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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 574 बार

मामी की प्यासी बहन

प्रकाश इलाहबाद

06 Mar 2008 को प्रकाशित

मामी की प्यासी बहन
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कॉलेज आते जाते अगर कोई बड़ी गाण्ड वाली भाभी दिख जाती तो घर आकर मुझे उस भाभी की गाण्ड की नाम की मुठ मारनी पड़ती। मन तो करता है जितनी भाभियाँ दिखती हैं, गाण्ड मटकाते हुए सबको पटक कर चोद डालूँ।

बस मेरी मनोकामना पूरी होने ही वाली थी।हुआ यूँ कि मेरी मामी को दीवाली पर अपने मायके जाना था, मेरे मामाजी व्यापार के सम्बन्ध में व्यस्त थे तो उन्होंने मुझे याद किया मामी के साथ जाने के लिए।मैं भी तैयार हो गया, कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही थी।

खैर, मैं और मामी जी दीवाली के दो दिन पहले पहुँच गए उनके मायके। वहाँ मामी की छोटी बहन नीतू भी थी जिनकी पिछले वर्ष ही शादी हुई है।मामीजी के एक बड़े भाई भी हैं जो दूसरे शहर में नौकरी के कारण यहाँ नहीं रहते लेकिन शायद दीवाली के दिन यहाँ आने वाले थे।

हमारे यहाँ एक रिवाज़ है कि शादी के बाद दुल्हन दूसरी बार अपने ससुराल थवन होने के बाद जाती है और शादी के बाद थवन एक साल या दो साल के बाद ही किये जाने का रस्म है और दोस्तों अगर किसी लड़की को एक बार चुदाई का स्वाद मिल जाये तो लण्ड लेने की उसे तीव्र इच्छा सी हो जाती है।

यही हाल नीतू का भी था, सुहागरात में पति के लण्ड का स्वाद लेकर आई थी और अब उसे एक साल बाद ही मौका मिलता, फिर से लण्ड चखने का।और इधर मैं भी भूखे शेर की तरह चूत की फ़िराक में लगा था।

उस रात को मैं, मेरी मामी और नीतू तीनों टीवी देखते हुए बातें कर रहे थे, नीतू के भैया के कमरे में। आप लोग तो जानते ही हैं कि दो औरतें जब एक अरसे बाद मिलती हैं तो बातों का जो सिलसिला शुरू होता है, वो फिर ख़त्म नहीं होता है।

मैं कुछ देर तक उन दोनों की बातों में हाँ में हाँ मिलाता रहा लेकिन थकान के कारण थोड़ी देर बाद वहीं डबल-बेड पर सो गया।

रात के तीन बजे मेरी नींद खुली तो बड़ी हैरत में पड़ गया। टी.वी चल रहा थी और मेरी मामी और नीतू वहीं मेरे बगल में ही बेसुध सी सोयी हुई थी।

मैं टी.वी बंद करने के लिए रिमोट खोजने लगा, तो देखा कि रिमोट नीतू के पेट पर पड़ा है। मैं उठा और घूमकर नीतू की तरफ गया, रिमोट उठाने के साथ ही मेरी नज़र नीतू की नाईटी से झांकते हुए उसके रसीले स्तनों पर पड़ गई।

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा और मन करने लगा कि चूची को पकड़ कर दबा दूँ, लेकिन साथ ही डर भी लग रहा था कि अगर नीतू जाग रही होगी तो कितनी बेईज्जती होगी मेरी।डर और जिज्ञासा के भाव से, एक हाथ से मैंने रिमोट उठाया और बायें हाथ से मैंने नीतू की अधनंगी चूची को मसल प्रिया।

हे भगवान! कितना कोमल और आनंदमयी स्पर्श था चूची का, मैं टीवी बंद करने के बाद सोचने लगा।

कोई दस मिनट तक यही क्रिया करता रहा और मेरा लण्ड मेरे लोअर में सलामी देने लगा था, लेकिन आदमी के लालच का अंत कहाँ? चूचियाँ तो देख और मसल लीं अब बुर भी देख ली जाये।कभी मामी और कभी नीतू के चेहरे की तरफ देखते हुए मैं धीरे-धीरे नाईटी को नीतू की पेट तक सरका प्रिया।

हाय, ये चिकनी जांघें!

मैं अपने हाथ नीतू की केले के तने सरीखे जांघों को दोनों हाथों से सहलाते हुए आहें भरने लगा और काली पैंटी में छिपी हुई बुर की तरफ हाथ बढ़ा दिए।

जैसे ही पैन्टी के ऊपर से मैं चूत को सहलाने लगा मेरा लण्ड उफान भरने लगा, अब एक हाथ से मैं अपना लण्ड मसल रहा था और दूसरे हाथ से नीतू की चूत सहला रहा था।

अब तो मेरी ढीठाई और बढ़ गई, मैंने नीतू की पैंटी को चूत के ऊपर से सरकाकर एक तरफ कर दी और अपना लण्ड छोड़ कर उसी हाथ से चूत सहलाने लगा, चूत गीली हुए जा रही थी।

कामोत्तेजना के वशीभूत मैंने अपनी एक ऊँगली चूत की दरार में रगड़ते हुए छेद में डाल दी, ऊँगली चूत में जैसे ही घुसी, नीतू सिसकारती हुई उठकर बैठ गई और मेरे तो होश उड़ गए।

रंगे हाथ पकड़ा गया था मैं…लेकिन नीतू के मन में कुछ और ही था !

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यह क्या कर रहे हो, प्रकाश? नीतू ने मुझसे पूछा।‘क..क..कुछ नहीं!’ मैंने डरते हुए जवाब प्रिया।

इतने में नीतू उठी और मुझे खींचते हुए बाथरूम में घुस गई और दरवाज़ा लॉक करते हुए कहने लगी- अच्छा ! मेरी बुर में ऊँगली करते हो और कहते हो कुछ नहीं?

मैं झेंप सा गया।

‘अब करो…’ उसने आगे कहा, और इतना कहते हुए अपनी नाईटी उतार दी।मुझे तो लगा मैं कोई सपना देख रहा हूँ, यही तो मेरी बरसों की तमन्ना थी, बुर चोदने की।

उसी क्षण मैंने नीतू को बाहों में भर लिया और उसके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे बेतहाशा चूमने लगा, उसके होंठों को चूसने के साथ ही उसके चूतड़ों को दबाने लगा, वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी।

अब नीतू फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लोअर के साथ अंडरवीयर को भी खींच कर निकाल प्रिया। मेरे खड़े लण्ड को नीतू ने मुंह में ले लिया और चूसने खसोटने लगी।

5 मिनट की चुसाई के बाद, मैंने उसको दीवार के सहारे खड़ी कर प्रिया और साथ ही उसकी ब्रा और पैंटी उसके खूबसूरत बदन से अलग कर दिए और नीचे बैठकर उसकी चूत चाटने लगा।

उसकी चूत पर हल्की झांटें थी, जिसे मैं अपने होंठों में फंसा, खींचकर खेल रहा था, उसकी चूत को कुत्ते की तरह चाट रहा था।नीतू ‘सी… सी…उह… आह’ की आवाजें करती हुई अपनी गाण्ड उचका-उचका कर चूत को मेरे मुंह में दे रही थी।

पूर्ण-रूपेण बुर को चाटने के पश्चात् मैं खड़ा हुआ और अपने लण्ड को हाथ में लेकर नीतू की चूत के छेद में टिकाया और उसकी दाहिनी टांग को ऊपर उठा कर जोरदार धक्का पेल प्रिया।

नीतू चीखी ही थी कि मैंने उसके होंठ अपने होंठ से दबा लिए क्योंकि कमरे में मेरी मामी सो रही थी और अगर उन्होंने कुछ सुन या देख लिया तो बवाल हो जाता।

मेरे हर धक्के की गति बहुत तेज़ थी, साथ ही उसकी चूत में अन्दर बाहर होता हुआ मेरा लण्ड मुझे स्वर्ग की अनुभूति दे रहा था।

बाथरूम के अन्दर चूत और लण्ड के मिलन से उत्पन्न ‘फ़च्छ फ़च्छ’ और हम दोनों की दबी हुई आहें और सिसकारियाँ हमारी चुदाई का आनन्द दुगना कर रही थी।

कोई पंद्रह मिनट के बाद मैं पहली और नीतू शायद दूसरी बार छूटी थी।

इसके बाद मैं नीतू को बीस मिनट तक फर्श पर घोड़ी बनाकर चोदता रहा। मेरा लौड़ा तो अभी भी नीतू की बुर को चोदना चाहता था, लेकिन नीतू ने मना कर प्रिया कि अभी नहीं, उसकी दीदी मतलब मेरी मामी जाग ना जाये।

अब तो मेरे लिए रास्ता खुल गया था और मैं जब तक वहाँ रहा, नीतू ने मुझसे रोज़ रात जबरदस्त चुदाई करवाई।

।इति।

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