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मेरी मां का गैंगबैंग: सेडक्शन की पूरी कहानी(Meri maa ka gangbang: seduction ki poori kahani)

hatedvillain

22 Sep 2021 को प्रकाशित

मेरी मां का गैंगबैंग: सेडक्शन की पूरी कहानी(Meri maa ka gangbang: seduction ki poori kahani)
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मेरा नाम राहुल है। मैं 19 साल का हूं। घर में सिर्फ मैं और मेरी मां रीता हैं। पापा की मौत को दो साल हो गए। मां 39 साल की है, लेकिन उसका बदन 30 साल वाली लड़की जैसा है। लंबे काले बाल, बड़ी भूरी आंखें, गोरा रंग, पतली कमर, भरी छाती और गोल गांड। वह हमेशा साड़ी पहनती है, जो उसके शरीर से चिपक कर सब कुछ दिखा देती है। मां घर का सारा काम खुद करती है, लेकिन रातों में मैंने सुना है कि वह अकेले में खुद को छूती है। मुझे लगता था कि मां की चाहतें बहुत हैं, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि वह इतनी बहकी हुई हो सकती है।

एक रात मैं दोस्तों के साथ देर तक घूमने गया था। रात के 11 बज चुके थे जब मैं घर लौटा। बाहर दो कारें खड़ी थी। मैंने सोचा, कौन आया है? चुपके से दरवाजे की झिरी से झांका। अंदर चार आदमी थे। वे मजबूत कद के थे, शायद पड़ोस के ठेकेदार। नाम थे राजू, मुनू, बबलू और सोहन। मां उन्हें चाय परोस रही थी। वह लाल साड़ी में थी, पल्लू थोड़ा ढीला। “अरे भाई साहब, इतनी रात गए?” मां ने मुस्कुराते हुए कहा। लेकिन उसकी आंखों में कुछ चमक थी।

राजू ने चाय का घूंट लिया और बोला, “रीता जी, आपका घर का काम आज खत्म हो गया। ये पैसे लीजिए।” मां ने पैसे लिए, लेकिन उसका हाथ राजू के हाथ पर रुका। राजू ने मुस्कुराया। “क्या जल्दी है? थोड़ी देर और रुक जाओ ना।” मां बोली।

लेकिन अब सेडक्शन की शुरुआत हो चुकी थी। राजू ने मां की आंखों में देखा। “रीता जी, आप अकेली हैं ना? ये घर इतना बड़ा, और आप इतनी सुंदर।” उसकी आवाज गहरी थी। मां शर्मा गई, लेकिन नज़रें मिलाई। “हां, अकेलापन सताता है।” बोली।

मुनू ने हंसते हुए कहा, “अरे रीता जी, आप तो फिल्मी हीरोइन लगती हैं। ये साड़ी आपके बदन पर कितनी अच्छी लग रही।” वह सोफे से उठा और मां के पास गया। मां ने चाय का कप रखा। मुनू ने मां के कंधे पर हल्का हाथ रखा। “गर्मी लग रही है क्या? पल्लू ठीक कर लो।” बोला, लेकिन हाथ से पल्लू को छुआ। मां का पल्लू सरक गया, ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा दिखा, छाती का गोलाई साफ।

मां ने हंस कर पल्लू ठीक किया, लेकिन जान-बूझ कर धीरे। “तुम लोग कितने शरारती हो।” बोली। बबलू ने कहा, “रीता जी, हम तो आपके दीवाने हो गए। ये आंखें, ये होंठ।” वह मां के चेहरे के पास आया, सांस छुई। मां की सांस तेज हो गई।

सोहन ने टीवी ऑन किया। कोई रोमांटिक गाना बजने लगा। “रीता जी, थोड़ा नाच लो ना। हम देखें।” बोला। मां हिचकिचाई, लेकिन राजू ने हाथ बढ़ाया। “चलो, एक डांस।” मां ने हाथ पकड़ा। संगीत पर मां हल्का-हल्का नाचने लगी। राजू उसके साथ। उसके हाथ मां की कमर पर। मां की कमर पतली, राजू ने सहलाया। “कितनी सॉफ्ट है।” बोला। मां मुस्कुराई, शरीर राजू से चिपकाया। बाकी तीनों देख रहे थे। मुनू ने ताली बजाई। “वाह रीता जी, कमर घुमाओ।” मां ने घुमाया, साड़ी की चली सरकी, टांगें दिखीं। गोरी टांगें, चिकनी।

डांस के दौरान राजू ने मां के कान में फुसफुसाया। “रीता, तुम्हारा बदन आग लगाता है। पति के जाने के बाद कोई नहीं मिला?” मां ने सिर हिलाया। “नहीं, लेकिन तुम जैसे मजबूत आदमी देख कर मन डोल जाता है।” राजू ने मां की पीठ सहलाई। हाथ नीचे सरकाया, गांड पर रुका। मां सिहर गई, लेकिन पीछे नहीं हटी। “हां, छुओ।” फुसफुसाई। बबलू उठा, मां के सामने आया। डांस में शामिल। उसके हाथ मां की छाती पर रगड़े। “ये भरी हुई छाती, कितनी मुलायम।” बोला। मां की सांसें उखड़ रही।

मुनू ने मां को सोफे पर बिठाया। “रीता जी, थक गईं? हम मसाज करें?” बोला। मां हंस पड़ी। “अच्छा? करो ना।” राजू ने मां के पैर पकड़े। जूते उतारे, टांगें सहलाई। “कितनी सुंदर टांगें।” ऊपर की ओर हाथ बढ़ाया, जांघ पर। मां की साड़ी ऊपर सरक गई। पैंटी का किनारा दिखा। मुनू ने कंधे दबाए। लेकिन हाथ आगे, छाती पर। ब्लाउज के ऊपर से दबाया। मां कराही, “आह… हल्का।” लेकिन आंखें बंद। सोहन ने मां के बाल संवारे। फिर गर्दन चूमा। “रीता, तुम्हारी खुशबू मदहोश कर देती।” मां का बदन गर्म हो रहा।

वे चारों ने मां को घेर लिया। राजू ने साड़ी का आंचल खींचा। “ये गर्मी सहो मत।” बोला। मां ने नहीं रोका। ब्लाउज दिखा। टाइट ब्लाउज, निप्पल उभरे। बबलू ने ब्लाउज के हुक खोले। एक-एक करके। “देखो, कितना सुंदर।” स्तन बाहर। गोरे, भरे। निप्पल काले, सख्त। बबलू ने एक निप्पल मुंह में लिया। चूसा। जीभ घुमाई।

मां चीखी, “ओह… हां।” मुनू ने दूसरे स्तन को हाथ से दबाया। चूंची खींची। सोहन ने मां के होंठ चूमें। गहरा किस्स। जीभ अंदर। मां ने जवाब दिया, जीभ चाटी।

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राजू नीचे गया। पेटीकोट ऊपर किया। पैंटी पर हाथ फेरा। “गीली हो गई।” बोला। मां शर्मा गई। “तुम्हारी वजह से।” राजू ने पैंटी सरकाई। चूत दिखी। गीली, बाल काले। उंगली लगाई, क्लिटोरिस पर। मां कांपी। “आह… वहां।” राजू ने जीभ लगाई। चाटा। रस चखा। मुनू ने मां का हाथ पकड़ा, अपनी पैंट पर रखा। लंड सख्त। मां ने सहलाया। “बड़ा है।” बोली। बबलू ने शर्ट उतारी। अपना बदन दिखाया। मां ने छुआ। “मजबूत छाती।” सोहन ने पैंट खोली। लंड बाहर। मां ने देखा, मुस्कुराई।

सेडक्शन तेज हो गया। वे मां को नंगा करने लगे। साड़ी पूरी उतारी। पेटीकोट खींचा। मां नंगी। बदन चमक रहा। राजू ने मां को गोद में उठाया। सोफे पर लिटाया। “रीता, हम तुम्हें खुश करेंगे।” बोला। मुनू ने मां के पैर फैलाए। जीभ चूत में डाली। चूसने लगा। बबलू और सोहन ने स्तन चूसे। दांत लगाए। मां कराह रही। “हां… सब करो।” राजू ने अपना लंड मां के मुंह पर रगड़ा। “चूसो।” मां ने मुंह खोला। चूसा। गले तक। लार टपक रही।

वे बारी-बारी से मां को छू रहे। राजू ने चूत में उंगली डाली। दो उंगलियां। अंदर-बाहर। मां का रस बहा। “तैयार हो गई।” बोला। मुनू ने गांड सहलाई। उंगली डाली। “यहां भी टाइट।” मां बोली, “हां, खोलो।” बबलू ने मां के पैर चूसे। टांगों पर किस्स। सोहन ने आंखों में देखा। “रीता, तुम्हें सब कुछ चाहिए?” मां ने हां कहा। “सब मिल कर।”

अब वे खुद को नंगे कर चुके। चारों लंड खड़े। मोटे, लंबे। मां ने देखा। “वाह… कितने अच्छे।” राजू ने मां को किस्स किया। “हम तुम्हें चोदेंगे, लेकिन पहले मजा लो।” मुनू ने मां को खींचा। लंड हाथ में दिया। “सहलाओ।” मां ने सहलाया, चाटा। बारी-बारी चारों के। जीभ से टिप चाटी। “स्वादिष्ट।” बोली। बबलू ने मां के बाल पकड़े। मुंह में धक्का दिया। चोदा मुंह को। सोहन ने पीछे से छुआ।

सेडक्शन इतना गहरा था कि मां पूरी बहक गई। वे मां को उठा कर किचन ले गए। “यहां भी खेलें।” राजू बोला। किचन टेबल पर मां को लिटाया। मुनू ने चूत चाटी। बबलू ने लंड मां के स्तन पर रगड़ा। सोहन ने मुंह में। राजू ने तेल लिया, गांड पर लगाया। उंगली डाली। मां चीखी, “हां… तैयार करो।” वे हंस पड़े। “रीता, तुम्हारी भूख बड़ी है।”

फिर बाथरूम में। पानी चालू। मां को नहलाया। साबुन लगाया। बदन पर हाथ फेरा। छाती, चूत, गांड। मां हंस रही। “तुम लोग कितने चालाक।” बोला। राजू ने शावर के नीचे मां को चूमा। लंड चूत पर रगड़ा। लेकिन अंदर नहीं डाला। “पहले उत्तेजित हो जाओ।” मुनू ने पीठ पर मालिश। गांड सहलाई। बबलू ने पैर धोए, लेकिन जीभ से चाटा। सोहन ने बाल धोए, गर्दन चूमा। मां का बदन भीग गया, चमकदार।

बाथरूम से निकले। बेडरूम में। मां को बेड पर। वे चारों ने मां को छुआ। हर इंच। राजू ने मां की आंखें बांध दी। “सरप्राइज।” बोला। अंधेरे में मां सिहर रही। मुनू ने स्तन चूसे। बबलू ने चूत में जीभ। सोहन ने गांड। राजू ने कान में। “हम तुम्हें पागल करेंगे।” मां कराह रही। “हां… करो।” आंखें खोली तो लंड सामने। एक-एक चूसा।

सेडक्शन के बाद गैंगबैंग शुरू। राजू ने पहले चूत में लंड डाला। धीरे-धीरे। मां चिल्लाई। “आह… पूरा।” धक्के मारे। मुनू मुंह में। बबलू स्तन। सोहन गांड उंगली। फिर बदले। हर ने चूत चोदी। गांड में। मुंह। हाथ। मां तीन-चार लंडों में। चीखें, कराहें। रस बहा। कम छूटा। बदन पसीना, निशान।

रात भर चला। हर कोने में। सोफा, फर्श, टेबल, बेड। पोजीशन बदलीं। डॉगी, मिशनरी, साइड, ऊपर-नीचे। मां बोली, “और… न रुको।” वे हंसे। “रीता, तुम्हारी चूत लाल हो गई।” लेकिन जारी। आखिर कम सब जगह छोड़ा। चूत, गांड, मुंह, बदन। मां निगली, चाटी।

सुबह वे गए। मां थकी लेटी। मैंने सब देखा। मेरा लंड खड़ा। मां जागी। “देख लिया राहुल?” मुस्कुराई। “हां मां।” मैं बोला। “अगली बार तू भी।” कहा। मेरी दुनिया बदल गई।

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