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पहली बार चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 522 बार

दोस्त की बहन ने मुझे पटा कर चूत चुदाई करवाई

विराज

27 Feb 2013 को प्रकाशित

दोस्त की बहन ने मुझे पटा कर चूत चुदाई करवाई
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जब मैं 12वीं में था तब मेरी क्लास में मेरा एक दोस्त था रोहित, वो मुझे अक्सर ब्लू फिल्मो की सीडी आदि लाकर देता था जिस वजह से हमारी दोस्ती गहरी हो गई थी।

रोहित की एक बहन भी है जिसका नाम है दिया, वो भी हमारे स्कूल में पढ़ती है।

दिया उस वक्त 19 साल की एक कमसिन कली थी जिसका बदन एकदम गोरा, लम्बाई लगभग 5 फीट 6 इंच होगी, उसके होंठ बिना लिपस्टिक के इतने लाल हैं कि चूस चूस के खा जाने को दिल करता है। उसकी गांड ज्यादा मोटी तो नहीं थी लेकिन ऊपर की ओर उठी हुई थी जिसकी वजह से वो और भी ज्यादा कामुक लगती थी।

दिया मुझे स्कूल में अक्सर घूरा करती थी लेकिन तब मैं उस पर ध्यान नहीं देता था, शायद इसलिए क्योंकि वो मेरे दोस्त की बहन थी।

रोहित और मेरे एग्जाम नजदीक आ रहे थे तो हमने एक साथ पढ़ने का सोचा। रोहित ने कहा कि पढ़ाई उसके घर पर करेंगे क्योंकि हमारे घर काफी दूर थे और उसके पास बाईक भी नहीं थी।

अगले दिन मैं शाम 5 बजे रोहित के घर पहुँच गया। रोहित के घर में दिया, उसकी मम्मी, रोहित और उसके पापा रहते हैं।

मैंने दरवाजे की घंटी बजाई, दरवाजा खुला तो देखा कि दिया है। उसने शार्ट्स पहन रखे थे और एक स्लीवलैस टीशर्ट जिसमें उसके छोटे छोटे दूध के उभार निकले हुए थे। कसम से दोस्तो, क्या नजारा था, उसकी गोल गोल जाँघें जिन पर एक भी बाल नहीं था, कयामत ढा रही थी।

मैंने कहा- रोहित घर पर है?इस पर उसने कहा कि वो ऊपर के कमरे में है।

मैंने कहा- क्या तुम बता सकती हो कि वो ऊपर कौन से कमरे में है?

दिया ने कहा- चलो, मैं ले चलती हूँ।

मैं दिया के पीछे चल पड़ा, हम दोनों सीढ़ियाँ चढ़ने लगे और अचानक मेरी नजर उसकी गांड पर पड़ी… उफ्फ… क्या गांड थी। एक तो उसके शार्ट्स और ऊपर से उसकी उठी हुई गांड! मेरा तो दिमाग खराब हो गया।

कमरा आ गया, दिया मुझे कमरे में छोड़ कर चली गई और फिर मैं और रोहित पढ़ने लगे. हमने 2 घंटे पढ़ाई की, फिर मैंने उसे कहा- आज के लिए बहुत है, अब कल पढ़ेंगे!और मैं घर चला आया लेकिन दिमाग में तो सिर्फ दिया की गांड घूम रही थी.उस दिन पहली बार मैंने दिया के नाम की मुठ्ठ मारी।

अब मैं रोज रोहित के घर जाने लगा, मैं वहाँ 2-3 घंटे रुकता था तो मुझे किसी ना किसी बहाने से दिया के दर्शन हो ही जाते थे। मैं उसके दूध और गांड देखने का कोई मौका नहीं छोड़ता था और रोज घर जाकर उसके नाम की मुठ्ठ मारता था।वो अक्सर मुझे लाईन देती थी लेकिन मैं किसी तरह उस से नजरें हटा लेता लेकिन उसे क्या पता था कि मैं उसे चोदने के सपने देख रहा हूँ।

यूँ ही दिन बीतते गये और अब मैं दिया से थोड़ा खुलने लगा, जब भी टाईम मिलता, वो मेरे पास आ जाती और हम खूब बातें करते। कभी कभी कुछ डबल मीनिंग बात हो जाती तो वो मेरी तरफ तिरछी निगाहों से देखकर मुस्कुरा देती और स्कूल में जब भी हमारा आमना सामना हो जाता, वो अजीब सी स्माईल देते हुए वहाँ से चली जाती।

अब तो मुझे भी लगने लगा था कि आग दोनों तरफ बराबर है।

एक दिन मेरा क्लास टैस्ट था तो टीचर ने मेरी पूरी क्लास को स्कूल के बीचोंबीच एक हाल है, वहाँ बैठा प्रिया।मैं भी वहाँ एक कोने में बैठा था और पेपर सोल्व कर रहा था.तभी अचानक से किसी ने पीछे से मेरे सर पे हल्के से मारा, मैंने फटाक से पीछे देखा, वो दिया थी।मैं उसे कुछ कह पाता, इससे पहले ही वो हँसती हुई अपनी क्लास में चली गई।

उसकी इस हरकत ने मुझे अंदर तक हिला के रख प्रिया, मैंने सोच लिया कि अब तो ये पक्का चुदेगी।

उसी दिन मैं शाम को 5 बजे रोहित के घर पढ़ने गया। मैंने देखा कि दिया रसोई में कुछ काम कर रही है, रोहित की मम्मी शायद किसी काम से बाहर गई हुई थी।मेरे दिमाग में अचानक वो सुबह वाली बात आ गई और मैंने उस शरारत का बदला लेने का सोचा।

मैं ऊपर जाने के बजाय धीरे से रसोई में चला गया और दिया की गांड पर धीरे से एक चपत लगा दी, वो एकदम से चिहुंक गई और पीछे मुड़कर मुझे देखा, उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था।

उसने मुझे गुस्से से देखा और वहाँ से चली गई।मेरी गांड फट गई, मैं उस दिन बिना पढ़े सीधे अपने घर चला गया।

उस रात मुझे नींद नहीं आई, मैंने सोचा कि उसने रोहित को यह बात बता दी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अगले दिन रोहित ने मुझे फोन किया और पूछा- तू कल पढ़ने क्यूँ नहीं आया?

मैंने कहा- यार कल मेरी तबीयत थोड़ी खराब थी।रोहित ने कहा- ठीक है लेकिन आज आ जाना।

मुझे इस बात की खुशी थी कि दिया ने रोहित को कुछ नहीं बताया लेकिन दिया के सामने जाने से गांड भी फट रही थी।

मैं जैसे तैसे हिम्मत करके उसके घर पहुँच गया।

वहाँ पहुँचा तो देखा कि घर में रोहित और दिया साथ बैठे थे।मैंने रोहित से पूछा कि आंटी कहाँ गई तो रोहित ने कहा- मम्मी और पापा मार्केट गए हैं।

दिया को मैंने हैलो कहा तो उसने जवाब नहीं प्रिया।फिर मैं और रोहित पढ़ने लगे।

हमें पढ़ते हुए आधा घंटा ही हुआ था कि रोहित के फोन पर एक काल आया, वो काल उसके पापा का था।दरअसल हुआ ये कि रोहित के पापा कार में से चाबी निकालना भूल गये थे और थोड़ी देर बाद कार आटोमैटिक लाक हो गई। फोन पर रोहित के पापा ने उसे बोला कि घर से कार की दूसरी चाबी लेकर मार्केट पहुँचे।

रोहित ने मुझसे कहा- यार, जल्दी तेरी बाईक की चाबी दे, मैं मार्केट जाकर चाबी देकर आता हूँ।

मैंने फटाफट चाबी दे दी और वो मार्केट चला गया,

अब घर में सिर्फ मैं और दिया ही थे।

मैंने हिम्मत करके दिया को सॉरी कहा।

उसने मुस्कुरा कर जवाब प्रिया- मैं तुम से नाराज नहीं हूँ, लेकिन एक बात बताओ, उस दिन तुममे इतनी हिम्मत कैसे आ गई?

दिया के इस अंदाज़ से मैं अपने होश गंवा बैठा और मैंने उसके होंठों पे एक किस कर लिया।

अचानक हुए इस वार से शायद वो घबरा गई और वहाँ से जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और खींचकर उसे पीछे से बांहो में जकड़ लिया।

दिया अपने आप को मुझसे छुड़ाने लगी लेकिन उसकी कोशिश नाकाम रही।

मैंने एक हाथ से उसकी कमर को कस के पकड़ा और दूसरे हाथ से उसका दूध दबा प्रिया।

वो कहने लगी- प्लीज़ ऐसा मत करो, यह गलत है।लेकिन मेरे लंड को अब कोई नहीं रोक सकता था।

मैंने उसे बैड पर पटक प्रिया और उसके हाथ पकड़ कर उसके होंठों से होंठ मिला दिए। मैंने उसके होंठों को खूब चूसा और उसकी चुची को मसला।

अब दिया को भी मस्ती चढ़ गई और उसने झटके से मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे होंठों से होंठ मिला दिए। उसके इस वार से मेरा जोश दोगुना हो गया और मैंने उसकी गांड पे अपना हाथ फेरना शुरू कर प्रिया।

दिया अब सिसकारियां भरने लगी।

मैंने कहा-आई लव यू।

दिया-आई लव यू टू बेबी!

मैंने बिना देर किए दिया की टीशर्ट उतार दी और अब उसके गोल कबूतर मेरे सामने थे, मैंने झट से उसका एक निप्पल ज़ोर से मसला और फिर उसे मुँह में भर लिया, मेरी इस हरकत से उसके रोम रोम में चुदास भर गई,

उसने मेरी जीन्स के ऊपर से मेरे लंड को सहलाया, मैं समझ गया कि अब क्या करना है।मैंने अपनी जीन्स और टीशर्ट निकाल फेंकी, बस अंडरवियर बची थी। मैं दिया के मुँह के पास जाकर खड़ा हो गया।

दिया मेरा ईशारा समझ गई थी लेकिन उसने मुँह में लेने से इन्कार कर प्रिया।मैंने उसका पजामा उतार फेंका और अब मेरे सामने एक कमसीन कली सिर्फ एक लाल चड्डी में थी।

मेरा लंड उफान मार रहा था, मैंने उसकी चड्डी उतारने की बजाय फाड़ डाली और अंदर से भूरे बालों से घिरी काली चूत मेरे सामने थी। उसकी चूत एकदम सन्नी लियोनी जैसी थी।

दिया ने कहा- मेरी चड्डी फाड़ दी… ये क्या किया?

मैंने कहा-अभी तो कुछ किया ही नहीं मेरी जान।

दिया ने मुस्कुराते हुए कहा- तो कब करोगे, घर वालों के आने के बाद?

इस पर मैंने कहा- अच्छा ऐसी बात है?

और फिर मैंने उसकी मदमस्त चूत को चाटना शुरू किया। पूरा कमरा उसकी सिसकारियों से गूँज रहा था।

दिया- आहहह… म्हह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह स्ससस जान अब बर्दाश्त नहीं होता, कुछ करो।

मैंने अपनी अंडरवियर उतारी और मेरा लंड आज़ाद हो गया।

दिया ने जैसे ही मेरा लंड देखा, उसकी आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि मेरा लंड वाकयी आकार में बहुत बड़ा है।

मैंने अपने लंड पे थोड़ी क्रीम लगाई और थोड़ी क्रीम उसकी चूत के छेद के ऊपर… फिर दोनों हाथों से उसकी टांगें चौड़ी की और अपने कंधों पर रख दी।

अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पे सेट किया और एक ज़ोरदार झटका मारा, छपाक से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया।

दिया बुरी तरह छटपटाने लगी, मैंने अपने हाथ से उसका मुँह भींच लिया और दूसरे झटके में लगभग आधा लंड उसकी चूत में उतार प्रिया।दिया रो रही थी।

मैंने 5 मिनट तक लंड को चूत में फंसाए रखा, जब वो थोड़ा नार्मल हुई तब मैंने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया।कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगा और वो सिसकारियाँ भरने लगी- आहह आहह हहह स्स म्म आहह हह…

अचानक से मैंने एक और झटका मारा और इस बार मेरा सारा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया।

दिया की हालत खराब हो गई, उसकी आँखों में आँसू बह रहे थे लेकिन इस बार उसे दर्द के साथ मजा भी आ रहा था।

अब मैंने स्पीड बढ़ा दी और दिया भी चुदाई का खूब मज़ा ले रही थी- आहहह चोदो… और ज़ोर से चोदो… फाड़ के रख दो इस चूत को ओहहह आहहह उफ्फफ…

मैंने कहा- जान, चलो अब तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदता हूँ।वो घोड़ी बन गई और मैंने पीछे से लंड को चूत में डाल प्रिया।

काफी देर की धकापेल चुदाई के बाद अब मैं झड़ने वाला था, मैंने कहा-मेरा होने वाला है।

दिया- बेबी ज़ोर से चोदो, मेरा भी होने वाला है।

मैंने 15-20 झटके मारे और उसकी चूत में झड़ने लगा लेकिन दिया अभी झड़ी नहीं थी इसलिए मैंने झटके बंद नहीं करे और कुछ सैकण्ड में दिया झटके खाती हुई झड़ गई।

हम दोनों की हालत खराब हो गई थी और बिस्तर पर थोड़ा सा खून लगा था।दिया के मम्मी पापा और रोहित कभी भी आ सकते थे इसलिए हमने जल्दी से अपने आप को ठीक किया और चादर को धोने के लिए डाल प्रिया।

उसके कुछ ही देर बाद उसके घर वाले आ गये।

इसके बाद मैंने दिया के साथ 2 बार और चुदाई की, और इस बार तो उसने मेरा लंड मुँह में भी लिया।

दोस्तो, मेरी सेक्सी स्टोरी पर आपके जो भी विचार हैं, मुझे मेल ज़रूर करें!support@mohakkisse.com

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