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Pehli Chudai • पठन समय: 14 मिनट • पढ़ा गया: 727 बार

मासूम लड़की की चुदाई(Masoom ladki ki chudai)

rajkusumlove

16 Jun 2014 को प्रकाशित

मासूम लड़की की चुदाई(Masoom ladki ki chudai)
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बात आज से कई साल पुरानी है। मैं अपना ग्रैजुएशन खत्म करके वापस घर आ गया था, और मैंने CAT की तैयारी घर से ही करने का फैसला किया। मैं एक सीधा साधा सा नार्मल लड़का था और ज्यादा दुनियादारी के चक्कर में पड़ता ही नहीं था। कोचिंग, जिम और घर यही मेरा रूटीन था। कभी-कभी दोस्तों के साथ पार्टी करता था। बट कुल मिला कर शरीफ बंदा माना जाता था।

एक दिन मेरे मोहल्ले की एक आंटी मेरे घर आयी और मेरी मां से रिक्वेस्ट कर रही थी कि मैं उनकी लड़की कुसुम को एकाउंट्स की ट्यूशन पढ़ा दूं। वो कॉलेज होस्टल में रह के पढ़ाई कर रही थी। और कुछ दिन पहले ही घर आई थी। मेरी मां ने मुझसे पूछा तो मैं राजी हो गया। मैं उसे काफी टाइम से देखा तक नहीं था।

अगले दिन शाम को कुसुम मेरे घर आई। मैंने उसको बहुत साल बाद देखा था। पहले वह दुबली-पतली सी नाजुक सी लड़की हुआ करती थी। पर अब वो एक-दम जवान और सेक्सी हो चुकी थी। उसका दूध सा गोरा रंग, गुलाबी और पतले होंठ, तराशा हुआ चेहरा, पैनी नाक, लंबी सुराहीदार गर्दन, उसकी पतली और बलखाती कमर, काले घने खुले हुए बाल, और उसके तराशे हुए टाइट बूब्स किसी को भी पागल करने के लिए काफी थे।

जैसे ही वो मेरे रूम में आई तो अचानक मुझे एक झटका सा लगा। मेरे शरीर का एक एक अंग जैसे रोमांचित हो उठा। मैं एक टक उसको देखता ही रह गया। उसने मुझसे हेलो किया और आके मेरी डेस्क के पास कुर्सी पे बैठ गयी। उसके पास से एक दिलकश मदहोश करने वाली महक आ रही थी। जो मुझे पागल बना रही थी।

मेरा लंड जैसे लोहे की गर्म रॉड बन चुका था और पैंट फाड़ के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था। मैंने कैसे भी करके अपनी भावनाओं पर काबू किया और उसकी किताबें देखने लगा। उस दिन मैंने उसको थोड़ा बहुत पढ़ाया और वापस भेज दिया। उसके जाने के बाद बार-बार मेरी आँखों के सामने उसका ही चेहरा आ रहा था और एक अजीब सी बेचैनी मुझे पागल किये जा रही थी। मैंने उस दिन रात में 2 बार मुठ भी मारी, पर उसके लिए तड़प कम नहीं हुई।

खैर मैं अगले दिन सुबह कोचिंग गया और वापस आकर शाम का बेसब्री से इंतजार करने लगा। कुसुम शाम 5 बजे आयी। आज उसने हल्के गुलाबी रंग की टी-शर्ट और ब्लैक लोअर पहना था जिसमें वो बहुत ही प्यारी लग रही थी।

आज मैंने उसको ट्यूशन पढ़ने के साथ ही उससे नार्मल बाते की और उसके पढ़ाई दोस्तों और जिंदगी के बारे में पूछा। धीरे-धीरे ऐसे ही कुछ दिन में वो मेरे साथ सहज हो गयी और हम हल्की-फुल्की बात-चीत करने लगे। वह एक सिंपल सी लड़की थी और ज्यादा फालतू बात भी नहीं करती थी। मैं धीरे-धीरे उसकी तरफ खिंचाव महसूस करने लगा था। उसके लिए तड़प दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। हर दिन उसके नाम की 2-3 बार मुठ ज़रूर मारता था।

एक दिन जब मैं उसको पढ़ा रहा था तो मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके जांघ पे रख दिया और ऐसे प्रीटेंड किया कि मैंने गलती से ऐसा किया है।

मैंने उसके शरीर में एक अजीब सा कंपन महसूस किया, पर उसने मेरा हाथ वहां से हटाया नहीं ना ही उसने और कुछ कहा। वह बस बैठी रही और पढ़ती रही। इस वाकये से मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी। अब मुझे ये लगने लगा कि शायद वो किसी और से इसके बारे में नहीं कहेगी ना ही किसी को बोलेगी।

अगले दिन फिर पढ़ाते समय मैंने अपना एक हाथ उसके कमर के जस्ट नीचे जांघ पे रख दिया। और पढ़ाने के साथ ही उसकी जांघ सहलाने लगा धीरे दबाने लगा। उसका शरीर धीरे-धीरे कांप रहा था पर उसने हाथ आज भी नहीं हटाया। अब मेरी हिम्मत बढ़ गयी थी। इतनी कोमल और प्यारी लड़की के साथ ये हल्का-हल्का रोमांस मुझे पागल कर रहा था।

कुछ दिन ये घटना चलती रही मैं उसकी जांघ सहलाता और वो मजा लेती। मैंने महसूस किया कि वो अब मुझसे और सट कर बैठने की कोशिश करती और अब वो बहुत पतला लोअर पहन के आती। कई बार सहलाते समय वो आंख बन्द कर लेती और सिसक जाती।

एक दिन मैंने इससे थोड़ा आगे बढ़ने की सोची। मैंने ऐसे ही पढ़ाते-पढ़ाते उसका हाथ पकड़ के अपने जांघ पे रख दिया और हल्के-हल्के अपने पैर हिलाने लगा। सच कहूं तो मेरे अंदर एक तूफान मच गया था। उसने हाथ रख लिया और हटाया नहीं। मैंने कुछ देर में महसूस किया कि वो हाथ से मेरी जांघ को सहला रही है। और बार-बार मेरे लंड की तरफ उसका हाथ जाने की कोशिश कर रहा था पर शायद शर्म की वजह से वो आगे नहीं बढ़ रही थी।

खैर ट्यूशन का टाइम खत्म हुआ और मैंने उसके जाते ही रूम बंद करके मुठ मारी। आज हर दिन से ज्यादा माल निकला था।मैं ये समझ चुका था कि वो भी ये सब एन्जॉय कर रही थी, पर कह नहीं पा रही थी। अगले दिन जब वो पास आके बैठ गयी तो मैंने कुछ देर बाद उसकी जांघ ऊपर से ही चूत के पास सहलाई तो उसने अपनी टांग खोल दी।

आज मैंने पहली बार उसकी चूत को ऊपर से टच किया और मैं धीरे-धीरे उसकी नाजुक सी चूत सहलाने लगा। वो धीरे-धीरे कांप रही थी सिसक रही थी साथ ही उसकी आँखें बंद हो रही थी और उसका शरीर अकड़ रहा था।

कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि उसका लोवर गीला हो गया था और वो अब पैर सिकोड़ रही थी। मैंने अपना हाथ हटा लिया और उसको एकाउंट के सवाल समझाने लगा।

कुछ दिन यही प्रक्रिया लगातार चलती रही। मैं उसकी चूत सहला देता और कभी कभी उसका हाथ अपनी जांघ पर रखवा लेता। वो भी मेरी जांघ सहलाती रहती।

एक दिन मैंने एक पतला सा लोअर पहना और अंडरवियर नहीं पहनी। वो आयी तो थोड़ी देर बाद हिम्मत करके मैंने उसका हाथ अपनी जांग की जगह अपने लंड के ऊपर रख दिया। उसके शरीर को एक झटका जैसा लगा पर उसने हाथ हटाया नहीं। धीरे-धीरे लंड पूरा तन के खड़ा हो गया। मैं पूरी तरह से वासना से भर चुका था। उसने भी हाथ नहीं हटाया। मैंने हिम्मत करके ऊपर से ही उसको अपना लंड पकड़ा दिया। और आश्चर्य की बात ये थी कि उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और हल्के-हल्के सहलाने लगी।

अगले कुछ दिन हमारा ये नियम बन गया मैं उसकी चूत सहलाता वो मेरा लंड सहलाती। पर इसका नतीजा ये हुआ कि मेरे अंदर की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। पर मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था। मैं कोई जल्द-बाजी नहीं करना चाहता था। हम दोनों ये सब कर रहे थे पर कभी इस बारे में बात नहीं करते थे।

एक दिन मैंने एक और कदम आगे बढ़ाया और मैंने अपना हाथ उसके लोअर के अंदर डाल दिया। जैसा कि मैं जानता था कि अब वो पैंटी पहन के नहीं आती थी तो मेरा हाथ सीधा उसकी चूत पे पहुंच गया। उसने धीरे से अपने पैर खोल लिए और मैं उसकी चूत सहलाने लगा। आज उसकी नाज़ुक और कोमल चूत को छूने का अहसास मुझे पागल कर रहा था। मैं काफी देर तक उसकी चूत मसलता रहा और फिर उसने पानी छोड़ दिया।

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अगले दिन मैंने भी बिना चड्डी के पैंट पहनी और पढ़ाते समय किसी बहाने से मैंने अपना लंड चैन के बाहर निकाल लिया। उसके बाद मैंने उसका हाथ पकड़ के अपने लंड पर रख दिया। उसने भी धीरे से मेरा मोटा और गर्म लंड अपने हाथ से पकड़ लिया, और हल्के हाथ से सहलाने लगी। मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया था ।

मैंने भी उसकी लोअर में हाथ डाल के सहलाना शुरू कर दिया और एक हाथ से उसका चूची दबाने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना नियंत्रण खो दिया और उसको पकड़ कर उसके होंठो पे अपने होंठ रख दिये।

उसके लिए ये एक अप्रत्याशित घटना थी। पर उसने भी मेरा साथ दिया। धीरे-धीरे मैं उसके कोमल होंठो को चूस रहा। इस उसके शरीर को मसलता रहा। मेरा लंड जैसे किसी लोहे की रॉड की तरह तन कर खड़ा था और उसी चूत पर ऊपर से ही घुसने की कोशिश कर रहा था। हम ना जाने कितनी देर ऐसे ही एक-दूसरे को किस्स करते रहे।

इसी बीच टाइम हो गया और वो घर चली गयी। मैंने आज कई बार मुट्ठी मार के खुद को शांत किया। अगले कुछ दिन हमने ऊपर ऊपर से ही सब कुछ किया। मैंने उसको किस्स किया उसके बूब्स दबाये उसने मेरा लंड पकड़ के सहलाया यही सब चलता रहा।

अब मेरा खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल था मैं अब इससे आगे बढ़ना चाहता था। क्योंकि मेरे अंदर एक बहुत ही ज्यादा तड़प हो रही थी। वो भी अब शायद ऐसा ही चाहती थी।

और एक दिन शायद किस्मत को यही मंजूर था मेरी मां पापा और बहन किसी शादी में 3 दिन के लिए चले गये। मैं अंदर से बहुत खुश हुआ। खैर शाम हुई और कुसुम मेरे पास आई आज जैसे ही वो मेरे घर आई मैंने मेन गेट का दरवाजा बंद करते ही उसको पकड़ लिया उसको किस्स करने लगा। और धीरे-धीरे किस्स करते-करते ही हम रूम में आ गए।

रूम में आते ही मैं उस पर टूट पड़ा। मैं जोर-जोर से उसके सारे शरीर को सहलाने लगा किस्स करने लगा और मसलने लगा।धीरे-धीरे मैंने अपने और उसके कपड़े खोल दिये। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। क्या बताऊं दोस्तों क्या शरीर था उसका। उसका हर एक अंग जैसे तराश के बनाया गया हो।

मैं उसको देख के पागल हो रहा था। मैंने अपनी चड्डी भी उतार दी और उसको फिर से किस्स करने लगा। दोनों हाथों से उसके बूब्स मसलने लगा और कभी-कभी उसकी चूत भी मसल रहा था। वो बस सिसकारी ले रही थी। आज तक हमने कभी भी इस सब की बात नहीं की थीं ना आज कर रहे थे।

काफी देर तक मैं उसके होंठो को किस्स करता रहा और धीरे-धीरे उसके शरीर को मसलता रहा। धीरे-धीरे मैंने उसके बूब्स और निप्पल्स को चूसना शुरू किया। जब एक बूब को चूसता तो दूसरे निप्पल को हाथ से दबाता और जब दूसरे को चूसता तो पहले को दबाता।

धीरे-धीरे मैं उसके पेट से नीचे आके उसकी चूत को चूसने लगा। क्या मक्खन जैसी चूत थी यार एक दम गुलाबी गुलाबी और एक दम अच्छे शेप में। जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली उसका शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ गयी। काफी देर मैं उसको चूसता रहा प्यार करता रहा और जब मुझे लगा कि अब वो तैयार है तो मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया। वो भी शायद इसीलिए तड़प रही थी। वो अपनी कमर उठा रही थी जैसे कह रही हो कि बस अंदर डाल दो।

मैंने उसके होंठो को चूसते हुए एक हाथ से लंड को चूत पे सेट किया और उसकी आँखों में देखते हुए पूछा कि रेडी हो। उसने हल्के से हां में सिर हिलाया और मैंने धीरे से उसकी चूत पे लंड का दबाव बढाया और एक बार में कस के पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक उतार दिया।

वो अचानक हुए इस हमले से कस के चीखी और झटपटाने लगी। तड़पने लगी और मुझे हटाने की कोशिश करने लगी। मैं समझ गया कि ये शायद इसका पहली बार है। खैर मैंने धीरे-धीरे उसको किस्स करना शुरू और हल्के-हल्के कमर को ऊपर-नीचे करने लगा। इस तरह वो थोड़ा शांत हुई और उसका दर्द कम हुआ। मैं अब उसको धीरे-धीरे चोदने लगा।

अब शायद उसका दर्द भी कम हो गया था, तो वो कमर हिला-हिला के साथ देने लगी, और हल्की-हल्की आहें भरने लगी। कुछ देर उसको ऐसे ही चोदने के बाद मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई और जोर-जोर से उसको चोदने लगा। सारा कमरा चुदाई की आवाजों से गूंजने लगा, और कुछ देर बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

इस बीच वो भी 2 बार झड़ चुकी थी। जब मैं उसके ऊपर से हटा तो मैंने देखा कि मेरे बेडशीट पे हम दोनों के माल के साथ उसका खून भी बहा हुआ था। वो सही से उठ नहीं पा रही थी। मैंने उसको सहारा देकर उठाया फिर बाथरूम के ले जाकर हल्के गर्म पानी से उसकी चूत को साफ किया। उसने हाथ पैर धोके कपड़े पहने और धीरे-धीरे चलते हुए घर चली गयी।इस बीच हमारी कोई बात नहीं हुई।

रात में मेरे पास एक अनजान नंबर से कॉल आया और जब मैंने बात की तो पता चला कि ये कुसुम थी। हमने थोड़ी देर कासुअल बात की। फिर मैंने उसको कहा कल संडे है मेरी कोचिंग नहीं है और अगर वो चाहे तो कल सुबह आ सकती है पढ़ने के लिए।

उसने कुछ कहा नहीं और कॉल काट दी।अगले दिन सुबह 9 बजे मेरे घर की घंटी बजी। मैं सो रहा था और उठ कर ऐसे ही गेट खोलने चला गया। गेट खोल कर देखा तो ये कुसुम थी। घर के अंदर आते ही वो मुझसे लिपट गयी |

खैर आगे की कहानी अगले भाग में बताऊंगा। आप अपनी राय मुझे जरूर दें। ये मेरी पहली और सच्ची कहानी है तो अगर कोई गलती हुई हो तो माफ करना।मुझे ईमेल जरूर करें – support@mohakkisse.com

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