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डॉक्टर ने इलाज के बहाने गर्म करके चूत चोदी

अनीता झांसी

29 Jan 2015 को प्रकाशित

डॉक्टर ने इलाज के बहाने गर्म करके चूत चोदी
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इस डॉक्टर सेक्स कहानी में मैं इलाज करवाने एक डॉक्टर के पास गई जिसने बहाने से मेरी चूत को सहला कर मुझे गर्म कर दिया। मेरा भी चुदने का मन करने लगा। कैसे मैंने पराये मर्द से चूत मरवाई, मेरी स्टोरी में पढ़ें।

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दोस्तो, मेरा नाम अनीता है।मैं झांसी, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूं।

मेरे बदन का रंग गोरा है। फिगर भी देखने में ठीक है।मैं एक गृहिणी हूं। मेरे पति अध्यापक हैं।

दोस्तो, यह डॉक्टर सेक्स कहानी अंतर्वासना हिंदी सेक्स कहानी साइट पर मेरी पहली रचना है।

मुझे सेहत को लेकर कुछ परेशानी रहती थी।मेरे सीने में दर्द की शिकायत रहती थी और बालों के झड़ने से भी परेशान रहती थी।मैं कई जगह इलाज करवा चुकी थी लेकिन आराम नहीं मिल रहा था।

फिर मेरे पति ने मुझे होम्योपैथी का इलाज करवाने के लिए कहा।

अगले दिन उन्होंने अस्पताल में मेरा नम्बर लगवा दिया।

अस्पताल में काफी भीड़ थी।डॉक्टर भी जल्दी-जल्दी में मरीजों को देख रहे थे।वहां से मैंने दवाई ली और घर आ गई।

महीने भर तक इलाज होने के बाद मुझे कोई खास आराम नहीं लगा।

एक दिन मैंने डॉक्टर से इस बारे में विस्तार से बात की और बताया कि मुझे बहुत अधिक फर्क नहीं लग रहा है आपकी दवाइयों से।डॉक्टर ने कहा- यहां पर बहुत ज्यादा मरीज आते हैं, ज्यादा समय नहीं दे पाता हूं। आप चाहें तो मुझे मेरे प्राइवेट क्लीनिक पर दिखा सकते हैं।उन्होंने अपना कार्ड मुझे दे दिया।

मैं पति के साथ उनके क्लीनिक पर पहुंच गई।वहां पर भीड़ कम थी लेकिन हरेक मरीज पर ज्यादा समय लग रहा था क्योंकि डॉक्टर सभी मरीजों को पूरा समय दे रहे थे।

फिर मेरा नम्बर भी आ गया।डॉक्टर ने अच्छे से मेरी सारी बात सुनी।उन्होंने मुझे दवाई देकर दस दिन बाद दोबारा बुलाया।

मैं दस दिन की दवाई खाकर दोबार से चेकअप के लिए गई।

मैंने उनको सारी बात बताई और कहा कि ज्यादा तो आराम नहीं है लेकिन पहले से बेहतर है।डॉक्टर ने कहा कि होम्योपैथी में समय ज्यादा लग जाता है। लेकिन बीमारी पूरी तरह से सही हो जाती है।

अगले दस दिन की दवा लेकर मैं घर वापस आ गई।दवा खत्म होने के बाद मैं दस दिन बाद क्लीनिक पर पहुंची।

उस दिन मेरे पति को बाजार में कुछ काम था तो वो मुझे क्लीनिक पर छोड़ कर बाजार में चले गए।मैं अपना नम्बर आने का इंतजार करने लगी।

लगभग तीस मिनट बाद मेरा नम्बर आ गया।मैंने बताया- मुझे आराम हो रहा है लेकिन सीने में कभी कभी दर्द रहता है।

डॉक्टर ने मुझे अंदर आने को कहा।मैं अंदर जाकर टेबल पर लेट गई।

उन्होंने फिर पूछा कि कहां कहा दर्द महसूस करती हो?मैंने बताया सीने के बीच में अचानक दर्द होने लगता है।

डॉक्टर ने ब्लाउज के बटन खोलने को कहा।

बटन खोलने के बाद ब्रा को भी हटाने को कहा तो मैंने ब्रा भी ऊपर खिसका दी।

अब मेरे दोनों बूब्स डॉक्टर के सामने थे।मैं दूसरी तरफ नजर करके लेटी रही।

डॉक्टर ने बूब्स को छुआ और कहा- कसाव काम होने के कारण ये नीचे की तरफ आ गए हैं जिससे सीने मैं दर्द महसूस होता है। एक्सराइज से ये दर्द सही हो जायेगा, डरने की कोई बात नहीं है।

फिर डॉक्टर ने मेरे एक चूचे को हाथ में भरा और मसलने लगे।मैंने पूछा- ये क्या कर रहे हो आप?वे बोले- मसाज कर रहा हूं। यही एकमात्र इलाज है दर्द से छुटकारा पाने का।

मैं चुपचाप लेटी रही।डॉक्टर मेरे बूब्स को दबाने लगे; धीरे-धीरे मसाज करने लगे।

एक-एक करके 20 मिनट तक दोनों बूब्स की मसाज की।फिर बोले- तीन महीने तक ऐसे ही करना है।

मैं अब तक गर्म भी हो गई थी।फिर उन्होंने पूछा- कभी पेट के नीचे भी दर्द होता होगा?मैंने कहा- हां, कभी-कभी होता है।

डॉक्टर ने कहा- हां, उसके लिए कुछ टेस्ट करने होंगे जो काफी महंगे हैं। उनकी दवाई भी महंगी होगी। लेकिन एक तरीका एक्सरसाइज का है, जिसमें कोई खर्चा नहीं लगेगा। लेकिन इसमें आराम आने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।मैंने कहा- कोई बात नहीं, टाइम लग जाने दीजिए।

भीतर ही भीतर मैं भी अब चाह रही थी कोई मर्द मेरे प्राइवेट अंगों से खेले।क्योंकि मेरी चूत में अब गीलापन आने लगा था।

डॉक्टर मेरे पेट को चेक करने लगा।फिर उन्होंने धीरे-धीरे मेरे पेट को सहलाना शुरू किया और कहा- कहीं दर्द हो तो बताना।

मैं आंखें बंद करके लेटी रही।

वो धीरे धीरे पेट को दबा रहे थे।कई बार उनका हाथ नीचे जाने की कोशिश भी कर रहा था लेकिन पेटीकोट का नाड़ा बंधा होने की वजह से उनका हाथ नीचे तक पहुंच नहीं पाता था।

डॉक्टर ने धीरे से कहा- अगर आप पेटीकोट थोड़ा सा नीचे कर दें तो मैं सही से कर पाऊंगा।मैंने हां कहा और पेटीकोट को ढीला कर दिया।

अब डॉक्टर आसानी से हाथ नीचे ले जा सकता था।मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी।अब तक मेरी चूत भी हल्की गीली होने लगी थी।

डॉक्टर के द्वारा की जाने वाली धीमी मसाज से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।फिर डॉक्टर ने कहा- अगर कोई परेशानी हो तो कह देना।

मैंने कहा- कोई परेशानी नहीं हो रही है, काफी आराम मिल रहा है।मुझे महसूस हो रहा था कि डॉक्टर का हाथ धीरे-धीरे मेरी चूत पर टच हो रहा था।

मैं भी अनजान बनकर चुपचाप लेटी रही।मेरी तरफ से कोई विरोध न होने के कारण डॉक्टर ने मेरी साड़ी पेटीकोट समेत नीचे खिसका दी।अब मेरी चूत पूरी तरह बाहर थी।

वो अब मेरी चूत के आसपास से भी सहलाने लगा।अब मेरा मन कर रहा था कि डॉक्टर मेरी चूत को भी सहलाये।मैं अब धीरे धीरे टांगों को हिलाकर इशारा भी दे रही थी.

वो समझ चुका था।उसने एक दो बार मेरी चूत पर भी हाथ फेरा।मेरे बदन में सरसरी सी दौड़ गई और बहुत मजा आया।

फिर डॉक्टर ने मेरी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी।मैंने अब भी कुछ नहीं कहा।

डॉक्टर अब समझ गया था कि मैं गर्म हो गई हूं क्योंकि मेरी चूत अब काफी पानी छोड़ने लगी थी।

डॉक्टर ने देर न करते हुए तुरंत कहा- अब जैल से मसाज करनी होगी, इसमें कपड़े गंदे हो सकते हैं, अगर आप को प्रॉब्लम न हो तो इनको साइड कर दूं?मैंने जवाब में सिर हिलाते हुए हां कर दी।

डॉक्टर ने मेरा ब्लाउज हटा दिया और ब्रा भी अलग कर दी।मैंने देखा डॉक्टर का लन्ड पैंट मैं बहुत टाइट हो गया था।

उसने नीचे से पूरी साड़ी निकाल दी।अब मैं पूरी नंगी थी।

डॉक्टर ने मेरी चूत पर कुछ चिकनाई वाला पदार्थ लगाया और मेरे दोनों पैर फैला दिए।मेरी चूत अब बिल्कुल साफ दिख रही थी।

मैं देख रही थी कि डॉक्टर की नज़र मेरी चूत से हट नहीं रही थी।

डॉक्टर ने उंगली चूत के अंदर डाली और उसको अंदर बाहर करने लगा।चूत पूरी गीली थी।

वो बार-बार मेरी चूत को हथेली से रगड़ रहा था।मेरी चूत में गजब की कुलबुली मची थी।

वो चूत की फांकों के सहला रहा था और मैं चुदासी होती जा रही थी।

उसने देखा कि मेरे चेहरे पर चुदाई की इच्छा साफ झलकने लगी है।वो समझ गया था कि मैं अब उसके साथ सेक्स के लिए तैयार हूं।

मैं चाह रही थी कि वो अब और आगे बढ़े।

बिना देर किए हुए डॉक्टर मेरी चूत को चाटने लगा।उसने अपनी जीभ पूरी की पूरी चूत के अंदर डाल दी।वो मेरी चूत का कोई भी कोना नहीं छोड़ रहा था।

मैंने भी उसका सिर अपने पैंरो से दबा लिया और वो दोनों बूब्स को हाथों में भरकर भींचने लगा।मेरा बदन अब कसाव में आने लगा।

फिर उसने चूत को छोड़ मेरे एक बूब्स को मुंह में भरा और चूसने लगा।दूसरे को वो हाथ से जोर-जोर से मसल रहा था।फिर उसने पहले से मुंह हटाया और दूसरे को मुंह में भरा और पहले को हाथ से भींचने लगा।

बारी-बारी से उसने दोनों चूचियों को पीया।मेरे अंदर अब सेक्स की आग भड़क उठी थी।

अब उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया।उसका लौड़ा पूरा का पूरा तना हुआ था।

उसने अपने लंड पर काफी सारी क्रीम लगा ली।

क्रीम को पूरी तरह से लंड पर फैला लिया और उसका लौड़ा अब एकदम से पूरा चिकना हो गया।

मैंने कहा- मुझे देर हो जाएगी।मैं साड़ी को ऊपर करने लगी।उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और साड़ी नीचे करवा दी।

बोला- थोड़ी देर की ही तो बात है, चली जाना।मैंने कहा- नहीं, पति आ जाएंगे। बहुत देर हो रही है।वो बोला- बस पांच मिनट।

कहकर वो मेरे बदन को चूमने लगा, मेरी चूचियों को मसलने लगा और कभी चूत में उंगली से चोदने लगा।

मैं भी खुद को रोक नहीं पा रही थी।उसके ऐसे हमलों से मैं चुदने के लिए बेताब हो गई।

मैंने सोचा जो होगा देखा जाएगा, थोड़ी देर लंड ले लेती हूं। बहुत मन कर रहा है।

फिर उसने मुझे नीचे जमीन पर आने को कहा।नीचे जल्दी से उसने एक शीट बिछा दी और मुझे उस पर लेटा दिया।

वो मेरे होंठों को चूमने लगा, उसका लंड मेरी चूत पर छू रहा था।

मेरा मन कर रहा था कि उसके लंड को चूत में डलवा लूं।

मेरी चूत लंड अंदर लेने के लिए अब तरस रही थी।वो तेजी से मेरी चूत को अपने हाथ से सहला रहा था।

फिर उसने मेरी चूत के मुंह पर लंड का रखा और एक जोर का झटका दिया।एक ही धक्के में उसने पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया।

एक बार तो मुझे बहुत दर्द हुआ।मैंने उसको रोक दिया।

दो मिनट तक वो रुका रहा।फिर उसने धीरे-धीरे मेरी चुदाई शुरू की।

मुझे मजा आने लगा।पहली बार मैं किसी पराये मर्द से चुदवा रही थी।पति के लंड से चुदवाने में इतना मजा नहीं आता था जितना डॉक्टर के लंड से चुदवाने में आ रहा था।

उसके लंड ने चूत को तलहटी तक छूना शुरू कर दिया था।लंड के धक्के अब सुहावने लग रहे थे।

मैंने अपना बदन ढीला छोड़ दिया और आराम से लेटकर चुदाई का मजा लेने लगी।

मेरी टांगें अब खुद ही और ज्यादा चौड़ी खुल गई थीं।इससे लंड को चूत में अंदर तक आने का अवसर मिल रहा था।

डॉक्टर बीच-बीच में मेरे होंठों को भी चूस रहा था।मैं भी उसकी पीठ को बार-बार सहला रही थी।

कुछ देर तक तो वो ऐसे ही पड़े-पड़े मेरी चूत को चोदता रहा।फिर उसने मुझे उठने के लिए कहा।अब उसने मुझे घोड़ी बनने को बोला।

मैं उठी और उसके सामने गांड उठाकर झुक गई।मेरी चूत अब घोड़ी पोजीशन में उसके सामने थी।

वो घुटनों पर आ गया और पीछे से मेरी चूत के छेद पर उसने अपना लंड लगा दिया।

अब उसका लंड मेरी चूत के छेद पर छू रहा था और मुझे बहुत कामुक अहसास मिल रहा था।

अब उसने लंड को छेद के थोड़ा सा अंदर फंसाकर अच्छे से टिकाया और एक झटका मार दिया।लौड़ा मेरी चूत में जा फंसा।

फिर मेरी कमर को पकड़़ कर डॉक्टर मुझे जोर-जोर से पेलने लगा।

मेरी चूत में गजब की सरसरी मची थी जिसे डॉक्टर का लंड अच्छी तरह से शांत कर रहा था।दस मिनट तक उसने मुझे घोड़ी पोजीशन में चोदा, फिर एकदम से उसका माल निकलने को हो गया।

वो बोला- मुंह में माल पीना है क्या?मैंने मना कर दिया।फिर बोला- तो अंदर ही निकाल दूं?

मैं अंदर नहीं निकलवा सकती थी।मैंने कहा- नहीं, चूत में नहीं निकालना।फिर उसने कहा- ठीक है, चूचियों पर छोड़ देता हूं।

उसने लंड निकाल कर एकदम से पलटने को कहा।मैंने देखा वो जोर-जोर से लंड को हिला रहा था।एकदम से उसके लंड से वीर्य की पिचकारी बाहर निकल पड़ी।

उसके लंड से निकला वीर्य मेरी चूचियों पर फैल गया।कुछ बूंदें मेरे मुंह पर भी गिरीं।

फिर वो डॉक्टर सेक्स करके शांत हो गया और उठकर उसने अपनी पैंट पहन ली।

मैंने भी जल्दी से एक कपड़े से खुद को साफ किया और अपनी साड़ी ऊपर कर ली।

खुद को व्यवस्थित करके मैं वहां से निकल गई क्योंकि पति का भी फोन आने लगा था।

इस तरह से उस डॉक्टर नेमेरी चूत मार लीऔर पहली बार मैंने एक डॉक्टर से चुदाई करवाई।

दोस्तो, आपको यह डॉक्टर सेक्स कहानी कैसी लगी मुझे बताना जरूर, आपकी प्रतिक्रियाओं का मैं इंतजार करूंगी।मेरा ईमेल आईडी है- support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अखिल कुमार हरियाणा

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

हार्दिक सैम

1 week ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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