही नहीं रहता”। ये कह कर मैं उदास हो गई।

राकेश्वर जी हंसे और बोले, “अरे रितु, कितनी भोली हो तुम। हम दोनों का रिश्ता बस एक-दूसरे के शरीर को खुश रखने तक का ही है। और रही बात तुम्हारे पति की, तो वो तो तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार करता है”।

मैंने गुस्से में कहा, “अगर उन्हें मुझसे इतना प्यार है, तो हर बार मुझे छोड़ कर क्यों चले जाते है?”

राकेश्वर जी बोले, “शेखर (मेरे पति का नाम) जब भी मुझसे मिलता है तो तुम्हारे बारे में बहुत बोलता है। वो सारी मेहनत बस तुम्हारे लिये कर रहा है”।

ये बात सुन कर मुझे अच्छा लगा और बुरा भी, कि कैसे मैं अपने पति के प्यार को कम समझ बैठी। लेकिन राकेश्वर जी ने मुझे अच्छे से समझाया और मुझे मेरी गलती का एहसास हुआ।

हम दोनों काफी देर नंगे ही सोफे पर बैठे थे, और मैंने तो दिन भर कोई कपड़ा ही नहीं पहना था। सच कहूं तो मुझे अब नंगी रहने में ही मजा आ रहा था।

कुछ देर बाद राकेश्वर जी ने मुझसे खाने के बारे में पूछा तो मैंने उन्हें कहा कि, “मैं अब खाना बनाने के हालत में नहीं हूं”। हम दोनों दिन भर चुदाई के बाद थक गए थे, और पसीने से लथपथ थे। तभी राकेश्वर जी ने कहा, “तुम भी थक गई हो और मैं भी। तो चलो आज बहार होटल में खाना खाते है”।

मैं ये सुन कर बहुत खुश हुई और जल्दी से हां कर दी। बस मैं कपड़े पहनने के लिए उठने ही वाली थी कि राकेश्वर जी का फ़ोन बजा। उन्होंने फ़ोन देखा तो खुश हो गए। दरसल उनके जिगरी दोस्त का फ़ोन था इसलिए वो खुश हो गए।

फिर क्या, दोस्त जैसे आपस में हसी-मज़ाक करके बात करते है, वैसे ही उनकी बातें शुरु हो गई। मैं राकेश्वर जी को हस्ता हुआ देख कर बहुत खुश हुई। क्योंकि शायद घर जलने के हादसे के बाद वो पहली बार इतना मन भर कर हस रहे थे। तो ये देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा।

मैं तो खैर वैसे ही नंगी राकेश्वर जी को फ़ोन पर बोलते हुए सुन रही थी, और मन में सोच रही कि यार कब खतम होगा इनका बोलना। बाहर खाने भी जाना था।

8:30 बज गए थे। मैं ये सब सोच ही रही थी कि राकेश्वर जी फ़ोन पर बात करते हुए बोले, “अरे अभी? अभी तो मुश्किल है। अच्छा कुछ अर्जेंट बात है? ठीक है फिर।” ये कह कर उन्होंने फ़ोन रख प्रिया।

मैं: किसका फ़ोन था जी?

राकेश्वर जी: अरे मेरे जिगरी दोस्त का फ़ोन था। दीपक नाम है उसका।

मैं: अच्छा। तो क्या कह रहे थे वो?

राकेश्वर जी: रितु देखो गुस्सा मत होना। पर मुझे अभी जाना होगा। मेरे सारे दोस्तों ने मुझे मिलने बुलाया है। मुझे जाना ही होगा।

मैं: अरे आप मेरी चिंता मत किजीये। जाईये अपने दोस्तों से मिल कर आइये। हम किसी और दिन बाहर खाना खाते है।

राकेश्वर जी: तुम सच में गुस्सा नहीं हो ना?

मैं: गुस्सा तो नहीं हूं, पर नाराज हूं। लेकिन आप भी अपने दोस्तों से मिलने जा रहे है, तो मैं भी कैसे मना करूंगी।

राकेश्वर जी: रितु तुम कितनी समझदार हो। अब तो हम आज ही बाहर खाना खाएंगे।

मैं (खुश होकर): सच में!?

राकेश्वर जी: हां बाबा, मेरा इन्तज़ार करना।

मैंने राकेश्वर जी के कपड़े लाकर दिये, और वो उन्हें मेरे सामने पहनने लगे। कपड़े पहन कर तैयार होने के बाद वो निकल रहे थे, कि मैंने उनका हाथ पकड़ा और उनको रोक कर झट से उनके होंठों पर कस के किस्स किया और बोली, “जल्दी आना”।

उन्होंने मेरी गांड पर एक थप्पड़ मारा, और हां में सर हिलाया। फिर राकेश्वर जी चले गए और मैं अकेली ही घर पर नंगी रह गई। मैं नंगे बदन ही टीवी देख रही थी। अब तो मुझे नंगा रहने में शरम भी नहीं आ रही थी।

ऐसे ही बैठी थी कि मुझे राकेश्वर जी की बात याद आ गई। उन्होंने कहा था कि मेरे पति से ज्यादा मुझसे कोई प्यार नहीं कर सकता। मुझे भी मेरे पति से बहुत प्यार है। पर क्या करूं मेरी चूत की आग ही इतनी बढ़ गई कि में राकेश्वर जी से चुद गई। मुझे मेरे पति की याद आ रही थी। तो मैंने उन्हें फ़ोन किया।

(मैं और मेरे पति फ़ोन पर बात करते हुए)

मैं: हेलो।

पति: हेलो रितु, क्या हुआ फिरसे फ़ोन किया?

मैं: जी वो आपकी याद आ रही थी।

पति: मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही है।

मैं: तो फिर यहां क्यों नहीं आते?

पति: आना तो चाहता हूं, पर तुम तो जानती हो

बिज़नेस को संभालना कितना मुश्किल है।

मैं (गुस्से में): तुम और तुम्हारा बिज़नेस।

पति: अरे तुमने मुझे डांटने के लिए कॉल किया है क्या?

मैं: नहीं जी, बस आप काम में लगे रहते हैं, और मेरी तरफ कुछ ध्यान नहीं देते इसलिये।

पति: मैं ये सब तुम्हारे लिये ही कर रहा हूं।

ऐसे ही बात करते-करते हमारी बात-चीत थोड़ी गरम हो गई और मैं अपनी चूत में उंगली करने लगी। फिर मेरे पति ने मुझसे पूछा कि, “राकेश्वर जी घर पर है कि नहीं?” तो मैंने उन्हें कहा कि, “वो बाहर गए है”। ये बोलते ही उन्होंने मुझे वीडियो कॉल करने बोला। उन्हें मुझे अच्छे से देखना था। वीडियो कॉल करते ही मेरे पति चौंक गए क्योंकि मैं नंगी ही थी। मुझे ऐसे देख वो बोले-

पति: वाह! मेरी बीवी तो तैयार बैठी है।

मैं इस बात पर मुस्कुराई। फिर उन्होंने भी अपने कपड़े निकाले, और हम दोनों अपने आप को खुश करने लगे। वो अपना लंड हिला रहे थे, और मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी। ये खेल करीब आधे घंटे तक चला। फिर हम दोनों शांत हो गए।

मैंने पूछा: कितने दिन बाद लौटोगे?

पति: पता नहीं बेबी। 1 या 2 महीने लग सकते है।

मैं: इतने दिन! (मैं ये सुन कर थोड़ी खुश भी हो गई कि और 1-2 महीने मैं और राकेश्वर जी पति पत्नी बन कर रह सकते है)

फिर कुछ और देर हमने बाते की, और मैंने बातों-बातों में बता प्रिया कि मैं और राकेश्वर जी बाहर खाना खाने जा रहे थे। मुझे लगा कि मेरे पति गुस्सा होंगे, पर वो उल्टा खुश हो गए। मेरे पति का मुझ पर पूरा विश्वास था। मुझे बुरा भी लगा कि मैं उनका विश्वास तोड़ रही थी। फिर हमने एक-दूसरे को बाय कहा, और फ़ोन कट कर प्रिया।

मैंने घड़ी देखी तो 9:30 बज गए थे। मैं बाथरुम में गई, और अच्छे से नहा लिया। पूरे आधे घंटे तक नहाने के बाद मैं अपने रूम में तैयार होने के लिये गई। मैंने लाल नेट की सारी पहन ली, और काले रंग का ब्लाऊज पहना, और एक सरप्राइज था, वो आपको बाद में पता चलेगा।

मैं बहुत ही अच्छे से सज-धज कर तैयार थी, और राकेश्वर जी का इन्तज़ार कर रही थी। करीब 11:00 बजे राकेश्वर जी घर आए।

मैं: इतनी देर क्यूं कर दी?

राकेश्वर जी मुझे देख कर एक-दम थम से गए और बोले, “रितु तुम कितनी सेक्सी लग रही हो! मन कर रहा है कि तम्हें फिर से चोदना शुरु करूं“।

मैं शर्मा गई और उनसे फिर पूछा कि, “देर क्यों हो गई?” उन्होंने कहा कि,‌ “बातों-बातों में समय का पता नहीं चला।” और फिर मैंने भी ज्यादा कुछ पूछा नहीं। मैं राकेश्वर जी के सामने गई और उन्हें गले लगाया, और उन्होंने भी मेरी गांड और बूब्स को कस कर दबाया। मेरी तो आह निकल गई।

राकेश्वर जी: चलो रितु अब चलते है।

मैं: ठीक है।

हम दोनों घर के बाहर आ गए, और कार में बैठ गए।

आगे की कहानी अगले भाग में।

अगला भाग पढ़े:-हादसा-5

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Baap Beti Ka Pyaar – Part 17
बाप बेटी की चुदाई

Baap Beti Ka Pyaar – Part 17

Hello friends, mera naam Sarika hai aur mere papa ka naam Sanjay hai, me unko pyar se sanju bolti hun. Apne meri kahani padhi aur muje comment bhi diye uske liye me ap sabko thank you.

8 मिनट 585
Bistar Ki Rajneeti – Episode 17
बाप बेटी की चुदाई

Bistar Ki Rajneeti – Episode 17

Ab tak aapne padha ki Aparna ne election jeetne ke baad apn ghar walo se phir rishte sudharne ki koshhish ki par maamla aur bigad gaya.

14 मिनट 442
कमसिन बेटी की महकती जवानी-3
बाप बेटी की चुदाई

कमसिन बेटी की महकती जवानी-3

अब तक की सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि पद्मिनी के बापू ने रात को उसकी चूत में उंगली डाल कर चैक कर लिया था कि उसकी बेटी अभी कुंवारी है. फिर उसके चूतड़ों की दरार में अपना लंड रगड़ कर माल निकाल कर सो गया था.अब आगे..

16 मिनट 1,018

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।