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चुदाई की कहानी पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 948 बार

काजल बज गई

राज पाल सिंह

16 Oct 2012 को प्रकाशित

काजल बज गई
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प्रेषक : राज पाल सिंह

हेलौ फ्रेंड्स,

मैं राज उम्र 37 साल गुड़गाँव निवासी एक बार फिर आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ।

जैसे कि मैंने आपको बताया था कि मेरा अपनी पत्नी के साथ महीने में लगभग एक या दो बार सैक्स हो पाता है। इसलिए मैं और मेरा एक दोस्त देवेन्द्र कभी-कभी घर में दिन में लड़की लाकर या कभी-कभी बाहर किसी काल-गर्ल के साथ सैक्स करते थे। मेरा दोस्त देवेन्द्र एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सेल्स-मेनेजर है। वो हफ्ते में अकसर 3-4 दिन बाहर रहता है।

काजल से मेरी मुलाक़ात उसी ने करवाई थी। मेरे दोस्त को काजल बस में मिली थी। बस में ही उनका परिचय हो गया। रात काफी हो गई थी, इसलिये मेरे दोस्त ने काजल को घर तक छोड़ प्रिया। अगले दिन उसने मुझे काजल के बारे में बताया और यह भी बताया कि काजल की शक्ल मेरी एक पुरानी गर्ल-फ़्रेंड से मिलती है। मैं काजल से मिलने को बेचैन हो गया। मैंने मेरे दोस्त को काजल से मिलवाने के लिये कहा।

उसने काजल को फोन किया। काजल ने शाम को मार्केट में मिलने का वादा किया। शाम को हम दोनों काजल से मार्केट में मिलने गये। काजल को देख कर मैं वाकई हैरान रह गया। उसकी शक्ल मेरी एक पुरानी गर्ल-फ़्रेड सुमन से मिलती-जुलती थी। अगले दिन मैंने काजल को फोन किया और उसे मिलने को कहा। वो मिलने आई और हमने काफी देर बातचीत की और गाड़ी में घूमे। धीरे-धीरे काजल से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। एक दिन मैंने काजल को फोन करके घर बुलाया।

काजल घर आई। हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बाते करने लगे। फिर मैंने काजल से कुछ लेने को कहा। काजल ने मना किया तो मैंने काजल को कहा कि थोड़ी-थोड़ी बियर लेते है। काजल मान गई। मैंने बेडरूम में बियर व स्नैक्स का इंतजाम कर प्रिया। फिर हम दोनों बेडरूम में बैठ कर बियर पीने व बातचीत करने लगे। काजल ने जीन्स व टी-शर्ट पहनी थी। जीन्स की वजह से उसे बैड पर बैठने में दिक्कत हो रही थी। बार-बार वो अपने पैर इधर-उधर कर रही थी।

मैंने काजल को कहा कि जीन्स उतार कर आराम से बैठ जाए। काजल मना करने लगी। मैंने ज़िद की और लगभग जबरदस्ती उसकी जीन्स उतार दी। काजल लाल रंग की पैंटी में अपने पैर सिकोड़ कर बैठ गई। हम दोनों फिर से बियर पीने व बातचीत करने लगे। एक बियर खत्म होते ही मैं दूसरी खोलने लगा। काजल ने मना किया तो मैंने काजल को कहा कि थोड़ी-थोड़ी और लेते है। काजल मान गई।

जब दूसरी बियर की बोतल भी खत्म हो गई तो मैंने स्नैक्स की प्लेटें उठा कर अलग रख दी और काजल को छेड़ने लगा।

काजल ने कहा- क्या कर रहे हो?

मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।

मैंने काजल को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया। फिर मैं काजल के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। काजल ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तन दबाने लगा।

फिर मैं उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो काजल बोली,”क्या करते हो? प्लीज इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।”

मैंने कहा,”डरने वाली क्या बात है।” कह कर मैं फिर उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा।

काजल बोली,”कोई आ जाएगा?”

मैंने कहा,”कोई नहीं आएगा !” कह कर मैंने ज़िद की और लगभग जबरदस्ती उसकी टी-शर्ट उतार दी।

काजल के गोरे-गोरे वक्ष गुलाबी ब्रा में फँसे थे। मैंने उठ कर मेन-दरवाज़ा बंद कर प्रिया। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जौकी में काजल से लिपट गया। मैंने काजल का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लिटा लिया। फिर मैंने लाईट बंद कर दी। कमरे में लाल रंग का नाइट लैम्प जल रहा था।

मैंने काजल को अपनी बाँहो में भर लिया। मैंने अपनी टांगे काजल की टांगों पर रख दी और मैंने अपने जलते हुए होंठ काजल के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। काजल ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ काजल के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने काजल को बैड पर सिधा लिटा प्रिया। फिर उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुऐ होंठ रख दिए।

फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। काजल के मुँह से आह निकलने लगी। लगा। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा। काजल ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैंने उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डाल प्रिया।

कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। काजल ने कोई विरोध नहीं किया, उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा, फिर मैं अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। काजल के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। काजल ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चिकनी और क्लिन-शेव चूत पर हाथ फिराने लगा।

थोड़ी देर बाद मैं उसकी पैन्टी को उतारने लगातो काजल बोली “प्लीज इसे मत उतारो।” काजल ने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोली “नहीं इसे मत उतारो !”

मैंने कहा,”देखो काजल हम कुछ करेंगे नहीं ! बस कपड़े उतार कर नंगे एक दूसरे से लिपट कर लेटेंगे और प्यार करेंगे !” कह कर मैंने उसकी पैन्टी उतार दी।

काजल का नंगा बदन और उसकी चिकनी चूत लाल रौशनी में नहाकर लाल हो गये। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जौकी को फ़ाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जौकी उतार कर फेंक दी। फिर मैं काजल से लिपट गया।

मैंने काजल को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड तन कर काजल की चिकनी चूत से टकरा रहा था। मैं काजल की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं काजल की चूत पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ काजल की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से काजल की चूत की फाँक को खोलने और बन्द करने लगा। फिर काजल की चूत के दाने को रगड़ने लगा। काजल के मुँह से सिसकियां निकलने लगी।

मेरा लण्ड काजल की जांघों से रगड़ खा रहा था। मैंने काजल का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख प्रिया। काजल ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। काजल मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं काजल की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैंने काजल को कहा “काजल जरा सा इसे ऊपर घिस लूं क्या ? बहुत मन हो रहा है !”

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काजल कुछ नहीं बोली। मैंने इसे ही काजल की हाँ समझ लिया। मैं काजल के ऊपर लेट गया। काजल का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था।

मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर काजल की चूत के दाने के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर काजल की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। काजल ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। फिर काजल मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के दाने के ऊपर रगड़ने लगी। कुछ देर बाद काजल की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था।

शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने काजल का हाथ पकड़ लिया।

मैंने काजल को कहा,”कुछ करें क्या ? बहुत मन हो रहा है। लाओ मैं करता हूँ।”

काजल कुछ नहीं बोली।

उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी। वह बोली,”प्लीज ऐसे ही करते रहो !”

मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। मैं काजल को चोदने को बेताब हो रहा था। काजल की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर काजल की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

काजल ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली।”प्लीज कंडोम तो लगा लो ! मुझे डर लगता है।”

मैंने बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। काजल ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। फिर मैं काजल के ऊपर लेट गया। काजल का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। फिर मैंने अपने जलते हुऐ होंठ काजल के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने भी मुझे अपनी बाँहो में भर लिया। मेरा लण्ड काजल की जांघों के बीच फंसा हुआ था। कुछ देर बाद मैंने अपने लण्ड को काजल की चूत के सुराख पर लगा प्रिया और फिर मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा काजल की चिकनी चूत में घुस गया। काजल के मुँह से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली।

मैंने थोड़ा और जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड काजल की चूत में घुस गया। काजल के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का प्रिया तो मेरा पूरा लण्ड काजल की चूत में समा गया। काजल के मुँह से जोर से आह निकली और उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया। मैंने भी काजल को अपनी बाँहो में भर लिया। मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए। मेरा पूरा लण्ड काजल की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँहो में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी। काजल का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें काजल की टांगों के बीच में फँसी हुई थी। मैं काजल के माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर गालों को किस करने लगा। काजल भी मेरे गालों को किस करने लगी।

कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से काजल की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से उसकी चूत में अन्दर घुसा प्रिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद काजल ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे काजल की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी।

हम दोनों बियर के तथा सैक्स के नशे में चूर हो रहे थे। काजल को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स उपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर काजल को चोदने लगा।

मैं बैड पर हाथ रख कर काजल के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड उसकी चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। वो भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं काजल को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से काजल के ऊपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। काजल इस चुदाई तथा बियर के नशे से मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर काजल से कहा “काजल अच्छा लग रहा है क्या?”

काजल बोली,”प्लीज रुको मत। तेज-तेज करते रहो।”

काजल के मुँह से यह सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने काजल के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर काजल को चोदने लगा।

काजल के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह्ह्होहोहोह सिस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज तेज-तेज करो।”

मैं काजल के ऊपर लेट गया और मैंने काजल को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ काजल के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुऐ उसे और तेजी से चोदने लगा। काजल भी अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसती हुई मजे से चुदाई का मजा ले रही थी। लगभग 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते हुऐ चुदाई का मजा लेते रहे।

फिर अचानक काजल ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया। उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक जोर से आह भरी। मैं समझ गया कि काजल डिस्चार्ज हो गई है। मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं तेज-तेज धक्के मार कर काजल को चोदने लगा। काजल आँखें बंद करके मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी। लगभग 2 मिनट तक काजल को तेज-तेज चोदने के बाद मैं काजल की चूत के अन्दर कंडोम में डिस्चार्ज हो गया।

कुछ देर तक मैं काजल के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। काजल मेरे नीचे आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड काजल की चूत में से बाहर खींच लिया।

फिर उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर डस्टबिन में फेंक प्रिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके काजल की बगल में लेट गया। काजल आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की लाल रौशनी में उसका गोरा और नंगा बदन लाल हो कर चमक रहा था। कुछ देर बाद काजल मेरी तरफ करवट ली और अपनी टांग मेरी टांगों पर रख दी। फिर वो मेरी छाती के बालों पर हाथ फिराने लगी।

फिर काजल बोली,”हो गई तुम्हारे मन की।”

मैंने कहा,”हाँ बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया !” कह कर मैंने करवट ले कर काजल को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुऐ बातचीत करते रहे।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी यह कहानी ? मुझे मेल करेंगे ना ?

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

आवारा हवस का पुजारी

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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