MILF भाभी चुदाई कहानी में मेरी बीवी की सेक्सी सहेली किसी काम से मेरे घर आई. मैं अकेला था. मैंने उसका काम कर प्रिया और दोबारा आने को कहा. वो आधे घंटे बाद खुद आ गयी.
दोस्तो, कैसे हो आप सब?मेरी पिछली कहानीठोक दे किल्ली बागड़ बिल्ली की चूत में11-12 साल पहले आई थी.
बहुत समय के बाद आज मैं आपको इस MILF भाभी चुदाई कहानी में अपना ये अनुभव सुनाने जा रहा हूँ.
मेरा नाम हिरल है.उम्र 42 साल है.मैं एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी रहा हूँ.गुजरात के अहमदाबाद में एक बेटा है, सुंदर बीवी है और बिजनेस भी अच्छा सैट है.पैसे भी ठीक-ठाक कमा लेता हूँ.
मैं अपनी सोसाइटी का चेयरमैन हूँ.अक्सर लोग मुझसे प्रॉब्लम लेकर आते हैं.
वैसे तो मैं किसी औरत को बुरी नजर से नहीं देखता लेकिन एक दिन मैं सोसाइटी के ऑफिस में बैठा था.
मेरे दो घर छोड़कर बाजू में रहने वाली वंदना भाभी (उम्र 38) अचानक से भीगे कपड़े पहनी हुई आईं.वंदना मेरी बीवी की सहेली भी है.
उस दिन रविवार था और मैं सोसाइटी के ऑफिस का काम कर रहा था.उन्हें आता देख मैं उन्हें देखने लगा.
वे शायद कपड़े धो रही थीं और उसी गीली अवस्था में या गई थीं.
भाभी कहने लगीं- ऐसा नहीं चलेगा!मैंने पूछा- क्या हुआ?
ये कहते हुए मैंने इस बार कुछ गौर से उनको सामने सही से देखा … मानो उर्वशी ही खड़ी हो मेरे सामने!मैं तो एकटक देखता ही रह गया!
उन्होंने कहा- आज क्यों पानी जल्दी बंद कर प्रिया? कपड़े धोने बाकी हैं.
उस वक्त भाभी ने हल्के नीले रंग की साड़ी पहनी थी और वह साड़ी पूरी भीग गई थी.उनका पेट थोड़ा मोटा था, पर वे गोरी थीं, इसलिए बहुत सुंदर लग रही थी.
मैंने कहा- क्या हुआ?वे बोलीं- पानी क्यों बंद कर प्रिया? आज ही तो काम करने का समय मिलता है और आपने पानी बंद कर प्रिया.
मैं उन्हें देखता ही जा रहा था.
उनका गोरा मोटा शरीर नीले रंग की साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रहा था.नापा तो नहीं, पर 38 इंच के बूब्स, 40 की गांड और थोड़ा मोटा पेट … ये सब मेरा लंड खड़ा करने के लिए काफी थे.भाभी के परिवार के सभी लोग एक संयुक्त परिवार में रहते थे तो रविवार को पानी की जरूरत ज्यादा रहती है.
मैंने कहा- ठीक है, मैं पानी का बोर चालू करवा देता हूँ!वे बिना कुछ कहे चली गईं.
फिर एक दिन शाम को मैं घर में अकेला था।काफी दिन बाद मेरे घर पर कोई नहीं था.मैं टेरेस पर बैठकर अकेला था, इसलिए ड्रिंक कर रहा था.
नीचे से डोरबेल बजी.मैंने देखा तो वंदना भाभी थीं.
मुझसे बोलीं- शक्कर है?मैंने शक्कर दी.
भाभी जाते-जाते कहने लगीं- उस दिन के लिए सॉरी.
मैंने कहा- ऐसे कैसे चलेगा? आपको कुछ खिलाना पड़ेगा, तब मैं मानूंगा.वे हंस दीं, कुछ नहीं बोलीं और चली गईं.
बाद में मुझे लगा कि मैंने गलत कहा है क्योंकि दो पैग के बाद थोड़ा नशा हो गया था.
दस मिनट बाद फिर से डोरबेल बजी.खोला तो फिर से वंदना भाभी कुछ खाने को लेकर आई थीं.
मुझे नशा ज्यादा हो गया था तो उन्हें देखता ही रह गया.
उस वक्त उन्होंने पिंक साड़ी पहनी हुई थी.
एक तो मोटी और गोरी, ऊपर से पिंक साड़ी … मानो कोई अप्सरा लग रही थीं!
मैंने नशे में आंख मार दी.वे कुछ नहीं बोलीं.
मैंने कहा- अन्दर आइए.उन्होंने अर्थ-पूर्ण अंदाज में कहा- अभी नहीं … तीस मिनट बाद!
मेरे तो मन में लड्डू फूटने लगे कि क्या होगा … मैं कैसे क्या क्या करूँगा!
इतने में मेरी बीवी का फोन आया.कह रही थी- वंदना भाभी को बोला था खाना देने को, दे गईं या नहीं?मैंने कहा- हां … खाना खा कर सोने की तैयारी कर रहा हूँ!
उससे मैंने थोड़ी बात की और फोन रख प्रिया.
मैं तो सोच में पड़ गया कि ये मेरे कहने पर आई हैं या बीवी के कहने पर?
इतने में डोरबेल बजी.मैंने खोला तो वंदना भाभी थीं.
मैं नशे में था.
मैंने पूछ लिया- आप मेरे कहने पर खाना लाई हैं या बीवी के कहने पर?
उन्होंने कहा- खाना बीवी के कहने पर … और अभी आप के कहने पर आई हूँ.
मैं तो चुप हो गया.क्या कहूँ, कुछ पता नहीं चल रहा था.
मैंने चुपचाप दरवाजा बंद किया.
वंदना भाभी मेरे सामने वाले सोफे पर बैठी थीं.
मैंने रसोईघर में जाकर पानी पिया.वंदना भाभी से पूछा तो उन्होंने मना कर प्रिया.
मैंने उन्हें टटोलने की नियत से पूछा- अपने घर पर आपने क्या कहा?उन्होंने कहा- सच बोलकर आई हूँ कि भाभी ने घर साफ करने को कहा है … तो मेरे उन्होंने कहा कि ठीक है.
भाभी की बात सुनकर मैं चुप ही रहा.फिर वे बोलीं- उस दिन पानी चालू किया तो मेरी सास आपकी तारीफ कर रही थीं कि हिरल भाई अच्छे इंसान हैं. उन्होंने एक बार भी मना नहीं किया.
मैंने बात बदलते हुए कहा- आपके पर घर तो सब ठीक है न?वे मुस्कुराईं और कहने लगीं- अभी बिगड़ेगा ना!
मैं समझ गया.
वैसे तो वह कभी मुझे देखती भी नहीं थीं, पर आज सामने से कह प्रिया … कोई बेवकूफ ही होगा जो ऐसा मौका जाने देगा.
मैंने कहा- ऊपर चलो … कुछ बिगड़ेगा भी नहीं और अपना काम भी हो जाएगा.
मैंने छत पर बिस्तर पहले से ही लगा कर रखा था.उधर दारू की बोतल पानी गिलास चखना आदि सब रखा था.
वे अपने सामने दारू के भरे गिलास को देख रही थीं.मैंने कहा- पियोगी?
उन्होंने न केवल मना किया बल्कि पूछा भी कि इधर कब से मिलने लगी?गुजरात में शराब मिलती नहीं है, इसलिए वे थोड़ी हैरान थीं.
मैंने कहा- पैसे से सब मिलता है बस पैसा …
उन्होंने मेरी बात काटते हुए कुछ तल्ख भरे स्वर में कहा- और प्यार? उसके लिए भी पैसा काम करता है क्या?
मैं एक पल के लिए चुप हुआ, फिर बोला- क्या हुआ?
वे रोईं तो नहीं, पर उदास हो गईं और कहने लगीं- आप अपनी बीवी से कैसे प्यार करते हो? मेरे पति ऐसे मुझसे नहीं करते! वे सिर्फ शरीर का सुख लेकर सो जाते हैं … न कोई बात, न कोई और चीज!
कुछ पलों के लिए हम दोनों के बीच सन्नाटा छाया रहा था.
‘बस 19 साल से जानवर की तरह जी रही हूँ … बच्चे, घर और सास … बस यूँ ही जिंदगी जा रही है. कोई नयापन नहीं है.’
मैंने कहा- आप चिंता मत करिए … मैं आपको घुमाने ले जाऊंगा. छुट्टी में आप मायके चली जाना, मैं आपको वहां से घुमाने ले जाऊंगा.
इतना सुनते ही भाभी मेरे गले से लग गईं.उनके बूब्स मुझे और ज्यादा नशीला बना रहे थे.उनके मक्खन से गोलों का स्पर्श ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो मुझे जन्नत का सुख मिल रहा हो.
मेरी बीवी भी सुंदर है, पर कुछ नया मिले तो हर आदमी को मजा आता है.
मैं दस मिनट तक भाभी के गले से लगा रहा.फिर मैंने पास में रखा अपना पैग उठा कर खत्म किया और उनके होंठ हाथ में लेकर उंगली फिराने लगा.
वे अपनी आंखें बंद करके खुद को ढीली छोड़ कर मेरे सीने से लग गईं.
मैं अपना मुँह उनके मुँह पर रखकर करीब पांच मिनट तक किस करता रहा.
फिर समय ज्यादा न बिगाड़ते हुए मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और साड़ी निकाल दी.वे पेटीकोट और ब्लाउज में क्या लग रही थीं.
मैंने उनके पेटीकोट और ब्लाउज को भी निकाल कर उन्हें अपनी चादर में खींच लिया और किस करने लगा.भाभी भी मेरा साथ देने लगीं.
दारू के नशे में लौड़ा चुत को ज्यादा समय तक चोदता है … ये मैं अपनी बीवी पर अनुभव कर चुका हूँ.इसलिए बिना समय गंवाए … उनकी पैंटी निकाल दी.
मेरी एक आदत है मैं जिसकी भी पैंटी उतारता हूँ उस पैंटी की खुशबू जरूर लेता हूँ.भाभी की पैंटी की महक मुझे बहुत मस्त लगी.
मैंने नाक पर पैंटी को रखा और उसमें चुत वाली जगह को जीभ से चाटा.तो वे हंसने लगीं.
फिर मैंने उनके दोनों पैरों के बीच में मुँह डाल प्रिया और उनकी चूत चाटने लगा.वे मेरा सिर अपनी चुत पर दबा रही थीं.
करीब पांच मिनट बाद उन्होंने अपनी चुत में से खूब सारा चिकना पानी छोड़ा … मैं सब पी गया और चुत को चाटता रहा.
उन्होंने कहा- अब नहीं रहा जाता मुझसे … प्लीज डाल दो जल्दी से अपना मूसल मेरी बुर में!वे उत्तर प्रदेश से थीं, सो चुत को बुर कहती थीं.
मैं तो वैसे ही लुंगी में था.मैंने लुंगी को अलग किया और अपने निक्कर को निकाल कर साइड में रख प्रिया.
वे मेरे लौड़े को निहारने लगीं.फिर मैंने पोज सैट किया और अपना लौड़ा उनकी चुत में डाल प्रिया.
एकदम मक्खन में छुरी की तरह लौड़ा अन्दर घुसता चला गया.
‘ओह्ह … वंदना … ओह्ह … वंदना.’ कहते-कहते मैं भाभी की चुत में धक्के पर धक्के मारने लगा था.भाभी का पेट आगे-पीछे हो रहा था.
दस मिनट तक बराबर चुदाई चलती रही.
समय कम था हमारे पास, तो मैंने धक्के और तेज़ कर दिए.
कुछ मिनट बाद मुझे लगा कि मैं जाने वाला हूँ.
मैंने वंदना भाभी से कहा- मैं जा रहा हूँ!भाभी ने तुरंत बोला- अन्दर ही डाल दो … मैंने ऑपरेशन करवा लिया है.
मैंने कस कसके धक्के मारे और अकड़ते हुए भाभी को कसके पकड़ लिया.उन्होंने भी कसके मेरी पीठ में नाखून गाड़ दिए!
दो मिनट ऐसे ही रहने के बाद मैंने कहा- आपकी सास आपका इंतजार करती होगी?
भाभी ने कहा- मैं उनके और सबके खाने में नींद की गोलियां डालकर आई हूँ. क्योंकि मुझे नींद नहीं आती, तो मेरे पति ने नींद की दवाई लाकर दी थी … वह सब मैंने खाने में डाल दी हैं. शायद वे सब लोग गहरी नींद में सो गए होंगे. फिर भी मैं देखकर आती हूँ.
भाभी फटाफट से कपड़े पहन कर अपने घर जाकर देखकर वापस आ गईं.तब तक मैंने एक पैग और बना लिया था और सिगरेट सुलगा कर धुआँ उड़ा रहा था.
मेरे पास आकर भाभी कहने लगीं- सब सो रहे हैं!
मैंने वापस से भाभी के कपड़े निकाल दिए, उनको सिगरेट पकड़ा दी.
वे बोलीं- मैं पी कर देखूँ क्या?मैंने कहा- हां देखो.
वे सिगरेट पीने लगीं और मैं उनके दूध.इस बार इत्मीनान से मैंने उनके बूब्स को बारी-बारी चूसा.कभी निप्पल पर काटा भी … उन्हें भी बहुत अच्छा लगा.
करीब बीस मिनट तक उनके दोनों मम्मों को मैंने बारी बारी से जीभर कर चूसा और काटा … मस्त मजा आ रहा था.
हम दोनों छत पर चादर के अन्दर नंगे थे.उस दिन तो मानो जन्नत का सुख मिल गया था.
वहीं हमने माउंट आबू जाने की बात की कि कैसे जाएंगे वैकेशन में.
दूध चूसने के बाद मैंने भाभी की गोरी-गोरी टांगों को चाट-चाटकर लाल कर प्रिया.फिर उनकी टांगों को कंधे पर लेकर लौड़ा भाभी की बुर में डालकर पेलने लगा.
करीब दस मिनट तक धक्के देने के बाद मैंने अपने लौड़े का सारा माल भाभी की बुर में डाल प्रिया और उनके एक कंधे पर सिर रखकर सो गया.
सुबह चार बजे भाभी ने मुझे जगाया और कहा- अब मैं जाऊं?मैंने कहा- अभी एक बार और करते हैं.
मैंने उन्हें एक बार फिर से जमकर MILF भाभी चुदाई का मजा लिया.उसके बाद भाभी कपड़े पहन कर अपने घर चली गईं.
इस पूरी घटना में किसकी क्या गलती है? आप मुझे बताइए.क्या औरत पूरी जिंदगी एक जानवर की तरह काम करने के लिए है?उसके भी तो कुछ अरमान होते हैं, कुछ सपने होते हैं!
मैं ही नहीं, सब गुज्जू अपनी बीवी के साथ साल में एक बार तो बाहर जाते ही हैं.
औरत का मान रखोगे तो वह आपका मान रखेगी.बस मुझे आप सबसे यही कहना है.
मैं वंदना भाभी को गलत नहीं मानता, पर अपनी जो समाज की जो रीत है, उसे गलत कहता हूँ.
उसने क्या बुरा किया?उन्नीस साल से मजदूर की तरह काम करने के बाद भी अगर उसके पति को पता चला तो वह बेवफा?अरे भाई … पहले आप औरत को मान दो! वह आपको कभी धोखा नहीं देगी … और अगर आप ऐसे ही रहेंगे, तो हर तीसरे घर से वंदना कोई न कोई हिरल में अपना प्यार और सपना खोजेगी!
मुझे माफ करना अगर आपको बुरा लगा हो.
उसके बाद मैं और वंदना कैसे माउंट आबू गए और मैंने कैसे उसके सब सपने पूरे किए … वह अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.
हां, उसके बाद मैं और वंदना कभी सोसाइटी में नहीं मिले, जब भी मिले … बाहर मिले.
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