दोस्तो, मेरा नाम अर्पिता वर्मा है, मैं देश की राजाधानी दिल्ली से हूँ. यह कहानी आज से 2 साल पहले की है जब मैं बारहवीं क्लास में थी. उस वक्त तक मुझे सेक्स का पूरा ज्ञान था लेकिन मैंने कभी सेक्स किया नहीं था. हालाँकि मैं पॉर्न वीडियो देखकर खुद को शांत ज़रुर कर लेती थी. उस वक्त तक मेरी कई सहेलियों के बॉयफ्रेंड थे और वो बहुत मज़े लेती थीं.यह कहानी मेरे साथ पढ़ने वाले लड़के की है जिसका नाम विकास था.
विकास दिखने में काफी अच्छा था और इसी वजह से मैं भी उसकी तरफ आकर्षित होती रहती थी और वह भी मुझपर लाइन मारता था. लेकिन कभी भी उसने मुझे प्रपोज़ नहीं किया था. हम आपस में काफी बातें करते थे. एक दिन हमारी ट्यूशन क्लास के बाद उसने मुझे गली में रोक लिया और कहा कि वह मुझे बहुत पसंद करता है और मेरे साथ फ्रेंडशिप करना चाहता है तो मैंने भी उसे हाँ कर दी.इसके बाद तो हमारी रोज़ घंटों फ़ोन पर बातें होने लगी और मुझे भी उससे बातें करना बहुत अच्छा लगता था.
फिर एक दिन उसने मुझे पार्क में मिलने के लिए बुलाया.अगले दिन सुबह वो मुझे लेने आ गया और हम पार्क में चले गये. यह एक कपल पार्क था तो कोई दिक्कत नहीं थी फिर भी हम दोनों सबसे छिपकर एक कोने में बैठ गए. कुछ देर बाद विकास ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे हाथ पर किस किया लेकिन मैंने कोई उत्तर नहीं प्रिया.
तो वह मेरे गालों और गर्दन पर किस करने लग गया. मैंने उसे टोका और कहा- यहाँ कोई देख लेगा.इससे उसकी हिम्मत और बढ़ गयी और वो और ज़ोर से किस करने लग गया. फिर उसने मेरे होंठों पर भी किस करना शुरू कर प्रिया.
अब मैं भी गर्म होने लग गयी थी तो मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर प्रिया. कुछ देर किस करने के बाद उसने मेरी टी-शर्ट के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर प्रिया लेकिन अबकी बार मैंने उसे नहीं रोका क्योंकि मुझे भी मज़ा आने लगा था.
तभी उसने मेरी टी-शर्ट में हाथ डाल प्रिया. अब मैंने उसे हल्का सा धक्का दे प्रिया और कहा- यहां पर मत करो यार!तो उसने मेरी बात मान ली और मुझसे अलग हो गया.फिर उसने मुझे घर पर छोड़ प्रिया.
घर पर आकर सबसे पहले मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत को शांत किया और फिर विकास के बारे में सोचने लगी.
तभी कुछ देर बाद विकास का फ़ोन आ गया और उसने कहा- 2 दिन बाद स्कूल में ऐनुअल फंक्शन है.उस दिन वह मुझसे अपने दोस्त के फ्लैट में मिलना चाहता था तो मैने भी हाँ कह दी.
फंक्शन के दिन सुबह 10 बजे वह मुझे लेने आ गया और 15 मिनट में हम फ्लैट पर पहुंच गए. दरवाज़ा बंद करते ही विकास मुझसे लिपट गया और मेरी गर्दन पर ज़ोर-ज़ोर से किस करने लग गया. फिर वो मेरे होंठों पर भी किस करने लग गया.
अब मैं भी गर्म होने लग गई थी और उसका साथ देने लगी. फिर उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मेरे बूब्स दबाने लग गया. फिर उसने धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए और वो मेरे बूब्स चूसने लग गया और एक हाथ से मेरी चूत सहलाने लग गया जिससे मेरा खुद पर कोई कंट्रोल नहीं रहा और मैं अपने आपे से बाहर हो रही थी.
मैं भी विकास को मस्ती में होकर चूमती जा रही थी. मुझे पहली बार बिना किसी डर के किसी लड़के के बदन को छूने का मौका मिला था. इसलिए मैं भी बहुत ही ज्यादा गर्म हो गई थी. मैंने विकास की गर्दन पर किस किया मुझे और ज्यादा अच्छा लगा. फिर मैंने उसके होठों को दोबारा से चूसना शुरू कर प्रिया.
विकास का लंड मेरी जांघों पर नीचे अलग से मुझे टच होता हुआ महसूस होने लगा था. वह अपने खड़े हुए लंड को बार-बार मेरी जांघों में घुसाने की कोशिश करता हुआ मालूम हो रहा था. मैं जान गई थी कि लड़कों का लंड खड़ा होने के बाद उनको कंट्रोल करने में कितनी परेशानी होने लगती है. इसलिए विकास ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे हाथ को नीचे ले जाकर अपनी पैंट के अंदर खड़े हुए लंड पर रखवा लिया. मैं उसकी पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाने लगी थी.
उसके बाद मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगा था. मैं और ज़ोर से विकास के होंठों को चूसने लगी थी. धीरे-धीरे मैं भी कुछ ज्यादा ही गर्म होती जा रही थी. मेरी सारी शर्म रफा-दफा हो गई थी और मैं विकास को बस प्यार से किस करते हुए उसके लंड को सहलाती जा रही थी.पहली बार मुझे किसी मर्द के साथ ऐसा अहसास हो रहा था.
उसके बाद तो जैसे हम दोनों ही पागल होने लगे थे. मैंने विकास को उसकी छाती पर किस करना शुरु कर प्रिया. उसके बाद मैंने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए और उसकी छाती पर किस करने लगी. वह मेरे चूचों को दबाने में लगा हुआ था. उसके बाद मैंने विकास की शर्ट को उतार प्रिया और उसकी बनियान भी निकाल दी. वह ऊपर से पूरा नंगा हो चुका था. मैं भी उसको नंगा देखकर और ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी.
फिर मैंने विकास की पैंट को भी खोलना शुरू कर प्रिया. मेरी शर्म पता नहीं कहां चली गई थी. मैं बिना किसी हिचकिचाहट के उसको नंगा करने में लगी हुई थी. वह भी आराम से मेरी हरकतों का मज़ा लेने में लगा हुआ था. मैंने उसकी पैंट को खोलकर उसे नीचे खींच प्रिया और उसकी फ्रेंची में तना हुआ उसका बड़ा सा लंड मेरी आंखों के सामने आ गया.मैंने उसके लंड को हाथ से छूकर देखा तो मेरे बदन में बिजली सी दौड़ गई और विकास ने मुझे फिर से अपनी बांहों में भर लिया.
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उसके बाद उसने अपना हाथ नीचे ले जाते हुए अपने अंडरवियर को निकाल प्रिया और फिर उसने मेरा एक हाथ अपने लंड पर रखवा लिया और मैं भी उसका लंड आगे-पीछे करने लगी और वो मेरी चूत में उंगली करने लगा. अब हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था.
कुछ देर के बाद उसके लंड और मेरी चूत दोनों ने पानी छोड़ प्रिया. अब हम दोनों एक-दूसरे से लिपट गए और किस करने लगे.
फिर उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा तो मैंने साफ़ मना कर प्रिया क्यूंकि मुझे ये सब बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है.
तो उसने मुझ पर ज्यादा दवाब नहीं डाला. फिर उसने पास में ही पड़ी हुई क्रीम की बोतल उठाई और काफी सारी क्रीम अपने लंड और मेरी चूत पर लगा दी और अपने लंड को मेरी चूत पर सेट कर लिया. फिर उसने मेरे होंठों पर किस करते हुए एक ज़ोरदार धक्का लगाया जिससे उसका आधा लंड मेरी चूत में समा गया जिसके कारण मुझे बहुत दर्द हुआ और उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं दर्द के मारे छटपटाने लगी.
कुछ देर उसी स्थिति में रुकने के बाद जब मैं कुछ सामान्य हुई तो उसने फिर एक ज़ोरदार झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में जा चुका था. अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैं उसे अपने उपर से हटाने के लिए धक्के देनी लगी लेकिन वो हट नहीं रहा था.
उसने धक्के लगाना शुरू कर प्रिया लेकिन मुझे अभी भी दर्द हो रहा था. कुछ देर बाद मुझे भी मज़ा आने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लगी. विकास मेरे बूब्स दबाते हुए धक्के लगाये जा रहा था.अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. कुछ देर बाद मेरा शरीर अकड़ने लग गया और मेरी चूत ने पानी छोड़ प्रिया. लेकिन विकास अब भी मुझे चोदे जा रहा था.
कुछ देर बाद वो बोला- मेरा निकलने वाला है.तो मैंने कहा- बाहर ही निकाल दो!तो उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया और अपना पानी मेरे पेट पर निकाल प्रिया. अब वो मेरे ऊपर निढाल होकर पड़ गया और मुझे किस करने लग गया.
उसके बाद कुछ देर हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे से चिपके पड़े रहे. वह मुझे किस करता रहा और मैं उसके होंठों को चूसती रही.
कुछ देर बाद मुझे नीचे मेरी जांघों पर उसका लंड फिर से तनाव में आता हुआ महसूस होने लगा और धीरे-धीरे उसका लंड फिर से तन गया. विकास उठा और उसने उसी वक्त अपना लंड अपने हाथ में लेकर मेरे मुंह की तरफ बढ़ा प्रिया. अबकी बार मैंने विकास के लंड को अपने मुंह में लेने में बिल्कुल भी देर नहीं की. मैं मज़ा लेकर उसके लंड को चूसने लगी और वह मेरे मुंह को चोदने लगा.मैंने उसके चूतड़ों को पीछे से पकड़ कर सहलाना शुरू कर प्रिया और वह मेरे मुंह में लंड देकर उसको अंदर और बाहर करता रहा. उसके लंड से एक नमकीन सा स्वाद मेरे मुंह में आने लगा. फिर विकास ने मेरी चूत में दोबारा से उंगली डाल दी और मेरी चूत में उंगली डालकर अंदर-बाहर करने लगा. मैं पागल होने लगी और जल्दी ही चुदने के लिए फिर से तैयार हो गई.
उसके बाद विकास ने मुझे पलटा प्रिया और मेरी गांड को दबाने और सहलाने लगा. वह समझ गया था कि अब मैं पूरी तरह से खुल चुकी हूँ. फिर विकास ने मेरी गांड के छेद पर अपने लंड को रख प्रिया और एक ज़ोर का धक्का दे प्रिया.
वह मेरी गांड को चोदने लगा. मुझे पहले तो काफी दर्द हुआ लेकिन बाद में उसके लंड से चुदकर मेरी गांड खुल गई और मैं उसकी चुदाई का आनंद लेने लगी. कुछ देर बाद चुदाई करते हुए विकास मेरी गांड में झड़ गया. मैं भी उस दिन पागलों की तरह उससे चुदने के लिए अपने आप ही तैयार हो रही थी. उस दिन हमने तीन बार और चुदाई की और फिर विकास ने मुझे घर छोड़ प्रिया.इसके बाद मैं कई बार चुद चुकी हूँ लेकिन पहली बार का मज़ा कुछ अलग ही था क्योंकि वह विकास के साथ मेरा पहला अहसास था.
उस दिन पता नहीं मुझे क्या हो गया था. उसके बाद विकास ने कई बार मेरी चूत और गांड की चुदाई की लेकिन जो मज़ा मुझे पहले दिन आया था वह मज़ा आज तक दोबारा नहीं मिला.उसके बाद मैंने एक-दो लड़कों के साथ और चुदाई करवा कर देखी. लेकिन उनका लंड इतना बड़ा नहीं निकला जितना कि विकास का था. इसलिए मैं फिर से विकास के लंड से चुदना शुरू हो गई.
अब तो विकास के लंड से चुदकर मेरी चूत बिल्कुल चौड़ी हो चुकी है. विकास भी अब मुझे ज्यादा मज़ा लेकर नहीं चोदता है लेकिन मेरी चूत की खुजली मुझे आराम से बैठने नहीं देती. इसलिए मैं खुद ही विकास को अपनी चुदाई करने के लिए बुला लेती हूँ। वह आता है और मेरी चुदाई करके चला जाता है.
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