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चुदाई की कहानी • पठन समय: 19 मिनट • पढ़ा गया: 268 बार

पहले ननद फिर भौजाई, दोनों ने चूत मराई

विजय कपूर

25 May 2010 को प्रकाशित

पहले ननद फिर भौजाई, दोनों ने चूत मराई
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दो बच्चों का पिता होने के बावजूद मेरा अपने मुहल्ले में रहने वाली मनीषा से अफेयर हो गया. मनीषा हमारे मुहल्ले की सर्वाधिक ब्रिलिएंट लड़की थी, डबल एम ए थी और पीएचडी कर रही थी. मनीषा और मेरा अफेयर एक समय शादी की स्टेज तक पहुंच गया था, हालांकि ऐसा हो नहीं सका.

मेरे और मनीषा के अफेयर के बारे में धीरे धीरे सारे मुहल्ले को खबर हो गई थी. उस समय मुहल्ले की तमाम लड़कियां और भाभियां मुझे इस तरह से देखती थीं जैसे कि पूछ रही हों कि हममें क्या कमी थी.

बस एक जालान आंटी थीं जिनके विचार इससे भिन्न थे.जालान आंटी मेरे घर के सामने रहती थीं, लगभग 60 साल की थीं और पढ़ाई के नाम पर अंगूठाछाप थीं लेकिन बहुत चतुर थीं. वास्तविकता यह थी कि वो जितनी चतुर थीं, उससे अधिक बनने की कोशिश करती थीं.

उनका एक बेटा था और एक बेटी. मैं उनकी लड़की पर कहीं डोरे न डाल दूं, इसलिये हर समय अपनी बेटी साधना को मेरी बहन बनाने पर तुली रहती थीं- तेरी बहन का रिजल्ट आ गया है, तेरी बहन खाना बना रही है, तेरी बहन ननिहाल गई है. हर बात में तेरी बहन, तेरी बहन करती थीं.

इसमें कोई शक नहीं कि जालान आंटी की बेटी साधना सुन्दर थी, मनीषा की अपेक्षा बहुत सुन्दर थी. लेकिन मेरा ऐसा कोई इरादा कभी नहीं था. कालान्तर में साधना की शादी ग्वालियर हो गई और मनीषा की लखनऊ.

साधना की शादी के डेढ़ दो साल बीत चुके थे.एक दिन साधना अपने आंगन में दिखी, पेट ऐसे फूला हुआ था, जैसे अभी डिलीवरी हो जायेगी. मैंने अपनी पत्नी से पूछा तो उसने बताया कि साधना का नवां महीना शुरू हो गया है और इन लोगों में पहली डिलीवरी मायके में कराने का रिवाज है, इसलिये आई हुई है.

इस घटना के लगभग चार दिन बाद जालान आंटी आईं और बोलीं- बेटा, तेरा भाई टूर पर गया हुआ है और साधना को डॉक्टर के यहां ले जाना है, तो क्या ले चलोगे?“क्यों नहीं आंटी! आप आधी रात को कहेंगी तो भी चलूंगा.” मुहल्ले में मेरी छवि दबंग लेकिन मददगार व्यक्ति की थी.

थोड़ी देर बाद मैं, साधना और जालान आंटी डॉक्टर के यहां जाने के लिए निकल पड़े. साधना आगे की सीट पर और आंटी पीछे थीं.मेरे पूछने पर साधना ने बताया कि दो तीन दिन से वजाइना में खुजली और हल्का हल्का दर्द है. चूंकि डिलीवरी का समय नजदीक है इसलिये मैं रिस्क नहीं लेना चाहती.मैंने उसकी बात से सहमति जताई.

हम लोग साधना की डॉक्टर के यहां पहुंचे तो आंटी ने कहा- बेटा साथ में अन्दर चले जाना, मैं गंवार कुछ समझ नहीं पाऊंगी.

नम्बर आया तो मैं और साधना अन्दर गये. लगभग 50-55 साल की बंगाली डॉक्टर थी.

वो साधना को अन्दर ले गई, चेकअप किया और आकर बोली- कुछ नहीं है, चिंता की कोई बात नहीं है. हम हिन्दुस्तानी लोगों की सोच ऐसी है कि डिलीवरी का समय नजदीक आता है तो सेक्स करना बंद कर देते हैं, जिसकी वजह से मसल्स टाइट होने लगती हैं और नार्मल डिलीवरी के समय कष्ट होता है. डिलीवरी के दिन तक थोड़ा केयरफुली सेक्स करते रहें तो डिलीवरी आसानी से होती है. मैं एक जेल दे रही हूँ, इसे वजाइना के अन्दर लगाइये, आराम मिलेगा, मसल्स सॉफ्ट हो जायेंगी.

मैंने पूछा- इसे सेक्स के दौरान भी यूज कर सकते हैं?तो डॉक्टर ने कहा, बिल्कुल करिये, इससे मसल्स सॉफ्ट होंगी.मैंने शरारती लहजे में पूछा- मैम लेडीज मसल्स ही सॉफ्ट होंगी ना?डॉक्टर ने हंसते हुए कहा- साधना तुम्हारा हसबैंड बहुत फनी है.

हम दोनों बाहर आये, वहीं से जेल खरीद लिया और वापस चल दिये. रास्ते में आंटी के पूछने पर साधना ने बताया कि लगाने की दवा दी है.

घर पहुंचते पहुंचते मैंने साधना से पूछा, दवाई लगाने कब आऊं तो बोली- मम्मी चार बजे सत्संग जाती हैं, तब आना.

मैं नजरें गड़ाये बैठा था, जैसे ही आंटी निकलीं, मैं साधना के पास पहुंच गया.उसने बताया कि वो एक बार जेल लगा चुकी है लेकिन कोई आराम नहीं है.

मैंने कहा- अब मैं लगाऊंगा, तब आराम आयेगा.

मैं साधना को लेकर बेडरूम में आ गया और उसका गाउन उतार प्रिया. उसने पैन्टी नहीं पहनी थी. मैं ब्रा खोलने लगा तो बोली- भाई साहब, दवा नीचे लगानी है.“मुझे मालूम है बहन जी” लेकिन पहले फीस तो वसूलने दीजिये.”

इतना कहकर मैंने उसकी ब्रा उतार दी और उसके मम्मे चूसने लगा. मम्मे चूसते चूसते मैं साधना के पेट पर और चूत पर हाथ फेरता रहा.

मम्मे चूसते चूसते मेरा लण्ड मूसल की तरह टाइट हो गया तो मैंने साधना को लिटाकर उसकी टांगें फैला दीं जिससे चूत पूरी तरह से खुल गई.जेल की डिब्बी से जेल निकाल कर अपने लण्ड पर मला और साधना की चूत के लबों को फैला कर धीरे धीरे पूरा लण्ड साधना की चूत में पेल प्रिया. पूरा लण्ड अन्दर जाते ही साधना कुलबुलाने लगी और जल्दी जल्दी चोदने के लिए कहने लगी.

लेकिन मैंने धीरे धीरे सावधानीपूर्वक साधना को चोदा और वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में चला दी और अपने घर चला आया.

खाना खाकर रात को नौ बजे टहलना मेरा नित्यकर्म था.आज जैसे ही निकला, जालान आंटी अपने गेट पर ऐसे खड़ी थीं मानो मेरा ही इन्तजार कर रही हों.और यही हुआ भी.

मुझे देखते ही आंटी ने अपने पास बुलाया और बोलीं- अन्दर चले जाओ बेटा. साधना कुछ कह रही थी, मैं यहीं गेट पर खड़ी हूँ.

उनकी अजीबोगरीब बात सुनकर मैं अन्दर गया और साधना से पूछा- आंटी ऐसे क्यों कह रही थीं?तो साधना ने बताया- मम्मी जब सत्संग से लौटी थीं तो मुझसे पूछ रही थीं कि ‘दवा लगाने से कुछ आराम मिला?’ तो मैंने कह प्रिया, नहीं मिला. और डॉक्टर कह रही थीं कि अपने पति से यह दवा लगवा लेना, अन्दर तक लगानी है. मम्मी, समझ रही हो ना? तो मम्मी कुछ देर चुप रहीं और फिर बोलीं कि तू कहे तो अजय से लगवा दूँ? मैंने नादान बनते हुए पूछा कि कैसे? तो मम्मी बोलीं, मैं उसको अन्दर भेज दूंगी, बाकी तू समझ लेना.

इतना सुनने के बाद मैंने अपना लोअर उतारकर साधना को चोदा और बाहर आकर आंटी से पूछा- आंटी, कभी तो आप साधना को मुझसे ऐसे बचाती थीं जैसे बकरी को शेर से बचाते हैं और आज?“बेटा, मां हूँ ना. तब साधना को तुमसे बचाना साधना के हित में था और आज तुम्हारा साधना के पास जाना.”“धन्य हो आंटी!” कहकर मैं चला आया और डिलीवरी के दिन तक उसको आंटी के होते हुए जी भर कर चोदा.

साधना का बेटा पैदा हुआ और उसके पैदा होने के डेढ़ महीने बाद साधना अपनी ससुराल चली गई.इसके आठ दस महीने बाद साधना के भाई विनोद की शादी का कार्यक्रम बन गया.

शादी की तैयारियों के लिए साधना शादी से एक महीना पहले ही आ गई. आने से पहले उसने अपने आने की सूचना मुझे दे दी थी.एक दिन मैंने जालान आंटी से पूछा- आंटी परसों साधना आ रही है, मेरा उससे मिलना साधना के हित में है या नहीं?आंटी मेरा तंज समझ गईं और बोलीं- बेटा, अब साधना कोई बच्ची तो है नहीं, तुम जानो और वो जाने.

साधना आ गई और शादी की तैयारी के दौरान उससे मुलाकातें स्वाभाविक थीं और आंटी से कोई डर था नहीं इसलिये हमारे चुदाई कार्यक्रम चलते रहे. शादी के बाद साधना अपनी ससुराल चली गई और विनोद अपनी पत्नी कविता के साथ हनीमून पर.कविता बला की खूबसूरत थी, कैटरीना उसके सामने फेल थी.

विनोद की शादी के दो साल बाद तक उनके कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ तो जालान आंटी के कहने पर विनोद व कविता डॉक्टर से मिले. तमाम जाँचों के बाद डॉक्टर ने बताया कि दोनों की रिपोर्ट्स ठीक हैं, कोई दिक्कत नहीं है, विनोद के स्पर्म काउण्ट कुछ कम हैं लेकिन चिन्ता की बात नहीं है, हाँ थोड़ा समय लग सकता है.

बच्चों से सारी बातें सुनकर भी जालान आंटी को संतुष्टि नहीं हुई, वो जल्दी से जल्दी दादी बनना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने कविता से बात की और उसे मुझसे मदद लेने के लिए राजी कर लिया.

एक दिन विनोद और कविता घर पर नहीं थे तो आंटी ने मुझे बुलाया और सारी बात बताई. मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे. आंटी अपनी बहू की चूत तश्तरी में परोस कर दे रही थीं.मैंने आंटी से कविता का नम्बर ले लिया और विनोद के टूर पर जाने का इन्तजार करने लगा.

मेरी कम्पनी में डे और नाइट दो शिफ्ट काम होता है. जिस दिन विनोद टूर पर गया, मैंने अपनी पत्नी को बताया कि इस हफ्ते मेरी नाइट शिफ्ट है.

मैंने एक हफ्ते की छुट्टी ले ली. कविता को फोन मिलाया, आज पहली बार उसकी आवाज सुनी थी, बड़ी खनखनाती हुई मादक आवाज थी.

मैंने कहा- आंटी कह रही थीं कि मैं आपसे बात कर लूं.कविता बोली- आइये, आपसे कुछ जरूरी काम है.मैंने कहा- मैं समझ गया. मैं रात को नौ बजे आऊंगा. और सुबह छह बजे तक आपकी पनाह में रहूंगा. पहली बार आ रहा हूँ इसलिये दुल्हन के वेश में मिलियेगा.

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रात को नौ बजे उनके घर गया तो आंटी ने दरवाजा खोला. मैंने आंटी के पैर छुए और कहा- आंटी आशीर्वाद दीजिये कि मेरी कोशिश कामयाब हो.आंटी ने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- कविता अपने कमरे में है.

मैं कविता के बेडरूम में पहुंचा तो हैरान हो गया, उसने बेडरूम फूलों से सजा रखा था. मेरे पूछने पर उसने बताया- शाम को फूल लेकर आई थी, मैंने खुद सजाया है.

इतने में दरवाजे पर खटखट हुई और आंटी कमरे में आ गईं. उनके हाथ में दो गिलास केसरिया दूध था.मेज पर दोनों ग्लास रखते आंटी हुए बोलीं- बेटा पी लेना, मैं अब सोने जा रही हूँ.

आंटी के जाने के बाद मैंने दरवाजा लॉक किया और बेड पर आकर कविता का घूंघट उठाकर बोला- कविता, तुम बहुत खूबसूरत हो, मेरी खुशकिस्मती है कि मैं इस समय तुम्हारे पास हूँ.

मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर कविता बोली- मुझे इस घर में आये हुए दो ही साल हुए हैं लेकिन आपकी रंगीनियों का एक एक किस्सा मुझे मालूम है, मैं तो आपकी दीवानी थी ही, मम्मी ने हमारा मिलन आसान कर प्रिया. मुझे अपनी बांहों में समेट लो अजय! मुझमें समा जाओ. मेरा अंग अंग तुमसे मिलने को बेकरार है.

कविता की बातों ने मुझे मदमस्त कर प्रिया, मैंने बड़ी नाजुकता से कविता का एक एक कपड़ा उतारा और बिल्कुल नंगी कर प्रिया. उसके बाद अपने सारे कपड़े उतार दिये, सिर्फ अण्डरवियर पहने रहा और कविता को बांहों में समेटकर लेट गया.

संतरे के आकार की चूचियां मेरे सीने से सटी हुई थीं. अपने दहकते होंठ कविता के होठों पर रखे तो वो चूसने लगी, मैं समझ गया, ये पहले से ही गर्म है. मैंने कविता की चूत पर हाथ फेरना शुरू किया तो कसमसाने लगी.

देर करना मुनासिब नहीं था इसलिए मैं उठा और उसके ड्रेसिंग टेबल से क्रीम की शीशी उठा लाया.कविता के चूतड़ उठाकर उनके नीचे तकिया रख प्रिया जिससे उसकी चूत ऊंची हो गई. कविता की टांगें फैलाकर मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर रख प्रिया और जीभ फेरने लगा.“न करो वि..ज…य … न करो!”

मैंने आंटी की बहू की चूत चाटना जारी रखा तो उसकी चूत के होंठ फड़कने लगे.मैं उठा, अपना अण्डरवियर उतारा और अपने लण्ड पर क्रीम लगाई, कविता की चूत के लब खोलकर अपने लण्ड का टोपा रखा और ठोंक प्रिया तो कविता बोली- आ…ह!

इसके बाद मैंने और धक्का मारकर पूरा लण्ड चूत में पेल प्रिया तो कविता बोली- आ..ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आ…ऊ…च, एक मिनट निकालो अजय, एक मिनट निकाल लो प्लीज!“क्या हो गया?”“निकाल लो अजय, प्लीज निकाल लो.”

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो उठकर बैठ गई और मेरा लण्ड पकड़कर बोली- हाय राम, इतना बड़ा भी होता है?“क्यों क्या हो गया? लण्ड पहली बार देखा है क्या?”“नहीं, पहली बार नहीं देखा है लेकिन इतना बड़ा लण्ड पहली बार देखा है.”

“इससे पहले कितने लण्ड देखे हैं?” इतना पूछते पूछते मैंने कविता को लिटाकर अपना लण्ड फिर से उसकी चूत में पेल प्रिया.कविता ने कहा- इससे पहले दो देखे हैं और दोनों तुम्हारे लण्ड से आधे थे. इनफैक्ट अगर ये लण्ड है तो वो दोनों नुन्नी थे.

मैंने कहा- एक तो विनोद है दूसरा भाग्यशाली कौन है?“किसी को न बताने का वादा करो तो बताऊं?”लण्ड को अन्दर बाहर करते हुए मैंने कहा- नहीं बताऊंगा, प्रामिस.

कविता ने अपनी कहानी बतानी शुरू की:

मेरे बीएससी के प्रैक्टिकल चल रहे थे, जो सर प्रैक्टिकल ले रहे थे वो मेरठ से आये थे. दुर्भाग्य से मेरा प्रैक्टिकल बेकार हो गया तो मैं रोने लगी.

हमारी कैमिस्ट्री मैम आईं और पूछा कि क्या हुआ.तो मैंने बता प्रिया कि मेरा प्रैक्टिकल बेकार हो गया है.कुछ पल रुकने के बाद वे बोलीं- मैं सर से बात करती हूँ.मैम सर से बात करके आईं और बोलीं- परेशान न हो, तुम्हारा प्रैक्टिकल दोबारा कराया जायेगा. एक बजे तक यह प्रैक्टिकल समाप्त हो जाये, फिर लंच होगा उसके बाद दो बजे से तुम्हारा करा दूंगी.ऐसा ही हुआ, मैम ने मुझे भी लंच कराया.लंच के बाद बोलीं- सर लैब में पहुंच गए हैं, तुम वहीं चली जाओ.मैं जाने लगी तो बोलीं- कविता, सर थोड़े रसिया टाइप हैं, सम्भाल लेना.

कुछ समझी नहीं मैं और लैब पहुंच गई.सर मेरा ही इन्तजार कर रहे थे. मुझे लेकर अन्दर वाले कमरे में आ गये और कुर्सी पर बैठते हुए बोले- तुम्हारा प्रैक्टिकल तो बेकार हो चुका है, मतलब तुमने अपना एक साल बेकार कर लिया है लेकिन परेशान न हो, मैं हर साल देखता हूँ कि किसी न किसी लड़की का प्रैक्टिकल खराब होता है लेकिन वो दूसरा प्रैक्टिकल करके पास हो जाती है, तुम भी हो सकती हो, बल्कि मैक्सिमम मार्क्स पा सकती हो. सर बोलते हुए मेरे शरीर के एक एक अंग का मुआयना कर रहे थे.

मैंने कहा- सर करा लीजिए दोबारा प्रैक्टिकल.“दोबारा नहीं होगा, दूसरा प्रैक्टिकल होगा, अगर तुम तैयार हो तो?”मैं कुछ कुछ समझ रही थी फिर भी नादान बनते हुए कहा- ठीक है सर, दूसरा ही करा लीजिये.

सर ने मुझे अपने करीब बुलाया और मेरी स्कर्ट उठाकर मेरी पैन्टी देखी और पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फेरने लगे. यहां तक मुझे कोई ऐतराज नहीं था और अच्छा भी लगने लगा था.थोड़़ी देर तक मेरी चूत पर हाथ फेरने के बाद सर ने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिये और ब्रा ऊपर उठा कर मेरी चूचियां चूसने लगे. इसके बाद सर ने अपनी पैन्ट की चेन खोलकर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया, मैं पहली बार लण्ड देख रही थी.

सर ने कहा- नीचे बैठ जाओ और इसे चूसो.मैं नीचे बैठकर सर का लण्ड चूसने लगी और वो मेरी चूचियां बड़ी बेरहमी से मसल रहे थे.

जब सर का लण्ड खूब टाइट हो गया तो उन्होंने मेरी पैन्टी उतार दी और मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और अपना लण्ड मेरी चूत के मुंह पर रख प्रिया. बड़ा गर्म गर्म और चिकना लण्ड था, मैं जन्नत में पहुंच चुकी थी.

अपने दोनों हाथों से सर ने मेरी कमर को घेरे में लिया और अपनी ओर झटके से खींचा, सर का लण्ड मेरी चूत के मुंह से स्लिप कर गया और अन्दर नहीं गया.

सर ने दोबारा अपना लण्ड मेरी चूत के मुंह रखकर मुझे अपनी ओर खींचा लेकिन उनका लण्ड मेरी चूत में तब भी नहीं गया.तो उन्होंने मुझे खड़ा करके मेरे हाथ टेबल पर रखकर मुझे घोड़ी बना प्रिया और मेरे पीछे आकर मेरी चूत पर हाथ फेरने लगे.

चूत पर हाथ फेरते फेरते उन्होंने अपनी ऊंगली मेरी चूत में डाल दी, दो चार बार उंगली अन्दर बाहर करने के बाद सर ने अपना लण्ड मेरी चूत के मुंह पर टिका प्रिया और मेरी कमर को मजबूती से पकड़ लिया.

इससे पहले कि सर धक्का मारते उनके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी. मेरी चूत और टांगें उनके वीर्य से सन गईं. सर ने अपना अंगूठा मेरी चूत में डाल प्रिया और तेजी से अन्दर बाहर करने लगे, थोड़़ी देर बाद मुझे लगा कि मेरी चूत पानी छोड़ रही है.इसके बाद सर ने अपना अंगूठा निकाल लिया, मैंने देखा सर का लण्ड सिकुड़ कर छुहारे जैसा हो गया था.

मैं कविता की आपबीती तो सुन रहा था लेकिन मेरा लण्ड अपनी ड्यूटी निभा रहा था. कविता की चूत में लण्ड अन्दर बाहर करते करते मेरा लण्ड फूलकर और मोटा हो चुका था. कविता भी चुदाई का पूरा मजा ले रही थी.

मैंने और ज्यादा मजा लेने के लिए कविता के चूतड़ों के नीचे एक तकिया और रख प्रिया जिससे उसकी चूत का मुंह आसमान की तरफ हो गया. मैंने फिर से अपना लण्ड कविता की चूत में पेल प्रिया.

जैसे जैसे मैं डिस्चार्ज होने के करीब पहुंच रहा था, लण्ड का टोपा फूलकर संतरे जितना बड़ा हो गया था. मेरे लण्ड से वीर्य का फव्वारा छूटा तो कविता की चूत भर गई. मेरे हट जाने के बाद भी कविता काफी देर तक उसी मुद्रा में लेटी रही, 12 बज चुके थे.

इसके बाद हम दोनों ने दूध पिया और सो गये.

लगभग दो बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि कविता मेरा लण्ड चाट रही थी.मैंने उसे बांहों में भर लिया और चुदाई का दूसरा दौर शुरू हो गया.

कई महीनों तक यह कार्यक्रम चला और अन्ततः कविता एक बेटे की मां बन गई.वो लड़का मेरा है या विनोद का? यह तो ऊपर वाला जाने!

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दोस्तो, मैं राजवीर, महायाराना के अंतिम भाग के साथ आपका मनोरंजन करने के लिए एक बार फिर से हाजिर हूं. कहानी के पिछले भाग में आपने देखा कि मेरे साले श्लोक ने किस तरह से अपनी बहन की चुदाई का बदला मेरे दोस्त की बीवी से लेने की ठान ली थी.

15 मिनट 910

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
ह

हितेश सिंघल

5 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

स

संजय साव

5 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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