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जवान लड़की पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 139 बार

पलक और कपिल

सन्दीप शर्मा

14 Aug 2014 को प्रकाशित

पलक और कपिल
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जैसा कि मैंने आपसे कहा था, मैं पलक और कपिल की अधूरी कहानी लेकर आप के सामने हाजिर हूँ..

इस कहानी को पलक ने खुद ही लिखा मैंने सिर्फ उसके लिखे को हिन्दी में अनुवाद किया है। पलक किसी से सम्बन्ध नहीं रखना चाहती तो उसने अपना मेल आई डी देने से मना कर प्रिया है अत: मैं यहाँ उसका मेल आई डी नहीं दे रहा।

कहानी शुरू करने के पहले कुछ बाते आप को फिर से कह दूँ कि कृपया मुझसे आप किसी भी लड़की के मेल आई डी और फोन नम्बर की उम्मीद ना रखें, मैं आपको नहीं दे पाऊँगा। मेरी कहानियाँ सच्ची ही होती हैं, अगर आप सिर्फ यही पूछने के लिए मेल करने जा रहे हैं कि ये कहानियाँ सच्ची हैं या झूठी तो कृपया जवाब की उम्मीद ना करें…

तल्ख़ शब्दों के लिए माफ़ी के साथ अब आगे की बात पलक के शब्दों में…

सभी दोस्तों को नमस्ते,

जिस वक्त मैं यह कहानी लिख रही हूँ तब तक हम दोनों की पिछली कहानी

प्रकाशित नहीं हुई है अत: उसके बारे में आप सभी की राय कुलदीप के पास नहीं है तो मुझे भी नहीं मिली। वैसे कुलदीप के कई राज हैं जो अगर सम्भव हुआ तो आपके सामने मैं जरूर लेकर आऊँगी, उनमें से एक इस बेचारे का देह शोषण भी है।

जब कुलदीप ने हम दोनों की कहानी लिखी और मुझे पढ़ने को दी तो मुझे लगा कि उसके साथ कपिल और मेरी कहानी भी आपके सामने आनी चाहिए।

मैं आपको और परेशान नहीं करते हुए कहानी पर आती हूँ।

अगर आपने पिछली कहानीपलक की चाहतके सात भाग पढ़े हैं तो आप मुझे जानते ही होंगे, अत: अभी अपने बारे में मैं सिर्फ इतना लिखूँगी कि मैं वर्तमान में अमेरिका में मेरे पति और बच्चे के साथ मजे से हूँ।

अब जो घटना मैं आपको बताने जा रही हूँ वो कुलदीप और मेरी कहानी के एक हफ्ते बाद की ही है, कुलदीप और मैं जब महेश्वर से वापस आये तो मैं यह तय कर चुकी थी कि अब कपिल से मैं सम्बन्ध खत्म कर लूंगी लेकिन उसके पहले मैं खुद को यकीन दिलाना चाहती थी कपिल मुझे प्यार नहीं करता।

वापस आने के बाद मैंने कपिल से कहा- कपिल, मुझे सेक्स करना है!

और वो बेचारा तो पागल ही हो गया था- हाँ करते हैं, चल, अभी चलते हैं! जैसी बातें ही उसके मुँह से निकल रही थी तब।

मैंने उसे कहा- अभी नहीं, अगले शनिवार को करेंगे और मेरी कुछ शर्तें होंगी वो माननी पड़ेंगी।

तो वो बोला- हाँ मान लूँगा!

और फिर शनिवार तक बेसबी से इन्तजार करता रहा और हर रोज मुझे याद दिलाता रहा कि हम मिल रहे हैं शनिवार को!

और उसके याद दिलाने से हर बार मेरी सोच और पक्की होती जा रही थी।पर चूंकि मैं उसे वादा कर चुकी थी तो उस वादे को निभाने मैं जाने वाली ही थी चाहे कुछ भी हो जाता।

वैसे इस बारे में जब मैंने कुलदीप को बताया था तो उसका चेहरा तब देखने लायक था, बड़ा ही अजीब सा मुँह बना कर रखा था इस गधे ने तीन दिन तक और जब मेरे साथ कपिल के फ़्लैट की तरफ जा रहा था तबा तो और भी अजीब।

शनिवार को कपिल उसके फ़्लैट पर मेरा इन्तजार कर रहा था, मैं जैसे ही अंदर आई उसने मुझे उसकी बाँहों में भर लिया और बिना कुछ कहे चूमने लगा, कभी मेरे गालों को चूम रहा था और कभी गले को! इस सब में वो कभी मेरे स्तन तक भी चला जाता था चूमते हुए। उसने मुझे उसकी बाहों में जकड़ा हुआ था जिससे मेरे स्तन उसके सीने पर टकरा रहे थे, और मैं छूटना चाह कर भी नहीं छूट पा रही थी।

हालांकि वो मेरे साथ जबरदस्ती ही कर रहा था लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं था कि मुझे मजा नहीं आ रहा था, मुझे भी उसके चूमने और इस तरह से जकड़ने में बड़ा मजा आ रहा था और मैं भी उसका साथ देना ही चाहती थी।

फिर मैंने मेरी बाहें कपिल के गले में डाल दी और उसके होंठों को मेरे होंठों से चूमने लगी, कपिल भी मेरा पूरा साथ दे रहा था लेकिन उसके हाथ पहली बार मेरे स्तनों पर बेरोकटोक चल रहे थे, मेरे स्तनों को सहला रहे थे, दबा रहे थे।

ऐसा नहीं था कि हमने पहले एक दूसरे को चूमा नहीं था पर मैंने उससे पहले कभी कपिल को मेरे स्तनों पर हाथ नहीं लगाने प्रिया था। उस दिन उसके होंठों के चूमने के साथ उसके हाथों का स्पर्श बहुत ही अच्छा लग रहा था। एक बार को लगा कि रोक दूं उसे, लेकिन मन कह रहा था कि करते रहें, और करते रहे और हम एक दूसरे को चूमते रहे, वो मेरे स्तनों को ऐसे ही सहलाता-दबाता रहा, मसलता रहा और मैं उस मस्ती का मजा लेती रही।

हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को थोड़ी देर चूमते रहे, फिर कपिल ने मुझे बाँहों में भर कर उठाया, गोद में ले लिया, मैंने भी अपनी टांगों से उसकी कमर को जकड़ लिया और ऐसे ही कपिल मुझे लेकर बेडरूम में जाने लगा।

उस वक्त कपिल ने टीशर्ट पहनी हुई थी और मैंने भी काले रंग की टीशर्ट और जींस पहनी हुई थी। वो जब मुझे बेडरूम में ले जा रहा था तो मैंने उसकी टी शर्ट उतारने की कोशिश की लेकिन वो टीशर्ट उसके बेड रूम में जाकर ही उतरी जब कपिल ने मुझे बिस्तर पर लिटा प्रिया और मेरे ऊपर आ गया। अब वो लोअर और बनियान में था और मैं पूरे कपड़ों में! उसने मेरी टीशर्ट उतारने की कोशिश की, मैंने उसका पूरा साथ प्रिया और हाथ ऊँचे करके थोड़ा सा ऊपर उठ कर टी शर्ट उतरवा ली।

अब मैं जींस और काली ब्रा में थी, तब मेरा वक्षाकार 34 हुआ करता था और मैं 32 नम्बर की ब्रा पहनती थी तो मेरे स्तन बाहर आने को मचल रहे थे और मैं जानती थी कि ऐसी हालत में कपिल का खुद पर काबू रखना अगर नामुमकिन नहीं था तो नामुमकिन की हद तक मुश्किल जरूर था।

और वही हुआ, वो पागलों की तरह मेरी जींस उतारने के लिए मेरी जींस के बटन खोलने लगा और मेरे स्तनों को उसके ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा।

और जल्द ही उसने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए मेरी जींस को भी निकाल प्रिया।अब मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी और वो जींस और बनियान में!

जब उसने मेरी पैंटी उतारनी चाही तो मैंने कहा- पहले तुम तो कपड़े उतारो!

मेरा इतना कहना था कि अगले ही पल उसके सारे कपड़े जमीन पर थे।

वो फिर से मेरी ब्रा की तरफ बढ़ा तो मैंने कहा- मैंने कहा था ना कि मेरी एक शर्त होगी तो मैं मेरी शर्त कहूँ?

मेरी बात सुन कर कपिल झुझलाकर बोला- यह शर्तों का वक्त है क्या जानू?

और फिर जब मुझे गुस्सा होते देखा तो बोला- अच्छा बोल ना, क्या शर्त है?

मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे ऐसे ही बिना और कपड़े उतारे चरमसुख दो!

आपको याद होगा यही चाहत मैंने कुलदीप के सामने भी रखी थी।

मेरी बात सुन कर कपिल पूरी तरह से झुंझला गया और बोला- यार, ऐसे कहीं होता है क्या?

मैंने कहा- हाँ होता है, करो!

मेरी बात सुन कर कपिल ने मुझे बाँहों में भरा और मेरी पैंटी के ऊपर से ही उसके लण्ड को मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर प्रिया, उस वक्त तो ऐसा लग रहा था भाड़ में जाए हर शर्त और बस अभी इसका लण्ड मैं मेरी चूत में ले लूँ लेकिन मैं देखना चाहती थी कपिल की नजरों मेँ मेरी चाहत की क्या कीमत है, इसलिए चुदवाने की इच्छा को दबा कर भी मैं अपनी शर्त पर अड़ी रही।

कपिल थोड़ी देर तक इसी तरह मुझ पर ऊपर चड़ कर मेरी चूत को रगड़ता रहा और फिर बोला- बस यार, अब सहन नहीं होता! प्लीज यार, अंदर डालने दे ना! मैं बाद में तेरी इस शर्त को पूरा कर दूँगा!

और जब तक मैं उसे रोकती, वो मेरी ब्रा उतार चुका था और पैंटी की तरफ हाथ बढ़ा रहा था।

मैंने उससे कहा- अच्छा ठीक है, लेकिन मुझे इसे चूसना है!

और इस बात के लिए कपिल को ना तो करना ही नहीं था, तो वो तुरंत राजी हो गया।

मेरी बात सुन कर कपिल बिस्तर पर लेट गया और मैं उसका लण्ड हाथों में लेकर जोर से हिलाने लगी और जोर जोर से उसके लण्ड को चूसने लगी, वो भी उसके हाथों से मेरे स्तनों को दबाने की कोशिश कर रहा था और कभी उसके हाथों से मेरे बालों को पकड़ कर सहला रहा था और बीच बीच में मेरा सर जोर से उसके लण्ड पर दबा भी दे रहा था जिससे उसका लण्ड मेरे गले तक चला जा रहा था।

मैं भी लण्ड को अच्छे से चूस रही थी तभी कपिल ने मेरे सर को जोर से दबाना शुरू कर प्रिया और वो मचलने भी लगा।

मैं समझ गई थी की कपिल अब चरम पर पहुँचने की कगार पर है, मैंने मेरे मुँह से उसका लण्ड निकाला और हाथों से लण्ड को सहलाते हुए उससे कहा- कपिल, तुम झड़ने वाले हो तो क्या मैं बाकी हाथ से कर दूँ, मैं मुँह में नहीं लेना चाहती।

कपिल बोला- प्लीज, मुँह में ही ले ना! मैं बस एक मिनट और लूँगा, नहीं तो मैं अंदर डाल देता हूँ।

और यह कहते ही उसने जबरन लण्ड मेरे मुँह में डाल प्रिया और कस कर मेरे मुँह को चोदने लगा और मैं भी उतने ही प्यार से उसे चूसने लगी।

मैंने बस कुछ सेकंड ही उसे चूसा होगा और वो झड़ने लगा और उसने मेरे सर को कस कर पकड़ लिया था और उसके वीर्य की पिचकारी मेरे मुँह के अंदर तक जा रही थी और वो झटके मारता हुआ मेरे मुँह में उसका वीर्य उगलता रहा।

जब वो झटके मार कर शांत हो गया तब उसने मेरे सर को छोड़ा।

उस वक्त बड़ा ही अजीब लग रहा था वो, मुझे उबकाई भी आ रही थी तो जैसे ही कपिल ने मुझे छोड़ा मैंने वहीं पास में वीर्य उगल प्रिया और अपने कपड़े उठा कर बाथरूम में चली गई। वहाँ जाकर मैंने अच्छे से कुल्ला किया और मुँह धोया, जींस में से मोबाइल निकाल कर कुलदीप को एस एम एस किया- मैं नीचे आ रही हूँ, कार के पास आ जा!

मैंने कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर निकली तो कपिल बोला- कहाँ जा रही है, अभी मत जा ना!

मैंने कहा- आज के लिए इतना काफी है शोना, बाकी बाद में!

और जब तक कपिल कुछ कहता, मैं फ्लैट से बाहर आ चुकी थी।

जब मैं नीचे आई तो कुलदीप कार में ही था, मैंने कार स्टार्ट की और बिल्डिंग के बाहर निकल गई।

उस दिन और भी कुछ हुआ था जो आपको कुलदीप ही बताएगा, उसने इस बात का वादा किया है मुझसे!

वो आपको अगली कहानी में मिलेगा।

तब तक के लिए कुलदीप और मुझे दोनों को विदा दीजिए।इस घटना पर आप अपनी राय उसे ही भेज दीजियेगा, मैं अपना मेल आईडी नहीं देना चाहती।पलकsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

सुष्मिता 1984

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

परिहार

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

यश

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।