इंडियन बीवी की चुदाई

मुंह बोले बेटे से अपनी चूत चुदवाई और लंड चूसा

लेखक: आरती विवी दिनांक: 07-06-2012 पठन समय: 15 मिनट

माय पुसी सेक्स स्टोरी में मेरे पति से मेरी चूत को मजा नहीं मिला तो मैंने अपने लिए एक नया जवान लंड तलाश लिया. वो बेसहारा था तो मैं उसे अपने घर ले आई.

मेरी पिछली कहानीसुनसान जगह पर चूत चटवाई और लंड चूसामें मैंने आपको बताया कि कैसे मुझे राह चलता लड़का मिला और मैं उसका लंड देख कर मेरा गला सूख गया, मैं ओट गई और उसे अपनी चूत की रबड़ी खिला बैठी और फिर उसको अपने घर ले गई।मेरे हसबैंड मुझे बच्चे का सुख नहीं दे सकते।

मैंने अपने हसबैंड को बताया कि मुझे एक बच्चा अडॉप्ट करना है, तो वो मेरी बात मान गए और उन्होंने उनके एक लॉयर फ्रेंड से सारे डॉक्यूमेंट्स रेडी करवा लिए।

अब मैं आगे की माय पुसी सेक्स स्टोरी बताती हूँ।

मैं राज को घर ले गई और उसे बोला, “जाकर नहा ले जब तक मैं खाना बनाती हूँ!”

मैं उसके लिए खाना बनाने लगी।

मेरी चूत एकदम लाल हुई पड़ी थी और राज के बारे में सोच-सोच कर गीली हो रही थी।

तभी राज मेरे पास आया और मैं उसे देखती रह गई।नहाने के बाद राज और भी गोरा और हैंडसम लग रहा था।पता नहीं कितने दिन बाद नहाया था वो!

उसका लंड अभी भी मुझे सलामी दे रहा था।वो मुझसे थोड़ा शर्मा रहा था.

फिर मैंने उसको बताया कि मैं तुझे अडॉप्ट कर रही हूँ और आज से तू मुझे ‘माँ’ बुलाएगा।

मैं राज से उसके बारे में पूछने लगी- तुम कहाँ से हो, और जो सब हमारे बीच हुआ है उसे किसी को बताना मत।वो भी मुझसे खुल कर बातें करने लगा।

वो बोला, “आप सच में बला की खूबसूरत हो और आपकी चूत का स्वाद अमृत जैसा है— मीठा और नमकीन!”

यह सुन कर मैं शर्मा गई और राज को हल्के से थप्पड़ मारा।मैंने बोला, “चलो अब अपना खाना खत्म करो, वरना तुम्हारे शरीर को शक्ति कैसे मिलेगी? और तुम मुझे खुश कैसे कर पाओगे!”

यह बोल कर मैं हँसने लगी और राज भी मुझसे खुल कर बात करने लगा।मैं भी उसके मोटे 8 इंच के लंड के बारे में सोच रही थी कि कैसे लूंगी इतना मोटा लंड अपनी नाजुक सी चूत में!फिर मैं उसको खाना लगा कर देने लगी।

मैं खाना परोसने के लिए नीचे झुकी, तो मैंने अपना पल्लू जान-बूझकर नीचे गिरा प्रिया।मेरे पल्लू को नीचे गिरा देख कर राज के मुँह में तो पानी ही आ गया।फिर मैंने पल्लू सही किया और नहाने चली गई।

कुछ समय बाद हम रेडी हो गए शॉपिंग पर जाने के लिए क्योंकि राज के लिए कपड़े लेने थे और मुझे भी न्यू ब्रा-पैंटी लेनी थी राज को दिखाने के लिए।मैंने पिंक कुर्ती और वाइट पजामी पहनी थी।

राज मुझे देख कर बोलता है, “आप गोरे हो इसलिए पिंक सूट में बहुत हॉट लग रही हो!”उसकी बातें सुन कर मैं भी खुश हो गई और फिर हम स्कूटी से मॉल की तरफ निकल गए।

वो मेरे पीछे बैठा था, मुझसे चिपक कर।उसका लंड मेरी गांड से टकराता मुझे महसूस हो रहा था।

फिर हम मॉल पहुँच गए और राज के लिए कपड़े ले लिए।फिर मैं उसको लेडीज अंडरगारमेंट्स सेक्शन में ले आई।मॉल का स्टाफ हम दोनों को हसबैंड-वाइफ समझ रहा था।

वहाँ से मैंने कुछ पैंटी और ब्रा उठाई और चेंजिंग रूम में चली गई राज को लेकर।मैं राज को पहन-पहन कर दिखाने और पूछने लगी- बता कौन सी पसंद है तुझे?राज कुछ नहीं बोला, उसकी नज़र मेरे चूतड़ों और चूत पर थी।

मेरी नज़र उसके लंड पर पड़ी जो पूरी तरह तन चुका था।

फिर मैंने उसको बोला, “तू बाहर वेट कर, मैं आती हूँ!”

इतना बोलते ही उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे किस करने लगा।मैंने उसको रोका कि यहाँ नहीं, कोई देख लेगा।बट राज आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था मुझे सेक्सी पैंटी और ब्रा में देख कर।

फिर वो सीधे अपने घुटनों पर बैठ गया और मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा।मैंने उसको रोका नहीं, मेरी आवाज़ भी सिसकियों में बदल रही थी।

मैंने बोला, “पैंटी उतार ले वरना गंदी हो जाएगी!”तभी उसने एक झटके में मेरी पैंटी नीचे खींच दी और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा प्रिया।

मैंने अपने मुँह पर हाथ रख लिया ताकि बाहर आवाज़ ना जाए।तभी राज ने मेरी चूत को काटना स्टार्ट कर प्रिया।

मैं पूरी तरह से तड़प उठी और मुझसे रुका नहीं गया और मेरी सिसकियाँ निकल गईं।

तभी बाहर काम कर रही लड़कियां आती हैं और चेंजिंग रूम का डोर बजाने लगती हैं।

वो बोलीं, “क्या हुआ मैम? आप ठीक तो हो ना!”मैंने उनसे बोला, “कुछ नहीं, एक कॉकरोच था!”

अंदर मैं अपनी साँसों को कंट्रोल करने लगी।राज ने अपना मुँह चूत से हटाया और मुझे किस करने लगा।मैंने उसे रोका कि घर जाकर जो करना है कर लेना, यहाँ कोई देख लेगा, चलो घर चलते हैं।

और जो पैंटी मैंने ट्राई की थी, उनमें से एक पूरी तरह से गीली हो चुकी थी मेरी चूत के पानी से।

मैंने उस पैंटी को भी चेंजिंग रूम में ही छोड़ प्रिया और बिलिंग करवा कर वहाँ से चले गए।पता नहीं स्टाफ वाले क्या सोचेंगे उस पैंटी को देख कर!

रास्ते में मैंने एक मेडिसिन स्टोर पर अपनी स्कूटी रोकी और एक कंडोम का बॉक्स और आई-पिल ले ली।ये देख कर राज बहुत खुश हो गया।

रास्ते में जब हम घर आ रहे थे, तब भी उसने स्कूटी पर पीछे बैठे-बैठे मेरी पजामी में हाथ डाल प्रिया और मेरी चूत को सहलाने लगा।मैं भी मदहोश हो रही थी और अपनी दोनों टांगों को जोड़ लिया ताकि उसका हाथ और अंदर तक ना जाए।

मेरी चूत इतनी गीली हो गई थी कि पजामी भी भीग रही थी।

हम जैसे ही घर के अंदर पहुँचे, राज ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और बोला, “अब तो घर भी आ गया, अब मुझे मत रोकना!”मैंने कहा, “थोड़ा रेस्ट तो कर ले!”

लेकिन राज को हवस चढ़ी थी।हवस तो मुझे भी बहुत चढ़ी थी, दिन भर मेरी चूत से रस टपक रहा था राज के लंड के बारे में सोच-सोच कर।

तभी राज मुझे उठा कर रूम में ले गया और मेरे होठों से चिपक गया और उनका रस पीने लगा।मैं भी गरम होने लगी थी और जोश में आ गई थी।

मैं उसका लंड पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी।राज मेरे होठों को चूसता जा रहा था और कभी अपने दाँतों से काटने लगता।

साथ ही मेरी गांड को पजामी के ऊपर से ही सहलाने लगा और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा।मेरी भी मदहोश सिसकियाँ निकल पड़ीं।

फिर उसने मेरी कुर्ती उतार कर फेंक दी और मेरी ब्रा को खोलने लगा।वो इतने जोश में था कि उसने पीछे से ब्रा का हुक ही तोड़ प्रिया और मेरे बूब्स पर टूट पड़ा।उनको मसलने लगा और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।वो उन्हें अपने मुँह में लेकर दबाने लगा। मेरा भी बुरा हाल हो रहा था।

मैंने उसका सिर पकड़ लिया और बोली, “बेटा आराम से कर, मैं कहीं नहीं जा रही!”

राज बोला, “तूने मुझे आज पूरा दिन तड़पाया है! इतनी सेक्सी कुर्ती और पजामी पहन कर मुझे दिखा रही थी और मॉल में जाकर मुझे पैंटी पहन कर दिखा रही थी!”

उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से पकड़ा और मेरी नाभि पर किस करने लगा।मेरी चूत का रस पूरे बेड को गीला कर रहा था।

तभी उसने मेरी पजामी अपने मुँह से खींच कर नीचे कर दी और मेरी गोरी-गोरी जांघों को देखने लगा।फिर उसने मेरी जांघों को फैलाया, तभी मैं खड़ी होकर राज को गले से लगा लिया और उसको चूमने लगी।

उसका पैंट खोल कर उसका लंड हाथों में ले लिया।उसका लंड एकदम कड़क, मोटा और गरम हो गया था।

फिर मैं उसके लंड को चूमने लगी।

राज ने मुझे रोका कि मैं क्या कर रही हूँ।मैंने बोला, “आज मैंने तुझे बहुत तड़पाया है ना, उसी का इलाज कर रही हूँ!”और उसका लंड का टोपा मुँह में ले लिया।

राज मादक आहें भरने लगा।उसका लंड इतना मोटा था कि सिर्फ टोपा ही मेरे मुँह में जा पा रहा था।

फिर मैं भी अपनी ज़ुबान से उसके टोपे को सहलाने लगी और उसके पूरे 8 इंच के लंड को अपनी ज़ुबान से चाटने लगी।उनके गोटों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

राज भी मस्त हो चुका था और लंड से हल्का-हल्का माल निकलना शुरू हो गया था।तभी उसने मेरे सिर को पकड़ लिया और अपना लंड मेरे मुँह में अंदर घुसाने लगा।

मेरा तो बुरा हाल हो गया था, मैं कुछ कर भी नहीं पा रही थी।

उसका लंड मेरे गले तक चला गया और तभी एक गरम सी माल की धार मेरे मुँह के अंदर महसूस हुई।

मेरा पूरा मुँह राज के गरम-गरम माल से भर गया।मैंने भी राज के लंड को अपने दाँतों से प्यार से काट प्रिया उसको चिढ़ाने के लिए।

तभी उसने मुझे धक्का मार कर बेड पर गिरा प्रिया और मेरी जांघों को खोल कर सीधे मेरी चूत पर टूट पड़ा।

उसने अपने मुँह से ही मेरी पैंटी नीचे सरका दी और अपने होठों से मेरी चूत के होठों को मिला कर स्मूच करने लगा।मेरी साँसें तेज़ हो गईं और सिसकियाँ निकलने लगीं।

मैंने एक हाथ से राज का सिर और एक हाथ से बेड पर बिछी हुई चादर को कस कर पकड़ लिया।तभी मुझे अपनी चूत के अंदर कुछ गरम-गरम जाता महसूस हुआ।

राज अपनी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर तक ले जा रहा था।मैं तड़प उठी और उसका सिर ज़ोर से अपनी चूत पर दबा प्रिया और झड़ना स्टार्ट हो गई।

राज मेरा पूरा पानी पी गया।मैंने बोला, “बस कर, अब कितना तड़पाएगा अपने लंड के लिए? डाल दे अंदर मेरे!”

राज ने मेरी एक ना सुनी और मेरी चूत में उंगली करने लगा और चूत को दाँतों से काटने लगा।

मेरी साँसें पहले से ज़्यादा तेज़ हो गई थीं।मैंने चादर को कस कर पकड़ लिया, मेरी चूत से पानी निकलना बंद नहीं हो रहा था।

तभी राज ने मेरी चूत को अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर से चूस कर चूत को मुँह में ही दबाने लगा।

मैं बिन पानी की मछली की तरह तड़प उठी और मुझसे सहा नहीं जा रहा था।

मैं खड़ी हुई और राज को अपने होठों से लगा लिया।थोड़ी देर तक हमने यूँ ही किस किया।

मेरी चूत का रस राज के सारे मुँह पर लगा था जो किस के दौरान मेरे मुँह में भी चला गया।

फिर मैंने राज से बोला, “जाकर मेरे पर्स में से कंडोम लेकर आ!”वो तुरंत ले आया और मैंने कंडोम उसके लंड पर पहनाना शुरू कर प्रिया।

उसके लंड पर कंडोम भी छोटा पड़ रहा था।मेरा तो बुरा हाल हो रहा था, सोच रही थी कैसे जाएगा अंदर! लेकिन मेरी चूत लंड माँग रही थी।

फिर मैं लेट गई और राज मेरे ऊपर आ गया।राज बहुत जोश में था, वो झटके मारने लगा।

उसका लंड कभी मेरी चूत से टकराता तो कभी पेट से।फिर मैंने अपने हाथों से उसके लंड को अपनी चूत के मुँह पर रख प्रिया और बोला, “बेटा आराम से करना, तेरा बहुत बड़ा है, मैं मर जाऊँगी!”

इतना बोला ही था कि तभी राज ने एक ज़ोरदार झटका मारा और उसने अपना लंड 4 इंच अंदर घुसा प्रिया!मैं ज़ोर से चीख उठी और उससे बोलने लगी, “बेटा आराम से!”

वो और ज़ोर लगाने लगा और बोला, “माँ, आज मत रोको! आपको खुश करना है मुझे। आपने मुझे अपनी चूत की रबड़ी खिलाई है, उसका कर्ज़ चुकाना है मुझे!”

इतना कहते ही एक झटका और मारा और उसका लंड 7-8 इंच अंदर चला गया।मेरी चूत उसके लंड की गर्मी को महसूस कर रही थी और पानी छोड़ने लगी।

मैंने अपनी जांघों को ज़ोर से कस लिया और उसकी कमर पकड़ कर रोकने लगी।मेरा बुरा हाल हो रहा था।

तभी राज ने मेरे दोनों हाथों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से उछल-उछल कर मेरी चूत का भर्ता बनाने लगा।उसका लंड मेरी बच्चादानी से टकरा रहा था और चूत से पानी निकलना बंद नहीं हो रहा था।पूरा बेड गीला हो गया।

मुझे भी बेचैनी सी होने लगी और मैं जोश में आ गई और राज को गाली देने लगी, “चोद मुझे! कुत्ते, रंडी के बच्चे! मार दे मुझे आज तू, आज फाड़ दे मेरी चूत!”

यह सुन कर राज और ज़ोर से मेरी बच्चादानी को चोदने लगा।मैं ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी और उसकी गांड को दबाने लगी कि उसका लंड और अंदर जाए।

मैंने अपनी टांगें और फैला लीं।करीब आधा घंटा तक यह चला।मेरी चूत के अंदर कंडोम भी फट चुका था।

तभी राज भी आहें भरता हुआ मेरी चूत में ही झड़ गया और मेरी चूत उसके माल से लबालब भर गई।उसके गरम-गरम माल से मैं मचल उठी और मेरा भी पानी झड़ने लगा।

मेरा 5 बार पानी निकल चुका था और थोड़ा सा खून भी निकला था।

मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी, साँसें बहुत तेज़ थीं और मैं रोने लगी।मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा था।

तभी राज ने मुझे किस किया और सॉरी बोला- आपको बहुत दर्द प्रिया मैंने।मैं हँसने लगी और बोली, “पागल! तुमने तो मुझे खुश कर प्रिया।”

यह सुन कर बोला, “फिर एक और बार हो जाए?”मैंने बोला, “तू क्या जान लेना चाहता है क्या? मेरी हालत देख, मुझसे नहीं होगा!”

उसका लंड अभी भी खड़ा था।तभी मेरी जेठानी का फोन आया गाँव से।उन्होंने बोला कि तुझे गाँव आना है, यहाँ शादी की तैयारियाँ करनी हैं और पूछने लगीं, “तेरी तबियत तो ठीक है ना? इतना हाँफ क्यों रही है?”

मैंने बोला, “कुछ नहीं जेठानी जी, बाहर से घूम कर आई हूँ इसलिए।”

एक्चुअली मेरे बड़े देवर की शादी थी, तो मुझे गाँव जाना था।जब मैं थोड़ी नॉर्मल हुई तो राज का लंड चूसने लगी।

लंड चूसने के बाद उसको शांति मिली।मेरा मुँह और चूत दोनों सूज गए थे।

अब हम गाँव जाने की तैयारी करने लगे।मैंने सोचा राज को भी ले जाऊंगी, मेरी चूत का मन लगा रहेगा।

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