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Lesbian Sex • पठन समय: 7 मिनट • पढ़ा गया: 288 बार

जन्मदिन पर भिखारिन का तोहफा-2(Janamdin par bhikharin ka tohfa-2)

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15 May 2013 को प्रकाशित

जन्मदिन पर भिखारिन का तोहफा-2(Janamdin par bhikharin ka tohfa-2)
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पिछला भाग पढ़े:-जन्मदिन पर भिखारिन का तोहफा-1

नमस्कार दोस्तों, मैं ज्योति आपके सामने अपनी लेस्बियन सेक्स कहानी का अगला पार्ट लेके हाजिर हूं। उम्मीद है कि आप सब ने पिछला पार्ट पढ़ ही लिया होगा। अगर नहीं पढ़ा तो कृपया पहले उसको जरूर पढ़ ले।

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि मेरी दिल्ली में जॉब लगी तो मैं वहां किराए के एक कमरे में रहने लगी। वहां बाहर बैठी एक भिखारिन करुणा से मेरी दोस्ती हो गई। फिर एक दिन बारिश में मैंने उसका नंगा बदन देखा, और उस दिन मेरे मन में उसके लिए वासना की भावना जाग उठी। अब आगे बढ़ते है-

उस दिन रात को मेरे मन में बार-बार करुणा के ही ख्याल आए जा रहे थे। मेरी आंखों के सामने उसके वो नंगे चूचे, और बड़ी गांड घूम रही थी। यहीं सोच-सोच कर पता नहीं कब मेरा हाथ मेरी चूत पर चला गया, और मैं अपनी चूत को सहलाने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था उसके बारे में सोच कर चूत को सहलाने में। फिर मेरा पानी निकल गया, तो मैं सो गई।

अगले दिन मैं उठी, तो मुझे रात के उस मजे की याद आई। मेरे चेहरे पर अपने आप ही मुस्कान आ गई। फिर मैं तैयार हुई और ऑफिस जाने के लिए घर से निकली। करुणा अपनी जगह पर ही बैठी थी। मैंने उसको देख कर एक स्माइल पास की, और उसने भी सामने से स्माइल पास की। वो थोड़ा झुक कर बैठी थी, जिससे उसकी गहरी क्लीवेज दिख रही थी। उसको देखते ही मेरी चूत में करेंट सा लगा। मैं उसको देखते हुए वहां से निकल गई।

कुछ दिन तक ऐसा ही चलता रहा। हर रात मैं करुणा के बारे में सोच कर अपनी चूत सहलाती, और पानी निकालती। उसके लिए मेरे मन में वासना बढ़ती जा रही थी। अब मैं सोच रही थी कि क्यों ना उससे सेक्स के लिए पूछूं। लेकिन मुझे डर भी था कि वो मेरे बारे में क्या सोचेगी। पर फिर एक दिन मेरी इच्छा पूरी हो गई।

मेरे जन्मदिन का दिन था, और करुणा को मैंने पहले ही बताया हुआ था। मैंने उसको कहा था कि उस दिन वो भीख नहीं मांगेगी, और सारा दिन मेरे साथ घूमेगी-फिरेगी। क्योंकि घर तो मैं जा नहीं सकती थी। उसने भी हां बोल दी थी। फिर हम सुबह घूमने निकल गए, और हमने काफी मौज मस्ती की। करुणा ने आज लेगिंग्स-कुर्ती पहना हुआ था, जिसमें उसका भरा हुआ जिस्म बहुत सेक्सी लग रहा था।

सारा दिन मैं उसको देख कर उत्तेजित होती रही, और मेरी चूत पानी छोड़ती रही। फिर शाम को हम घर आए, और अब केक काटने का टाइम था। मैंने केक काटा, और वो जन्मदिन का गाना गाते हुए तालियां बजाने लगी। फिर मैंने पहला स्लाइस उसको खिलाया, और उसने भी मुझे केक खिलाया। उसके बाद मैंने उसको मजाक करते हुए कहा-

मैं: अच्छा करुणा मेरा जन्मदिन का तोहफा क्या दे रही हो?

करुणा बोली: कुछ खास है।

उसका ये जवाब सुन कर मैं सोच में पड़ गई। मैंने सोचा कि सारा दिन वो मेरे साथ थी। मैंने नहीं देखा वो अपने साथ कुछ लाई थी, या उसने रास्ते से कुछ खरीदा हो। फिर वो किस तोहफे की बात कर रही थी?

मैं बोली: अच्छा फिर दो क्या खास तोहफा है।

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करुणा: पहले अपनी आँखें बंद करो।

ये सुन कर मैं थोड़ी रोमांचित हो गई। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा, जिससे मैं और रोमांचित हो गई। अचानक मुझे अपने चेहरे पर उसकी सांसे फील हुई, जैसे वो मेरे करीब आई हो। इससे पहले मैं कुछ अंदाज़ा लगा पाती, उसने अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए, और मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए।

दोस्तों मेरी आँखें हैरानी से खुल कर बड़ी हो गई। उसकी किस्स ने मुझे झट से मदहोश कर दिया, और मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया। तकरीबन 10 मिनट तक हमने अच्छे से एक-दूसरे के होंठ चूसे। होंठों को चूसने से मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए। फिर हम अलग हुए, और मैं करुणा को सवालिया नजरों से देखने लगी।

मैंने उससे पूछा: तुम… ये… कैसे…?

तब करुणा बोली: बारिश वाले दिन से लेके आज तक तुम जिस नज़र से मुझे देख रही हो, मैं समझ गई थी तुम्हारी फीलिंग्स। तुमने मुझे इतनी इज्जत दी, तो इतना तो मैं तुम्हारे लिए कर ही सकती हूं। वैसे भी मेरा पति को किसी काम का नहीं है, और मुझे सेक्स किए को भी पता नहीं कितना वक्त हो गया। तो मेरी भी इच्छा है तुम्हारे साथ सेक्स करने की।

उसकी बात खत्म होते ही हम दोनों फिर से किस करने लगी। इस बार हमारी किस्स पहले से बहुत वाइल्ड थी। होंठ चूसते हुए हम दोनों एक-दूसरे के बदन पर हाथ फेर रहे थे। फिर उसने मेरे चूचे दबाने शुरू किए, जिससे मैं और गरम हो गई और झड़ गई।

फिर हम दोनों कपड़े उतारने लगी, और ब्रा पैंटी में आके बिस्तर पर लेट गई। हम दोनों बारी-बारी एक-दूसरे के बदन को चूमने लगी। पहले वो मेरे ऊपर आई, और मेरी गर्दन और क्लीवेज को चूमने लगी। फिर उसने मेरी ब्रा उतारी, और मेरे दोनों चूचों को चूसने लगी। उसके बाद उसने भी अपनी ब्रा उतार दी, जिससे उसके मोटे चूचे मेरे मुंह के ऊपर लटकने लगे। मैं भी उसके चूचों को मजे से चूसने लगी।

बहुत मजा आ रहा था मुझे। कुछ देर चूचे चुसवाने के बाद वो नीचे गई, और मेरी पैंटी उतार कर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। मैं तो जैसे पागल सी हो गई। मैंने उसके मुंह को अपनी चूत में दबा लिया, और गांड उठा कर उससे चूत चुसवाने लगी। वो भी मजे से चूत चूसती रही। फिर हम 69 पोजीशन में आए, और एक-दूसरे की चूत चूसने लगे। हम दोनों चूत में उंगलियां करके एक-दूसरे की चूत चुदाई करने लगे। पागलों की तरह उंगली कर रहे थे हम दोनों एक-दूसरे की चूत में।

आधा घंटा ऐसे ही हमने प्यार किया। इस दौरान हम पता नहीं कितनी बार झड़ गए। फिर दोनों थक कर साथ में नंगे ही लेट गए। उस दिन से जब भी हम दोनों में से किसी का भी मन होता है, तो हम एक-दूसरे की प्यास बुझाते है।

तो ये थी मेरी लेस्बियन सेक्स कहानी। आपको कहानी कैसी लगी जरूर बताएं।

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