कोई मिल गया

मेरी चालू बीवी-45

लेखक: इमरान दिनांक: 17-09-2025 पठन समय: 8 मिनट

इमरानरोज़ी तुरंत केबिन से बाहर निकल गई !मगर हाँ केबिन का दरवाजा बंद करते हुए उसके चेहरे की मुस्कुराहट उसकी ख़ुशी को दर्शा रही थी।

कुछ देर बाद नीलू भी अपने काम में लग गई।अब ऑफिस का कुछ काम भी करना था।

दोपहर को लंच करने के बाद मैंने सलोनी को फोन लगाया…उधर से मीनू की आवाज आई- कौन..??मैं- अरे मीनू तू.. क्या हुआ? सलोनी कहाँ है??

मीनू- अरे भैया.. हम स्कूल में हैं… भाभी की जॉब लग गई है… वो अंदर हैं…मैं- क्यों? तू बाहर क्यों है?मीनू- अरे अंदर उनका इंटरव्यू चल रहा है… वो कुछ समझा रहे थे !मैं- ओह… मगर तू उसका ध्यान रख… देख वो क्या कर रही है?

मीनू- हाँ भइया… पर क्यों?मैं- तुझसे जो कहा, वो कर ना…

मीनू- पर वो अपने कोई पुराने दोस्त के साथ हैं.. वो क्या नाम बोला था? हाँ याद आया… विनोद… वो उनके कोई पुराने दोस्त हैं… वो ही हैं यहाँ बड़े वाले टीचर..मेरे दिमाग में एक झनका सा हुआ… अरे विनोद वो तो कहीं वही तो नहीं…

मुझे याद आया सलोनी ने एक दो बार बताया था.. उसका फोन भी आया था शायद… विनोद उसके स्कूल के समय से दोस्त था…पर हो सकता है कि कोई और हो…

तभी मीनू की आवाज आई- भैया.. ये तो… अंदर…मैं- क्या अंदर? क्या हो रहा है?मीनू- व्व्व्व्व्व्वो भाभी अंदर… और व्व्व्वो !!!!!

ऑफिस में ही नीलू और रोज़ी से मस्ती करने के बाद मैं बहुत आराम से फोन पर बात कर रहा था…लण्ड को अपनी खुराक भरपूर मिल गई थी, फिर भी दिल तो बावरा होता है रे…

सलोनी का फोन मीनू के पास था… दोनों किसी स्कूल में थी जहाँ सलोनी ने जॉब करने के लिए कहा था…मीनू ने के ऐसी बात बताई कि मेरे कान खड़े हो गए…

झूठ नहीं बोलूंगा.. कान के साथ लण्ड भी खड़ा हो गया था…

मीनू- भैया… भाभी अंदर कमरे में हैं… यहाँ उनका कोई दोस्त ही बड़ा सर है… वो क्या बताया था… हाँ विनोद नाम है उनका…

मैंने दिमाग पर ज़ोर डाला… उसने बताया था कि कॉलेज में उसके मनोज और विनोद बहुत अच्छे दोस्त थे, दोनों हमारी शादी में भी आये थे।मैंने मीनू को कमरे में देखने को बोला..

मीनू- व्वव… व्वव… वो भाभी तो विनोद सर की गोद में बैठी हैं…

मैंने मीनू को निर्देश प्रिया- सुन मीनू फोन ऐसे ही वहीं खिड़की पर रख दे.. स्पीकर उनकी तरफ रखना… और तू वहीं खड़े होकर देखती रह…मीनू ने तुरंत ही यह काम कर प्रिया और मुझे आवाज आने लगी…

विनोद- सच सलोनी.. कसम से तुम तो बहुत सेक्सी हो गई हो… मुझे पहले पता होता तो चाहे कुछ हो जाता.. मैं तो तुमसे ही शादी करता…

सलोनी- हाँ… और जैसे मैं कर ही लेती… मैंने तो पहले ही सोच रखा था कि शादी माँ डैड की मर्जी से ही करूँगी… और यकीन मानना, मैं बहुत खुश हूँ…

‘पुच्छ पुच च च च च च पुच…’

सलोनी- ओह क्या करते हो विनोद… अपना मुँह पीछे रखो ना… जब से आई हूँ, चूमे ही जा रहे हो..

विनोद- अरे यार, कंट्रोल ही नहीं हो रहा…सलोनी- हाँ, वो तो मुझे नीचे पता चल रहा है… कितना चुभ रहा है…

विनोद- हा हा हा… यार, यह तुमको देखकर हमेशा ही खड़ा होकर सलाम करता था मगर तुमने कभी इस बेचारे का ख्याल ही नहीं किया..

सलोनी- अच्छा… तो तुम्हारे दोस्त के साथ दगा करती..?

विनोद- इसमें दगा की क्या बात थी यार? तुम तो हमेशा से खुले माइंड की रही हो… ऐसे तो अब भी तुम अपने पति से दगा कर रही हो…

सलोनी- क्यों ऐसा क्या किया मैंने… ऐसी मस्ती तो तुम पहले भी किया करते थे.. हे… हे… क्यों याद है बुद्धू… या याद दिलाऊँ?

विनोद- अरे उस मस्ती के बाद ही तो मैं पागल हो जाता था… फिर पता नहीं क्या क्या करता था… तुम तो हाथ लगाने ही नहीं देती थी… तुम्हारे लिए तो बस मनोज ही सब कुछ था…

सलोनी- अरे नहीं यार… तुम ही कुछ डरपोक किस्म के थे…

विनोद- अच्छा मैं डरपोक था…?? वो तो मनोज की समझ कुछ नहीं कहता था…वरना न जाने कबका.. सब कुछ कर देता…

सलोनी- अच्छा जी क्या कर देते??? बोल तो पाते नहीं थे.. और करने की बात करते हो…

विनोद- बड़ी बेशरम हो गई है तू…

सलोनी- मैं हो गई हूँ बेशरम… यह तेरा हाथ कहाँ जा रहा है… चल हटा इसको…

विनोद- अरे यार, बहुत दिनों से तेरी ये चीजें नहीं देखी.. शादी के बाद तो कितना मस्ता गई है.. जरा टटोलकर ही देखने दे…

सलोनी- जी बिल्कुल नहीं… ये सब अब उनकी अमानत है… तुमने गोद में बैठने को बोला तो प्यार में मैं बैठ गई… बस इससे ज्यादा कुछ नहीं… समझे बुद्धू… वरना मैं तुम्हारे यहाँ जॉब नहीं करुँगी…

विनोद- क्या यार?? तुम भी न…ऐसे ही हमेशा के एल पी डी कर देती हो..

सलोनी- हा हा हा हा… मुझे पता है तुम्हारे के एल पी डी का मतलब… और ज्यादा हिलाओ मत… कहीं यन मेरी जींस में छेद ना कर दे…

विनोद- हा हा… तो दे दो ना इस बेचारे का छेद इसको.. फिर अपने आप ढूंढ़ना बंद कर देगा…

सलोनी- जी नहीं, यहाँ नहीं है इसका छेद… इसको कहीं और घुसाओ…

विनोद- अरे यार, कम से कम इसको छेद दिखा तो दो… बेचारा कब से परेशान है…

सलोनी- अच्छा जैसे पहले कभी देखा ही नहीं हो… अब तो रहने ही दो…

विनोद- अरे यार तब की बात अलग थी… तब तो मैं दोस्त का माल समझ कुछ ध्यान से नहीं देखता था..

सलोनी- हाँ हाँ मुझे सब पता है… कितना घूरते थे… और मौका लगते ही छूते और सहलाते थे.. वो तो मैंने कभी मनोज से कुछ नहीं कहा… वरना तुम्हारी दोस्ती तो ही गई थी… हे हे…

विनोद- अच्छा तो यह तुम्हारा अहसान था?

सलोनी- और नहीं तो क्या…

विनोद- तो थोड़ा सा अहसान और नहीं कर सकती थीं…पता नहीं था क्या कि मैं कितना परेशान रहता था…

सलोनी- वैसे सच बोलूं… तुमने कभी हिम्मत नहीं की… तुम्हारे पास तो कई बार मौके थे… और शायद मैं मना भी नहीं करती…

विनोद- अच्छा इसका मतलब.. मैं बेबकूफ था…ऐं ऐं ऐं ऐं…

सलोनी- हा हा… हा हा… हा हा… ओह… रहने दो न.. बहुत गुदगुदी हो रही है… अहा… ये क्या कर रहे हो…?? अरे छोड़ो न इन्हें…

विनोद- यार सच बहुत जानदार हो गए हैं तुम्हारे बूब.. कितना मजा आ रहा है इनको पकड़ने में…सलोनी- देखो मैं अब जा रही हूँ ओके.. तुम बहुत परेशान कर रहे हो…

विनोद- अरे यार तुमने ही तो कहा था… अब कोशिश कर रहा हूँ तो मना कर रही हो…सलोनी- ये सब उस समय के लिए बोला था… अब मैं किसी और की अमानत हूँ…

विनोद- अरे यार, मैं कौन का अमानत में ख़यानत कर रहा हूँ.. जैसी है वैसी ही पैक करके पहुँचा दूंगा…सलोनी- हाँ मुझे पता है.. कैसे पैक करोगे… मेरे मियां को दाग पसंद नहीं है समझे बुद्धू…

विनोद- कह तो ऐसे रही हो जैसे अब तक बिल्कुल साफ़ और चिकनी हो… न जाने कितने दाग लग गए होंगे…सलोनी- जी नहीं… मेरी उस पर एक भी दाग नहीं है.. जैसे तुमने पहले देखी थी.. अब तो उससे भी ज्यादा अच्छी हो गई है…

ओह माय गॉड !इसका मतलब मनोज तो उसका बॉय फ्रेंड था ही..फिर यह विनोद भी क्या उसको नंगी देख चुका है…मैं और भी ध्यान से उनकी बातें सुनने लगा…

कहानी जारी रहेगी।imranhindi@ hmamail.com