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पहली बार चुदाई • पठन समय: 6 मिनट • पढ़ा गया: 1,052 बार

वो पहला स्पर्श और चुम्बन

यास्मीन पटेल

01 Jul 2014 को प्रकाशित

वो पहला स्पर्श और चुम्बन
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हाय दोस्तो, मेरा नाम यास्मिन पटेल है, बी.ए प्रथम वर्ष की छात्रा हूँ, रायगढ़ छत्तीसगढ़ में निवास करती हूँ, मेरी कद 5’3′ है, रंग गोरा, पूर्ण विकसित स्तन, कमर पतली, गोल चेहरा और कमर तक छूते हुए बाल, मेरी फिगर 34-28-34 है। वैसे तो मैं अपने मुख से अपना तारीफ नहीं करना चाहती पर यदि मैं अपनी कंचन काया के बारे में आपको ना बताऊँ तो आपको मेरे तन की बनावट का पता नहीं चलेगा। वैसे तो भगवान ने मुझे बड़े ही फ़ुरसत से बनाया है, या यूँ कहिए साक्षात मदमस्त जवानी की मूरत को धरती पर उतार प्रिया है।

तो मैं आपको मेरी आपबीती के बारे में अवगत कराती हूँ। बात दो वर्ष पहले की है, जब मैं कक्षा दसवीं में पढ़ती थी, उस समय मेरे सीने का उभार 32सी था, मुझे बचपन से ही सुंदर दिखने का और साज-श्रृंगार का बड़ा शौक है, मैं अपने आपको हमेशा हल्के-फुल्के मेकअप कर अपने आप को बहुत ही सुसज्जित रखती हूँ, मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूँ इसीलिये मेरे माता पिता मेरी हर ख्वाहिश और जरूरत को पूरी करते हैं, मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते !

दोस्तो, मैं आपका ज़्यादा समय न लेते हुए सीधे पॉईंट पर आती हूँ। मेरे स्कूल और मेरे घर की दूरी लगभग 1.5 कि.मी थी, यह रास्ता सुनसान तो नहीं, पर इक्के-दुक्के मकान बने हैं, दो-चार टूटे हूए घरों के खंडहर भी हैं।

बात अप्रैल माह की है, हमारी परीक्षा का अंतिम पेपर था, उस दिन मैंने पेपर जल्दी कर लिया और उत्सुकतावश मैंने अपनी सहेलियों का इंतजार न करते हुए अकेली ही अपने घर की ओर चल पड़ी। दोपहर का समय होन के कारण रास्ते में किसी का आना-जाना नहीं हो रहा था।स्कूल से लगभग आधे किलोमीटर चली हूँगी कि अचानक खंडहर से मेरे ही स्कूल के तीन लड़के जो मेरे से सीनियर क्लास के थे, अचानक बाहर आये और मुझे कहा- अरे यास्मिन, आओ तुझे एक चीज दिखाते हैं। वे मुझे खंडहर के पीछे ले गए जहाँ हमें कोई नहीं देख सकता था। फिर खंडहर की आड़ में एक लड़के ने कहा- यास्मिन हम जो कर रहे हैं, चुपचाप रह कर करने दे।

तो मैंने कहा- प्लीज मुझे जाने दो, अगर किसी ने देख लिया तो मैं किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहूँगी।

इस पर दोनों लड़कों ने तो कोई प्रतिक्रिया नहीं की पर तीसरे लड़के ने मेरे सीने पर हाथ रखकर मेरे स्तनों को धीरे-धीरे मसलते-सहलाते हुए कहा- देख यास्मिन, अगर तुझे अच्छा न लगे तो दोबारा नहीं करेंगे, पर एक बार तो करवा के देखो !

इस पर मैंने कुछ नहीं कहा तो वह मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरी चूचियों को अपने दांतों से हल्के‍-हल्के काटने लगा। उसकी ऐसी हरकतों से मेरे तन-बदन में चींटियाँ सी रेंगने लगी थी। तभी पीछे वाले लड़के ने मेरी शर्ट की जिप खोल दी और कंधे से नीचे सरका प्रिया।

फिर दूसरे लड़के ने मेरी पजामी का नाड़ा खोल प्रिया और पेंटी को नीचे सरका कर मेरी चूत में उंगली डालने लगा और अंदर-बाहर करने लगा, उसकी इस हरकत से मेरा बदन अकड़ने लगा था, मैं अपना होश खोने लगी थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं हवा में उड़ रही हूँ, जो लड़का पीछे था, उसने अब मेरी ब्रा का हुक भी खोल प्रिया।

मैं पूरी तरह उन तीनों के सामने जन्मजात निर्वस्त्र नंगी खड़ी थी,और पीछे वाले लड़के ने मेरी चोटी को पीठ से हटा कर मेरे कंधे, कान, गर्दन और पीठ पर चुम्बन करने लगा, मेरे पूरे बदन को चुम्बनों से सराबोर कर प्रिया, उसके हर चुम्बन से मेरा बदन सिहर उठता था, मेरे सीने के साथ खेलने वाला अब मेरे एक स्तन को हाथ से दबा रहा था तथा दूसरे स्तन को अपने होटों से चूस रहा था। नीचे बैठा हुआ लड़का मेरी चूत के अंदर अपना जीभ डालकर चाटने लगा था और मेरी भगनासा के दाने को दांतों से हल्के-हल्के काट रहा था।

उन तीनों के हरकतों से मेरी सांसें उखड़ने लगी थी, न चाहते हुए भी मेरे मुख से कामातुर ध्वनि निकलने लगी थी- आअ अग अअहा अम्माह अअह उह उईई मांआ आहा नहींइ प्लीज आअह !

और फिर मेरी जवानी का रस फूट पड़ा और मैं उसमें बह गई, मेरे लाख मना करने के बाद भी मेरी चूत ने अपना कामरस का लावा बाहर निकाल प्रिया।

तभी तीनों लड़कों ने मेरे कपड़े उठाकर मुझे दिये और कहा- यास्मिन, तुम्हें बुरा लगा हो तो प्लीज़ हमें मॉफ कर देना, हम तुम्हारे साथ ऐसा नही करना चाहते थे, पर तुम्हारी मदमस्त जवानी और कंचन काया के मीनूरस में हम अपना होश खो बैठे और यह सब कर गये, प्लीज हमें मॉफ कर देना…!

मेरी जुबान पर तो जैसे ताला लग गया था, मेरे गले से आवाज नहीं निकल रही थी, बस आँखों से आंसू बह रहे थे, उन्हें लगा शायद मैं रो रही हूँ, उन तीनों ने जाते-जाते मुझे 100 का नोट प्रिया और कहा- यास्मिन, तुम्हें अच्छा लगा हो तो हमें बताना, हम तुम्हारी इच्छा के अनुरूप ही तुम्हारे बदन से खेलेंगे, जैसा तुम चाहोगी वैसा ही करेंगे।यह कह कर वे लोग चले गये।

फिर मैने अपने कपड़े पहने और अपने घर की ओर चल पड़ी। तब तक मेरी सारी सहेलियाँ भी घर पहुँच रही थी।

तो दोस्तो, मेरी यह आपबीती आप लोगों को कैसी लगी?अपनी राय और सलाह प्लीज़ मुझे मेल करें !support@mohakkisse.com3435

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