मेरी पिछली चुदाई कहानीमेरी जवान भानजी ने कुंवारी बुर का तोहफा प्रियामें आपने पढ़ा कि कैसे मेरी सगी भानजी ने अपनी कामुकता के अधीन हो कर के मुझ से अपनी कुंवारी बुर की चुदाई करवा ली.अब मेरी भानजी मेरी मदद कर रही थी मेरी सगी बेटी की चूत मुझे दिलवाने में!आप पढ़ें:
मैं और मेरी भानजी मेरी बेटी के स्कूल में गए और उसके प्रिन्सिपल से मिल कर कोई बहान बना कर उस की छुटटी ले ली. फिर उसे ले कर हम बाजार गए और कुछ खाने पीने का सामान ले कर पार्क में आ गए और एक एकांत जगह सी बैठ गए.
कुछ देर हमने इधर उधर की बातें की. तभी हमने देखा कि हमारी बायीं तरफ में एक जवान लड़का और एक युवा लड़की चुम्मा चाटी कर रहे थे. दोनों कॉलेज के स्टूडेंट लग रहे थे, बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड होंगे. लड़का लड़की के बदन को भी बीच बीच में छू रहा था.
मेरी कमसिन बेटी सुमन की नज़र बार बार उधर ही जा रही थी. चिंकी ने सुमन को उस तरफ देखते हुए देखा तो वो भी मुड़ कर देखने लगी और फिर मुस्कुरा कर सुमन से बोली- क्यों सुमन? क्या देख रही हो?“कुछ नहीं..”“अरे यार… जवानी का खेल चल रहा है! मजा आ रहा है तो जाओ नजदीक से देख आओ..”सुमन शायद मुझसे कुछ शर्मा रही थी, इसा लिए बोली- मुझे नहीं देखना, तुम ही देख लो जो देखना है…”“हुंह… अभी बड़ी नखरे दिखा रही है. कल तो बड़ा मजा ले ले कर सेक्स की बातें कर रही थी?”
चिंकी के चेहरे पर कामुकता के नशे का गुलाबी रंग छा गया. वो उठ कर मेरी बेटी सुमन के बगल में बैठ गई और उसके कंधे पर हाथ रख कर सुमन की उठी हुई चूची मसलते हुए बोली- यार तेरी चूचियां तो हार्ड हो चुकी हैं तुम्हारी. तुम्हारी बुर भी पानी छोड़ रही होगी ना?अपनी भानजी के मुख से मेरी बेटी के सामने ऎसी खुली अश्लील बातें सुन कर मुझे विश्वास हो गया था कि पिन्की तो आज ही मुझे मेरी बेटी की बुर दिलवा देगी.
लेकिन सुमन झिझकती हुई बोली- चिंकी, क्या करती हो? पापा देख रहे हैं!चिंकी बोली- अब मैं क्या करूँगी, जिसे करना है वो ही करेगा. जाओ, अपने पापा की गोद में बैठ जाओ.और उसने सुमन को खींचते हुए मेरी गोद में बैठा प्रिया.
उसके गोद में बैठते ही मेरा लंड झन्ना गया. सुमन पहले तो थोड़ी झिझकी और मेरी गॉड से उठाने लगी, लेकिन चिंकी ने उसे उठाने नहीं प्रिया, बोली- कल तो तू अपने पापा से सेक्स की बातें कर रही थी, अब मैं मौक़ा ड़े रही हूँ तो तू ये नौटंकी कर रही है?
इतनी देर में मैं अपनी बेटी की स्कर्ट में हाथ देकर उसकी जांघें सहलाने लगा. क्या चिकनी टांगें थीं. उसके बाद मैंने उसकी चूचियों को सहलाया. उसकी चूचियां चिंकी से छोटी थीं. उसके बाद मैंने अपने होंठ उसके होंठ से लगा दिए और उसकी गुलाब की पंखुरियों जैसे होंठों का रस पीने लगा.इसमें वो भी मेरा साथ देने लगी.
हम दोनों लिपट गए. पन्द्रह मिनट तक चूमते चाटते रहे फिर दोनों अलग हुए.अब चिंकी ने कहा- सारा कांड अभी ही कर दोगे या घर के लिए भी कुछ रखोगे?मैं मुस्कुरा उठा.
चिंकी ने सुमन की ओर देख कर कहा- क्यों सुमन डार्लिंग! मजा आ रहा है न? तुम तो साली पूरी रंडी निकली? अपने सगे बाप से चूची मसलवा कर मज़े ले रही हो?“तूने तो मज़े ले लिए मेरे बाप से यानि अपने मामा से और दूसरे को चिढ़ाती है.”“मैं अपने पापा के साथ जो चाहे करूँ तुम्हें क्यों खुजली हो रही है? तू भी ले ले मजे.”
चिंकी- मेरी बुर सूज गई न होती तो मैं यहीं चुदवा लेती. आज तू खा ले इनका केला. तू ही अपने निम्बू चुसवा ले मामा से!मैं- यार तुम दोनों लड़ो मत. मैं दोनों को मजे दूंगा… अब घर चलो.फिर हम तीनों लोग मजा करते हुए घर आए.
दिन तो यूं ही निकल गया. रात को फिर मैंने अपनी बीवी के खाने में नींद की गोली मिला दी. जब सब सो गए तब मैं उन दोनों के रूम में आ गया. दोनों जागी हुई थीं और मेरे आने का इंतजार कर रही थीं. जाते ही मैंने दोनों को किस किया, अपनी बेटी सुमन को कहा कि कपड़े उतार कर आए. मैं उसका नंगा बदन देखना चाहता हूँ.
सुमन शर्माने लगी तो चिंकी ने उसके सारे कपड़े उतारे और कहा- साली, लंड लेने में शर्म नहीं करेगी तो नंगी होने में क्या शर्म? जिसके लंड के वीर्य से पैदा हुई, उसी से शर्म? न जाने कितनी बार इन्होंने तुम्हारी बुर को देखा होगा. अब जब इनके लंड को तेरी कुँवारी बुर की जरूरत है तो नखरे करती है? अब चलो और जिस लंड से तुम पैदा हुई हो, उस लंड का पानी अपनी बुर में ले लो.
सुमन बोली- यार चिंकी, तुम क्यों इतना परेशान होती हो? मैं भी इस लंड से चुदने के लिए बेताब हूँ..यह कह कर मेरी बेटी झट से नंगी हो गई. उस कच्ची कली का बदन देखक कर मेरे लंड में सिहरन सी दौड़ गई. दूधिया गोरा बदन, टमाटर जैसी छोटी-छोटी चूचियां, चने की दाल के बराबर निप्पल और बिना झाँटों वाली चिकनी चूत, ख़रबूज़े जैसी गांड.
मैंने उसे वैसे ही गोद में उठा लिया और बेड पर ले गया. बेड पर जाते ही मैंने उसकी चूचियां मुँह में ले लिया और चूसने लगा. सुमन के मुँह से “आह्ह्ह्ह्ह्..” की आवाज़ आने लगी. मैं अपनी हथेली से उसकी बुर रगड़ने लगा. मैं इतना जोश में था कि उसके पूरे बदन को चाटने लगा.फिर मैंने उसे लिटा प्रिया और टांगें फैलाकर उसकी छोटी सी फूली हुई बुर को चाटने लगा. मुझे उसकी बुर की ख़ुशबू मदहोश कर रही थी. पांच मिनट बुर को जीभ से चोदने के बाद उसके बुर ने रस छोड़ना शुरू कर प्रिया, मैंने अपनी जीभ से उसकी बुर के रस को चाट-चाट कर साफ कर प्रिया.
उसके बाद मैं नंगा हो गया और अपना लंड उसके हाथ में दे प्रिया.मैंने पूछा- ये ले सकोगी?वो बोली- हाँ… क्यों नहीं… जल्दी से डालो पापा.
मैंने चिंकी को क्रीम लाने को कहा. चिंकी क्रीम ले कर आई और सुमन की बुर में लगा दी. फिर चिंकी ने मेरे लंड को चूसकर उस में भी क्रीम लगाई. फिर वो क्रीम सुमन की बुर में लगाते हुए बोली- सुमन रंडी, ले आज तेरी बुर का भोसड़ा बनाने का समय आ गया. आज की तकलीफ़ बर्दाश्त कर लो, फिर तुम्हारे मज़े ही मज़े हैं. मैं तो चली जाऊँगी इस बेटीचोद का ख्याल रखना, बड़ा मस्त चुदाई करता है. बोलो खयाल रखोगी ना?सुमन- हाँ चिंकी, जरूर रखूंगी अपने बेटीचोद बाप का ख्याल… पहले चुदाई होने तो दो.
चिंकी बोली- हरामजादी तेरी बुर में ज्यादा आग लग रही है, चुदने को बड़ी बेताब हो रही है री कुतिया?सुमन- चुप कर हरामजादी, खुद तो मेरे पापा से अपनी बुर चुदवा कर मज़े ले चुकी. अब मुझे तो ले लेने दे अपने बाप के लंड का स्वाद!मैं बोला- तुम दोनों लड़ो मत, तुम दोनों को मज़े दूंगा.
चिंकी बोली- मामा, मैं इसा के साथ लड़ नहीं रही हूँ.. सुमन को ट्रेनिंग दे रही हूं. सुमन को मैं सब सिखा दूंगी.“अब तो मुझे इस गुड़िया की बुर का मजा लेने दो.”
यह कह कर मैंने चिंकी को हटाया और सुमन की टाँगों के बीच आकर लंड का सुपाड़ा उसकी कुँवारी बुर में फंसा कर दबाने लगा. मेरा लंड बार-बार फ़िसल जाता था. तब मैंने चिंकी से कहा कि इसके हाथ ऊपर फैला कर पकड़ लो.
मेरी बेटी की चूत की चुदाई
उसने वैसा ही किया. मैंने एक हाथ से उसका मुँह बंद किया और लंड के सुपारे को बुर में सही जगह फंसा कर जोरदार धक्का दे मारा.उसें जबरन मेरा हाथ हटाया और दर्द के मारे चीखी- ऊऊऊई ईईई.. ऊऊऊ ऊउई.. मर गई… पापा… बहुत दर्द हो रहा है…. निकाल लो!बोल कर के सुमन छटपटाने लगी. मेरे लंड का कुछ हिस्सा उस की कुँवारी बुर में चला गया था.
मैं दो मिनट तो शांत पड़ा रहा, फिर उसके मुंह पर हाथ रख कर दुबारा धक्का प्रिया. लगभग आधा लंड सुमन की कुँवारी कच्ची बुर के अन्दर पेवस्त हो गया. सुमन बुरी तरह छटपटा रही थी और उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे.
मैं रुक गया… इन्तजार करने लगा कि मेरी बेटी की बुर का दर्द कुछ कम हो जाए.चिंकी उसे समझाने लगी- यार, अभी तो पहली बार है, दर्द होगा ही लेकिन कुछ ही देर में मजा आने लगेगा.
मुँह बंद होने के कारण सुमन कुछ नहीं बोल पा रही थी. मेरा लंड उसकी बुर में जकड़ा हुआ था. मैं अपने होंठ से उसकी चूचियों को चाट रहा था.
कुछ देर तक मैंने कुछ नहीं किया. जब मुझे लगा कि वो शांत है, तब मैंने हाथ उसके मुँह से हटाया तो वो रोते हुए बोली- हट जाओ पापा.. मुझे नहीं चुदाना है, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मेरी बुर फट गई है.
मैंने उसे समझाया- मत रो बेटी, पहली बार सब के साथ ऐसा ही होता है. जब मजा आएगा तो तुम्हीं बोलोगी कि और डालो पापा.
इस तरह पुचकारते फुसलाते हुए मैंने उसे शांत किया. फिर उसके होंठ चूसने लगा. जब उसने रोना बंद किया, तब मैंने लंड एकदम धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. मेरे हर दबाब के साथ वो चिहुंकने लगती थी. मैंने अपने हाथ से उसके गालों को सहलाना शुरू किया.
दस मिनट ऐसे ही करने के बाद मैंने अचानक उसका मुँह बंद किया और एक जोरदार धक्का दे मारा. गच्च से मेरा पूरा लंड उसकी बुर की सील को तोड़ता हुआ पूरा अन्दर हो गया.वो फिर छटपटाने लगी.चिंकी ने उसे समझाया कि अब हो गया, पूरा लंड तुम्हारी बुर में चला गया है. अब दर्द नहीं होगा.
वो फिर रोने लगी. जवान लड़की की बुर में चालीस साल का लंड जाएगा तो ऐसा ही होता है. वो भी इतनी टाइट बुर कि मुझे लगा कि मेरा लंड भी जख्मी हो गया होगा. क्योंकि मेरा लंड उसकी बुर में एकदम टाइट फंसा हुआ था.इतना कसी हुई बुर मैंने कभी नहीं महसूस की थी. मैं वैसे ही शांत होकर उसकी ऊपर लेट गया. वो छटपटा रही थी. चिंकी उस सांत्वना दे रही थी.
काफी देर की मान मनौव्वल के बाद वो शांत हुई, तब मैंने अपने लंड फिर से अपनी बी की बुर में आगे पीछे करना शुरू किया. काफी देर तक धीरे धीरे लंड पेलने के बाद मैंने देखा कि उसने आँखें बंद कर लीं, तो मैंने हाथ उसके मुँह से हटाया.
चिंकी ने पूछा- सुमन, कैसा लग रहा है अब?सुमन- अब तो कुछ कुछ ठीक है.चिंकी- चुदाई को तेजी से किया जाए? अपनी टाँगें थोड़ा-थोड़ा पापा की कमर से लपेट लो.
बस अब मैंने ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी. मेरे हर धक्के पर वो “आह्ह्ह्ह्ह्.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ईह्ह्ह्ह्ह्..” करने लगी. अब वह मादक सिसकारियां भरने लगी थी. दस मिनट में ही उसने अपनी बाँहों में मुझे कस लिया और धक्कों के साथ गांड उछाल उछाल कर मजा लेने लगी.
दोस्तो, मैंने अपनी सगी बेटी की बुर की सील तोड़ दी थी.
मैं अपनी बेटी सुमन की मस्त बुर को पेलता रहा, कुछ देर बेटी की चुदाई के बाद मैंने चिंकी को अपने पास बुलाया और चिंकी के रसीले होठों को चूसने लगा. इधर सुमन की कुंवारी बुर को चोद रहा था. अब तो मेरी बेटी सुमन भी अब गांड हिला कर चुदाई का मजा ले रही थी. उसकी दर्द व आनन्द से मिश्रित कराहें, सिसकारियाँ निकाल रही थी- उम्माह… अह… हाह.. हां… हां… ओह्ह!
अब मैं अपने मुँह में चिंकी की छोटी छोटी चुचियों को लेकर चूस रहा था. सच में क्या मस्त मजा आ रहा था, मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं सुमन की चूत में जोर-जोर से लंड पेलने लगा और साथ में चिंकी के होठों को चूसने और काटने लगा. मैं बहुत तेजी से सुमन की कुंवारी चूत चोद रहा था और उंगली से चिंकी की चूत को चोद रहा था.
कुछ ही देर में मेरे लंड से वीर्य सुमन की चूत में गिरने लगा. मेरे साथ साथ सुमन भी झड़ गई और हम दोनों शांत हो गए. चिंकी भी कुछ ही देर में झड़ कर शांत हो गई.
फिर हम लोग एक साथ नंगे ही सो गए.
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