यह बात करीब 6 महीने पहले की है. मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. मेरे पड़ोस में वर्ष और नेहा नाम की दो बहनें रहती थी. नेहा का फिगर करीब 32-28-30 का था. नेहा को जो भी देखता वो मुठ मारने को मजबूर हो जाता था. नेहा एक सीधी सादी लड़की थी. मैंने कभी उसको गंदी नजर से नहीं देखा था, पर हां नेहा की बहन वर्षा को मैं उससे प्यार करता था और ऐसा लगता था कि वर्षा भी मुझसे प्यार करती थी पर हमने कभी आपस में प्यार का इजहार नहीं किया था.
समय के साथ साथ हमारे बीच आकर्षण बढ़ता गया और एक दिन हम दोनों ने मिल कर आपस में एक दूसरे को आई लव यू बोल प्रिया. लेकिन हम दोनों का प्यार सेक्स से परे था. या यों कहो कि हम अभी इतने आगे नहीं बढे थे कि सेक्स जैसी कोई बात होती.
कुछ ही माह बाद वर्षा की शादी तय हो गई. उसकी शादी जिस लड़के से तय हुई थी वो जयपुर के एक रईस खानदान से था. अच्छा घर और वर देख कर नेहा के घर वालों ने वर्षा की शादी तय कर दी.
इधर नेहा हमारे प्यार के बारे में जानती थी. उसको समझ आ गया था कि वर्षा का प्यार खत्म होने का समय आ गया है. मैं भी वर्षा की शादी तय हो जाने से मायूस हो गया था पर शायद मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं वर्षा के लिए उसके घर वालों से शादी की बात कर सकूँ.
एक दिन नेहा ने मुझसे मिलने को कहा मैंने हां कह प्रिया. मैं 12 बजे मिलने चला गया. नेहा ने मुझसे कहा- मेरी बहन की तो शादी होने वाली है, तुम तो अकेले हो जाओगे.मैंने दुखी होकर कहा- मेरी किस्मत ही खराब है.नेहा मुझे घूर घूर कर देख रही थी. फिर नेहा ने मुझसे कहा- समीर मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ?मैंने कहा- तुम अच्छी हो… पर तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो?नेहा ने कहा कि देखो मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है… क्या तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे?
पर मैंने ना कह प्रिया और वो रोते हुए झुक सी गई और उसके दूध दिखने लगे.वो बोली- मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ.मैंने उसके मम्मे देख कर सोचा कि ये लड़की भी सेक्सी है और राजी भी दिख रही है.
मैंने उससे हां कह प्रिया. नेहा मुझसे लिपट गई और ‘आई लव यू’ कहने लगी. मैंने भी उसके होंठों को अपने होंठों से लगा लिया और जोर जोर से उसके होंठों को चूमने और काटने लगा.करीब 5 मिनट के बाद हम दोनों अलग हुए.
अब हम दोनों कीप्रेम कहानीपटरी पर दौड़ चली थी. दरअसल ये प्रेम कम था वासना का खेल अधिक था.
करीब एक महीने तक हम दोनों मिलते रहे. मैं नेहा को चोदना चाहता था, पर मैंने कभी उसको इस बात के लिए नहीं बोला. मुझे लगा कि कहीं ये बुरा मान गई तो मेरे लंड का क्या होगा. मैंने सोचा कि क्या नेहा को खुद चुदाने का मन नहीं करता होगा. लेकिन ये भी सच था कि मैं नेहा को चुदाई के नजरिए से ही देखता था.
एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना एक बार कह कर देखा जाए. मैं रात के 10 बजे नेहा के घर के पीछे छुप कर सबके सोने का इंतजार करने लगा. जब सब सो गए तो मैं नेहा के कमरे के पास गया. मैंने पीछे से उसकी खिड़की तक पहुँच बनाई और छिप कर उसे देखने की कोशिश करने लगा. मैंने अपनी आँखों से जो सीन देखा, वो देख कर मुझे बड़ा अजीब सा लगा. मैंने देखा नेहा पूरी नंगी होकर पतली साईज का एक बैगन अपनी चूत में घुसा रही थी और मेरा नाम ले रही थी- आह… समीर फक मी समीर…
मैं ये सब देख कर हैरान रह गया. फिर नेहा ने अपना मोबाइल उठाया और कुछ करने लगी. इतने में मेरे पेंट में मेरा मोबाइल हिलने लगा. मेरा मोबाइल साईलेंट पर था. मैंने मेरा मोबाइल उठाया और देखा कि नेहा ने काल किया था.
मैंने फोन उठाया, नेहा ने कहा- जान, आज तुम्हारी बहुत याद आ रही है.मैंने कहा- याद आ रही है तो बोलो क्या मैं आ जाऊं?नेहा चहक कर बोली- हां प्लीज़, आ जाओ…मैंने पूछा- क्या दोगी?नेहा- तुम जो माँगोगे मैं वो दूँगी.मैंने कहा- तुम अपने कमरे की खिड़की खोलो.
नेहा ने खिड़की खोली तो मैं अन्दर घुस आया. नेहा मुझे देख कर हैरान हो गई. नेहा बोलने लगी- तुम मेरे घर के पास कब आए?मैंने उसे किस करते हुए बोला- नेहा वो सब छोड़ो… आज मैं ये ही कहने आया था कि आई लव यू…नेहा मुझे किस करने लगी और मुझे आई लव यू टू कहने लगी.
हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बांहों में भींच लिया और हमारे जिस्मों को एक करने की कोशिश करने लगे.
सच में नेहा में बहुत चुदास भरी थी. उसने मुझे चूमते हुए ही मेरे लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी.
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मैंने उससे पूछा- क्या देने का कह रही थीं?नेहा ने लंड को भींचते हुए कहा- इसको दूंगी.मैंने उसकी चूची मसलते हुए कहा- किसको क्या दोगी कुछ नाम भी तो लो जानेमन.उसने मेरी छाती पर मुक्का मारते हुए कहा- ज्यादा सताओ मत बस समझ लो मैं क्या कहना चाहती हूँ.
मैंने कहा- नहीं आज तो जब तक तुम खुद अपने मुँह से नहीं कहोगी… मुझे कुछ समझ में नहीं आने व़ाला है. मैंने बहुत दिन तुम्हारा इन्तजार किया है अब तो तेरे मुँह से सब कुछ सुन कर तसल्ली होगी.नेहा मेरी कान में फुसफुसाती हुई बोली- मेरी चुत को तेरा लंड चाहिए.मैंने कहा- तेरी चुत को मेरा लंड क्यों चाहिए… जरा खुल कर बोलो रानी.नेहा ने खुलते हुए कहा- साले हरामी मेरी चुत को तेरा लंड किसके लिए लेना है तुझे पता नहीं है?मैंने ढीठता दिखाते हुए कहा- नहीं पता.
नेहा मुझे काटते हुए गाली देते हुए कहा- मादरचोद, अपने लंड से मेरी चूत फाड़ दे… अब समझ गया भोसड़ी के कि और कुछ समझना है.
मुझे उसकी इस बिंदास भाषा से थोड़ा आश्चर्य हुआ कि साली ये तो गाली दे रही है. मैंने भी उसकी चूची के निप्पल को खींचते हुए गाली दी- साली रंडी, आ जा आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँ.
यह कह कर मैंने नेहा को गोद में उठाया और बेड पर लिटा प्रिया. मैं नेहा को किस करने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी. फिर मैं नेहा के ऊपर चढ़ गया और उसे किस करने लगा. मेरा एक हाथ नेहा के दूध पर जम गया. मैं धीरे धीरे उसके मम्मों को दबाने लगा. मैंने हल्के से मम्मे दबाए थे तो नेहा कुछ नहीं बोली.
मैंने अपना दूसरा हाथ उसके दूसरे मम्मे पर रख प्रिया और जोर जोर से दोनों मम्मे दबाने लगा. नेहा के मुँह से ‘अहह आहा…’ की मीनूर आवाज आने लगी. मैंने देर ना करते हुए नेहा की पेंटी में हाथ घुसेड़ प्रिया और चूत में दो उंगलियां घुसा दीं. नेहा बेकाबू हो रही थी. अब मैंने उसकी पेंटी को खींच कर खोल प्रिया.
मेरे सामने उसकी मस्त चूत थी… आह उसकी चुत एकदम गुलाबी थी… चुत में हल्की हल्की सी झांटें थीं. चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी. मैं उसकी चुत को चाटने लगा. नेहा ‘आ हहह आआ समीर…’ करने लगी. मैं जोर जोर से चुत चाटने लगा.
नेहा बोली- मुझे और मत तड़पाओ साले पेल दे लौड़ा.उसकी चुदास देखा कर मैं पूरा नंगा हो गया. नेहा बोली- तुम्हारा लंड कितना बड़ा है.मैं बोला- जान मुँह में ले लो इसे…
नेहा मेरा लंड चूसने लगी. कुछ ही मिनट बाद मैंने नेहा को लिटा प्रिया और उसकी चूत के मुँह पे लंड टिका प्रिया.
मैंने उसको आँख मारी और एक तगड़ा शॉट दे मारा. मेरा पूरा का पूरा लंड चूत में घुस गया. नेहा चिल्लाने लगी. मैंने नेहा के होंठों को चूमते हुए दबा लिया. उसकी आवाज घुट कर रह गई. अब नेहा छटपटा रही थी. कुछ मिनट बाद नेहा का दर्द कम हुआ. मैं उसको जोर जोर से चोदने लगा.
इसके बाद मैंने नेहा को घोड़ी बनने को कहा. नेहा झट से घोड़ी बन गई तो मैंने पीछे से लंड पेल कर उसे बहुत चोदा. कुछ देर बाद में हम दोनों एक साथ झड़ गए. उस रात हमने 3 बार सेक्स किया. उस दिन के बाद से हमें जब भी मौका मिलता था, हम दोनों सेक्स का मजा करते थे.
एक महीने बाद नेहा की बहन वर्षा की शादी हो गई.उसकी शादी के बाद मैं फरवरी 2017 को जयपुर में मेरे मामा के घर गया था. उधर रहते हुए मुझे 7 दिन हो गए थे, मैंने नेहा से बात नहीं की थी. मैंने एक दिन मेरे फ्रेंड को फोन किया और उसे बोला- नेहा से बात करवा दे.
पर मेरे फ्रेंड ने बोला- नेहा का 5 दिन पहले एक्सीडेंट हुआ था और उसकी मौत हो गई थी. मैं एकदम से सन्न रह गया. मैं सोचने लगा कि शायद मुझे नेहा से ही प्यार था… उसकी मौत की खबर ने ही मुझे इस बात का अहसास कराया था.मैं आज भी अपनी बिंदास नेहा से प्यार करता हूँ. नेहा मुझे बहुत याद आती है.
दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी, मुझे आप लोगों की राय का इंतजार रहेगा मेरी ईमेल आईडी हैsupport@mohakkisse.com