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पहली बार चुदाई पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 632 बार

कुंवारी पड़ोसन को प्रिया चुदाई ज्ञान

चक्रेश यादव

12 Aug 2010 को प्रकाशित

कुंवारी पड़ोसन को प्रिया चुदाई ज्ञान
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दोस्तो, पिछले दिनों आपने मेरी कहानियाँ पढ़ी और ढेर सारे तारीफ भरे मेल किए, जिसके लिए मैं आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।

कुछ लोग मेल में लिखते हैं कि किसी लड़की का जुगाड़ करवा दीजिए, अत: आपसे निवेदन करता हूँ कि जब किसी लेखक को आप मेल करें तो ऐसी बेतुकी बातें न करें और न ही अभद्र भाषा का प्रयोग करें।

आइए चलते हैं कहानी की ओर और खो जाते हैं एक मीठे एहसास में जहाँ सिर्फ मस्ती ही मस्ती बिखरी हुई है…

मित्रों आपने पिछली कहानीभाभी की जीरो पार्टीमें पढ़ा कि जब मैं भाभी के साथ मस्ती कर रहा था तो बगल की चारपाई पर लेटी भाभी की पड़ोसन नीता पूरा खेल देख रही थी और बार-2 करवट बदल रही थी।

मेरा मन तो था कि नीता के साथ भी मजे करूँ मगर भाभी ने मना कर रखा था इसलिए मैंने नीता को नहीं छेड़ा था, किन्तु बाद में भी मैं नीता के बारे में सोचता रहता था। नीता को 1-2 बार मैंने भाभी के साथ देखा था।

कई दिन बाद एक दिन भाभी के मोबाइल से नीता का फोन आया।

मैं समझा भाभी होंगी तो मैं बोल पड़ा- हैलो जानेमन, कैसी हो?

‘मुझे जानेमन कब से बना लिया?’ नीता बोली।

बदली आवाज से मुझे कुछ शक हुआ, मैं चुप रहा।

‘हैलो, मैं नीता हूँ, पहचाना नहीं क्या?’ वो बोली।

‘हाँ नीता, मैं तुम्हें पहचान नहीं पाया था, मैं समझा भाभी हैं, और बताइए !’ मैंने कहा।

‘भाभी के साथ बहुत मस्ती करते हो ! क्यों?’ वो बोली।

‘क्या करूँ, बिना किसी जवान साथी के बिना टाइम ही नहीं कटता।’ मैंने कहा।

दोस्ती करने के लिए तुम्हें एक शादीशुदा ही मिली?’ उसने पूछा।

‘प्रेम से जो भी नमक रोटी मिल जाए, उसी में गुजारा कर लेता हूँ, कुँवारी लड़कियाँ नखरे ज्यादा दिखाती हैं।’ मैंने कहा।

‘अच्छा बताओ कि उस दिन भाभी के साथ क्या कर रहे थे?’ उसने पूछा।

‘कुछ तो नहीं !’ मैंने कहा।

‘मुझे मत बनाओ मैं सब देख रही थी।’ नीता बोली।

‘अच्छा? क्या देखा था तुमने?’ मैं शरारत के मूड में आ गया।

‘भाभी का दूध पी रहे थे न?’ वो शरमाते हुए बोली।

‘हाँ यार, तुमने तो सच में देख लिया, और क्या-2 देखा?’ मैंने कहा।

‘क्या बताऊँ, बड़ा गंदा काम करते हो !’ नीता ने कहा।

‘तुमने कभी नहीं किया क्या?’ मैंने पूछा।

‘नही, मैं ऐसी नहीं हूँ !’ वो बोली।

‘कभी तो करना ही पड़ेगा।’ मैंने कहा।

‘नहीं, मैं ऐसा काम कभी नहीं करुँगी।’ उसने कहा।

‘क्या अपने पति के साथ भी नहीं करोगी? मैंने तो सुना है तुम्हारी शादी भी तय है?’ मैंने कहा।

‘ऐसा करना क्या जरूरी है? क्या मिलता है यह सब करके?’ वो बोली।

यह करना ज।रूरी है, इससे क्या मिलता है, यह फोन पर नहीं बता सकता कभी मिलो तो बताऊँ’ मैंने कहा।

‘कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करोगे?’ वो बोली।

‘कुछ नहीं करुँगा सिर्फ वो बताऊँगा जिससे तुम भी मजे ले सकती हो और अपने पति को भी खुश रख सकती हो।’ मैंने कहा।

‘ठीक है, मैं किसी दिन भाभी के घर पर आऊँगी, तब बता देना लेकिन कुछ करना मत ! ठीक है?’ उसने कहा।

‘ठीक है बाबा, कुछ नहीं करुँगा अब भाभी से बात कराओ !’

‘भाभी अभी कहीं गई हैं, जब आएँगी तो करवा दूँगी बाय !’ और नीता ने फोन रख प्रिया।

करीब बीस मिनट बाद भाभी की मिसकाल आई, मैंने कालबैक किया। भाभी से मैंने नीता से हुई बात के बारे में बताया और उससे मिलवाने को बोला तो भाभी साफ मना करने लगी, बोली- नहीं, तुम्हें नए माल का चस्का लग जाएगा तो मुझे तो भूल ही जाओगे, न बाबा न, मैं ऐसा नहीं करुँगी।’

मैंने भाभी को समझाया- यार, तुम तो हमेशा मेरी रहोगी, एक ही मुलाकात की तो बात है यार, करवा दो ! वैसे भी तुम्हारा… सातवाँ महीना चल रहा है ज्यादा झटकों से तुम्हें भी तकलीफ होगी इसलिए तब तक नीता को निपटा प्रिया जाए।

काफी मक्खन लगाने के बाद भाभी मानी।

मैंने भाभी को सारा प्रोग्राम समझा प्रिया।

कुछ दिनों के बाद नीता की रिश्तेदारी में तेरहवीं थी जिसमें नीता के घरवालों को चले जाना था उसी रात का प्रोग्राम तय किया गया।

दो दिन बाद वो रात भी आ गई जिसका मुझे इंतजार था। फोन पर सारा कार्यक्रम तय था जिसके अनुसार मैं रात का खाना खाकर करीब 10 बजे घर से निकल पड़ा।

फरवरी में वैसे तो ठंड काफी कम हो जाती है पर इधर दो दिन पहले ओले पड़े थे जिससे ठंड काफी बढ़ गई थी।

मैं सुनसान रास्ते पर चला जा रहा था, ठंडी हवा के झोंके शरीर में सिहरन पैदा कर रहे थे। मुझे आभास हो रहा था कि चूत का नशा इंसान में किसी भी परेशानी से लड़ने की ताकत पैदा कर देता है।

भाभी के घर के पास पहुँच कर मैंने भाभी को मैसेज किया, दो मिनट बाद जवाब आया- पीछे का दरवाजा खुला है, आ जाओ।

मैं दबे पाँव अंदर गया, भाभी ने बढ़कर मेरा आलिंगन किया, मैंने भी भाभी को किस किया, यह देख नीता शरमा गई जो बरामदे में बैठी हीटर से हाथ सेंक रही थी।

मैं नीता के पास गया और वहीं बिछी चटाई पर बैठ गया और नीता से बोला- हैलो नीता, कैसी हो?

‘मैं तो ठीक हूँ, अपनी सुनाइए !’ नीता मुस्कुराते हुए बोली।

‘मैं भी ठीक हो जाऊँगा तुमसे मिलकर !’ मैंने कहा।

तब तक भाभी बोली- तुम लोग एक दूसरे को ठीक करो, मैं तब तक चाय बनाती हूँ। ओके?’ और मेरे गाल में चिकोटी लेकर चली गई।

मैंने नीता से कुछ देर इधर-उधर की बात करने के बाद अपने काम की बात पर आ गया, मैं बोला- अच्छा नीता, यह बताओ कि तुमने कभी किसी लड़के से दोस्ती की है?

‘नहीं मेरे घर वाले बहुत सख्त हैं, मुझे कहीं अकेले नहीं जाने देते, वो तो भाभी के घर में कोई लड़का नहीं है, इसलिए यहाँ सोने प्रिया वरना यहाँ भी मुझे अकेले नहीं छोड़ते।’

‘तो तुमने मुझसे मिलने का प्रोग्राम कैसे बना लिया?’ मैंने पूछा।

‘भाभी कह रही थी कि जो लड़की सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती, वो अपने पति को खुश नहीं कर सकती जिससे दाम्पत्य जीवन नर्क बन जाता है और तुम तो जानते हो कि मेरी शादी तय है इसलिए मैंने सोचा कि तुम लोगों से कुछ जानकारी लेने में क्या हर्ज है इसलिए…’ वो बोली।

‘गुड, काफी समझदार हो यार तुम तो !’ मैं मन ही मन अपनी योजना को सफल होता हुआ देख खुश हुआ।

तब तक भाभी चाय लेकर आ गई। हम तीनों ने चाय पीना पीना शुरु किया।

मैं नीता से बोला- देखो नीता, थ्योरी और प्रैक्टिकल में फर्क होता है, जो काम करने से जितना सीखा जा सकता है उतना सिर्फ बताने से नहीं इसलिए कुछ तो करना ही पड़ेगा !

‘हाँ, लेकिन गलत काम मत करना !’ वो बोली।

‘नहीं यार, कुछ गलत नहीं होगा, मैं जो करुँ तुम उसे महसूस करना और जो भाभी बताएँ वो करती रहना ! इससे तुम्हें पूरी बात मालूम हो जाएगी !’

नीता बोली कुछ नहीं, सिर्फ मुस्कुराती रही। मेरी बातें सुनकर भाभी भी मुस्कुरा रही थी।

चाय खत्म हो चुकी थी अत: भाभी ने कहा- चलिए बिस्तर पर चलते हैं, बाकी बातें वहीं करेंगे !

मैं उठ गया और नीता का हाथ पकड़कर उठाया, वो भी शर्माते हुए उठी और धीरे-धीरे मेरे साथ चलने लगी।

सच बताऊँ दोस्तो, उसका गोरा चेहरा, पतले गुलाबी होंठ और उसका शर्माना देखकर मेरा लंड बेताब हो रहा था लेकिन मैं किसी तरह खुद पर काबू किए हुए था।

भाभी ने योजना के अनुसार एक ही बिस्तर लगाया था, यह देखकर नीता बोली- क्या एक ही बिस्तर पर तीनों लेटेंगे?

भाभी ने कहा- हाँ यार, इससे ठंड भी नहीं लगेगी और चक्रेश तुम्हारे साथ कुछ गलत करे तो मैं तुम्हारी मदद भी करुँगी, है न?

मैं और नीता दोनों मुस्कुराने लगे।

भाभी ने नीता को बीच में लिटाया मैं और भाभी अगल-बगल लेट गए। मैं थोड़ा उठकर नीता के ऊपर से होता हुआ भाभी को चूमने लगा, फिर नीता के कान में कहा- नीता भाभी की छाती दबाओ !

नीता धीरे-धीरे दबाने लगी, नीता के एक गाल पर मैं और दूसरे पर भाभी चुम्बन करने लगी। भाभी ने नीता की एक छाती और मैं दूसरी छाती सहलाने लगा।

‘हाऽऽऽय… क्या गोल और मस्त छातियाँ थी !’ इधर मेरा लंड सख्त होकर उसकी जाँघ फाड़ने को बेताब था जिसे शायद वो भी महसूस कर रही थी।

अब मैं उसके होंठ चूसने लगा। भाभी ने उसका फ्राक उतार प्रिया और अपनी साड़ी भी खोल दी। नीता का एक निप्पल मैं और दूसरा भाभी चूस रही थी जिससे नीता के शरीर में करेंट लगना शुरु हो गया था, वो ऊँऽऽऽह…आऽऽऽह… की आवाजें निकाल रही थी।

अचानक भाभी पलट गई और नीता की सलवार को उतार कर उसकी चूत को चाटने लगी। मैं लगातार नीता की छाती चूस और मसल रहा था।

5-6 मिनट बाद मैंने अपना लोअर उतार प्रिया अंदर कच्छा नहीं था। भाभी का हाथ पकड़कर मैंने खड़े लंड पर रखा। भाभी मेरा इशारा समझ गई, उन्होंने नीता का हाथ पकड़कर मेरे लंड पर रखा और उसे सहलाना सिखाया। नीता का नर्म नाजुक हाथ का स्पर्श पाकर लंड से कुछ बूँदें निकल गईं।

अब मैं घूम गया नीता की चूत की तरफ। नर्म नाजुक व गदराई हुई चूत पर हल्के रोयें थे, मैं चूत को चाटने लगा, उधर भाभी ने मेरा लंड चूसा और फिर नीता को कुछ समझाया। कुछ समझाने व कुछ उत्तेजना के कारण नीता ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।

इधर मैं चूत की चुसाई में जुटा था। नीता के मुँह में मेरा लंड था फिर भी नाक से ऊँऽ ऊँ की आवाजें मुझे और अधिक उत्तेजित कर रही थी। मुझे लगा कि अगर ऐसे ही चला तो मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा। यह कहानी आप अंतर्वासना डाट काम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने झट से लंड को बाहर खींचा चूत की चुसाई चालू थी, अचानक नीता ऐंठने लगी।

उसने मेरा सर जोर से अपनी चूत पर दबाते हुए पानी छोड़ प्रिया।

मैं उसकी गीली चूत को वैसे ही छोड़कर घूम गया और नीता को किस किया।

भाभी को मैंने इशारा किया और लंड को नीता की गीली चूत पर रगड़ने लगा। नीता फिर से गर्म होने लगी। भाभी ने नीता के होठों को अपने मुँह में कैद किया और दोनों छातियाँ मसलने लगी।

जोश में आकर जैसे ही नीता ने अपनी चूत ऊपर उठाई पहले से ही तैयार लंड मैंने झटके के साथ उसकी चूत में उतार प्रिया।

नीता छटपटाने लगी, शायद चिल्लाने भी लगती अगर भाभी ने उसका मुँह दबा न रखा होता। मुझे लगा जैसे मेरा लंड गन्ने की मशीन में आ गया हो, इतनी टाइट चूत थी।

मैं और भाभी बराबर उसे सहला रहे थे कुछ देर बाद उसे आराम मिला। अब मैंने धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करना चालू किया। नीता अब पूरा सहयोग कर रही थी।

दो मिनट बाद मैंने नीता को घोड़ी बनने को कहा और भाभी ने अपनी चूत नीता के मुँह पर रख प्रिया। पीछे से मैं नीता की चूत चोद रहा था और आगे नीता भाभी की चूत चाट रही थी, भाभी भी पूरी लगन से नीता की छातियाँ मसल रही थी।

नीता का मुँह तो व्यस्त था मगर मेरे और भाभी के मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी।

करीब 5-7 मिनट की धक्कमपेल चुदाई के बाद हम तीनों लगभग एक साथ ही झड़ गए। मैं जैसे ही बाहर हुआ वो दोनों हसीनाएँ मुझे ताबड़तोड़ चूमने लगी।

हमने अपने-अपने कपड़े पहने और भाभी ने चाय बनाई।तीनों ने चाय पी और फिर मैं उठकर अपने घर चला आया।

दूसरे दिन नीता ने फोन पर बताया कि उसे काफी खून निकला था, बड़ा दर्द हो रहा था और चलने में भी तकलीफ हो रही थी। मैंने उसे समझाया और कहा कि सेक्स का ज्ञान तुम्हें हो गया है।

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