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Office Sex पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 256 बार

पारो और मैं

टॉम ब्रिगैन्ज़ा

02 Mar 2008 को प्रकाशित

पारो और मैं
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यह उस वक्त की बात है जब मैं २५ साल का था और मेरे ऑफिस में एक लड़की की नई नई आई। वो लड़की हमारे शहर की नहीं थी इसलिए एक कमरा लेकर दो और लड़कियों के साथ पेइंग गेस्ट की तरह रहती थी। मेरी शादी अभी नहीं हुई थी, इसलिए मुझे सेक्स करने की कुछ ज्यादा ही इच्छा होती थी पर कोई लड़की हो तो ही न सेक्स करे !

कुछ महीने बीत गए और उस लड़की और मुझ में दोस्ती हो गई। फिर हम कभी होटल में काफ़ी पीने तो कभी खाना खाने जाने लगे। इसी बीच मेरा प्रमोशन हो गया और इसी प्रमोशन की खुशी में मैं और पारो एक दिन आउटिंग के लिए गाँव चले गए।

हम गाँव जाने के लिए स्कूटर पर निकल पड़े। गाँव के नजदीक आते ही पारो को मस्ती सूझी उसने मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया और उसके छूने से मेरा लण्ड तुंरत ही खड़ा हो गया। उसने अपने मुम्मे मेरी पीठ पर इस तरह से चिपकाये थे कि मेरा लण्ड एकदम कड़क हो गया। अब मुझसे बिल्कुल रहा नहीं गया।

मैंने गाड़ी नहर के किनारे लगा दी और पारो को लेकर झाड़ी की आड़ में ले गया और उसे इस तरह लिटाया के कोई हमें देख न सके। फिर मैंने उसे चूमना शुरू किया और ऐसा करने की वजह से वो पूरी तरह से गरम हो गई और उसने मुझे अपने नीचे लेकर ख़ुद ऊपर की पोज़िशन ले ली।

मैं समझ गया कि आज अपनी निकल पड़ी है। पारो ने मेरी पैन्ट उतारी और मेरा लण्ड मुँह में लेकर खूब जोर जोर से चूसने लगी। मैंने तुंरत अपनी पोजिशन बदली, उसका कुरता ऊपर सरकाया और उसके मुम्मे मुँह में लेकर खूब जोर जोर से चूसने लगा। उसे भी बहुत मज़ा आने लगा था और वो सिसकारियाँ भरके मुझे जवाब दे रही थी। फिर हम दोनों ही एक दूसरे को चूसना चाहते थे इसलिए हमने 69 में हो कर एक दूसरे के गुप्तांग मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और हमें मज़ा भी बहुत आ रहा था।

मगर असली मज़ा तो लण्ड और चूत के मिलन के बाद ही आने वाला था। थोड़ी देर में हम दोनों एक दूसरे के मुँह में झड़ गए।

पारो उठ कर खड़ी हो गई और उसने फिर एक बार मुझे किस करते हुए मेरे कानों में कहा- क्या बात हैं ! मैं तो जानती ही नहीं थी कि असली मज़ा तो मेरी चूत को चूसनेवाला ही मुझे दे सकता है !

वो मेरे चुसाई की दीवानी हो गई थी और इसका सबूत यह है कि उसने आव देखा न ताव ! वो सीधा मेरे मुँह पर आकर बैठ गई और अपनी चूत को फ़ैला फैला कर उसे चूसने के लिए मेरी मिन्नतें करने लगी। उधर मेरा लण्ड अभी तक सोया हुआ ही था इसलिए मैंने भी पारो की चूत के अन्दर अपना मुँह घुसेड़ दिया और पागलों की तरह उसकी चूत को चाटने और चूसने लगा। इसी दौरान उसकी टांगों में अकड़न आ गई और मैं समझ गया कि वो अब झड़ने वाली हैं।

वो मेरे मुँह में ही झड़ गई और शांत होने के बाद उसने मेरे मुँह में अपनी जुबान डालकर मुझसे खेलने लगी। उसने अपने हाथ को मेरे लण्ड के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया। अब मेरा लण्ड धीरे धीरे अपनी सीमाएं तोड़ रहा था। वो अपनी पूरी मस्ती में आ गया था। मुझसे भी अब रहा नहीं गया और मैंने पारो को जल्दी से अपने नीचे लिटाकर उसकी टाँगें ऊपर उठा ली। मैंने पारो को अपने हाथ से लण्ड को अपनी चूत पर लगाने को कहा और उसने बिना वक्त गंवाए ऐसा ही किया। उसने धीरे से अपनी कमर उठाकर मेरे लण्ड को अपनी चूत में समां लेना चाहा मगर मेरा विशाल लण्ड अन्दर लेने में उसे बहुत दिक्कत आ रही थी क्योंकि उसकी चूत बहुत ही नाजुक थी।

अब मैंने एक तरकीब लगाने की सोची, इससे पारो को दर्द तो होगा मगर उसे समझ नहीं आएगा कि कब मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर चला जाएगा।

मैंने पारो को पीठ के बल लेटने को कहा और अपनी टांगें मेरे कन्धों पर रखने को कहा, उसने ऐसा ही किया। फिर मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पे रखकर एक हल्का सा धक्का लगाया, उसके मुँह से जोर से आवाज़ आई- उई उइ माँ मर गयी मैं ! क्या करते हो बहुत मोटा लण्ड है तुम्हारा !

उसे बहुत जोर से दर्द हुआ। अब मैंने सोचा जब दर्द हो ही रहा है तो क्यों न दो चार और धक्को में अपना पूरा लण्ड अन्दर कर दूँ। मैंने अपनी पूरी ताकत से पारो को और दो धक्के दिए और मेरा पूरा लण्ड पारो की चूत को चीरता हुआ अपनी मंजिल तक पहुँच गया। अब पारो चिल्ला रही थी- प्लीज़ ! मेरी चूत को फाड़ दो ! और जोर जोर से नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी।

मुझे भी अब मज़ा आने लगा था और मैंने भी पारो की खूब अच्छी तरह से गहराइयाँ नापने की ठान ली। मैंने पारो को कभी कुतिया की तरह खड़ा करके तो कभी कामसूत्र वाली पोज़िशंस में, खूब अल्टा पलटा कर चोदा। पारो भी अब चुदने का मज़ा उठा रही थी। करीब आधे घंटे के बाद जब मैंने अपना पानी बाहर निकलने की इच्छा ज़ाहिर की तो पारो ने बिना वक्त गंवाए मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया और कहने लगी आज मुझसे यह मज़ा मत छीनो !

फिर मैं उसके मुँह में ही झड़ गया और विश्वास कीजिये कि आज से पहले मुझे झड़ने में कभी इतना मज़ा नहीं आया।

मैं अब शांत हो चुका था मगर पारो अभी भी झड़ी नहीं थी उसने एक बार फिर मेरे मुँह पर बैठने की इच्छा जताई और मैंने हां कह दिया। फिर पारो मेरे मुँह पर बैठ गई और उसकी चूत की खुजली मिटाने में मैंने उसकी मदद की और कुछ ही पलों में वो भी झड़ गई।

इतने में हमें एक काला साँप वहाँ पर दिखाई पड़ा और हम दोनों अपने कपड़े ठीक कर के वहाँ से चल दिए।

बाद में हमने कभी ऑफिस में, तो कभी होटल के रूम में, तो कभी डैम के किनारे, पर तो कभी रास्ते में कई बार चुदाई की। पर वो कहानियाँ अलग है और वो मैं आपको अगली बार की कहानी में बताऊंगा।

support@mohakkisse.com

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सम्पादक :  इमरान

13 मिनट 294

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

पूनम

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

यधु राज

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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