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माँ की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,213 बार

घने कोहरे में बेपरवाह हुए माँ बेटा(Ghane kohre mein beparwah hue maa beta)

sunitamanish

13 Jul 2023 को प्रकाशित

घने कोहरे में बेपरवाह हुए माँ बेटा(Ghane kohre mein beparwah hue maa beta)
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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम शुभम है। मेरी उम्र 19 साल है। मेरे घर में तीन लोग है। मैं (कहानी का नायक), पापा और मम्मी (कहानी की नायिका)।

मेरी मम्मी सुनीता, उम्र 40 लेकिन लगती 30 की है। पढ़ी-लिखी घरेलू महिला है, सोशल मिडिया पर काफी एक्टिव रहती है और अपनी शरीर को खूबसूरत बनाये रखती है। उनका फिगर 36-30-36 है। गदराई हुई गोरी जिस्म के कारण मम्मी के सोशल मीडिया पर अच्छे फॉलोअर है।

हम मां-बेटे में जबरदस्त बॉन्डिंग है। हमारे पापा भी हम लोगों को बहुत प्यार करते है। पापा बिज़नेस करते है तो उनको समय कम मिलता है घर के लिए। हम लोग मिडिल क्लास फैमिली से रिलेटेड है। सब कुछ सामान्य चल रहा था फिर एक दिन एक तूफान आया और सब कुछ बहा के ले गया। पता नहीं लेकिन किस्मत को शायद यही मंजूर था।

मैंने बी.ए. फर्स्ट ईयर का एग्जाम पास किया था। आप लोग तो जानते ही है कि यह उम्र कितनी खराब होती है। सही-गलत कुछ समझ नहीं आता। मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी। मां हमेशा मेरे मन का खाना बनाती थी और मुझे बहुत प्यार करती थी।

दिसम्बर का महीना चल रहा था। मेरे मामा के लड़के की शादी थी और मम्मी वहां गयी हुई थी। पापा दुकान की वजह से जा नहीं पाये थे, और मैं पढ़ाई की वजह से नहीं गया था। मम्मी अकेले गयी हुई थी और वापस लौट रही थी। तब मम्मी ने मुझे कॉल करके कहा कि मैं उन्हे स्टेशन से रिसीव कर लूं।

उनकी ट्रेन शाम 4 बजे आने वाली थी, लेकिन 6 घंटे लेट के कारण 11 बज गये। लेकिन मैं शाम को कार लेकर पहुंच गया था। ठंड बढ़ गयी थी। मम्मी सिल्क सलवार-सूट पहनी हुई थी और बहुत जबरदस्त लग रही थी। मम्मी और मैं दोनों ने ही गर्म कपड़े नहीं पहने थे, हमे लगा था कि ट्रेन टाइम से होगी और शाम तक घर चले जाएंगे, पर हम फस गये थे।

मैं और मम्मी होटल गये और कुछ खाया-पिया। फिर अपनी कार से घर की ओर निकल गये। कोहरा काफी बढ़ने लगा था, मैं और माँ साथ में आगे बैठे हुए थे, और हम कोहरे के कारण धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। मुश्किल से 15 कि.मी. आये थे कि अब कोहरा छा चुका रहा और हम जंगल वाले सड़क पर थे। रात भी आधी बीत चुकी थी।

घना कोहरा होने के कारण मैं कार को धीरे-धीरे चला रहा था। तभी मम्मी ने कहा, “बेटा कार रोको, मुझे शुशु आई है।” उफ्फ्फ मम्मी की मुंह से ऐसी बात सुन कर उनकी गोरी चिकनी चूत की कल्पना करने लगा। फिर मैंने कार रोकी और मम्मी कार से नीचे उतर के, वहीं पास में अपनी सलवार नीचे की और सुरररर… करके मूतने लगी।

बाहर ठंड काफी थी, तब तक मैंने भी सोची की पेशाब कर ही लेता हूं। और कार बंद करके बाहर दूसरी तरफ मूतने लगा। सड़क के दोनों तरफ जंगल था। ठंडी हवाएं भी चल रही थी और कोहरा छाया हुआ था। मैंने झट से मूत के कार में गया तो देखा मम्मी ठंड से काँप रही है। उन्होंने कोई गर्म कपड़े भी नहीं पहने थे। मैं कार में बैठा तो मम्मी मेरी बाहों में समा गयी।

मम्मी: “बाहर ठंड बहुत ज्यादा है बेटा और मैंने कोई गर्म कपड़े भी नहीं पहने है।”

मैं: “कोई बात नहीं मम्मी, आप इसी तरह मेरी बाहों में रहो। थोड़ी देर में गर्मी आ जाएगी।”

मम्मी मुझे अपनी बाहों में जकड़ी हुई थी और मुझे उनकी मुलायम चूचियाँ सीने में धंसती हुई महसूस हो रही थी। मम्मी अभी भी काँप रही थी, मैं वैसे ही कार स्टार्ट करने लगा, लेकिन कार स्टार्ट नहीं हो रही थी, शायद उसका इंजन ठंडा पड़ गया था।

मम्मी: “क्या हुआ बेटा?”

मैं: “मम्मी लगता है कार ठंडी पड़ गयी है, अभी स्टार्ट नहीं हो रही है।”

मम्मी: “ओफ्फो.. अब हमें सुबह तक ऐसे ही रहना होगा।”

मैं: “मम्मी आप रुको, मैं बाहर आग की व्यवस्था करता हूं, ताकि आपको ठंड नहीं लगे।”

मैं बाहर निकला और जंगल की कुछ लकड़ियाँ इकट्ठा कर उन्हें जलाया, और मम्मी को बुलाया। वो अभी भी काँप रही थी, आग के पास आकर भी वो मुझसे चिपक गयी। मैं उन्हें अपनी गोद में चिपका के बैठ गया और हम दोनों आग सेकने लगे। कोहरा इतना घना था कि रोड पर एक भी गाड़ी नहीं चल रही थी। मम्मी आग से हाथ गर्म करके अपने गालों को सेक रही थी और साथ ही मेरे गालों को भी।

मम्मी जब मेरे गालों को सेकती तो उनकी चूचियाँ मेरे मुंह के पास आ जाती और मेरा लंड पूरा सख्त हो जाता। मम्मी को भी शायद नीचे से मेरे लंड महसूस हो रहा था, वो भी अब गर्म हो रही थी। मेरे गालों को सेकते हुए, अपनी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही मेरे मुंह से सटा रही थी।

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मम्मी की खूबसूरत चेहरा और गुलाबी होंठ देख कर उन्हे चूसने और चूमने का मन हो रहा था। मम्मी की आँखो में भी उनकी गर्म होती चूत की वासना दिख रही थी। मम्मी और मैं बेपरवाह हो कर एक-दूसरे के आँखों में देखने लगे, हम दोनों की गर्म सासे एक-दूसरे को महसूस हो रही थी। मम्मी की मासूम अदाएं मेरे लंड को झटके मारने पर मजबूर कर दिया जिसे मम्मी की चूत ने अच्छे से फील किया।

मम्मी के मुंह से हलकी आह निकली और उनके दोनों होंठ खुल गये। मैंने ज्यादा देर ना करते हुए अपना होंठ उनके होंठों पे रख दिया। मम्मी ने आँखे बंद कर ली। मेरा लंड और सख्त हो गया, मम्मी मेरे गोद में कस गयी और अपने होंठ चुसाई का मजा लेने लगी।

मम्मी थोड़ी मॉडर्न है। वे जानती है कि वासना किस तरह रिश्तो को नहीं देखता। आये दिन सोशल मिडिया पर ऐसी रिश्तो की बहकने की वीडियो आती रहती थी।

आज हमारे साथ भी वहीं हो रहा था। हम दोनों माँ-बेटे सुनसान सड़क के किनारे घना कोहरा में वासना की लपटो में फस कर रिश्ते भूल चुके थे। तभी मम्मी ने किस्स तोड़ा, वे हांफ रही थी, मेरा लंड अभी भी उनकी चूत को लग रही थी।

मम्मी ने हांफते हुए कहा, “बेटा हमे ये सब यही रोक देना चाहिए, ये सब गलत है।”

मैं: “हां मम्मी लेकिन आज ठंड बहुत है, हम अलग नहीं रह सकते। हमें एक-दूसरे से सट कर गर्म रहना पड़ेगा।”

इतने में मेरा लंड नीचे से झटके मारने लगा। इतना सख्त हो गया था कि कपड़े से बाहर आना चाहता था। मम्मी मेरे लंड की गर्मी महसूस कर रही थी। उनकी गर्म सांसे और उनकी चेहरा बता रहा था कि उनकी भी चूत गीली हो रही थी।

तभी एक ठंडी झोका आया और माँ फिर से मुझसे पूरी तरह चिपक गयी, मैं उनकी पीठ को सहलाने लगा, मम्मी भी गर्म हो कर मेरे गर्दन को किस्स करने लगी। हम दोनों माँ बेटे इस ठंड में बेपरवाह हो कर एक-दूसरे को चूमने लगे। मम्मी खड़ी हुई और मेरे पैरों को दोनों तरफ अपने पैर फैला कर मेरी गोद में समा गयी। मेरा लंड अब पूरी तरह उनकी चूत को लग रहा था और मम्मी लगातार मेरी होंठों को चूम रही थी।

मैं मम्मी को चूमते हुए उनकी चूचियों को भी मसलने लगा। आअह्ह्ह्ह उउउफ्फ्फ़… जैसी मादक सिसकारियां माँ के मुंह से निकलने लगे। लकड़ी की आग अब बुझ रही थी, लेकिन हम माँ बेटे की आग अब भड़की हुई थी। हम ठंड को भूल कर एक-दूसरे को चूम रहे थे। मम्मी अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी। आग बुझ जाने से हलकी ठंड लगने लगी।

मैं मम्मी को गोद में लिए हुए कार की पिछली सीट पर ले गया और उन्हे नीचे लिटा कर खुद उनपे चढ़ गया और उन्हें चूमने लगा। मम्मी मेरा भरपूर साथ दे रही थी, मैंने मम्मी की सूट के अंदर से ब्रा निकाल दी और उनकी चूचियों को बाहर कर चूसने लगा। मम्मी मेरे सर को अपने चूचियों में दबाते हुए मजा ले रही थी।

मैंने अपनी जीन्स को उतार दिया और लंड बाहर आ गया, मम्मी मेरे लंड को हाथों में लेके सहलाने लगी। मैं उनकी मालदार चूचियों का रस पी रहा था। थोड़ी देर में मम्मी ने अपनी सलवार और पैंटी उतार दी और अपनी टांगे चौड़ी कर ली। उनकी फूल सी कोमल चूत मेरे सामने आ गयी। मैंने उनकी गोरी जांघो को चूमते हुए, चूत तक पहुंच गया और चूत में जीभ डाल कर रस लेने लगा।

मम्मी अपनी आँखे मुंद कर चूत चुसाई का मजा लेने लगी। फिर मैं मम्मी के ऊपर आया और मम्मी ने खुद मेरा लंड अपनी चूत पे सेट किया। मैंने धीरे-धीरे दो-तीन झटके मारे और मेरा पूरा लंड मम्मी की गीली चूत में उतर गया। मम्मी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मैं नीचे से उनकी चूत में झटके मारने लगा। मम्मी मजे से चुदवा रही थी और कार में कामुक सिसकरिया आआह्ह्ह्ह… उउउफ्फ्फ्फ़… ऊऊह्ह्ह… कर रही थी।

मैं मम्मी को जोर-जोर से चोद रहा था। मम्मी अपनी आँखे बंद कर कभी मेरे होंठों को चूस्ती तो कभी तेज चोदने को कहती।

मैं मम्मी की चूत की गहराई तक चोद रहा था। मेरा लंड पूरा चूत के पानी से चिकना हो गया था। मम्मी मजे से इस भयानक ठंड में मेरे लंड की गर्मी ले रही थी। मैं तेजी से चोदने लगा और मम्मी के चूत की गहराई में अपना सरा वीर्य उढ़ेल दिया। मम्मी मुझे कस के बाहों में जकड़ी रही और मेरे वीर्य को अपनी चूत में लेती रही।

हम दोनों काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे। अब सुबह हो रही थी लेकिन कोहरा अभी भी बहुत था। मैंने अपना लंड मम्मी के मुंह में दे दिया और मम्मी ने उसे लॉलीपॉप की तरह चूस के फिर से खड़ा कर दी। मैंने मम्मी को फिर से चुदाई की, तब तक अच्छे से सुबह हो गयी। फिर मैंने कार स्टार्ट करने लगा, थोड़ी मेहनत के बाद बड़ी मुश्किल से कार स्टार्ट हुई और हम घर आ गये।

घर पे आने के बाद हम दोनों गर्म पानी से नहाने गये और बाथरूम में भी चुदाई किये।

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