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चुदाई की कहानी पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 515 बार

मैंने अपने पति की तमन्ना पूरी की

मनीषा दिल्ली

26 Feb 2018 को प्रकाशित

मैंने अपने पति की तमन्ना पूरी की
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मेरा नाम मनीषा है मैं दिल्ली की रहने वाली हूं। मैं दिखने में एकदम मस्त हूं। मेरा साइज 32 36 38 है, मेरा बदन एकदम चिकना है।मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं और वह भी मुझसे बहुत प्यार करते हैं वो रोजाना ऑफिस जाते हैं और ऑफिस आने के बाद मुझे खूब चोदते हैं। मेरी शादी को 8 साल हो गए हैं, मेरी और मेरे पति की शादीशुदा जिंदगी सामान्य चल रही थी।

सब कुछ सामान्य चल रहा था तो मुझे और मेरे पति को कुछ नया चाहिए था. जब वह मेरे साथ सेक्स करते थे तो मुझे किसी और से चुदवाने के लिए कहते थे। पहले तो मुझे यह बहुत अजीब सा लगता था परंतु धीरे-धीरे सामान्य लगने लगा और कुछ दिन बाद मेरा भी मन किसी और से चुदवाने के लिए करने लगा।

कुछ दिनों बाद मेरे पति ऑफिस के काम से बाहर चले गए और 2 हफ्ते बाद वापस आए. इस समय के दौरान मेरा मन ऐसा करता था कि कोई आए और मेरी चूत फाड़ दें।

मेरे पति जब वापस आए तो करीब रात के 9:00 बजे होंगे. उनके साथ उनका एक दोस्त भी था, उसका घर मेरठ में है.

सर्दियों के दिन थे, इस वजह से हमने उसे वहीं रुकने के लिए कहा और वह मान गया. हमने रात को खाना खाया और उनके दोस्त का एक कमरे में बिस्तर लगा प्रिया. मैं और मेरे पति अपने कमरे में आ गए.

बहुत दिन से मेरी चूत प्यासी थी। उन्हें देखते ही मेरा मन कर रहा था कि खा जाऊं उनके लंड को।

थोड़ी देर बाद वे मेरे पास आए और मेरे कपड़े उतारने लगे. मैंने उनसे कहा- अभी तो आपके दोस्त सोए भी नहीं हैं, अभी मत करो प्लीज!लेकिन मेरे पति नहीं माने और उन्होंने मुझे धीरे धीरे नंगी कर प्रिया. मैंने भी कुछ खास मना नहीं किया।

फिर वे मेरे होंठ चूसने लगे, कभी मेरे निप्पल दबाते, कभी मेरी चूत पर हाथ फेरते। मैं खूब गर्म हो चुकी थी मैंने उनसे कहा- अब चोद ही डालो ना मुझे।तब हम दोनों चुदाई में मगन हो गए. हम दोनों जोश में थे, तब उन्होंने मुझसे बोला- मनीषा आज तो दो हो जायें?मैं उनका इशारा समझ चुकी थी, मैंने ना में इशारा किया।

परंतु वे नहीं माने. कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे फिर कहा.मेरा मन खूब चुदवाने को कर रहा था तो मैंने बोल प्रिया- जाओ, बुला लाओ।

मेरे पति सच में चले गए तो मैं एकदम से सहम गई, मैंने उन्हें आवाज लगा कर रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरी नहीं सुनी. मैं डर की वजह से अपने कपड़े पहनने लगी लेकिन थोड़ी देर बाद ही वे दोनों कमरे में आ गए.मैं अपने कपड़े नहीं पहन पाई थी इसलिए मैंने अपने आप को रजाई से ढक लिया.

मेरे पति मुझसे कहने लगे- मनीषा, अब मान भी जाओ!और उनका दोस्त भी कहने लगा- भाभी जी, अब मान भी जाओ ना … हमें भी तो मौका दो आपकी सेवा करने का। आप चाहो तो मैं अगली बार अपनी पत्नी को भी लेकर आऊंगा और फिर हम चारों मजे लेंगे।

धीरे धीरे वो दोनों मुझे मनाने लगे. मेरा मन तो खूब कर रहा था परंतु मैं अपने पति के सामने रंडी की तरह नहीं चुदवाना चाहती थी। मेरे मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे परंतु वे दोनों मेरे पास आकर बैठे।मेरे पति ने मुझे पीछे से बांहों में भर लिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगे. मैं छटपटाने लगी और उनका दोस्त मेरे पैरों पर हाथ फिराने लगा. अब मैं अपना कंट्रोल खोती जा रही थी।

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धीरे-धीरे उनका दोस्त हाथ फिराते फिराते मेरी चूत तक आ गया. फिर तो मैंने सोच लिया कि आज तो हो ही जाने दो।

फिर हम तीनों चुदाई में मग्न हो गए. कभी उनका दोस्त मेरी चूची को काटता, कभी मेरी चूत पर किस करता. मैं तो मानो पागल सी हो जा रही थी।फिर धीरे से उनके दोस्त ने मेरे सर पर हाथ लगा कर अपने लंड की तरफ इशारा किया. मैं समझ गई कि वह मुझसे अपना लंड चुसवाना चाहता है. मैं भी जोश में थी, मैंने उसका सारा लंड मुंह में ले लिया और गपागप चूसने लगी.

मेरे पति यह नजारा देखकर एकदम भौचक्के से रह गए क्योंकि आज से पहले मैं इतने जोश में कभी नहीं चुदी थी।लेकिन वो जानते थे कि यह सारा खेल उन्होंने ही रचा है तो अब एतराज भी क्या करना!वे सब देख रहे थे कि कैसे उनकी प्रिय पत्नी को कोई कोई गैर मर्द नोच रहा था. कभी वह मेरी कमर पर किस करता, कभी मेरे मम्मे दबाता. वह मेरी छाती को खाए जा रहा था और मैं पूरे जोश में उसका साथ दे रही थी।

फिर मैंने अपने पति के दोस्त को अपने ऊपर सीधा कर लिया और उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में ले लिया क्योंकि हमें बहुत दिन हो गए थे तो उनका दोस्त मुझे अपनी बांहों में लेकर गपागप चोदने लगा और मैं मस्त हो कर उसका साथ दे रही थी.

कुछ देर बाद वो झड़ने वाला था। मैंने भी अपने हाथों से उसके कंधों को पकड़ रखा था और उसके पैरों को अपने पैरों से जकड़ रखा था. मैं उसकी बाहों में झड़ना चाहती थी। फिर हम दोनों चरम रीमा पर आ गए तो मैंने उससे कहा- अपना पानी मेरी चूत मैं ही निकाल दे!उसने सारा वीर्य मेरी चूत में भर प्रिया. उसका वीर्य चूत से निकल कर जांघ पर बह निकला।

मैं पहली बार अपने पति के अलावा किसी दूसरे के लंड से झड़ी थी। मेरे पति इन सबके बीच थोड़े से अलग हो गए थे, वे जानते थे कि आज मैं उनके दोस्त के लंड से झड़ना चाहती हूं।फिर मैंने अपने पति को कहा- जल्दी से आ जाओ और मेरी प्यास बुझा दो।

वीर्य से भरी हुई चूत में फिर मेरे पति ने अपना लंड डाल प्रिया और गपागप चोदन करने लगे मेरी गीली चुदी हुई चूत का … फिर थोड़ी देर बाद वे भी झड़ गए. दो मर्दों का वीर्य मेरी चूत में समा नहीं रहा था.

यह पहली बार था जब मैंने किसी और का लंड अपनी चूत में लिया था.

यह एक सच्ची कहानी है. इससे ज्यादा और मैंने उस समय पर कुछ नहीं किया था। जैसा उस दिन घटित हुआ था, वैसा मैंने आपको बता प्रिया. क्योंकि पहली बार था इसलिए हम सब थोड़े नर्वस भी थे.

फिर सुबह उनका दोस्त चला गया और मेरे पति मुझसे पूछने लगे- कैसी रही रात?मैं बस हल्की सी मुस्कुराती रही और रात के बारे में सोचती रही.उसके बाद ऐसा फिर कभी नहीं हुआ। ना कभी उन्होंने मुझसे कुछ कहा, ना मैंने अपने पति से कुछ कहा कि उसे फिर बुला लो या नहीं!क्योंकि मैं एक पतिव्रता औरत थी इसलिए मैं अपने पति की नजर में गिरना नहीं चाहती थी.

उस रात भी जो कुछ हुआ था, वह सब मेरे पति की मर्जी थी. लेकिन मैं अब सोचती हूं कि काश ऐसा फिर हो जाए, अबकी बार में बिल्कुल रंडी की तरह चुदूँगी।क्या आप मेरी इस कहानी से सहमत हैं?प्लीज मुझे ईमेल जरूर करें।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

नितिन

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

विजय कुमार जोशी

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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