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लण्ड का कहर

playboy4u1986

23 Jan 2011 को प्रकाशित

लण्ड का कहर
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प्रेषक : विकास

मैं जयपुर का रहने वाला हूँ, मेरा नाम विकास है, उम्र 25 साल, कद 5’10”, औसत शरीर वाला स्मार्ट लड़का हूँ।

यह कहानी आज से 2 साल पहले की है, तब मेरी उम्र करीब 23 साल की थी, तब मैं थोड़ा पतला था। मैं कुछ नहीं करता था क्योंकि मैं कंप्यूटर डिप्लोमा की तैयारी कर रहा था और परीक्षा को अभी बहुत समय था।

पिताजी ने मुझे अपने एक दोस्त के यहाँ घर पर रहने के लिए छोड़ प्रिया। परन्तु वो घर मुझे रास नहीं आया।

मैंने किराये का एक रूम लिया। जिस घर में मैं रहता था उस घर में चार सदस्य थे, पति-पत्नी और दो बच्चे ! उस मकान मालकिन को मैं भाभी जी कह कर पुकारता था, उनका नाम सुगन (नाम बदला हुआ) था। वो बहुत ही सेक्सी औरत थी, उसका वक्ष आकार 34 का था। जब भी वो आती मेरा तो लण्ड ही खड़ा हो जाता।

उसका बदन देख कर तो ऐसा लगता जैसे खुद बनाने वाले ने फ़ुर्सत में बनाया होगा और हर बार बनाने वाले का भी खड़ा हुआ होगा।

उसके पति को मैं भाई साहब कहता था। उसका डिस्ट्रिब्यूशन का काम था। सो वे अधिकतर जयपुर से बाहर ही रहते थे।

टीवी देखने के लिए मैं अक्सर उनके पास चला जाता था।

एक दिन जब मैं घर पर था। उस दिन रविवार का दिन था। मैं अपने कपड़े धोने का प्रोग्राम बना रहा था।

तभी अचानक वो मेरे पास ही आ गईं और बोलीं- विकास क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- कपड़े धोने का मूड बना रहा हूँ।

भाभी जी बोलीं- चलो, आज एक साथ ही कपड़े धोते हैं।

मैं भी उनके बाथरूम में चला गया और कपड़े भिगो दिए और एक साथ कपड़े धोने लग गए।

कुछ ही देर में उसने मेरे पास एक कपड़ा फेंका फ़िर उसने अपनी ब्रा मेरे सामने डाल दी।

बोलीं- लो आप धो दो मेरी ब्रा।

मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है। मैंने झट से चोली को मुँह पर लगाया और सूंघने लगा।

उसने शर्म के मारे अपना सिर नीचे कर लिया।

मैंने मौका पा कर धीरे से उसके गले में हाथ डाल कर नीचे गिरा प्रिया।

पहले तो वो कुछ बोली नहीं, पर कुछ देर बाद मुझसे वादा लेते हुए कि किसी और से यह बात नहीं कहना, मुझे एक किस देते हुए चली गई।

दो दिन बाद जब मैंने उनके पास रूम में गया, वो वहीं पर थीं। हमने थोड़ी देर इधर-उधर की बात की।

फिर बात करते हुए मुझे लगा कि उनके घर पर कोई नहीं है, तो मैंने उनको दरवाजा बन्द करने की इच्छा जताई।

थोड़ी ना-नुकर के बाद वो 10 मिनट के लिए मान गई। उतने में भाई साहब आ गए और मैं उनसे बहाना करके तुरन्त अपने रूम पहुँच गया।

दूसरे दिन जब भाई साहब चले गए तो उन्होंने मुझे घर के अन्दर बुलाया और मेरे सामने कुर्सी रखकर मुझसे बातें करने लगी।

मेरा ध्यान तो बस उनके बदन पर ही था। मुझे लगा आज मौका जरुर मिलेगा क्योंकि घर में और कोई नहीं था। बच्चे बाहर खेल रहे थे। मैंने भी उनसे पानी का बहाना किया। जैसे ही वो पानी लेने के लिए रसोई में गई, मैं उठकर अन्दर के कमरे में जाकर बिस्तर पर बैठ गया।

उन्होंने मुझे देख लिया था तो वो भी पानी लेकर अन्दर कमरे में आ गई।

मैंने भी पानी पीकर गिलास उन्हें प्रिया, जैसे ही उन्होंने गिलास लेने के लिए हाथ आगे किया मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठाकर उन्हें चूमना शुरु कर प्रिया।

वो अपने को छुड़ा कर एकदम से उठीं, पर तब तक वो गर्म हो चुकी थीं, क्योंकि उनकी आँखें सब बता रही थीं।

अचानक वो बाहर चली गईं और मुझे लगा आज भी मुझे खाली हाथ जाना पड़ेगा। पर उतने में वो घर के सारे दरवाजे बन्द करके मेरे पास आकर बैठ गईं और मेरा हाथ पकड़ लिया।

बस फिर क्या था, मैंने भी उनको पकड़ कर होंठों पर चुम्बन करना चालू कर प्रिया, फिर उन्हें बिस्तर पर लिटाकर जबरदस्त चूमा-चाटी शुरु कर दी।

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धीरे-धीरे मैंने उनके मम्मे दबाने शुरु कर दिए, अब वो भी मेरी जीभ चूस रही थी और मैं उनकी।

मैंने उनके ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए, उन्होंने नीचे काली ब्रा पहन रखी थी, मैंने ब्रा का हुक खोलकर उनके दूध को चूसने का कार्यक्रम शुरू किया।

धीरे-धीरे मैंने उनकी साड़ी को पेटीकोट के साथ जैसे ही ऊँचा किया, तो मैंने देखा कि उन्होंने पैन्टी तो पहनी ही नहीं थी।

मैंने हल्के से एक उंगली उनकी चूत में जैसे ही डाली, वो एकदम से सिहर गई, धीरे-धीरे मैंने दूसरी, फिर तीसरी उंगली डाली।

उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और मुझे अपने होंठों के पास लाकर मेरे होंठों को कस कर चूसने लगी।

उनकी चूत में जाते ही मेरी उंगली में कुछ गीलापन महसूस हुआ। तब मुझे लगा कि शायद वो झड़ गई हैं क्योंकि मुझे ये तो पता था कि औरतें भी झड़ती हैं।

फिर उन्होंने मेरी पैंट में हाथ डाला और मेरे लण्ड को पकड़कर हिलाने लगीं। मुझे तो अब और भी मज़ा आने लगा। फिर उन्होंने मुझे पैंट निकालने को कहा।

मैं पूरे कपड़े निकालने ही जा रहा था कि उन्होंने मुझे रोका और कहा- आज इतना वक्त नहीं है, तुम सिर्फ़ पैंट को नीचे कर लो।

जैसे ही मैंने पैंट को नीचे किया और उन्होंने मेरे लण्ड को जैसे ही देखा, वो तो बस मेरे लण्ड को एक बारगी तकती ही रह गईं।

फिर अचानक फटाक से मेर लण्ड पकड़ कर मुँह में ले लिया और मेरी गोलियों से मजे से खेलने लगी, कभी-कभी उनको भी मुँह में भर कर चूसने और चाटने लगतीं।

चूंकि मेरा यह पहला अनुभव था, मैं तो जैसे सातवें आसमान पर था, मुझे तो इतना मज़ा आ रहा थी कि बस पूछो मत। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।

मैं भी अब जोश में आने लगा था। मैं उनका सिर पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। एक बार तो उनका सर पकड़ कर लण्ड पर ही पूरा दबा प्रिया।

जैसे ही मैंने उनको देखा, उनकी आँखों से पानी निकलने लगा, तो मैंने अपनी पकड़ ढीली कर दी और उन्हें ऊपर लाकर उनके होंठों पर, गालों पर, कान के नीचे चेहरे पर हर जगह चूमना चालू कर प्रिया।

उन्होंने मुझे मेरे कान में कहा- आज तक मैंने किसी का मुँह में नहीं लिया, पर पता नहीं तुम्हारे उस में क्या खास बात थी जो मैंने उसे मुंह में भर लिया, सच में तुम्हारा बहुत मस्त है।

वो अभी भी शायद कुछ शरमा रही थीं, इसीलिए लण्ड शब्द का प्रयोग नहीं कर रही थीं।

इतना बोल कर वो तो जैसे पागल होने लगी थीं और मेरे लण्ड को अपनी चूत पर जोर-जोर से रगड़ने लगीं।

मेरे होंठ उनके होंठों पर ही थे इसलिए मुझे लगा कि वो जैसे चिल्ला रही हैं, पर होंठों के चिपके होने के कारण चीख दब गई।

मेरा ध्यान उनकी आँखों पर गया तो मैंने देखा कि वो दर्द के कारण तड़फ रही हैं।

मैंने भी थोड़ी देर उनके ऊपर पड़े रहना ही उचित समझा और धीरे-धीरे उनके मम्मों को चूसता और दबाता उनकी छाती पर लेटा रहा।

वो धीरे-धीरे सामन्य हो रही थीं और धीरे-धीरे अपने चूतड़ उठा कर धक्के देने लगीं।

फिर मैंने भी अपने धक्के चालू कर दिए। करीब 10-12 मिनट के बाद उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और जोर से मेरी जीभ को चूसने लगीं।

मेरा तो अब साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था। तभी अचानक मुझे मेरे लण्ड पर कुछ पानी जैसा महसूस हुआ, मैं भी अब जोश में धक्के पर धक्के लगा रहा था, पर करीब 20-25 धक्कों के बाद मेरे लण्ड में भी हरकत शुरु हुई और मैंने भी उनको कस कर पकड़ लिया।

मैं उनकी जीभ चूसने लगा और फिर मैंने भी अपना सारा लावा उनकी चूत में उड़ेल प्रिया। मैं पस्त होकर उनके नंगे बदन पर लेट गया।

कुछ देर तक हम यूँ ही पड़े रहे, फिर जैसे ही मैं कपड़े पहनकर जाने लगा, उन्होंने मुझे रोक कर एक लम्बी चुम्मी मेरे होंठों पर दी।

और मुस्कराते हुए बोली- तुम्हारे इसने तो कहर बरपा प्रिया ! अब जब भी मन करे, मुझे फोन कर देना, तुम जहाँ बुलाओगे, मैं आ जाऊँगी, मैं आज से तुम्हारी हुई, आज मेरी जिन्दगी का सबसे अच्छा दिन है।

मैंने भी उनको चूमते हुए उनसे विदाई ली।

तो दोस्तो, यह थी मेरी कहानी, एक सच्ची कहानी। फिर मैंने उन्हें 5-7 बार और चोदा, पर वो सब बाद में।

मैं अपनी कहानी पर आपकी राय के इन्तज़ार में हूँ।

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

ईशान शर्मा

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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