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भाभी की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 914 बार

पड़ोसन भाभी और उनकी सहेली की चुदाई

संचित 69

02 Jan 2025 को प्रकाशित

पड़ोसन भाभी और उनकी सहेली की चुदाई
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मेरी स्टोरी पड़ोस की भाभी और उनकी भाभी की चुदाई करके किस तरह मैं जिगोलो बना. आज मैं अपनी ये सच्ची कहानी आपके सामने लेकर आ रहा हूँ. कैसे मैंने पड़ोस की भाभी और उनकी मुँह बोली भाभी की जमकर चुदाई की और फिर उनकी भाभी ने मुझसे अपनी सहेलियों को चुदवाकर मुझे जिगोलो बनवा प्रिया.

सभी दोस्तो, भाभियों, आंटी और चूत की चुदासी लड़कियों को मेरे लंड का प्यार भरा नमस्कार. मेरा नाम संचित है.. उम्र 25 वर्ष, थोड़ा शर्मीला लड़का हूँ. मैं मेरठ में रहता हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ. मेरा कद 5’7″ लंबा है और 6 इंच का लंड है.. मेरा जिस्म साधारण है.

यह बात यह बात कुछ समय पहले की है. जब मैं बी.ए कर रहा था. मेरे पड़ोस में एक भाभी रहती थीं. उनका नाम तनुजा (बदला हुआ नाम) था. उनकी उम्र 30 साल ही थी. उनकी शादी को 7 साल हो चुके थे. उनकी 5 साल की एक बेटी भी थी.

भाभी दिखने में एकदम गोरी चिट्टी थीं. उनका उभरा हुआ बदन, उठी हुई गांड नशीला बदन.. कुल मिलाकर भाभी एक माल थीं. जो कोई उनको एक बार देख भर ले, कसम से लंड का पानी छोड़ दे.

उनके पति ज़्यादातर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहा करते थे. एक बार मैं बाज़ार में गया था. मम्मी ने मुझे घर के लिए सब्जी लाने के लिए भेजा था. जब मैं सब्जी ले रहा था.. तो मैंने देखा तनुजा भाभी भी सब्जी ले रही थीं.

मैंने भाभी को हैलो बोला, उन्होंने भी मुस्करा कर हैलो का जवाब प्रिया. फिर हम दोनों ने साथ में कुछ सब्जी खरीदी. इसके बाद मैंने अपनी बाइक पर भाभी को घर छोड़ने के लिए कहा. भाभी ने हामी भर दी. जब भाभी मेरी बाइक पर बैठी थीं, तो थोड़ा मुझसे चिपक कर बैठी थीं, जिससे ब्रेक लगने से वो आगे को झुक जातीं और उनके गोल गोल मुम्मे मेरी पीठ से चिपक जाते. दो बार ऐसा हुआ, उसके बाद भाभी संभल कर बैठ गईं.

फिर घर आने पर वो अपने घर की तरफ चल दीं, मैं वहीं खड़ा होकर उन्हें और उनकी मटकती गांड को देखता रहा. जब वो जा रही थीं तो तेरा सारा ध्यान उनकी ऊपर नीचे होती हुई गांड पर था. तभी अचानक उन्होंने मुड़ कर देखा, मैं हक्का बक्का रह गया क्योंकि वो मुझे इस तरह देख कर मुस्कुराते हुए चली गईं.

फिर जब भी भाभी सामने आतीं, तो हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते.

एक दिन मैं घर पर अकेला था. भाभी घर आईं तो मैंने उन्हें बैठने को कहा, वो बैठी ही थीं कि उनकी नज़र मेरे लैपटॉप पर चली गई, उसमें ब्लू फिल्म का एक शॉट था, जिसमें लड़की अपने पार्टनर के कंधे पर एक टाँग करके लेटी थी और लंड उसकी चुत में था. इस सीन को देखकर भाभी चौंक गईं. मैंने भी जल्दी से लैपटॉप बन्द किया.

भाभी ने मुझे डाँटना शुरू कर प्रिया. मैं चुपचाप खड़ा उनकी डाँट सुनता रहा. मैंने भाभी से सॉरी बोला, पर वो मम्मी से कहने की धमकी देने लगीं.मैं उनसे कहने लगा- भाभी इस उम्र में नहीं देखेंगे, तो कब देखेंगे.मुझे इस बात का कोई डर नहीं था कि वो मम्मी को बता देगी. क्योंकि मैं जानता था कि वो मम्मी को कुछ नहीं बताएंगी.

मैंने भाभी से कहा- भाभी शांत हो जाइए और बताइए क्या पीओगी.मेरे इस निडर व्यवहार को देख कर अब उन्होंने मुझे कातिलाना निगाहों से देखा और कहा- जो तुम पिलाने चाहो पिला दो, वो ही पी लूँगी.उनके दोहरे मतलब वाले शब्दों का मर्म मैं समझ गया, मैंने कहा- मुझे तो केले का रस पिलाना है.. आप पसंद करोगी?भाभी हंस दीं, मतलब लाइन क्लियर थी.

फिर भाभी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?मैंने कहा- नहीं भाभी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. तो इसलिये ये मूवी देखता हूँ.भाभी तनिक मुस्कुरा दीं.मैंने कहा- भाभी आपको तो भैया मिल जाते हैं.. हम किसके पास जाएं?

भाभी- अच्छा ये बात है.. तो बोलो मेरे ब्वॉयफ्रेंड बनोगे?मैं- भाभी ये भी कोई पूछने वाली बात है.. बस आप सोच लो.भाभी- क्या सोच लूँ?मैं- भाभी मुझे ब्वॉयफ्रेंड बनाने के लिए आपको बहुत कुछ करना होगा.भाभी- सोच लिया जी.. कुछ करने के लिए ही ब्वॉयफ्रेंड बना रही हूँ ताकि तुम्हें ये मूवीज ना देखनी पड़े.ये कहते हुए भाभी ने अपने मम्मों को मेरे मुंह की तरफ तान प्रिया.

मैं उनका इशारा समझ चुका था. मैंने भाभी को अपनी तरफ़ खींचा और बांहों में लेकर उनके होंठों को चूसने लगा. वो भी मेरा पूरी तरह से साथ दे रही थीं. हम दोनों एक दूसरे में खो गए. हम बस किस करने में मस्त थे, एक दूसरे की जीभ चूस रहे थे. भाभी ने तो मेरे होंठों पर काट भी लिया.

इतने में दरवाजे में दस्तक हुई और हम दोनों अलग हो गए.

मम्मी आ गई थीं, भाभी ने थोड़ी देर मम्मी से बात की और मुझे अपने घर आने का इशारा करके चली गईं.

जब मैं भाभी के घर गया तो भाभी अकेली थीं. उनके पति अपने काम पर गए हुए थे और उनकी बेटी सो रही थी. मैंने भाभी को अपनी बांहों में लिया और उनके होंठों को चूसने लगा.भाभी की सांस तेज होने लगी, वो कहने लगीं- यहाँ नहीं.. बेटी जाग जाएगी.

वो मुझे दूसरे कमरे में ले गई. वहां मैंने उन्हें अपनी गोद में उठाया और बेड पर लिटा कर किस करने लगा.

भाभी के होंठ चूसने के लिए मैं कब से तरस रहा था और आज वो मेरे सामने पड़ी थीं. कसम से उस समय ऐसा लगा कि मुझे मुझे जन्नत मिल गई हो. भाभी के रसीले होंठों को चूम कर सारे शरीर में करंट सा आ गया. अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं भाभी के चेहरे को अपने हाथों में लेकरभाभी के होंठ चूसने लगा. मैं कभी ऊपर वाला होंठ मुँह में लेता.. कभी नीचे वाला होंठ चूसता.

भाभी की गर्मागर्म सांसें धीरे-धीरे चल रही थीं और उनके जिस्म की महक और गर्माहट मुझे और पागल कर रही थी. मैंने धीरे-धीरे उनके ब्लाउज के हुक एक-एक करके सारे खोल डाले.धीरे धीरे भाभी और मेरे शरीर के सारे कपड़े उतर गए.उम्म.. आह्ह.. उनकी सफाचट चिकनी चूत को देख कर लगा कि अभी साली को खा जाऊं, पर सब्र का फल मीठा होता है.

भाभी की चूत मेरे सपनों से भी ज्यादा खूबसूरत थी, एकदम गोरी.. चूत के फूले हुए होंठ और चुत पर एक भी बाल नहीं था.. एकदम चिकनी चमेली चुत थी.

जैसे ही मैंने भाभी की चुत की क्लिट पर जीभ घुमाई, वो तड़फ उठीं और मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगीं. भाभी के मुंह से एक लम्बी सिसकारी ‘आह ह्हहह..’ निकल गई. ऐसा लग रहा था कि जैसे अब भाभी ने पूर्ण रूप से अपने आपको मेरे हवाले कर प्रिया हो.

मदहोश भाभी की चूत गीली हो रही थी, उनकी चुत से रस टपक रहा था. मैंने उस रस को जीभ से चाट के देखा तो उनकी चुत का रस बेहद नमकीन था.. जो बहुत टेस्टी था. मैं सारा रस चाट गया.

मैं लगातार भाभी की प्यारी सी चूत में अपनी जीभ चलाए जा रहा था. वो धीरे-धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे कर रही थीं.

भाभी अब सिसयाने लगीं- आआआ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआअह.. संचित मैं तो ऊपर आ रही हूँ.. आज से पहले मुझे इतना मजा कभी नहीं मिला.उन्होंने मुझे उठाया और खुद मेरे ऊपर आ गईं फिर नीचे बैठ कर मेरा लंड बड़ी कामुकता से चूसने लगीं. अब मेरे मुँह से सिसकारी निकल रही थी.

मेरा लंड एकदम कड़क हो चुका था. वो मेरे लंड के आगे वाले हिस्से पर अपनी जीभ बहुत मस्त तरीके से घुमा रही थीं.फिर भाभी बोलीं- अब मुझे चोद दो प्लीज़, रहा नहीं जा रहा.

मैं उनकी तड़फ को इतनी जल्दी खत्म नहीं होने देना चाहता था.भाभी कह रही थी- प्लीज.. अब डाल भी दो.. और मत तड़फाओ.

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मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटाकर उनकी कमर के नीचे तकिया लगाया और चूत पर अपना लंड रखा.भाभी कह रही थी- प्लीज.. अब डाल भी दो.. और मत तड़फाओ.मैंने भाभी की आंखों में देखा और एक धक्का मार प्रिया. मेरा लंड तीन इंच ही अन्दर गया होगा कि उन्होंने चीख मारी.

मैंने भाभी के होंठों को अपने होंठों से बंद कर प्रिया और फिर से एक ज़ोर का धक्का मारा. इस बार मेरा आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में समां गया. उसके बाद मैंने धीरे धीरे भाभी की चूत में अपना लंड पेलना शुरू किया.

जब उन्हें मजा आने लगा तो फिर भाभी जी खुद अपनी कमर उठा उठा कर मुझसे चुदने लगीं और मेरे लंड को अपने अन्दर तक डलवाने लगीं.

पूरा कमरा भाभी की कामुक सिसकारियों से भरा हुआ था. साथ में भाभी कह रही थीं- आहह आहह.. संचित.. फाड़ दे इसे आज.. बहुत दिन से तड़प रही है ये.. किसी के लंड के लिए.. अहह.. आज बुझा दे इसकी आग.. तेरे भैया तो मुझे प्यासा ही छोड़ देते हैं.मैंने कहा- भाभी जी आज मैं आपकी चूत की पूरी तसल्ली करवा दूँगा और आज मैं भी इसे छोड़ने वाला नहीं हूँ.

कुछ ही देर बाद भाभी की चूत से पानी निकलने लगा था. मैं अब भी धक्का मार रहा था. अब चूत चुदाई में ‘फॅक.. फॅक..’ की आवाज आ रही थी.मैंने ऐसे ही उनको कई मिनट तक हचक कर चोदा. उसके बाद जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने भाभी से पूछा- कहाँ पर निकालूँ.भाभी ने कहा- मेरी चुत में अन्दर ही डाल दो.. बहुत दिन से प्यासी हूँ.

मैं भाभी की चुत में ही झड़ गया. बाद में मैंने उनकी चूत से लंड निकाला और बिस्तर पर लेट गया. कुछ देर आराम करने के बाद मुझे उनकी गांड मारने इच्छा हुई.

मैंने भाभी से कहा- मुझे आपकी गांड मारनी है.पहले उन्होंने मना किया- नहीं बहुत दर्द होगा.फिर कुछ देर बाद वो मान गईं.. कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने उनकी गांड पर अपना लंड रखा और बहुत सा थूक लगा कर धीरे से झटका मारा.

भाभी चिल्ला उठीं- उई मार डाला.. बहुत दर्द हो रहा है.. निकाल लो.. उई मम्मी.. मर गई.

मैं कहाँ सुनने वाला था, मैं तो भाभी की गांड में लंड डाले जा रहा था. उन्हें बहुत दर्द हो रहा था, उनकी आँखों में आंसू आ रहे थे. फिर मैं थोड़ी देर रुका रहा, वो नॉर्मल हो गईं

अब मैंने जोर का झटका लगाया, वो बिस्तर पर गिर गईं और उनकी आँखों से आंसू निकलने बंद नहीं हो रहे थे.

फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में खड़ा किया और उनकी गांड मारने लगा. थोड़ी देर बाद उनको मजा आने लगा और वो चूतड़ों को उठा कर गांड चुदवाने लगीं. इस तरह मैं उनको चोदता रहा और काफ़ी टाइम बाद उनकी गांड में ही झड़ गया.

उस रात भाभी ने भैया कुछ काम से बाहर गए हुए थे तो भाभी ने कहा- आज रात तुम अपनी मम्मी से कहकर यहीं रुक जाना और पूरी रात मेरी चुदाई करना.

मैंने उस रात कई बार भाभी की चूत गांड मारी.. मुझे बहुत मजा आया, उस रात हमने खूब मजे लिए. मैं काफ़ी थक चुका था.

इसके बाद तो जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते.

एक बार भाभी और मैं चुदाई करने में मस्त थे तो तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजी. हम घबरा गए कि इस टाइम कौन आया होगा. हम जल्दी से अलग हुए और जल्दी जल्दी हमने अपने कपड़े पहने. भाभी दरवाजा खोलने चली गईं.

दरवाजा खोला तो देखा भाभी के पति के फ्रेंड की वाइफ थीं, जिनको भाभी, भाभी जी कहकर बुलाती थीं. जब वो अन्दर आईं तो अन्दर का माहौल देखकर उन्हें हम पर कुछ शक हुआ.

उन्होंने भाभी को शक की निगाहों से देखा. फिर मैंने भाभी को बोला- भाभी आपका कमरा साफ हो गया है. अब मैं चलता हूँ.. कुछ और काम हो तो बता देना.इतना कह कर मैं अपने घर आ गया.

अगले दिन भाभी ने मुझे अपने घर बुलाया. भाभी ने कहा- कल जो कोमल भाभी आई थीं. उन्हें हम पर शक हो गया है कि हमारे बीच कल कुछ चल रहा था, तो मैंने उन्हें सब कुछ बता प्रिया.मैंने भाभी पर गुस्सा किया कि भाभी आपने उनसे सब क्यों बताया.भाभी कहने लगीं- पहले पूरी बात तो सुनो.मैंने कहा- अब क्या बचा सुनने को.. भैया को पता चल गया तो क्या होगा?उन्होंने कहा- कुछ नहीं होगा.. क्योंकि कोमल भाभी भी तुमसे अपनी चुदाई करवाना चाहती हैं.मैं- ये क्या कह रही हो भाभी..?भाभी- हां ऐसा ही है तुम कहो तो.. उन्हें बता दूँ कि तुम उनकी चुदाई करने के लिए राज़ी हो गए हो.मैं- भाभी अगर वो ऐसा चाहती हैं और आपको कोई प्रॉबलम ना हो, तो बेशक बता दो.

फिर 2-3 दिन बाद भाभी ने अपनी मुँहबोली भाभी को अपने घर बुला लिया. उस दिन भैया अपने काम पर थे और उनकी बेटी स्कूल गई थी.भाभी ने मुझे फोन करके बुलाया- कहाँ हो, कुछ काम है, तुम जल्दी घर आ जाओ.मैं समझ गया कि क्या काम है… मैं नहा धोकर भाभी के गया.

दोनों भाभी अपनी चुदाई के लिए एकदम तैयार बैठी थीं. मेरे जाते ही दोनों ने मुझे दबोच लिया. दोनों मुझे बेडरूम में ले गईं, जहां मैंने दोनों की 3 घंटे तक जबरदस्त चुदाई की और गांड की भी चुदाई की.

मैं थक कर चूर हो गया तो भाभी में मुझे एक गिलास गर्म दूध लाकर लिया, जिसमें काजू, बादाम, पिस्ता सब कुछ मिला हुआ था.

चुदाई के बाद हम सबने अपने अपने कपड़े और जब मैं जब में अपने घर आने लगा तो भाभी की भाभी ने मुझे रोका ओर मेरे होंठों पर एक मस्त किस करके मुझे 2000 रुपए देकर कहा- अब से जब भी मैं तुम्हें बुलाऊं, तो तुम्हें मुझे चोदने आना पड़ेगा.

मैंने कहा- भाभी वो तो ठीक है लेकिन मैं ये पैसे नहीं ले सकता, मुझे तो होंठों की किस दे दो.कोमल भाभी बोलीं- किस क्या राजा.. मेरा सब कुछ तेरा है.. चाहे जो ले लो, पर रुपए तुम्हें लेने ही पड़ेंगे. ये तो शुरुआत है, आगे आगे देखो क्या होता है.

इसके बाद मैं पैसे लेकर अपने घर आ गया और कोमल भाभी ने मेरा नम्बर भी ले लिया था. अब कोमल भाभी का जब भी मन करता, वो मुझे फोन करके बुला लिया करती थीं. मैं उनकी जमकर चुदाई करता था. कोमल भाभी अपनी चुत चुसवातीं और गांड भी खुल कर चुदवाती थीं.

कोमल भाभी ने मुझसे अपनी सहेलियों को भी चुदवाया, जिन्हें चोद चोद कर मैं जिगोलो (प्लेबाय) बन गया.

कैसे मैंने कोमल भाभी की सहेलियों को चोदा, वो मैं अपनी अगली चुदाई की कहानी में लिखूँगा, तब तक के लिए विदा दोस्तोsupport@mohakkisse.comमुझे आपकी ईमेल का इंतज़ार रहेगा.

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