किस्से पर वापस जाएं
पड़ोसी पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 882 बार

डॉक्टर ने पंडित की गांड मारी

आजाद गांडू

15 Jun 2026 को प्रकाशित

डॉक्टर ने पंडित की गांड मारी
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

पिछली कहानी:मेडिकल स्टूडेंट्स को गांड चुदाई का शौक

फ्रेंड्स, मैं आपका पुराना साथी आजाद गांडू एक बार पुनः अपनी गे सेक्स कहानी का मसाला लेकर हाजिर हुआ हूँ.

एक पंडित जी थे उनका नाम भूरे था. सब लोग उन्हें भूरे महाराज या पंडित जी के नाम से जानते थे.वे गे सेक्स में टॉप थे और कई लौंडों की बजा चुके थे.

एक बार वे अपने परिचित डॉक्टर सुरेंद्र सर के साथ नाश्ता करने उस डॉक्टर के हॉस्टल की मेस में गए थे.उधर मेस के ठेकेदार ने पंडित जी को पहचान लिया.

वह पंडित जी से बड़े प्रेम से बोला- अरे भूरे महाराज … यहां कैसे? कौन के संग?

तभी सुरेंद्र सर ने आगे बढ़कर जवाब दिया- अरे ये पंडित जी हैं, इनके साथी सब मेरे गेस्ट हैं. आप मेरे नाम में लिख लें.

ठेकेदार ने कहा- अरे वह बात नहीं है सर … भूरे महाराज मेरे गांव से ही हैं. इनकी मां गांव के लिहाज से मेरी बहन लगती हैं. ये मेरे भांजे लगते हैं. इनके पिताजी घर जमाई बनकर मेरे गांव में बस गए. इनके नाना के कोई बेटा न था. इनके पैसे नहीं लगेंगे और न इनके संगियों के … चाहे जैसे दिन रहें. मैं पाप में पड़ जाऊंगा. ब्राह्मण और भांजे … डॉक्टर साहब आप रहन दो, आप लोग तो बस नाश्ता करो.

ठेकेदार ने पंडित जी को संबोधित करते हुए कहा- झाँ कैसे का काम कर रहे हो? कहां रह रहे हो?

पंडित जी बोले- मम्मा अरे तुम अच्छे मिले … हमें ढोलक, मजीरा, घुँघरू दिलवा सकते हो क्या?फिर पंडित जी सुरेंद्र सर की ओर इशारा करते हुए बोले- इनके बरामदे में फागें-भजन गाने हैं.

ठेकेदार ने कहा- सब मिल जाएंगे, पर बजाएगा कौन?पंडित जी बोले- एक जने गाएगा, दूसरे नाचेंगे … और तो सब डॉक्टर हैं, जे सब अंगरेजी नाच, नाच लेते हैं. फागें तो न नाच पाएंगे न गा पाएंगे. मम्मा तुम फागें गा लियो … संगे ढोलकऊ बजा दियो!

ठेकेदार बोला- हां मैं सब कर लेता, पर डॉक्टरन में और लड़कन में अच्छा नहीं लगेगा. तुम्हारे संग और बात है, फिर जे बार-बार परेशान करेंगे. तुम मेरे मौड़ा सुमन को ले जाओ, वह काम कर देगा.पंडित जी बोले- वह लड़का फाग की तेज ढोलक बजा लेता है?

ठेकेदार बोले- ज्यादा अच्छी तो नहीं, पर काम चलाऊ बजा लेता हूँ. तुम्हारा काम चला देगा.यह कह वह अर्थ पूर्ण अंदाज में मुस्कुराने लगा.

पंडित जी ने नाश्ता करके बरामदे में बैठक जमा ली.आज इतवार था, सब विद्यार्थी फ्री थे. पंडित जी ने समीर को कृष्ण बना दिया. पूरी ड्रेस तो नहीं थी, पर उन्होंने उसे जींस-टी-शर्ट में ही सर पर साफा बांधकर खड़ा कर दिया.

पंडित जी और उनका साथी शाहिद गाने लगे. पहले उन्होंने रसिया गाया. वे बहुत तेज नाच रहे थे और लोग-स्टूडेंट वहीं खड़े-खड़े ताल देने लगे.फिर पंडित जी ने सुरेंद्र को खींचा और नीरव को भी पकड़ा.

महाराज बोले- शर्माने की बात नहीं, बस साथ देते रहो.

सब लोग नाचते रहे.तीन-चार घंटे तक नाचे.

गाना सुनकर हॉस्टल सुपरिंटेंडेंट साहब, उनकी फैमिली और दो-तीन अन्य स्टाफ भी आ गए.

पंडित जी का नाच पसंद आने पर डीन साहब से चर्चा की गई और कॉलेज के ऑडिटोरियम में उनका कार्यक्रम रखा गया.

अब उन्होंने और बढ़िया प्रदर्शन किया. गजलें, फिल्मी गीत भी गाए. वे अपने बजाने वाले, नाचने वाले और स्टाफ ले आए.

उस दिन सारे स्टाफ और विशिष्ट अतिथि भी आए. उनको बाद में अन्य कॉलेजों से भी निमंत्रण मिलने लगे. आसपास के शहरों में भी उनका मंचीय कार्यक्रम होने लगा.

फिर इसी शहर के एक प्रवासी ने उन्हें अमेरिका आमंत्रित किया, तो विलायत रिटर्न का ठप्पा लग जाने से धंधा बढ़ गया.चारों ओर शोहरत हो गई.

वे इस सबका श्रेय सुरेंद्र को देते थे.

एक दिन वे नीरव से मिलने आए और उससे अकेले में मिलने की बात की.

नीरव बोला- अकेले में मिलना है तो रात में आना, आपको खुश भी कर दूंगा.पंडित जी बोले- अरे डॉक्टर साहब गलत न समझें. वह बात नहीं, कुछ और बात है!

नीरव बोला- उसके सिवा और क्या बात है? मैं पसंद नहीं तो दूसरा नमकीन दिलवाऊं?पंडित जी बोले- वह बात है ही नहीं!

वे उसे उसके रूम में ले गए. तब उससे धीरे से बोलने को हुए.

पहले वे कुछ हिचकिचा रहे थे. फिर बोले- डॉक्टर साहब, मुझे पेशाब में जलन होती है और कुछ करने पर जल्दी झड़ जाता हूँ!

नीरव ने सारी बात सुनी और उन्हें अपने परिचित सीनियर डॉक्टर साहब के पास ले गया.

वे डॉक्टर सुधीर थे. एम.बी.बी.एस. पूरा हो जाने पर आगे एम.डी. कर रहे थे.दो कमरों के मकान में किराए से रह रहे थे.

दोनों शाम को मिले.पंडित जी से डॉक्टर साहब सुधीर ने पूरी तकलीफ सुनी. उनके सारे कपड़े उतार कर परीक्षण किया, फिर उन्हें कुछ जांच लिख दीं.

पैथोलॉजी लैब का नाम बताया और कहा- पेशाब-खून की जांच करा लें. दो दिन बाद इसी समय मिलें.

उन्होंने बार-बार पूछा- दर्द तो नहीं होता? सूजन तो नहीं है?

पंडित जी ने इनकार किया.तो नीरव चुप न रह सका, वह बोला- सर इनका बहुत बड़ा है. मैंने तो इनका खड़ा अपनी गांड में भी झेला है. बहुत दर्द देता है, डलवाना मुश्किल हो जाता है. तीन दिन तक दर्द करती है.

सुधीर मुस्कुरा कर बोले- तो ऐसा काम क्यों करते हो?नीरव बोला- अरे सर, और दूसरे से करवाने में उतना मजा नहीं आता. अब इतना बड़ा पंडित जी का ले लिया तो दूसरे से लगता ही नहीं है कि क्या ले रहे हैं.

पंडित जी बुरी तरह घबरा गए और झेंप गए.वे बोले- अरे नीरव भाई … मेरा मतलब डॉक्टर साहब …

नीरव बोला- तो मैं झूठ कह रहा हूँ? नहीं मारी?यह कह कर वह दाँत निपोरने लगा.

सुधीर बोले- घबड़ाएं नहीं, ये शिकायत भी इस तकलीफ की वजह हो सकती है. आप जांच कराएं, फिर मिलेंगे.

रास्ते में पंडित जी बोले- अरे नीरव भाई, ये क्या किया? अपनी आपसदारी की बात थी, अब डॉक्टर साहब जाने क्या सोचेंगे.नीरव बोला- वे कुछ नहीं सोचेंगे, आप सवेरे मेरे पास आ जाना. ये सुबह की सोकर उठने के बाद पहली पेशाब लेने के लिए डब्बी है. अब कल मिलेंगे. चलता हूँ.

तीन-चार दिन बाद पंडित जी जांच की रिपोर्ट लेकर डॉक्टर साहब के पास शाम को हाजिर हुए.

उन्होंने उन्हें एक इंजेक्शन लगाया, दवा-गोलियां दीं, शीशी दीं और समझाया.एक इंजेक्शन नीरव की भी जांच करके उसे लगा दिया.

डॉक्टर साहब ने उन सबको बिठाए रखा. एक घंटे बाद जाने की परमिशन दी.

आज पंडित जी ने बार-बार निवेदन किया- आपने फीस नहीं ली.डॉक्टर सुधीर बोले- ले लेंगे जल्दी क्या है.

पंडित जी बोले- बार-बार आपके पास आता हूँ तो संकोच होता है. आप क्या सोचेंगे?सुधीर बोले- मैं कुछ नहीं सोचता, सब आप ही सोचते हैं. फीस लूंगा. आप स्वस्थ हो जाएं, जो मांगूँगा देना पड़ेगा, तब मना मत करना.

पंडित जी बोले- बस भर मेरी ताकत में मांगेंगे तो दूंगा. आपका अहसान है.सुधीर बोले- हां, ऐसी ही चीज मांगूंगा जो आपके बस में है. तब मना मत करना, बहाने बाजी नहीं. नीरव से पूछ लेना.

पंडित जी कुछ-कुछ तो समझ गए और मुस्कुराने लगे- डॉक्टर साहब, ठीक है मैं तैयार हूँ. कब आना है?नीरव बोला- मैं बता दूंगा. अब चलें.

रास्ते में पंडित जी ने पूछा- मैं जो सोच रहा हूँ, वही न?नीरव बोला- हां वही, कल आना है, रात दस बजे के बाद. फुरसत में तो रहोगे न?पंडित जी बोले- नहीं होऊंगा तो टाइम निकाल लूंगा. कहां आना है? तुम्हारे पास आऊं?

नीरव बोला- अरे ऐसे कामों में तो अकेले जाते हैं, फिर भी आप कह रहे हो तो मैं सीधे डॉक्टर साहब पर पहुंच जाऊंगा.इस बात को पांच दिन हो गए थे. पंडित जी की तबीयत अब ठीक थी, दवा से बहुत फायदा हुआ था.

उस वक्त रात को दस बजने में पांच मिनट बाकी थे कि उन्होंने डॉक्टर साहब का दरवाजा खटखटाया.किवाड़ नीरव ने ही खोले.

पंडित जी को देखते ही वह मुस्कुराया और बोला- आप सही टाइम पर आ गए.

उनके अन्दर होते ही किवाड़ लगा दिए. डॉक्टर साहब आज पायजामा-बनियान में बैठे थे.पंडित जी को आया देखते ही डॉक्टर सुधीर खड़े हो गए और अपना पायजामा भी उतार दिया.

अंडरवियर में उनका खड़ा हथियार उचक रहा था.

नीरव ने इशारा किया. पंडित जी अपनी जींस उतारने लगे. फिर पंडित जी ने अपनी टी-शर्ट, बनियान, अंडरवियर सब उतार दिए.उनकी मस्त मस्कुलर जांघें, गोल चूतड़, बांहों में उभरती मछलियां, बिल्कुल अन्दर धँसा पेट, उभरा सीना और घुँघराले कंधों तक बाल देख कर सुधीर मस्त हो गए.

पंडित जी ने आज सबेरे ही जेंट्स हेयर ड्रेसर से क्लीन शेव और फेशियल करवाया था. चेहरा चमक रहा था.वे वैसी ही बहुत खूबसूरत और नमकीन थे. गोरे भी खूब थे और आज तो शायद कोई सेंट भी लगाए थे, सो महक रहे थे.

सब मिला कर पंडित जी आज किसी दूसरे ही लोक के प्राणी लग रहे थे.

नीरव भी उन्हें देखता रह गया.सुधीर जी भी उन्हें देखने लगे.शायद उनके आगे अपने को कमतर अनुभव कर रहे थे.

वैसे सुधीर भी लंबे थे, पंडित जी से लगभग दो इंच लंबे होंगे.

उन्हें काला तो नहीं कह सकते, हां सांवले थे. तीखे फीचर, स्लिम, स्मार्ट, सुंदर और अच्छी पर्सनालिटी के मालिक थे, पर पंडित जी के मुकाबले कम थे.उनकी जांघें और बांहें पंडित जी के आगे कुछ नहीं थीं. पेट भी कुछ आगे को निकला था, ज्यादा नहीं था, पर भविष्य का संकेत देने लगा था.

फिर पंडित जी का लटकता लंड दोनों को चुनौती दे रहा था.एक तो इसका स्वाद चख चुका था, पर आज सुधीर जी के सामने लटका हुआ भी भयंकर लग रहा था.

सुधीर सर ने पंडित जी को टेबल पर टिकाया और उन्हें आधा लेटने को कहा.फिर वे एक ट्यूब ले आए और उसे पंडित जी की गांड में पिचका दिया.

अब अपनी एक उंगली डालकर गोल-गोल घुमाते रहे.फिर दो उंगलियां डालकर घुमाने लगे.

अब वही ट्यूब से निकाल कर उसकी क्रीम को अपने लंड पर चुपड़ ली और पंडित जी की गांड पर लंड टिका दिया.सुधीर सर बोले- डाल रहा हूँ, ढीली रखना.

पंडित जी कुछ समझ पाते कि डॉक्टर साहब ने लंड गांड के अन्दर कर दिया.पंडित जी की आह निकली और वे लौड़े को लील गए.

अब डॉक्टर साहब धक्के दे रहे थे.अन्दर-बाहर, अन्दर-बाहर, धच्‍च-फच्‍च, धच्‍च-फच्‍च जोर से कमर हिला रहे थे.एक बार तो पूरा लंड बाहर निकल आया, डॉक्टर साहब को पता ही नहीं लगा.

तब पंडित जी ने बताया- अरे डॉक्टर साहब बाहर आ गये हैं.तब नीरव ने भी देखा और उन्हें बताया- हां सर, बाहर है.

वे अनाड़ी चुदक्कड़ सा व्यवहार कर रहे थे. जल्दी ही बाहर ही झड़ गए.लंड ढीला पड़ गया.

सब कुल मिलाकर दस-बारह मिनट ही लगे होंगे. उसमें भी दो बार लंड बाहर आ गया था.

अब पंडित जी ने ढीली कर ली थी या गांड में डाली गई दवा का असर था.वे अपनी मराते समय मुस्कुरा भी रहे थे. डॉक्टर सुधीर से ज्यादा तेज झटके दे रहे थे.पंडित जी अपनी गांड ऐसे चला रहे थे कि डॉक्टर साहब खुद ही कहने लगते कि यार ठहर जाओ ज्यादा जल्दी नहीं करो!

कुछ ही देर में डॉक्टर झड़ कर अलग हो गए और उनका लंड ढीला पड़ गया.वे थोड़ी देर रुके रहे, फिर ढीला हथियार निकाल कर निढाल होकर कुर्सी पर बैठ गए.

नीरव ने पानी लाकर उन्हें पिलाया.

पंडित जी फ्रेश थे, मुस्कुरा रहे थे.अपने कपड़े पहनने लगे, फिर तैयार होकर बैठ गए.

डॉक्टर साहब ने पंडित जी को धन्यवाद दिया- बहुत मजा आया आपने कॉपरेट किया, कोई नखरा, विरोध, बहाना नहीं किया. इस उम्र में भी आप कितने माशूक, नमकीन, तगड़े और मस्कुलर हैं … अपोलो जैसे … थैंक्यू!

कुछ देर बाद डॉक्टर साहब हल्के से संकोच में बोले- मेरी करोगे?पंडित जी बोले- अरे नहीं डॉक्टर साहब आपको आनन्द देना था. मैंने अपनी तरफ से भरपूर कोशिश की. आपको कैसा लगा?

डॉक्टर साहब बोले- बहुत अच्छा मैंने कई लौंडों की मारी है, पर इतना मजा आया मानो जन्नत की हूर का छेद लग रहा था. मुझे थोड़ी देर लगी, आपको परेशानी तो नहीं हुई?पंडित जी बोले- नहीं, बिल्कुल नहीं आप जैसी हस्ती ने मारी, जिसे कई लौंडों की मारने का तजुर्बा है. मेरी खुशकिस्मती है कि आपके हथियार को सेवा दी है, वाह मजा आ गया … अब इजाजत दें, चलूँ.

डॉक्टर साहब बोले- अरे पंडित जी, मेरी नहीं मारना तो क्या आप नीरव की मारना चाहेंगे? ये तो बहुत माशूक है, इसकी मारेंगे?पंडित जी बोले- डॉक्टर साहब, आपकी बात सही है. ये बहुत माशूक है, नया लौंडा है. पर बहुत नखरे करता है. डॉक्टर नीरव जल्दी तैयार नहीं होंगे. आपकी जुबान खाली जाए, मैं नहीं चाहता. फिर कभी … अब इजाजत दें.

वे दोनों बाहर आ गए.

सड़क पर थोड़ी दूर जाने पर नीरव बड़े जोर से हंस पड़ा- अरे दस मिनट में निपट गए आपसे … और कह रहे थे बड़ी देर लगी, आप भी हां में हां मिला रहे थे.

पंडित जी बोले- अरे डॉक्टर नीरव, अपना काम पड़े तो सब सुनना पड़ता है. हां में हां मिलाना पड़ता है. गांड भी मरानी पड़ती है. मेरे पास इतने रुपये नहीं हैं, मजबूरी है.नीरव बोला- अरे पंडित जी, आप उन्हें मक्खन लगा रहे थे, मुझे हंसी आ रही थी वे अपने बड़े लंड को भयंकर कह रहे थे. जिसने आपका भयंकर लंड देखा न हो, वह तो उनकी बात मान लेगा. उनकी दस मिनट की चुदाई को वे कह रहे थे कि बहुत देर लगी. यहां मैं डेढ़-डेढ़ घंटे गांड फाड़ू लंड पिलवा चुका हूँ, तो उनकी बात पर हंसूँ नहीं तो क्या रोऊं.

पंडित जी मुस्कुरा दिए.

दोस्तो, इन लोगों की हंसी की बातें सुनकर आपको भी अच्छा लग रहा होगा.आप बताइए कि आपको यह गे सेक्स कहानी कैसी लगी. मुझे मेल लिखेंsupport@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

बीवी को मालिश वाले के बड़े लंड से चुदवाया- 2
पड़ोसी

बीवी को मालिश वाले के बड़े लंड से चुदवाया- 2

लॉन्ग डिक सेक्स कहानी में मेरी बीवी को चुदाई पसंद है पर मैं उसकी जोरदार चुदाई नहीं कर पाता. तो मैंने उसके मजे के लिए लम्बे लंड वाले की तलाश शुरू की.

17 मिनट 1,205
पति को धोखा देकर यार से चुदी होटल में
पड़ोसी

पति को धोखा देकर यार से चुदी होटल में

माय हॉट पुसी स्टोरी में मैं अपने पड़ोस के लड़के को पसंद करती थी. मैं उसके जवान लंड का मजा लेना चाहती थी. मैंने उसका लंड अपनी चूत में कैसे लिया?

9 मिनट 845
पड़ोसन भाभी और मेरी वासना की शुरुआत
पड़ोसी

पड़ोसन भाभी और मेरी वासना की शुरुआत

गुजराती भाभी सेक्स कहानी में मेरे पड़ोस में एक नया जोड़ा आया. एक दिन भाभी नहाकर बालकोनी में कपड़े फैला रही थी. मैं उनके सेक्सी बदन को देखने लगा.

10 मिनट 728

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।