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भाभी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 887 बार

भोला पंछी

वरिन्द्र सिंह

02 Dec 2025 को प्रकाशित

भोला पंछी
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लीजिए एक और नई कहानी आपकी खिदमत में पेश है। यह कहानी मुझे मेरी एक सहेली ने सुनाई थी, सो मैं आपको सुनाता हूँ।

बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं है, मैं मनीषा अग्रवाल, मेरी शादी मई, 2006 में कवीश से हुई थी। कवीश एक सजीला मर्द था और कामयाब बिज़ेनेस्मैन भी। दो साल तक उसने मुझे शादी का भरपूर सुख प्रिया, एक मासूम सी बेटी भी दी और मेरी कोई भी तमन्नाउसने अधूरी नहीं छोड़ी थी।

मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत खुश थी कि अचानक एक दिन कार दुर्घटना में कवीश की मौत हो गई।मेरे लिए यह ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सदमा था। 2-4 महीने तो रोते-रोते बीत गए पर असली परेशानी तो उसके बाद शुरू हुई। दिन तो जैसे तैसे बीत जाता था पर रात को तो नींद ही नहीं आती थी। कवीश की कमी अब मुझे सबसे ज़यादा महसूस हो रही थी। सिरहाने को बाँहों में भरने से भी मज़ा नहीं आता था।

अब मैं क्या करूँ ! किससे अपने दिल का हाल बयां करूँ ! अपनी बड़ी बहन को बताया तो उसने भी कन्नी काट ली के कहीं मैं अपनी प्यास बुझाने के लिए उसके पति को ही न पटा लूं। सारा दिन घर में रह कर भी काम नहीं चलता था। अपनी ऊँगली से या और चीज़ों से खुद को संतुष्ट करना चाहा पर मज़ा नहीं आया। हालात इतने बिगड़ गए कि मैं अक्सर अपने कमरे में नंगी घूमती रहती थी, पर इस से भी कोई लाभ नहीं हुआ।

एक बार तो घर में आने वाले सेलमैन को पटाने के लिए मैं सिर्फ एक पतली सी नाइटी में उस से कितनी देर बातें करती रही। वो भी मेरे बदन को घूरता रहा पर साले ने ज़रा भी हिम्मत नहीं दिखाई। मैंने उसे खुली बात भी कही कि मुझे तुम्हारा सामान नहीं कुछ और दमदार चीज़ चाहिए जो तुम्हारी पैंट में है, पर वो बोला- सॉरी मैडम मैं सिर्फ सामान ही बेचता हूँ !

मैं सोच कर हैरान रह गई कि कोई कैसे एक भरपूर जवान, गोरी चिट्टी, सुंदर औरत की पेशकश ठुकरा सकता है। खैर जब कहीं बात नहीं बनी तो एक दिन मैं अपने चाचा ससुर के घर गई।

उनका एक बेटा आलोक था जो करीब मेरी ही उम्र का था पर था भोंदू राम। वो जिस तरह होते हैं न बुद्धू किस्म के बड़े ही सीधे साधे से, वैसा ही था। इसी वजह से उसकी अभी तक शादी भी नहीं की थी कि यह घर गृहस्थी का बोझ कैसे उठा पायेगा, इसे तो दो और दो चार करने भी नहीं आते।

खैर एक हट्टे कटते मर्द को देख कर चाहे वो भोंदू ही सही, पर मेरे मन में कुछ हुआ। दो तीन दिन रहने के बाद जब मैं वापिस आने लगी तो मैंने अपने चचिया ससुर से कहा- अगर कुछ दिन के लिए आलोक मेरे साथ रहने चले तो मुझे अच्छा लगेगा।

तो उन्होंने खुशी खुशी उसे मेरे साथ भेज प्रिया, बिना यह जाने कि मेरे दिल में क्या है।

मैंने रास्ते में ही सारी योज़ना बना ली थी। जिस दिन हम घर पहुँचे, रात का खाना खा कर मैंने उसे अपने साथ ही सुला लिया।

एक गहरे गले वाली पतली सी नाईटी पहन कर मैं उसके सामने लेट गई। मैं चाहती थी कि वो मेरा बदन देखे। अपनी बेटी को दूध पिलाने के बहाने मैंने जानबूझ कर अपनी भरी पूरी चूची निकाल कर उसे दिखाई। पर वो तो ऐसे शरमा रहा था जैसे छोटा बच्चा हो।

खैर मैंने बातों बातों में उस से पूछा- आलोक ! क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं?वो बोला- हाँ भाभी ! आप बहुत अच्छी हो !मैं बोली- कहाँ से? यहाँ से ! यह कह कर मैंने अपने गाल पर उंगली रखी।वो बोला- जी भाभी !

और यहाँ से भी? यह कह कर मैंने अपने स्तन पर उंगली रख कर उससे पूछा।तो वो शरमा कर बोला- भाभी ! आप बड़ी वो हो !

जब मेरी बेटी सो गई तो मैंने कहा- देख आलोक ! ज़ीजिया तो दूध पीकर सो गई ! क्या तू भी सोने से पहले दूध पीना चाहेगा?पर वो बदतमीज़ बोला- नहीं भाभी ! मैं ऐसे ही सो जाऊँगा !. आप मुझे तंग मत करो।

और यह कह कर वो मेरी तरफ़ पीठ करके सो गया। मुझे लगा कि यार मेरी तो सारी योजना ही चौपट हो गई। खैर ! मैं भी सो गई।

सुबह उठी तो देखा की आलोक अभी सो रहा था मगर उसके पायजामे से उसका तना हुआ लण्ड ऊपर उठा हुआ था। यह तो मेरे सब्र की इन्तहा थी। मैं चुपके से उठ के उसके पास गई और धीरे धीरे से उसके पायजामे का नाड़ा खोला। पायजामे के नीचे उसने चड्डी पहन रखी थी, मैंने धीरे से उसकी चड्डी हटाई तो अंदर एक कुल्हाड़ी के दस्ते जैसा मोटा लम्बा लण्ड खड़ा था।

मैंने बड़े प्यार से उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ कर बाहर निकाला, उसे चूमा। उसके बाद कब मेरी आँखें बंद हो गई और कब उसका लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी, मुझे कुछ पता नहीं चला।मैं चूसती गई, चूसती गई, मैंने आलोक के जिस्म में हलचल महसूस की पर मैं आँखें खोल कर देखने की हालत में नहीं थी और तभी बिजली सी कौंध गई, आलोक ने पानी छोड़ प्रिया जिससे मेरा सारा मुंह, सर के बाल गर्दन, छातियाँ भीग गए। जैसे कोई बांध टूटा है ऐसे आलोक झड़ा।उसका कुछ माल तो मेरे मुंह के अंदर भी चला गया। मैंने नज़र उठा कर देखा, आलोक बड़ा परेशान सा लग रहा था।

वो बोला- भाभी आप बड़ी गन्दी हो, मेरे साथ गन्दा काम करती हो !मैंने कहा- तुम्हें किसने कहा कि यह गन्दा काम है? देखो तुम्हें मज़ा आया ! आया या नहीं?उसने सर हिला कर हाँ कहा।मैंने कहा- आओ चलो, नहा कर आते हैं।

मैंने उसका हाथ पकडा और बाथरूम में ले गई। वहां मैंने उसको खुद नहलाया और जानबूझ कर उसके सामने पूरी नंगी हो कर नहाई। उससे अपने जिस्म पर साबुन लगवाया ताकि उसमें औरत के जिस्म के लिए चाहत पैदा हो। नहाकर हम बाहर निकले। फिर दिन में मैं उसे बाज़ार भी घुमा कर लाई, उसकी पसंद की चीजें भी उसे लेकर दी। दोपहर का खाना खा कर जब हम आराम कर रहे थे तो मेरी बेटी सोने के लिए जिद करने लगी। मैंने बिना किसी संकोच के आलोक के सामने ही अपनी शर्ट उतारी और अपनी ब्रा में से एक स्तन बाहर निकल कर उसे दूध पिलाने लगी। आलोक मेरे सामने बैठा ये सब देख रहा था। मैंने उससे पूछा- अरे आलोक, क्या देख रहा है?

कुछ नहीं भाभी, वो बोला।मैंने पूछा- दूध पिएगा?

तो वो शरमा गया। मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी ब्रा हटा कर अपनी दूसरी चूची उसके सामने करके बोली- ले पीकर देख !

पहले तो वो शरमा गया, पर जब मैंने उसका सर पकड़ कर अपने स्तन से लगाया तो उसने धीरे धीरे चूसना शुरू कर प्रिया। जब ज़ीनिया सो गई तो मैंने अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी और आलोक से कहा- ऐसे मज़ा नहीं आएगा, मैं बताती हूँ कि कैसे पीना चाहिए।

यह कह कर मैंने उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लिया और उसके दोनों हाथ में अपने स्तन पकड़ा कर कहा- अब इन्हें चूसो !

उसने ऐसे ही किया। मैंने नीचे से अपनी कमर हिलानी शुरू की मैंने महसूस किया कि उसका लण्ड अकड़ने लगा था। जब उसका लण्ड पूरा तन गया तो मैंने कहा- आलोक और मज़ा लेगा?

तो वो शरमा गया पर सर हिला कर उसने हाँ कह दी। मैंने अपनी सलवार उतारी और अपनी चूत उसके सामने खोल कर दिखाई और उसके लण्ड को पकड़ कर बोली- इसको इसमें डाल कर आगे पीछे करते हैं तो बहुत मज़ा आता है, बोल करेगा?

उसने फिर सर हिलाया तो मैंने झट से उसकी पैंट, शर्ट, बनियान और चड्डी उतार दी। मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पे रगड़ा तो वो बोला- भाभी ! वैसे करो जैसे सुबह किया था।

मैंने हंस कर कहा- क्यों मज़ा आया था न !वो बोला- हाँ !

तो मेरे राजा अगर सुबह वाला काम करवाना है तो तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा, अगर मैं तुम्हारा चूसूंगी तो तुम्हें भी मेरी चाटनी पड़ेगी !

वो तैयार तो हो गया पर जब उसने मेरी चूत में मुंह लगा कर चाटा तो बोला- थू ओ ! ये तो गन्दा स्वाद है !

खैर मैंने उसे मजबूर नहीं किया, कुछ देर उसका लण्ड चूसने के बाद मेरी अपनी हालत बड़ी ख़राब हो रही थी सो मैंने उसकी पोसिशन अपने ऊपर सेट की और उसका लण्ड अपनी चूत पर रख कर उसे अंदर डालने को कहा।उसने सी सी करते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डाला मगर वो ढंग से चोद नहीं पा रहा था।मैंने सोचा- ऐसे तो मज़ा नहीं आएगा। यह चोद कम रहा है और हाय तौबा ज्यादा मचा रहा है।

फिर मैंने कमांड संभाली, उसे नीचे लिटा कर खुद ऊपर आ गई। चूत में लण्ड लेकर मैंने खुद ही चुदाई शुरू की। वो नीचे से हाय तौबा करने लगा तो 2 चांटे लगाये उसके और पूरे जोर से चुदाई करती रही और तब तक करती रही जब तक मैं झड़ नहीं गई। पर वो मर्द का बच्चा अभी खड़ा था सो मैंने अपनी तसल्ली होते ही नीचे उतार कर उसका लण्ड अपने मुंह में ले लिया और अपनी चूत 69 बनाते हुए उसके मुंह पर रख दी। बेशक उसने मेरी चूत नहीं चाटी पर मैं अपनी चूत उसके मुंह पर रगड़ती रही और उसका लण्ड चूसती रही और तब तक चूसती रही जब तक वो झड़ नहीं गया।

जोश ही जोश में मैं उसका सारा माल चट कर गई और संतुष्ट हो कर बेड पर लुढ़क गई क्योंकि आज मेरी तमन्ना पूरी हो गई थी। उसके बाद आलोक मेरे पास 15 दिन और रहा और हमने तकरीबन रोज 2-3 बार सेक्स किया और हर स्टाइल से किया। मेरी इस सेक्स-शिक्षा का असर यह हुआ कि भोंदू राम को अकल आ गई और आज वो अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी जी रहा है।support@mohakkisse.com0851

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