प्रेषक : नीरज़ गुप्ता
अरे यार ! क्या अगली बार तक कोई व्यक्ति उसी मूड में रह सकता है?
क्या तब तक आदमी अपना लंड पकड़ कर या औरत अपनी चूत में उंगली डाल कर बैठी रहेगी?
जो लिखना है वो उसी वक्त पढ़ने के काम आएगा और उसी वक्त मजा देगा !
आप लोगों का प्यार मुझको वास्तविक और साइंस आधारित कहानियाँ और लोगों के अनुभव लिखने को प्रेरित करता है। यह भी इसी तरह एक और जानकार के जीवन के कुछ अंश हैं।
मैं एक बात बता दूँ कि मैं स्वयं सेक्स में बहुत रूचि रखता हूँ, एवं घनिष्टता जिस किसी से भी बढ़ी, हम लोग सेक्स की बातों में बहुत रूचि लेते हैं और आपस में वार्तालाप भी करते हैं।
मैंने साइंस से पढ़ाई की और कई बायोलोजी की एवं सेक्स से सम्बंधित अन्य किताबों को मिलने पर उनको अच्छी तरह से पढ़ा। इससे कई तरह के फंडे क्लिअर हुए।
इसका फायदा ये होता है कि हम सेक्स के ज्ञान को तो बढाते ही हैं, नया अनुभव भी जानने को मिलता है और मनोरंजक सेक्स को और भी आनंदित बनाने में मदद भी मिलती है.
एक लड़का सुरेश मेरे संस्थान में पढ़ने आया, यह उसकी कथा है !
मेरी जिस से भी पटरी बैठी वो सब बोलने में मेरी तरह तमीजदार और अपने रिश्तों में विश्वास रखने वाले रहे हैं, अर्थात माँ के पेट से बने रिश्तों की इज्जत करने वाले। गन्दी भाषा में बात करने वालो को मैं पास भी नहीं फटकने देता हूँ।
जब सुरेश पढ़ाई कर रहा था तो इसके साथ इसके मामा का लड़का और लड़की तीनो होस्टल में रह कर पढ़ाई करते थे। तीनों को अलग अलग कमरे मिले हुए थे। इसके मामा की लड़की का नाम हम रीटा मान लेते हैं। ख़ुद सुरेश लगभग पांच फुट नौ इंच कद का है। सुता हुआ शरीर और बोलने में तमीजदार।
रीटा की एक सहेली भी होस्टल में ही थी। सुरेश का दिल उस लड़की ज्योति पर था। धीरे धीरे दोनों में घनिष्टता बढ़ने लगी। जैसा कि विपरीत सेक्स वालों में होता है, फ़िर आपस में थोडी बहुत सेक्स से रिलेटेड बातें भी होने लगी।
जब भी दोनों अकेले मिलते हाथ फेरने का सिलसिला भी चलने लगा। और क्योंकि होस्टल में रहते थे इसलिए मौका भी काफी था। ज्योति को भी मजा आता था। वो भी एक ऐसे घर से सम्बंधित थी जो परम्परा में बंधा था। इसलिए ज्योति भी एक हद से ज्यादा बढ़ने में डरती थी। इसलिए हाथ फेरने में बोबे तक तो सब कुछ चलता था लेकिन जैसे ही सुरेश नाभि से नीचे हाथ डालने लगता ज्योति उठकर कमरे से बाहर भाग कर ख़ुद के कमरे में आ जाती।
सुरेश ने उसको पूछा भी कि मजा आता है तो उसने बताया कि हाँ सनसनाहट होती है। लेकिन आगे नहीं बढ़ेंगे। सुरेश ने भी ज्योति को जाहिर कर प्रिया कि जब तक तू अपने मुह से सेक्स के लिए नहीं बोलेगी तब तक मैं सेक्स नहीं करूँगा।
अब सुरेश ने नाभि से नीचे जब भी बढ़ना होता ज्योति को भींच के बैठता ताकि वो उठ कर यूँ न भाग जाए और उसके बोबे दबाता धीरे धीरे टोपर ऊपर करके ब्रा खोलकर उसके बोबों को मसलता। तो ज्योति की आहें निकल जाती और आँखें गुलाबी डोरों में लिपट जाती। लेकिन एक रीमा के बाद वो छुडा कर भाग जाती।
सुरेश भी इरादे का एकदम पक्का था। वो लगा रहा कि कभी तो बहार आएगी। कोई भी मौका नहीं छोड़ता। मिलते ही मसलना, चूमना , जीभ चूसना बदस्तूर चलता।
क्रम से सुरेश आगे बढ़ता रहा। ज्योति को भींच कर बैठता उसके बोबे नंगे करता, चूसता। आहों से कमरे में संगीत गूंजने लगता। होटों में होंट लेके चूसता, ज्योति भी साथ देती। लेकिन जब भी चूत की ओर बढ़ने की बारी आती ज्योति के मन में भारतीय परम्परा सर उठाती और जो उसने अपने पति के लिए इतने वर्ष सम्हाल कर रखा उसको यू किसी को सौंप देना उसको गवारा ना होता। जाने कैसे उसने अपने आपको कंट्रोल किया हुआ था।
अब सुरेश उसको ज्यादा ध्यान से पकड़ कर रखता ताकि भागने का मौका कम से कम मिले। अब सुरेश सलवार के ऊपर चूत पर हाथ फेरने लगा। उसकी चूत की दरार में भी मसलने लगा। ज्योति की हालत पहले से ज्यादा ख़राब होने लगी।
लेकिन मानना होगा ज्योति को। सच में ऐसी होती हैं भारतीय लड़कियां। उस ने चार महीने इसी तरह से कंट्रोल किया। जाने ख़ुद के कमरे में जाने के बाद वो कैसे अपनी चूत की खुजली को काबू करती होगी। लेकिन उस ने अपने मुंह से नहीं बोलना था तो नहीं बोली सेक्स के लिए.
सुरेश भी पक्का डीठ। वो कसम खाए बैठा था। उसके मामे का लड़का उकसाता था कि गधे देख मैंने भी तेरे साथ ही मेरी दोस्त से सेटिंग की थी। मैं उसको चोद चुका और तू है कि तपस्या कर रहा है। लेकिन फ़िर भी सुरेश ने बड़ी तसल्ली से अपनी जिद पकड़े रखी।
आख़िर एक शनिवार को स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई तो जो भी स्टुडेंट आसपास के गाँव से थे घर जाने वाले थे वो सब चले गए। लेकिन ये चारों और कुछ स्टुडेंट और भी थे जो नहीं गए। लेकिन होस्टल थोड़ा सूना हो गया।
रात को लगभग १० बजे जब रीटा और मामा का लड़का सो गए तो सुरेश ज्योति के कमरे के दरवाजे पर थाप दे कर दरवाजा खुलने पर ज्योति के कमरे में आ कर दरवाजा बंद कर के ज्योति को लिए हुए उसके बिस्तर पर आ गया।
ज्योति को बाँहों में लिए उसके होटों को चूसना शुरू कर प्रिया। ज्योति ने भी साथ प्रिया। वो भी चूसने लगी। और अपनी जीभ निकाल कर सुरेश के मुह में डाल दी। सुरेश ने एक हाथ ज्योति के बोबों पर ले कर बोबे दबाने लगा और दूसरा हाथ ज्योति की गर्दन पर कस प्रिया।
धीरे धीरे दोनों की आँखे मदमस्त होने लगी। सेक्स का सुरूर ज्योति पर चढ़ने लगा। उसकी साँसे भारी होने लगी।
वो भी सुरेश की जीभ चूसने लगी। सुरेश ने ज्योति की कमीज के बटन खोल दिए फ़िर बोबे दबाने लगा। थोडी देर में हाथ ज्योति की पीठ के पीछे ले कर उसकी ब्रा के हुक को भी खोल प्रिया। और मुह नीचे लाकर ज्योति के बोबे चूसने लगा। ज्योति की आहें निकलने लगी। कमरे में इस नए संगीत के साथ सेक्स की गर्मी चढ़ने लगी। अब सुरेश ने ज्योति के सलवार का नाडा खोलकर सलवार नीचे सरका दी और पैंटी के ऊपर से चूत पर हाथ फेरने लगा।
एक तो बोबे चूस रहा था फ़िर चूत भी सहला रहा था। ज्योति लम्बी लम्बी गरम साँसे लेने लगी और वो आँखें बंद किए लेटी थी।
आज ज्योति के पास कमरे से भाग जाने का कोई रास्ता नहीं था। वो ख़ुद के ही कमरे में थी। और सुरेश के पास भरपूर टाइम था।
पड़ोसन भाभी का प्यार या वासना- 2
सुरेश ने ज्योति की पैंटी और सलवार को उतार कर टांगो से बाहर किया। अब ज्योति नीचे से पूरी नंगी थी। फ़िर सुरेश ने ज्योति की चूत की दरार में ऊँगली कर के धीरे धीरे सहलाने लगा। आज ज्योति हीटर की तरह तप गई।
अब उस से कंट्रोल नहीं हो रहा था। और वो इंतजार कर रही थी। कि काश उसको सेक्स के लिए नहीं बोलना पड़े और सुरेश ख़ुद ही उस को चोद दे।
लेकिन सुरेश फोरप्ले में लगा हुआ था। उसका लंड कड़क ठोस हो चुका था। सुरेश ने अब अपनी पैंट और अंडरविअर उतार दिए और लंड को ज्योति को पकड़ा प्रिया और ख़ुद ज्योति कि नाभि की और झुक कर नाभि में जीभ डाल कर चूसने लगा। ज्योति की साँसे चढ़ गई। वो हिचकियाँ लेने लगी और सुरेश को पकड़ कर अपने ऊपर लेने लगी। सुरेश पक्का डीठ हो गया। वो फ़िर ज्योति के बोबे चूसने लगा।
ज्योति की चूत पानी छोड़ने लगी। बिस्तर गीला होने लग गया। आख़िर जब ऐसी हालत हो गई तब सुरेश ने ज्योति को कहा कि देख अब सेक्स के लिए बोल दे नहीं तो आज मैं चला जाऊंगा।
आख़िर ज्योति ने सुरेश को बोला कि प्लीज मेरे साथ सेक्स करो।
अब सुरेश ज्योति की टांगे चौड़ी कर के बीच में घुटनों के बल बैठ गया और ज्योति की चूत पर हाथ लगा कर गीला छेद ढूंढ कर अपने लंड को उस छेद पर टिकाया और ज्योति की टांगो को घुटनों से मोड़ कर अपने घुटने ज्योति के घुटनों के नीचे देता गया इस कारण से सुरेश का लंड ज्योति की चूत पर बहुत अच्छी तरह से सेट हो गया अब सुरेश ने लंड पर जोर लगाया चूत में घुसा देने को।
लेकिन नहीं जा पाया और ज्योति का मुंह दर्द से लाल होने लगा। फ़िर एक बार सुरेश ने जोर लगाया लेकिन फ़िर नहीं गया। तो एक जोर से धक्का लगा कर लंड को जबरदस्ती से थोड़ा घुसा प्रिया। अब ज्योति को खूब तेज ब्लेड से कटने जैसा एहसास हुआ और उसका मुंह लाल हो गया और उस पर पीड़ा की लकीरें आ गई, बहुत मुश्किल से उसने चीख निकलने से बचाया। ज्योति ने होंट दांतों के बीच दबा लिए। इधर सुरेश का भी दर्द के मारे हाल अच्छा नहीं रहा। लेकिन अब चुदाई तो पूरी करनी थी ना। इसलिए और धक्के मार कर पूरा लंड ज्योति की चूत में उतार प्रिया और ज्योति के ऊपर लेटता गया।
ज्योति को धीरे धीरे किस किया अपने हाथ बोबों पर लेकर सहलाने लगा। और धीरे धीरे ज्योति के होंट चूसने लगा। पहले तो ज्योति ने कोई सहयोग नही प्रिया फ़िर जैसे जैसे उसका दर्द कम हुआ वो फ़िर गर्म होने लगी। लगभग १० मिनट बाद ज्योति क्रियाशील होने लगी। लेकिन अब भी सामान्य नहीं थी।
फ़िर धीरे धीरे धक्के लगा कर सुरेश ने चोदना शुरू किया। उसने अपनी जीभ ज्योति के मुंह में दे दी और धीरे धीरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता गया जैसे जैसे ओर्गास्म नजदीक आता गया धक्के तेज लगने लगे। ज्योति को मजा और दर्द दोनों हो रहे थे और वो इन्तजार कर रही थी कि चुदाई कब पूरी हो। ज्योति को ओर्गास्म हुआ लेकिन मजा नहीं आया और दर्द को सहते हुए सुरेश ने भी ज्योति की चूत की तराई कर दी।
थोडी देर में जब लंड ढीला होकर बाहर आया तो सुरेश ने अपना लंड देखा तो सुपाड़े के पीछे का धागा कट चुका था, सुपाड़े के ऊपर की खाल भी पीछे होकर कर लंड पर आ गई थी और लंड ३-४ जगह से छिल गया था।
उधर ज्योति की चूत भी खून से लिप गई थी। दोनों ने नेपकिन से लंड और चूत साफ़ किए और कपड़े पहन लिए।
अगले दिन सुरेश ने ज्योति को दर्द के लिए दवाई की दूकान से गोली लाकर दी।
बस गनीमत यह हुई कि इस चुदाई से ज्योति को गर्भ नहीं टिका। दोनों ही नादानी में बिना किसी साधन के काम कर गए।
एक बात और भी थी। कि ज्योति भी क्षत्रीय ही थी। एक दिन दोनों को आपस में एक दूसरे की आँखों में देखते रीटा ने देख लिया। लेकिन चुप रही और अकेले में ज्योति से पूछा तो ज्योति ने बता प्रिया कि वो सुरेश को पसंद करती है। फ़िर रीटा ने सुरेश से पूछा तो सुरेश ने भी बता प्रिया कि ज्योति उसको पसंद है।
रीटा ने अपने फूफा यानि सुरेश के पिता से और ज्योति की माताजी से बात की और ज्योति के पिताजी को सुरेश के घर रिश्ता लेकर भेजा। दोनों की सगाई हो गई।
फ़िर एक दिन मौका पाकर रात को सुरेश ढाणी में अपनी ससुराल मोटरसाईकिल पर १०:३० पर पहुँच गया। ज्योति को उसने मोबाइल पर बता प्रिया। मोटरसाइकिल उसने दूर खड़ी की। रात को ढाणी में लोग जल्दी सो जाते हैं और ज्योति ने धीरे से दरवाजा खोल कर सुरेश को अन्दर लिया। दोनों रसोई में घुस गए। ज्योति ने बाकी पिता और भाई दोनों के कमरों के बाहर से धीरे से सांकल लगा दी।
फ़िर दोनों ने रसोई में जश्न किया। दो घंटे वो मजे करते रहे। दोनों ने ही खुल कर सेक्स का मजा लिया। इस बार भी ज्योति थोड़ा चिंतित थी लेकिन अब के दर्द नहीं हुआ तो खुल कर खेली। इस बार सुरेश ने कंडोम काम लिया। फ़िर सुरेश अपने गाँव चला आया।
सुरेश बता रहा था कि सर चूमना, चूसना, दबाना, हाथ फिराना, जो जो मैं कर सकता था किया, और ज्योति ने खूब साथ प्रिया और मजे भी लिए ………
जब मैंने सुरेश को कहा कि पगले पहली बार में इतना दर्द करने की क्या जरूरत थी। ऊँगली डाल कर ओ आकर में घुमा कर थोड़ा तो चूत का छेद चौड़ा कर सकता था न। ना तो ज्योति को दर्द होता न तुझको इतनी दिक्कत उठानी पड़ती। और थोड़ा तेल ही लगा लेता। तो सुरेश बोला कि सर किसी ने बताया ही नहीं कि दर्द कम भी हो सकता है। ये तो अब आपने बताया। मेरे मामा के लड़के ने भी नहीं सिखाया।
सच में दूसरी बार में मजा आया। पहली बार में तो दर्द से मजा ही नहीं आया। पहली बार में तो चोदने की रस्म पूरी की बस………..
अब २ महीने बाद उनकी शादी है।
सुरेश ने कहा कि सर मुझको क्या पता था जिस लड़की के साथ मैं मजे के लिए चुदाई कर रहा हूँ उसी के साथ शादी हो जायेगी।
तो मैंने कहा कि ये तो बहुत अच्छा है। कम से कम तुझको तो पता है न कि वो कुंवारी लड़की है। वरना खेली खाई मिलती तो भी तो सब्र करना पड़ता। फ़िर जिसको तूने चोदा वो भी तो किसी की पत्नी बनती ही न। फ़िर यार आदमी ही लड़की को चालू करता है तो लड़की को दोष देना बेकार है। फ़िर सेक्स पर किसी का जोर थोड़े ही है। सबको अच्छा लगता है। मजे कर, खुश रह।
यदि आपको कहानी अच्छी लगी और कोई भी परेशानी शेयर करना चाहते हो या दोस्ती खास कर स्त्रियों से तो लिखिए, आपका स्वागत है.
धीरज गुप्ता