लव कुमार
नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम लव कुमार है, मेरी उम्र 24 साल, ज्यादा हट्टा-कट्टा तो नहीं पर एक खूबसूरत बदन का मालिक हूँ मैं। लड़कियाँ मुझे चोकोलेटी बॉय कहती है। मेरा रंग साफ़ है और ऊपर वाले की दया से दो-तीन गर्लफ्रेंड भी हैं।
आज मेरा भी दिल किया तो अपनी एक कहानी आपको भेज रहा हूँ। यह मेरी लिए बेहद अच्छा अनुभव था।
मैं पढ़ता था, तब मैं थोड़ा शरारती किस्म का लड़का था और अक्सर अपनी क्लास की लड़कियों को छेड़ता रहता और लड़कियों की गांड खुजाना मेरा सबसे पसंदीदा शौक था।
स्कूल के बाद शाम को मैं अपने एरिया के लड़के और लड़कियों के साथ छुपन छुपाई खेला करता था। वो भी इनमें से ही एक थी जिसने मेरे लंड को अंगडाई लेना सिखाया था।
रीमा नाम था उसका। बचपन से ही वो मेरी दोस्त थी। मैंने उसके बदन को बहुत चूसा और रगड़ा था। मेरे दबाने से ही उसके टिकोरे चुचियों में बदल गए थे। लेकिन ये सब ज्यादा दिन नहीं चल सका। मेरे पापा का तबादला दूसरे शहर में हो गया और हम सब वहाँ चले गए।
वहाँ जाकर मैं रीमा को बहुत मिस करता था और अक्सर उसकी याद में लंड निकाल कर मुठ मारा करता था। वैसे तो नए शहर में आते ही एक लड़की फंसा ली थी पर उससे मुलाक़ात नहीं हो पाती थी।
ऐसे ही 5 साल बीत गए। मैं सब भूल गया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद जॉब की तलाश कर रहा था। तभी मुझे एक दिन मेरे बचपन का दोस्त दीपक मिला। उसने मुझे बताया कि उसने शादी कर ली है।
मैं उस पर बहुत नाराज हुआ और उसको भाभी से मिलवाने के लिए कहा। वो बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने मुझे अपने घर पर चलने को कहा तो मैं उसके साथ उसके घर चल प्रिया।
घर पहुँचते ही उसने अपनी बीवी को आवाज दी तो एक खूबसूरत सी लाल रंग की साड़ी में लिपटी हुई अप्सरा कमरे में आई। जैसे ही मैंने उसको देखा तो चौंक गया।
वो रीमा थी !
मैं कुछ बोल नहीं पाया। बस रीमा को देखता रहा। पांच साल में क्या मस्त माल बन गई थी यार यह। वे चूचियाँ जो कभी मैं मसला करता था अब बड़े बड़े चुचे बन गए थे। लिपस्टिक से पुते हुए होंठ गुलाब की पंखुड़ी जैसे लग रहे थे। लाल रंग की साड़ी में से गोरा गोरा पेट इतना मस्त लग रहा था कि क्या कहूँ।
दीपक ने रीमा से मेरा परिचय करवाया। वो नहीं जानता था कि हम दोनों एक दूसरे को पहले से जानते है। मैंने रीमा की आँखों में देखा तो महसूस किया कि वो मुझे देख कर खुश थी। मैंने उसको शादी की बधाई दी और होंठों को किस करने की मुद्रा में करके उसकी तरफ इशारा किया तो वो शरमा गई। मुझे देख कर उसकी आँखों में चमक आ गई थी।
दीपक ने रीमा को चाय बना कर लाने के लिए कहा तो रीमा मुस्कुराती हुई अंदर चली गई। रीमा जब अंदर जा रही थी तो उसकी मटकते मोटे कूल्हे देख कर मेरा तो लण्ड अकड़ने लगा था और दिल कर रहा था कि रीमा को अभी पकड़ कर चोद दूँ।
दीपक मेरी नजर को ताड़ गया और बोला- साले क्या देख रहा है?
मैं थोड़ा सा झड़प गया पर फिर मैंने रीमा की तारीफ करते हुए कहा- बहुत मस्त माल मिला है तुम्हें !
तो दीपक भी खुश हो गया और बोला- यार, बहुत अच्छी लड़की है और घर का सारा काम कर लेती है। मेरी माँ को भी पसंद थी तो मैंने शादी कर ली।
मैं मन ही मन मुस्कुरा उठा कि रीमा और अच्छी लड़की !
तभी रीमा चाय बना कर ले आई, तीनों ने चाय पी और थोड़ी इधर उधर की बातें करते रहे। चाय खत्म हुई तो रीमा चाय के कप उठा कर रसोई में चली गई और तभी दीपक का फोन आ गया।
मैं उठा और रसोई की तरफ बढ़ गया।
“रीमा… कैसी हो?” मेरी आवाज सुन कर रीमा थोड़ा घबरा गई।
“लव… तुम यहाँ कैसे?”
“दीपक मेरा बहुत पुराना दोस्त है।”
“लव… प्लीज दीपक को हमारे बारे में पता नहीं लगना चाहिए… वो बचपन की नादानी थी और अब वो बातें पुरानी हो गई हैं।” वो घबरा रही थी।
मैंने उसको भरोसा दिलाया कि दीपक को कभी कुछ पता नहीं लगेगा। मैं मन ही मन खुश था कि रीमा को सब कुछ याद था।
तभी दीपक वापिस अंदर आया तो मैंने दीपक से जाने को बोल कर अपने घर की तरफ निकल लिया पर मैं जानबूझ कर अपना सामान दीपक के घर भूल आया था ताकि मुझे दीपक के घर दुबारा जाने का मौका मिल सके।
अगले दिन दीपक का फोन आया और बोला- तेरा कुछ सामान मेरे घर पर रह गया है।
तो मैंने कहा- मैं आज दिन में आकर ले जाऊँगा, तुम बस घर पर फोन कर देना।
दीपक ने कहा- तेरा अपना घर है, जब तेरी मर्जी हो तो जा कर ले लेना। मैं नहीं भी होऊँगा तो क्या तेरी भाभी तो होगी ही घर पर, उस से ले लेना।
मैं तो खुशी के मारे नाच उठा था यह सोच कर कि रीमा से अकेले में मिलने का मौका मिलेगा।
मैं नहा धोकर करीब 11 बजे घर से निकल कर सीधा दीपक के घर पहुँच गया।
घण्टी बजाई तो रीमा ने ही दरवाजा खोला। तभी अंदर से रीमा की सास मतलब दीपक की माँ की आवाज आई– बहू… कौन है?
दीपक की माँ को देख कर मेरा मूड खराब हो गया। मैं अंदर गया और दीपक की माँ को प्रणाम किया। मैंने रीमा से अपना सामान माँगा तो दीपक की माँ ने मुझे चाय पी कर जाने को कहा।
मैंने थोड़ी ना-नुकर की पर फिर रुक गया। रीमा चाय लेने चली गई और मैं दीपक की मम्मी के साथ बात करने लगा।
रीमा थोड़ी देर में चाय लेकर आ गई और हम चाय पीने लगे।
तभी आंटी ने कहा- मेरा सीरियल आने वाला है, तुम लोग बैठ कर बाते करो, मैं अंदर जाकर थोड़ा टीवी देखती हूँ।
अब कमरे में सिर्फ रीमा और मैं ही थे। रीमा सच में बहुत कमाल लग रही थी।
“रीमा तुम्हें सब याद है वो सब?” मैंने रीमा को कुरेदते हुए कहा।
“प्लीज लव… यहाँ ये सब बातें मत करो… कही सासू जी ने सुन लिया तो गड़बड़ हो जायेगी।”
मैंने उसको हाँ या ना में जवाब देने को कहा तो उसने हाँ में सिर हिला प्रिया। मैं उठ कर रीमा के पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया तो वो मना करने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूचियों पर रख प्रिया और बोला– रीमा… तुम्हारा तो मस्त साइज हो गया है…”
रीमा ने मेरा हाथ वहाँ से हटा प्रिया।
“तुम भी कमाल हो यार… जिसने चूस चूस कर और मसल मसल कर इन्हें इतना मस्त बनाया तुम उसे ही हाथ नहीं लगाने दे रही हो…?”
“लव… मैं अब किसी की पत्नी हूँ… और यह सब अब ठीक नहीं है।”
“मतलब जिस पेड़ को इतना बड़ा किया उसी के फल माली को खाने को नहीं मिलेंगे…”
उस रात की बात-1
उसने बहुत मना किया पर फिर भी मैंने उसको एक किस के लिए मना लिया। अब मैंने उसके लिपस्टिक से रंगे गुलाबी होंठों को अपने होंठों में दबा लिया। मैं रीमा के रसीले होंठ चूस रहा था और रीमा की आँखें भी मस्ती के मारे बंद हो गई थी। रीमा भी अब मेरा साथ देने लगी थी।
अचानक रीमा ने मुझे धक्का मार कर अपने से अलग किया और मुझे जाने के लिए कहा। मैंने मना किया तो वो नाराज होने लगी। मैंने सोचा कि कहीं अपनी सास को ना बुला ले तो मैं अपना सामान उठा कर वहाँ से चला आया।
पूरा दिन रीमा को याद करते हुए बीता। शाम को रीमा का फोन आया। रीमा की आवाज सुन कर मेरा दिल धड़क उठा और जब रीमा ने मुझे कहा कि वो मुझे कहीं बाहर मिलना चाहती है तो दिल बाहर निकल जाने को हो गया।
रीमा ने बुधवार के दिन कहीं बाहर मिलने का प्लान बनाया क्योंकि दीपक को उस दिन टूअर पर जाना था।
मैंने पूछा तो वो बोली- किसी होटल या किसी के घर पर मिलने का प्रोग्राम बनाओ।
मैं समझ गया था कि यह उस किस का ही परिणाम है। मैंने हाँ करने में बिल्कुल भी देर नहीं की और फोन काटने के तुरंत बाद एक होटल में रूम बुक करवा प्रिया।
अगले दो रातें मैं ठीक से सो नहीं पाया और ख्वाबों में रीमा को कई बार चोद प्रिया।
बुधवार दोपहर के 12 बजे मिलने का प्रोग्राम तय हुआ था। वो तय समय पर मुझे अपने घर से बाहर सड़क पर मिली। हम दोनों एक टैक्सी में बैठे और होटल में पहुँच गए।रूम की चाबी लेकर हम दोनों रूम में चले गए।
जैसे ही हम रूम में घुसे तो मैंने रीमा से पूछा- क्या इरादा है?
तो वो मेरे गले से लग गई और बोली- लव, मुझे प्यार करो।
मुझे तो पहले से पता था कि वो किस प्यार की बात कर रही है पर फिर भी मैंने पूछा- किस प्यार की बात कर रही हो?
तो वो बोली- दीपक अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता है और फिर जब रात को थक हार कर घर आता है तो मुझे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं कर पाता।
“लव सब कुछ करने से पहले मेरी एक शर्त है कि दीपक को या और किसी को अपने संबंधों के बारे में पता नहीं चलना चाहिए और ना ही यह पता लगे कि हम दोनों पहले से एक दूसरे को जानते हैं।”
मुझे तो बस चूत नजर आ रही थी तो मैंने एक दम से हाँ कर दी और रीमा को पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा। वो भी बिना देर किये मेरा साथ देने लगी।
कुछ देर होंठ चूसने के बाद रीमा ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा सिर अपनी चूचियों पर दबाना शुरू कर प्रिया तो मैं समझ गया कि वो अब क्या चाहती है। मैंने उसका कमीज उतार प्रिया और उसकी ब्रा में कसी मोटी मोटी चूचियों दबाने लगा।
रीमा आह्ह्ह… उफ्फ्फ.. करने लगी। मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसको बेड पर लेटा कर उसकी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। रीमा की सिसकारियाँ गूंजने लगी थी। मैं कभी उसकी दायीं चूची को चूसता तो कभी बायीं चूची को।
रीमा मस्ती के मारे सिसिया रही थी- “चूस लव चूस जोर से चूस मेरी चुचियाँ….आह्ह्ह….ओह्ह्ह्ह…बहुत मज़ा आ रहा है….आह्हह्ह”
फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसकी पेंटी सहित नीचे सरका प्रिया। पेंटी नीचे होते ही रीमा की गुलाबी चूत नजर आने लगी। मैं तो अपने दिल की रानी की गुलाबी चूत देख कर पागल हो गया। चूत बहुत चिकनी लग रही थी। मैं समझ गया था कि रीमा ने सुबह ही चूत के बाल साफ़ किये हैं।
मैं सीधा उसकी टांगों के बीच में आ गया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत की महक और स्वाद बहुत मस्त था। रीमा आह्ह ह्ह्ह ओह्ह्ह कर रही थी। मैं उसकी आवाजों का मज़ा लेते हुए उसकी चूत चाट रहा था। मैं जीभ को अंदर बाहर कर रहा था जिसमें उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था।
“लव डाल दो अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में… करते रहो लव…” रीमा मस्त हुई जा रही थी।
मैं कुछ देर ऐसे ही करता रहा कि तभी वो अकड़ी और फिर जोर से झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकल कर मेरे मुँह पर आ गिरा। मुझे पहले तो थोड़ा गन्दा लगा पर फिर उसकी मोहक खुश्बू ने मेरा मन मोह लिया और मैं उसका सारा पानी चाट गया।
अब उसकी बारी थी। मैंने उसको उठाया और अपना लण्ड निकाल कर उसके आगे कर प्रिया। उसने बिना देर किये मेरा लण्ड चूसना शुरू कर प्रिया। वो ऐसे चूस रही थी जैसे कोई आइसक्रीम चूस रही हो। मुझे बहुत आनन्द आ रहा था।
आज पहली बार कोई मेरा लण्ड चूस रही थी। मेरा बदन मस्ती में झूलने लगा था। मैं ज्यादा देर रोक नहीं पाया और एक आह के साथ मैंने मेरे लण्ड का माल रीमा के मुँह में छोड़ प्रिया।
रीमा का मुँह मेरे माल से भर गया था पर रीमा ने सारा माल बाहर थूक प्रिया। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैंने उसका सारा पानी पी लिया था पर उसने मेरा नहीं पिया।
अब बारी कुछ आगे करने की थी। मैंने रीमा की चूत पर पहले तो थोड़ी जीभ फेरी और फिर एक उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा। वो मस्त होकर आहें भरने लगी थी। मेरा लण्ड उसकी सेक्सी आह्हें सुन कर फिर से खड़ा हो गया था।
“लव… अब और मत तड़पाओ… चोद दो मुझे… बुझा दो प्यास मेरी चूत की !” रीमा मस्ती के मारे गांड उछाल रही थी।
मैं भी अब रुकना नहीं चाहता था, मैं भी उसकी टांगों के बीच में आया और अपना लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रख प्रिया और उसकी चूत के दाने पर रगड़ने लगा। मेरे गर्म सुपारे की रगड़ उसकी चूत में आग भर रही थी।
अब रीमा बार बार प्रार्थना कर रही थी कि लव जल्दी से लण्ड चूत में डाल दो… मत तड़पाओ।
उसके छेद पर लण्ड रख कर मैंने एक धक्का लगाकर लण्ड को चूत में सरकाया तो उसके मुँह से आह्ह्ह की आवाज निकल गई। मैंने थोड़ा ज्यादा जोर लगा कर एक और धक्का लगाया तो आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया।
रीमा के मुँह से चीख निकल गई। रीमा की चूत बहुत कसी थी और मुझे दीपक के व्यस्त होने का एहसास करवा रही थी। मुझे दीपक पर तरस आया कि वो अब तक अपनी बीवी की चूत को अच्छे से खोल भी नहीं पाया था और अब यह काम मुझे करना था।
मैंने दो तीन जोरदार धक्के लगा कर पूरा लण्ड चूत में डाल प्रिया। वो चीखती रही पर मैं नहीं रुका। रीमा की आँखों से आँसू बहने लगे थे। मस्त टाईट चूत में घुसने के कारण मेरा लण्ड चिरमिराने लगा था। हम दोनों ही दर्द में थे पर फिर भी मैं काफी देर तक उसके होंठ चूसता रहा।
थोड़ी देर बाद जब दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर प्रिया। थोड़ी ही देर में रीमा भी मेरा साथ देने लगी।
3-4 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसको बेड के किनारे पर लेटाया। मैं खुद नीचे खड़ा हो गया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख कर उसकी चूत में अपना लण्ड डाल प्रिया। मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा।
ऐसे चुदने में उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। वो गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी।
“चोद मुझे… मार ले मेरी… चोद… आज तूने असली में मुझे जवान कर प्रिया लव… चोद अपनी बचपन की सहेली को…. ले ले मज़ा आह्हह ओह्ह… चोद…” रीमा मस्ती में बड़बड़ा रही थी।
अब उसकी चूत गीली हो रही थी, मैं तेज तेज धक्कों के साथ उसको चोद रहा था। तभी वो अकड़ गई और उसने मेरी बाजू मजबूती से पकड़ ली। उसके नाखून मेरे बाजू में धंस गए और फिर वो एकदम से झड़ गई।
मैंने उसे घोड़ी बना लिया और फिर पीछे से लण्ड उसकी चूत में डाल प्रिया। कुल 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी चूत में छोड़ प्रिया। मेरे गर्म माल की गर्मी से वो एक बार फिर से झड़ गई।
हम दोनों थोड़ी देर नंगे ही पड़े रहे। दस मिनट के बाद मैंने उसे उठाया और हम दोनों बाथरूम में गए, मैंने उसकी चूत साफ़ की।
मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया था, मैंने उसको एक बार फिर से बाथरूम में चोद प्रिया। वो बाथरूम में पानी के नीचे चुदते हुए 3 बार झड़ गई और फिर हम दोनों नहा कर वापिस आ गए।
उसके बाद से मैं उसको 8-9 बार चोद चुका हूँ। अपने बचपन की सहेली की चुदाई मेरे लिए यादगार बन गई थी।
बाद में उसने अपनी सहेलियों की चूत भी दिलवाई पर रीमा जैसा मज़ा किसी में नहीं था।
आप सबको कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताना।
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