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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 292 बार

मेरी गांड में दोस्त का लंड चल गया

सन सी

03 Jan 2010 को प्रकाशित

मेरी गांड में दोस्त का लंड चल गया
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यह गे सेक्स विद मेन की घटना मेरे दोस्त की है. एक शादी में उसकी गांड लंड लेने के लिए कुलबुलाने लगी. एक लंड उसे मिला भी पर वो मुंह में ही झड़ गया. उसके बाद …

दोस्तो,मेरी पिछली गे सेक्स विद मेन कहानीगांडू दोस्त की गांड चुदाई और बेवफाईआपने पसंद की. धन्यवाद.

मैं पुनः एक सेक्स स्टोरी के साथ हाजिर हूँ. इस बार मैं आपके लिए ये सेक्स कहानी अपने फ्रेंड की तरफ से लिख रहा हूँ. आप उसी की जुबान से गे सेक्स विद मेन का मजा लीजिए.

मेरा नाम सैंडी है, मुझे गे सेक्स में बहुत मजा आता है.

बहुत दिनों से मेरी गांड प्यासी थी… मुझे कोई ऐसा मर्द मिला ही नहीं कि मेरी गांड की प्यास बुझा सके.

आज बहुत दिनों बाद एक दोस्त की शादी में जाने का मौका मिला था.मेरी गाड़ी में मुझे पुलकित और टॉम को ले जाना था पर आखिरी समय में टॉम का प्लान कैंसिल हो गया.

मैंने पुलकित को पिक किया और हम दोनों शादी के लिए निकल गए.

रास्ते में हमारे बीच थोड़ी बहुत बातें हुईं और हम दोनों शादी में पहुंच गए.

वहां उन लोगों ने दारू का पूरा इंतजाम कर रखा था.दारू पीकर हम दोनों मस्ती में डांस कर रहे थे.

शादी में मेरे दोस्त का कज़िन बार बार मुझे छेड़ रहा था.शायद मैं उसे पसंद आ गया था.वो बार बार मेरी गांड पर हाथ लगा रहा था.

उसके हाथ लगाने से मेरी गांड की खुजली बढ़ गयी थी.मेरी गांड भी बहुत दिनों से प्यासी थी, उसके हाथ के टच से मेरे लौड़े में जान आ गयी थी.मेरा मन सेक्स करने के लिए बेचैन हो गया था.

थोड़ी देर डांस करके मुझे पेशाब लगी तो मैं टॉयलेट जाने को हो गया.

मैंने इधर उधर देखा, पुलकित नहीं दिखा तो मैंने अकेले ही जाने का सोचा.

मैं वॉशरूम में जाकर एक पॉट में अपने आपको हल्का कर रहा था.उस वक्त मेरा सारा ध्यान अपने उस फ्रेंड के कजिन के लंड पर लगा था.

मैं उसी के बारे में सोचने लगा कि वो मेरी गांड सहला रहा था.और मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैं अपने आपमें इतना मस्त था कि ध्यान ही नहीं प्रिया कि फ्रेंड का कज़िन साथ वाले में टॉयलेट ही मूत रहा था और मुझे देख रहा था.

उसने एकदम से आवाज़ लगाई तो मैं अचानक मुड़ा.मैंने देखा कि वो अपना लंड हिला रहा था.

उसका काला लंड कोई 6 इंच का था और पूरा खड़ा था.वो मुझे अपना खड़ा लंड दिखा रहा था.

मैं उसके हथियार को देख कर एकदम शॉक्ड था.

उसने पूछा- कैसा लगा?नशे की वजह से मैं कुछ बोल नहीं पाया.

वो धीरे से मेरे पास आ गया और बोला- यार तू बहुत मस्त है.

उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख प्रिया.उसका लंड छूते ही मुझे एकदम से करंट सा लगा.

मैं बोला- क्या कर रहा है यार?उसने बोला- चूस दे यार एक बार.

मैंने बोला- मैं ये सब नहीं करता.वो बोला- लौड़ा तो तूने बहुत ही अच्छे से ऐसे पकड़ा है, जैसे मेरा लौड़ा कहीं भाग ही जाएगा.

ये सुनकर मेरा ध्यान गया कि मैंने उसका लौड़ा अभी भी पकड़ा हुआ है.मेरा भी लौड़ा खड़ा था और पैंट से बाहर ही था.

वो बोला- तेरा भी खड़ा है, चूसना नहीं तो हिला ही दे … अब पकड़ तो तूने लिया ही है.

अब तक मैं भी कुछ पिघल गया था. मैंने उसका लौड़ा हिलाना शुरू कर प्रिया.

वो बोला- यार यहां कोई देख लेगा … बाहर गाड़ी में चलें!मैंने बोला- चलो.

हम दोनों गाड़ी में आ गए.

उसके पास एसयूवी थी.हम दोनों गाड़ी में बैठ गए. उसने सनशेड्स लगा दिए और अपना लौड़ा निकाल कर बाहर कर प्रिया.फिर वो बोला- अब पकड़ ले यार.

मैंने उसका लौड़ा पकड़ा और हिलाना शुरू कर प्रिया.वो एक हाथ मेरी शर्ट में डाल कर मेरी छाती को सहलाने लगा.

मेरी हवस बढ़ती जा रही थी.

उसने मेरे निप्पल पर ज़ोर से चुटकी मारी, तो मेरी आह निकल गयी.उसे पता चल चुका था कि मैं गर्म हो रहा हूँ.

उसने दूसरे हाथ से ऊपर से ही मेरा लौड़ा सहलाया और मेरे निप्पल को दबाना शुरू कर प्रिया.

मैं मदहोश होता जा रहा था.

तभी उसने मेरे कान के पास आकर मुझे किस किया और मेरे कान की लौ पकड़ कर चूसने लगा.

मैं पागल हो गया.उसके लंड पर मेरे हाथ की पकड़ बढ़ गयी थी.

वो धीरे से बोला- एक किस ही कर ले यार.

वो ये कह कर एकदम से मेरे होंठ चूमने लगा.मैं पागल होता जा रहा था.मैंने दूसरे हाथ से उसके सिर को पकड़ा और तेज़ी से लिप किस करने लगा.

अभी उसकी जीभ मेरे अन्दर और मेरी उसके अन्दर आ गई थी.हम दोनों ही इस चुम्बन का मजा लेने लगे.

करीब 5 मिनट तक ज़बरदस्त लिपकिस करने के बाद हम लोग हट गए.

वो धीरे से बोला- एक बार लंड चूस दे यार!

मैं फुल पिघल चुका था लेकिन मैंने थोड़ा नखरा किया.

वो समझ गया कि मेरा मन है.उसने मेरे सिर के पीछे हाथ रख कर उसने मुझे झुका प्रिया और अपने खड़े लंड की तरफ मेरे मुँह को ले गया.

अगले कुछ ही सेकेंड्स में उसका पूरा 6 इंच का लौड़ा मेरे गले तक पहुंच चुका था.मैं अब उसके लंड को किसी कुल्फी की तरह चूस रहा था और वो मस्त आहें भर रहा था.

मुझे भी लौड़ा चूस कर मज़ा आ रहा था.

अचानक ही उसने मेरा सिर अपने लंड पर पूरा दबा प्रिया और अपना पूरा माल मेरे गले में उतार प्रिया.

वो निढाल होकर सीट पर निढाल हो गया पर मेरी ठरक अधूरी रह गयी.मेरी गांड प्यासी रह गयी.

हम दोनों शादी में अन्दर आ गए.

मैं शादी में आ तो गया था लेकिन मेरा मन नहीं लग रहा था.अब मेरा मन किसी मोटे लंड से चुदने का था.मेरी गांड अब लौड़ा मांग रही थी.

मैंने पुलकित और दोस्त अक्षय ने थोड़ा सा कुछ खाया, खाने में मज़ा नहीं आया था तो हम लोग फिर से दारू पीने चल दिए.उधर स्नेक्स लेकर दारू पीने लगे.

मेरे मन में सिर्फ़ अपनी गांड की चुदाई चल रही थी.

एक बार तो मेरा दिल उसी फ्रेंड के कजिन पर आ गया लेकिन वहां कुछ नहीं कर सकता था तो मन मार कर रह गया.

उसी के बाद फिर से डांस होने लगा.नाचते नाचते मेरा हाथ पुलकित के लंड पर लग गया तो पता चला कि उसका लौड़ा एकदम हार्ड था.

मेरे मन में कुछ आस जाग गई. अब मेरा सारा ध्यान पुलकित पर आ गया था.

मैंने नाचते हुए एक दो बार फिर से उसके लंड को टच किया.पुलकित को भी शायद मेरी इस हरकत का पता चल गया था और वो भी जानबूझ कर मेरे पीछे आकर अपना लौड़ा मेरी गांड पर टच कर रहा था.

फाइनली खूब सारी दारू, डांस और मस्ती के बाद घर वापस आने का टाइम हो गया.

पुलकित और मैं मेरी गाड़ी में बैठे और घर के लिए निकल गए.

थोड़ी देर तक दोनों चुप बैठे थे.फिर मैंने बात शुरू की और उसकी जांघ पर हाथ रख प्रिया.

वो कुछ नही बोला तो मैं धीरे धीरे अपनी उंगलियां चलाने लगा.

अब पुलकित बोला- ये क्या कर रहा है सैंडी!मैं बोला- वही, जो तुम डांस फ्लोर पर नहीं कर सके थे.

पुलकित बोला- हम्म … तो लगा गाड़ी कहीं अंधेरे में.मैंने एक सुनसान जगह देख कर गाड़ी साइड में लगा दी.

वो बोला- क्या पसंद है?मैं बोला- तुम.

पुलकित बोला- तो आ जा.उसने मेरा चेहरा पकड़ा और लिप किस करने लगा.

एक लंबी किस करते करते उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मेरे सिर को अपने पैरों की तरफ झुका प्रिया.मैंने भी फट से उसका खड़ा लौड़ा अपने मुँह में भर लिया.

उसकी आह निकल गयी.

दो मिनट लंड चुसवाने के बाद वो बोला- सैंडी रुक जा!मैंने पूछा- क्या हुआ?

वो बोला- मेरा झड़ जाएगा.मैं बोला- तो?

वो बोला- मेरा अन्दर लेगा क्या?मैं बोला- कंडोम है क्या?

वो बोला- नहीं.मैं बोला- फिर क्या करें?

वो बोला- कोई बात नहीं तू चूस.मैंने लंड चूसना शुरू कर प्रिया.

दो मिनट में ही वो बोला- मेरा रस आने वाला है.मैं हाथ के इशारे से बोला- झाड़ दे मुँह में ही.

वो आ आ करते हुए मेरे मुँह में झड़ गया.मैं फिर से प्यासा रह गया.

हम दोनों चल दिए लेकिन आगे जाम लगा था.आधे घंटे में किसी तरह से जाम से निकले.

इस समय हम दोनों मेरे ऑफिस में करीब थे.

मेरी प्यास नहीं बुझी थी तो मैं बोला- पुलकित करेगा क्या?वो बोला- कंडोम!

मैं बोला- मैं जुगाड़ करता हूँ.वो बोला- ओके.

मेरे पास ऑफिस की चाबी थी. मैं कार को बाहर खड़ा करके ऑफिस खोला और उसको अन्दर आने को बोला.

वो अन्दर आ गया.हम दोनों ने चिपक कर बॉडी प्ले किया और सारे कपड़े उतार कर पीछे वाले सोफे पर लेट गए.उसका लंड खड़ा नहीं हो रहा था.

मैंने लंड चूस कर उसे खड़ा किया, अपनी दराज से कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ाया और उससे बोला- बता कैसे चोदेगा?वो बोला- घोड़ी बन जा.

मैं घोड़ी बन गया और उसने अपना लंड मेर छेद पर लगा कर झटका दे प्रिया.उसका लौड़ा गांड के अन्दर घुस गया.

वो बोला- तेरी तो खुली हुई है.मैंने बोला- हां क्रीम लगा कर खोली है, तू मज़े ले और दे.

वो धकापेल चोदने में लग गया.

अब मुझे कुछ शांति मिली और गांड को राहत.

दस मिनट तक ताबड़तोड़ गांड में लंड चला मगर पुलकित का लंड झड़ ही नहीं रहा था.

मैंने पूछा- क्या हुआ … रस टपका न!वो बोला- एक बार झड़ने के बाद मुझे देर लगती है.

मेरी गांड भी पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी.

मैंने दो मिनट बाद फिर से बोला- अब तो झड़ जा मेरी जान!वो बोला- बस दो मिनट और … तू बस एक बार फिर से चूस दे.

मैंने मना कर प्रिया.

वो मुझे और तेज़ तेज़ चोदने लगा.

मैं आह आंह करते हुए झड़ गया और अपनी गांड हटा कर लेट गया.

इससे पुलकित प्यासा ही रह गया.

वो बोला- मेरा तो झड़ जाने दे!मैंने कहा- जरा रुक जा दम ले लेने दे.

मैं दो मिनट सीधा पड़ा रहा. मेरी गांड लुपलुप कर रही थी.पुलकित मेरे होंठों को चूसने लगा.

कुछ ही देर में मैं फिर से उठ गया और उससे बोला- चल आ जा!

उसका लंड ढीला सा हो गया था. वो बोला- इसे टाईट तो कर मेरी जान.

मैंने पुलिकत के लंड को चूसना चालू कर प्रिया और उसके लंड को अपनी गांड में लेने लायक कड़क कर प्रिया.

वो बोला- चल घोड़ी बन जा.मैंने कहा- नहीं इस बार तू आगे से ही अन्दर डाल दे.

उसने मेरी टांगें ऊपर उठाईं और मेरी टांगों को मेरे सीने से मिला दीं.इस पोजीशन में मेरी गांड उसके सामने खुल गई थी. उसने लंड में थूक लगाया और मेरी गांड पर सैट कर प्रिया.

मैंने उसे देखा तो वो मुस्कुराने लगा.मैंने भी स्माइल दे दी.

उसी पल उसने अपना लंड मेरी गांड में सरका प्रिया.

एक बार फिर से मेरी गांड की चुदाई होने लगी.

कोई दस मिनट बाद पुलकित ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया और मुठ मारने लगा.मेरा लंड भी झड़ने को हो गया था. हम दोनों एक साथ झड़ गए.

उसका लंड मेरी गांड में निकल गया और मेरे लंड का पानी उसके चेहरे से जा लगा.

हम दोनों को ही सुकून मिल गया था.

फिर उठ कर हम दोनों ने सफाई की और आराम से बैठ गए.

पुलकित ने मुझसे पूछा- तेरे पास ऑफिस में दारू रहती है?मैंने कहा- मेरे सब इंतजाम है. तू चिंता मत कर!

हम दोनों ने दो दो पैग लगाए और सिगरेट पीने लगे.कुछ देर बाद फिर से मूड बन गया और पुलकित ने मेरी एक बार फिर से गांड मारी.

इस वक्त रात के दो बज गए थे.हम दोनों ऑफिस से निकल कर घर आ गए.

उस पूरी रात मैं अपनी गांड में उसके लंड का अहसास करता रहा.

इसके बाद से पुलकित मेरी गांड जब चाहे मारने लगा. मुझे भी अपनीप्यासी गांडके लिए एक मजबूत लंड मिल गया था.

आपको मेरी ये गे सेक्स विद मेन कहानी कैसी लगी. प्लीज़ मुझे मेल करेंsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

प्रदीप भदौरिया

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

उर्मिला

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

टीना बैसा

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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