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Gay Chudai • पठन समय: 13 मिनट • पढ़ा गया: 231 बार

चाचा के साथ अनोखी रात-4(Chacha ke sath anokhi raat-4)

lovegurudel2

25 Jul 2009 को प्रकाशित

चाचा के साथ अनोखी रात-4(Chacha ke sath anokhi raat-4)
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हेलो दोस्तों आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ कर बहुत अच्छा रिस्पॉन्स दिया। इसलिए आज मैं आगे की कहानी लेकर आया हूं। अब आगे-

मैं एग्जाम ओवर करके चाचा (संजय) के साथ उदयपुर के लिए 4 बजे जयपुर से बस से निकल गया था। पूरे रास्ते चाचा ऐसे व्यवहार कर रहे थे, जैसे कल कुछ हुआ ही ना हो। एक जगह बस किसी ढाबे पर रुकी। तब सब नीचे चले गए। तो मैं बड़े गुस्से में बोला.

मैं: जब आपको पता था कि आप मुझे लेकर साथ आओगे, तो मुझे सुबह क्यूं नहीं बताया? मुझे कितना रोना आ रहा था, आप चले जाते तो…

चाचा (बड़े प्यार से): तो क्या बाबू, क्या होता फिर? मेरे जाने से इतना गुस्सा कि तुम रोने ही लग गए। ऐसा क्यूं बाबू, बोलो?

मेरा पास इसका कोई जवाब ही नहीं था, कि क्या बोलूं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि मेरे साथ ये क्या हो रहा था।

चाचा: तुम मेरी जान हो बाबू। क्यों टेंशन ले रहे हो? सब तुम्हारे लिए ही कर रहा हूं। घर पहुंच कर विधि आगे शुरू करेंगे। अबकी बार तो और भी मजे आएंगे बाबू। तो बोलो, करोगे मजे?

मैं बिल्कुल चुप था.

चाचा: मत बोलो, मुझे समझ आ गया मेरा बाबू क्या चाहता है। चलो हम भी कुछ खा लेते हैं बाहर जाकर।

रात के 7:30 बज रहे थे। बाहर ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी। अप्रैल के महीने में बहुत ज्यादा बारिश का मौसम हो रहा था। इतनी ठंडी हवा में भी मेरे चाचा के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही थी। मेरा तो पहले से उनका चूसने का मन कर रहा था। लेकिन बोलने से शर्म आ रही थी। चाचा का भी मन तो बहुत था, लेकिन वो भी सार्वजनिक स्थान पर कुछ करने से डर रहे थे।

बस स्टार्ट हो गई। अब फिर से चाचा नॉर्मल रिएक्शन दे रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि चाचा ऐसा क्यूं कर रहे थे। इतनी ही देर में बस की लाइट ऑफ हो गई। अब पूरी बस में बिल्कुल अंधेरा था। मैं विंडो सीट पर था, और वो मेरे साथ। वो मेरे कंधे पर से हाथ मेरी शर्ट के अंदर मेरे निपल पर रख कर जोर-जोर से दबाने लगे।

मैंने भी जोश-जोश में उनके लंड पर हाथ रख दिया। उनका लंड तो फुल मूड में था। जैसे अभी पेंट से निकल जाएगा। चाचा मेरे चूचों को दबा रहे थे, और मैं उनके लौड़े को। 15-20 मिनट तक बड़े प्यार से हम एक-दूसरे को ठंडी-ठंडी हवा के साथ गरम कर रहे थे।

मैंने भी उनकी पेंट की ज़िप खोल कर, उसमें हाथ डाल कर, उनका गरम-गरम लौड़ा पकड़ कर हिलाने लगा। प्यार-प्यार से उनका लौड़ा हिलाते-हिलाते, हम एक-दूसरे में मदहोश होते जा रहे थे। मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था। तभी मैंने नीचे होकर उनका लोड़ा मुंह से लगाने की कोशिश की। लेकिन केवल उनका टोपा मेरे मुंह में ही आ रहा था।। चाचा बहुत मदहोश हो गए थे।

तभी उनका गरम-गरम लावा मैंने पूरा चाट लिया, एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने दी। ऊपर उठा कर चाचा ने मुझे कस कर पकड़ लिया। अब तक मैं पिछले 2 दिनों से 3 बार चाचा के लौड़े का रसपान कर चुका था। चाचा और मुझे अब नींद आ रही थी।

2:30 बजे अचानक बस रुकी। उदयपुर आ चूका था। हम दोनों बस से नीचे उतरे। तभी चाचा के लिए कार तैयार थी। हम उसमें बैठ कर घर पहुंच गए।

घर तो बहुत बड़ा था उनका। जैसे ही हम घर में गए वहां लाइट गई हुई थी। उनके चौकीदार (गोपाल, 45 साल के स्लिम फिट और 5.8 फीट की ऊंचाई) ने बताया कि साहब अभी तूफान आया था, तब से लाइट बंद है।

चाचा: कॉल करी थी आपने लाइट के लिए?

गोपाल: जी साहब कर दी थी। थोड़ी देर मैं आने का बोल रहे थे। मैं आपका सामान रख देता हूं

चाचा: रोहित तुम गोपाल (चौकीदार) के साथ अंदर जाओ। मैं अभी चेक करवाता हूं।

मैं उनके कमरे में इंतजार कर रहा था। 3:30 बज गए थे। अब मुझे भी नींद आने लग गई। पता नहीं कब आंख लग गई।

अगली सुबह 11 बजे मेरी आंख खुली तो देखा चाचा घर पर अभी भी नहीं थे।

मैं: गोपाल, चाचा कहा हैं? अभी तक क्यूं नहीं आये?

गोपाल: साहब तो रात को आ गए थे।लेकिन आप सो रहे थे। और आज उनको ड्यूटी पर जाना था। कुछ अर्जेंट काम है वहां, इसलिए जल्दी गए है। बोल कर गए हैं कोई काम हो तो कॉल कर लेना, और बाहर मत जाना। और साहब आप नहा लो। मैं बबलू से बोल कर आपका नाश्ता बनवा दूंगा।

बबलू (21 वर्ष। मस्कुलर शरीर। ऊंचाई 5.5 फीट) नौकर था, जो चाचा का काम करता था, और पास ही रहता है। मैं नहा कर तैयार होकर बाहर आया। तब बबलू मेरे लिए खाना बना चुका था।

बब्लू: सर को बोल देना दोपहर या शाम का खाना घर से भिजवा दूंगा।

मुझे खाना देकर वो बाहर चला गया। अब घर पर कोई नहीं था। मैं फिल्म देख कर, और गेम खेल कर बोर हो रहा था। फिर 3 बजे चाचा का कॉल आया

चाचा: रोहित, आराम कर लो, शाम को कहीं घूमने चलते हैं। मुझे आने में देर हो जाएगी।

9:30 बजे चाचा घर आए। जैसे ही वो घर आए, मैंने उनको कस कर पकड़ लिया और रोने लगा।

मैं: आपने इतना टाइम कहा लगा दिया? बहुत टाइम हो गया था (धीरे-धीरे मेरे चाचा की तरफ आकर्षण बढ़ता जा रहा था)

चाचा: कोई नहीं बाबू, खाना खा लो, फिर आज तुम्हारा मूड ठीक करता हूं।

खाना खा कर अब सोने का टाइम हो गया था। चाचा ने केवल लुंगी पहन ली थी। और मेने बॉक्सर और टी-शर्ट। चाचा ने पूरा घर लॉक कर दिया। गोपाल मुख्य गेट पर बने कमरे में था। उसके अलावा कोई नहीं था। वो भी कभी घर के अंदर नहीं आता था।

चाचा: बाबू 3 दिन से जो विधि पूरी नहीं हो पा रही थी, आज उसे पूरा करेंगे। आज जैसे मैं बोलूंगा तुम्हें वैसा ही करना होगा। विधि के इस भाग में अगर कोई समस्या हुई, तो तुम्हारा लंड शायद कभी बड़ा ना हो।

मैं: ठीक है चाचा। लेकिन आप कहीं मत जाना।

चाचा: बिल्कुल नंगे हो जाओ। तब तक मैं विधि का सामान लेकर आता हूं।

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थोड़ी देर बाद चाचा एक कटोरी में चंदन का पेस्ट लेकर आए। शायद उसमें कुछ मिला भी हुआ था।

मैं बिल्कुल नंगा हो गया। मेरा पूरा जिस्म कमरे की कम रोशनी में गजब चमक रहा था। मुझे नंगा देख चाचा का टावर अब खड़ा होने लग गया था। उनके अंदर का भूखा भेड़िया जाग रहा था

चाचा: मेरी पास आकर बैठ जाओ। कमर सीधी करके।

चाचा भी मेरे पीछे लुंगी उतार कर बैठ गए। हम दोनों फ्लोर पर नंगे बैठे थे। उन्होंने चंदन का पेस्ट लेकर मेरी गर्दन पर किस किया, और फिर पेस्ट लगाया। फिर मेरी बगल को चूमा और वहां भी।

निप्पल पर जैसे ही चाचा ने चूमना शुरू किया, मैं तो पागल सा होने लगा। फिर चंदन ने तो और भी मेरी बॉडी में आग लगा दी। चंदन की ठंडक मेरे निप्पल को और ज्यादा टाइट कर रही थी। ये सब 10 मिनट तक चलता रहा।

शायद इस पेस्ट में कुछ खास था। जिससे मेरी बॉडी और ज्यादा सॉफ्ट फील हो रही थी। मेरी मोटी गांड और मेरे लंड पर चाचा के हाथ के साथ ठंडा-ठंडा चंदन मेरी गर्मी बढ़ा रहा था।

मैं: आआआ चाचा बहुत मजा आ रहा है। रुको मत।

उन्होंने मुझे बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया, और मेरे पैर ऊपर करके अब उनका लंड मेरी गांड के छेद पर महसूस हो रहा था।

चाचा: थोड़ा दर्द होगा बाबू, सहन कर लेना। बाद में सिर्फ मजा आएगा।

एक ट्यूब (लुब्रिकेंट) से क्रीम लेकर उन्होंने मेरे छेद पर बड़े प्यार से मसाज शुरू कर दी।

मैं: आआआआ चाचा बहुत मजा आ रहा है।

उनकी एक उंगली मेरी गांड में जैसे ही गई, मेरी चीख निकल गई।

मैं: आआआ, बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन उन्होंने अबकी बार कुछ नहीं सुना, और वो करते रहे। 10 मिनट बाद सब नॉर्मल जैसा हो गया। फिर 2 उंगलियों से और उसके बाद 3 उंगलियों से। लुब्रिकेंट से मेरा होल बहुत सॉफ्ट हो चुका था। अब 3 उंगलियों से भी थोड़ा-थोड़ा दर्द हो रहा था। मजे की तो आप पूछो ही मत यार। जन्नत का मजा आ गया

चाचा: तुम्हारी गांड बहुत मोटी है बाबू। आपका प्वाइंट छूने के लिए मेरी उंगलियों से बड़ा कुछ चाहिए होगा। मेरा लंड ट्राई करता हूं (सही पागल बना कर मेरी गांड फाड़ने वाले थे)

बहुत सारा लुब्रिकेंट अपने लंड और मेरे छेद के अंदर तक डाल दिया। अब मेरी गांड बहुत ठंडी और मुलायम हो गई थी लुब्रिकेंट की वजह से। फिर वो मुझे किस्स करने लगे, और बड़े आराम से अपना 7‌ इंच लंबा लोड़े का टोपा मेरे छेद में उतार दिया। मैं दर्द से चिल्ला भी नहीं पा रहा था। हिलने की तो कोशिश ही बेकार थी। दर्द से मेरी आंखों से आंसू आने लगे।

वो आराम-आराम से आगे-पीछे धक्के मारने लगे। फिर अगला झटका मारा और लंड आधा मेरी गांड में चला गया। मेरी आंखों के आगे अंधेरा आ गया। थोड़ी देर में पूरा लंड मेरी गांड के पार हो गया। मैं दर्द से रोने लगा। फिर पूरा लंड बाहर निकाल कर उन्होंने एक साथ मेरी गांड में उतार दिया। मेरी आंखें अब बंद हो गई।

4 घंटे बाद मेरी आंख खुली तो देखा चाचा अब भी मेरी गांड मार रहे थे। उनका बालों से भरा शरीर पसीने से गीला हो चूका था। कमरे की लाइट में गजब सेक्सी लग रहे थे। उस पर मेरी गांड में उनका लोड़ा तो क्या बात। ये चुदाई सबसे हटके हो रही थी। क्या मस्त माहौल लग रहा था। पूरा रूम पच-पच की आवाज से गूंज रहा था

मैं: मुझे जाने दो चाचा। दर्द हो रहा है।

चाचा: असली दर्द तो कब का खत्म हो गया बाबू, ये तो मजे वाला है।

फिर वो हंसने लगे।

चाचा: मैंने बोला था बीच में रोका तो सब दोबारा करना पड़ेगा।

मैं अब फस चुका था। लेकिन मज़ा भी आने लगा था अब। चाचा का लौड़ा मुझे मेरे पेट तक महसूस हो रहा था। 7+ लंबा और 4 इंच मोटा जो था।

चाचा: चल खड़ा हो। ड्राइंग रूम (घर का मेन होल) में तेरी गांड फ़ाडूंगा।

चाचा के मुँह से गन्दी बातें चुदाई का मजा बढ़ाने लगी।‌ चाचा ने मुझे सोफे पर उल्टा लिटा कर एक झटके में पूरा लंड मेरी गांड में दे दिया। मेरी कमर और गांड का दर्द अब मजे में बदल गया था। अब तो चुदने में मुझे भी मजा आ रहा था।

चाचा: ये तेरा तीसरा राउंड है। अब तो पूरा आराम से ले रही है जान।

ये सुन कर मैं हैरान हो गया। चाचा तीसरे राउंड के बाद चुदाई कर रहे थे, लेकिन उनकी ताकत में बिल्कुल कोई कमी नहीं थी। 5 बजे तक चाचा ने चोद-चोद कर मेरी गांड का भोंसड़ा बना दिया था। फिर मेरी गांड में ही झड़ गए। उनका गर्म-गर्म लावा मेरी गांड में भर गया था, वो भी 3 बार लगातार।

उन्होंने मुझे गोद में लेकर बिस्तर पर लिटा दिया। मेरी गांड से उनका वीर्य टपक रहा था। पूरे ड्राइंग रूम का फर्श इसका सबूत था। बिस्तर की चादर खून से खराब हो गई थी। ये सुहागरात की निशानी थी। गांड भी सूज चुकी थी। ये देख कर चाचा ने मुझे दर्द की दवाई दी, और मेरे माथे पर किस्स किया।

“आज से तू मेरी लुगाई (पत्नी) हो गया बाबू” (चाचा ने बोला)

फिर हम दोनों ऐसे नंगे ही सो गए।

इसके बाद रोजाना कैसे-कैसे और किस-किस के साथ मेरी चुदाई हुई, ये अगले भाग में।

मेल: support@mohakkisse.com

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Hello dosto dil khus ho gaya aap logo ko meri last kahan achi lagi aap logo ke bahut msg mile, thanks ese hi mujhe pyar dete raho mai aur bhi bahut sari kahani aap logo ko deta rahunga jesa ki aap jaante ho mai satya hun delhi se hun. Ab mai kahan...

10 मिनट 1,010

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