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नौकर-नौकरानी पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 818 बार

मालिक की बेटी के बाद उसकी बहन की चुदाई-2

संजय शर्मा 19

13 Mar 2011 को प्रकाशित

मालिक की बेटी के बाद उसकी बहन की चुदाई-2
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दोस्तो, पिछली कहानीमालिक की बेटी के बाद उसकी बहन को चोदामें आपने पढ़ा था कि कैसे हरीश और बुआ जी का टांका सैट हो गया था और हरीश ने बुआ जी को चोद प्रिया था.अब कहानी के इस आखिरी भाग में आगे पढ़िए..

इसके कहानी के बाद भी, मैं आपके साथ कुछ और भी सच्चे अनुभव आपके साथ सांझा करूँगा.

उस दिन बड़े दिनों के बाद चुत मिली थी और वो भी कुँवारी बुर का मजा मिला था. बुआ जी की चूत की सील को मैंने ही तोड़ा था.

कमरे पे आने के बाद मैं काफ़ी देर तक सोचता रहा कि क्या लाइफ है, एक ही घर में दो दो मस्त चूतों का इंतज़ाम हो गया है. बस इतना सा ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों को तरीके से संभाल के रखना होगा, वरना गड़बड़ हो जाएगी. वैसे भी मैं मालिक के लिए बहुत वफ़ादार था, जो कुछ भी हुआ था.. सब परिस्थितिवश ही हुआ था, मैंने जानबूझकर कुछ नहीं किया था.

खैर बुआ जी की चूत चुदाई के बाद मेरा और बुआ जी का रुटीन बन गया था. हम दोनों जब भी टाइम और मौक़ा मिलता था, चुदाई कर लेते थे.

इस दिनों मैं अनु से फोन पे बात करता था और उसे समझाता था कि अभी समय ठीक नहीं आया है, हमें थोड़ा और सावधान रहना होगा.

इन सब बातों के चलते करीब एक महीना हो चुका था.

एक दिन बुआ जी का दिलशाद गार्डन से कोई रिश्ता आया, लड़के का अपना बिजनेस था और फैमिली भी अच्छी थी. सेठ जी को भी सब ठीक लगा और उन्होंने बुआ जी से बात करके रिश्ता पक्का कर प्रिया. दो महीने बाद शादी की डेट निकलवा ली थी.

एक दिन बुआ जी ने कहा- अब तो कुछ टाइम बाद मैं चली जाऊंगी, उसके बाद तुम क्या करोगे?मैंने कहा- दीदी, आपकी मुझे बहुत याद आएगी, अगर आप कहेगी तो मैं कभी कभी आपसे मिलने आ जाया करूँगा.“वो तो ठीक है, लेकिन मुझे वहाँ का माहौल देखना पड़ेगा और वैसे भी अगर मेरे पति का लंड ठीक और मजेदार हुआ, तो फिर तो मुश्किल हो जाएगी.”मैंने कहा- कोई बात नहीं दीदी, जैसा मेरी किस्मत में होगा, देखा जाएगा.

“लेकिन तुम वादा करो कि कभी भी अनु के साथ कुछ नहीं करोगे.”मैंने कहा- दीदी, मैं वादा करता हूँ, आप परेशान ना हों, मैं कुछ नहीं करूँगा और ना ही कुछ होने दूँगा. जैसे आप अच्छे से शादी करा के जा रही हो, वैसे ही अनु भी जाएगी.उन्होंने मुझे थैंक्स कहा.

“दीदी, वैसे आपकी शादी से पहले एक बार तो सेक्स करना बनता है, उसके बाद तो मेरी किस्मत.”उन्होंने ‘हां’ कहा- चलो एकाध दिन में कुछ सोचती हूँ.

दो दिन बाद उनका फोन आया कि आज शॉपिंग के लिए बाहर जाना है, तुम मेरे साथ ही चलना.उन्होंने एक बड़े से होटल में कमरा बुक करवाया था, जो मुझे नहीं बताया था. थोड़ी देर बाद जब हम निकले, तो उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी, इसमें उनकी नाभि साफ़ दिख रही थी.

आज पठ्ठी गजब ढा रही थी. मैं समझ गया कि आज तो मेरे लंड को इसकी चुत पक्का मिलेगी. जब वो कार में आई, तो मैं उसे देखता रह गया.“आँखों से हो सब कर लोगे क्या, चलो यहाँ से.”उन्होंने होटल का नाम बताते हुए चलने का कहा, हम दोनों होटल में आ गए.

उन्होंने कहा कि आज मैं तुम्हारे साथ मस्त टाइम बिताना चाहती हूँ, इसके बाद पता नहीं, मौका मिले या नहीं.वो साड़ी में गजब ढा रही थीं, चूतड़ मस्त दिख रहे थे, ब्लाउज में चुचे उभर के आए हुए थे. गोरा रंग तो था ही, कंधे तक बाल नागिन से लहरा रहे थे. कुल मिलाकर वो उस दिन गजब ढा रही थीं.

चूंकि चुदास भी जोर मार रही थी सो कमरे के अन्दर आते ही वो मेरे से चिपक गई और मेरे गालों पे किस करने लगी.

“अरे क्या बात है दीदी, आज तो बिल्कुल जल रही हो आप!”“हां रे, सही में जल रही हूँ.. आग लगी पड़ी है.. बस जल्दी से आ जा और मेरे अन्दर पेल दे तू अपना, अब मुझसे और इंतजार नहीं होता.”

मैंने उनकी साड़ी निकाल दी. अब तो उसका हुस्न एक जलजला सा कहर ढाता हुआ मेरे सामने पेटीकोट और ब्लाउज में था. उन्होंने भी बड़ी अदा से मेरी पैन्ट और अंडरवियर को उतार प्रिया. मुझे अपने सामने खड़ा किया, खुद बेड पर बैठकर मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

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मैं बड़ा हैरान था कि आज ये हो क्या रहा है, इसे इतनी आग कैसे लग गई है- दीदी आज क्या हुआ है.. आप तो ख़तरनाक मूड में लग रही हो?“ज़्यादा बातें मत करो, बस आज तुम मुझे खूब सारा प्यार करो.. चूस जाओ मुझे हर जगह से.. देखो मैंने तुम्हरे लिए ही अपने बाल साफ़ किए हैं. जानते ही हो कि मैं बड़े दिनों से लंड लेना चाहती थी, लेकिन डरती थी कि कुछ गड़बड़ न हो जाए और ना ही मेरा कोई दोस्त था. तुमसे मिलने के बाद लगा कि लंड बड़ी मस्त चीज़ होती है, हर औरत को चाहिए ही होता है. और जिसने एक बार लंड का मजा ले लिया, वो तो बिना इसके रह ही नहीं पाएगी.”

उनकी बकचोदी सुनने में मुझे मजा आ रहा था. मेरे सामने उनकीजवानी नंगीहोने को मचल रही थी. इसी लिए अब तक मैं उन्हें नंगी भी कर चुका था और अपने भी कपड़े उतार चुका था. उन्होंने खींच कर मुझे अपने ऊपर ले लिया और टांगें खोलकर मेरा लंड अपनी चूत पे लगाकर खुद ही हिलने लगीं.

धीरे धीरे मेरा कड़ा लंड दीदी की चूत के अन्दर जाने लगा. मैंने भी लंड को उनकी चूत की दीवारों से फुल रगड़ते हुए अन्दर पेला. उन्होंने भी लंड की रगड़न का गर्म अहसास करते हुए मस्त आह भरी, उनकी आह बता रही थी जैसे प्यासे को पानी मिल गया हो.

मैंने पूरा लंड पेला और कहा- दीदी, आप चली जाओगी तो मेरा काम कैसे चलेगा. आप तो अनु की लेने से भी मना कर रही हो. वैसे आपको बता देता हूँ कि अनु भी लंड लिए बिना रहेगी नहीं.. वो मेरा नहीं लेगी तो किसी और का लेगी.“अरे वो छोटी है अभी.. पूरी लाइफ पड़ी है उसके सामने.. कुछ गड़बड़ हो गयी तो ठीक नहीं होगा.”“क्या बात करती हो दीदी, आपसे ज़्यादा लंड खा चुकी है वो, पहले अपने ब्वॉयफ्रेंड का, उसके बाद मेरा ले चुकी है. आपको याद है ना कि मैं उसको कैसे उचक के चोदता था. वैसे तो आजतक आपकी भी चुदाई नहीं हुई है.”

इस बीच वो पूरा लंड अन्दर ले चुकी थी और मैं धीरे धीरे दीदी की चूत में धक्के लगा रहा था. उनकी आंखें बंद थीं, जैसे उनको असीम आनन्द मिल रहा हो.

“दीदी, प्लीज़ मान जाओ ना, मैं कसम खा रहा हूँ कि अनु को परेशान नहीं होने दूँगा और उसकी भी ठीक ठाक शादी होगी, बस मज़े लेने दो ना.”“ना रे, तुम्हारा लंड बहुत मजेदार है.. बस मैं ही इसको अपनी चूत में लूँगी, अनु अभी छोटी है, अगर उसको चाहिए होगा तो कोई दूसरा लंड खोज लेगी. तुम बस मेरी चुदाई करो, अनु की चूत का नशा उतार दो अपने दिमाग से!”“दीदी, आप तो चली जाओगी ना.. उसके बाद इस लंड की गर्मी को कहाँ निकालूँगा? वैसे भी शादी के बाद आप दोगी नहीं.”“नहीं रे, मैंने सोचा है कि मैं तुम्हारे बिना रह नहीं पाऊंगी और जब भी मन करेगा कोई ना कोई इंतज़ाम करके तुम्हारा लंड लिया करूँगी. लेकिन अनु की नहीं लेना तुम.”दीदी अनु की चुदाई के लिए नहीं मानी.

वैसे तो मैं अनु को जब तब चोद ही रहा हूँ. मुझसे इसकी कोई परमीशन लेने की कोई जरूरत ही न थी. मैं तो बस ये सोच रहा था कि किसी तरह इन दोनों को एक साथ एक ही पलंग पर चोद लूं तो इस अभिलाषा को भी पूरा कर सकूँगा. लेकिन बुआ नहीं मानी.

बहुत देर तक उनको चोदने का मजा लेने के बाद हम दोनों घर पे आ गए.

शादी करके वो अपने घर चली गयी और मैंने अनु को चोदना शुरू कर प्रिया. अनु साली क्या चीज थी.. आह क्या मस्त टांग उठा कर चुदवाती थी वो.. लंड को बड़ी राहत मिलती थी.

बुआ की शादी हो जाने के बाद, अब तो घर पे कोई रहता भी नहीं था. मैं और अनु दोनों एक दूसरे को खूब चूसते थे. घर के हर कोने में मैंने अनु की चुदाई की. उसके मम्मे भी अब दो नम्बर बड़े हो गए थे. गांड भी खूब मस्त मटकने लगी थी.

फिर दो साल बाद अनु का रिश्ता आ गया और वो भी शादी करके चली गयी.

शादी के बाद अनु तो नहीं देती, लेकिन बुआ जी का और मेरा रिश्ता आज भी मस्त है. जब कभी उनका मन होता है वो होटल में कमरा बुक करवा देती हैं और फोन कर देती हैं. मैं भी पहुँच जाता हूँ और हम दोनों मस्त चुदाई करते हैं.

आज बुआ जी के दो बच्चे हैं. मेरी शादी भी हो चुकी है और मैं अब ड्राइवर नहीं रहा हूँ. मलिक ने मुझे फैक्ट्री का सुपरवाइज़र बना प्रिया है. मैं पूरी ईमानदारी से काम करता हूँ. महीने में दो तीन बार बुआ जी की चुत ज़रूर चोदने मिलती है, लेकिन अनु ने शादी के बाद कभी भी चुदाई नहीं करने दी.

एक बार मैंने कहा तो उसने मना कर प्रिया था. फिर मैंने भी नहीं कहा.

यह कहानी तो यहाँ खत्म होती है. आप मुझे लिखना न भूलें. मैं अपने दोस्तों के अनुभव शेयर करूँगाsupport@mohakkisse.com

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5 मिनट 1,115

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राज राव

2 months ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

हर्ष चौहान

2 months ago

जीजा साली की नोक-झोंक और फिर ये रोमांस! लाजवाब कहानी।

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